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महाशिवरात्रि महोत्सव में नौ दिनों तक दूल्हे की तरह सज रहे महाकाल

पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 28 Feb 2021 07:17 AM IST
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महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल का श्रृंगार
महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल का श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला -फाइल फोटो

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आदिकाल से ही प्रत्येक वर्ष के फाल्गुन माह की कृष्णपक्ष त्रयोदशी को शिव-पार्वती के वैवाहिक वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है जिसे 'महाशिवरात्रि' कहा जाता है। वैसे तो प्रत्येक माह के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को भी 'मासशिवरात्रि' के रूप में मनाया जाता है किन्तु फाल्गुन की शिवरात्रि इनमें प्रमुख है। इसीतिथि को प्रकृतिरूपा माँ पार्वती एवं पुरुषरूप परमेश्वर श्रीशिव वैवाहिक बंधन में बंधे थे। शिव के बामभाग से ही शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ है जिनसे कालान्तर में असुरों का सँहार करने के लिए माँ शक्ति को नौ दुर्गा का रूप धारण करना पड़ा। माँ के असंख्य रूपों में प्रमुख नौ रूपों को 'पति' रूप में दर्शन देने हेतु महाकाल को भी प्रत्येक वर्ष में नौ दिनों तक फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पंचमी से लेकर त्रयोदशी तक दुल्हे के रूप में सजाया जाता है। इसे ही नौ दिवसीय शिवरात्रि कहते हैं। 
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इन नौ दिनों के मध्य महाकाल के घटाटोप, उमा-महेश, मनमहेश, चंद्रमौलेश्वर, शिवतांडव, होल्कर, छबीना, गरुणध्वज, आदि रूपों को प्रतिदिन चाँदी के मुखौटों से सजाया जाता है। ज्योतिर्लिंग पर प्रतिदिन विभिन्न फलों के रस से अभिषेक करने के पश्च्यात दूध, दही, घी, शहद, शकर, के पंचामृत से स्नान कराकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ वैदिक विद्वानों द्वारा गर्भगृह में ही रुद्राभिषेक पाठ होता है। 


उज्जयनी नगरी के महाराजाधिराज कहे जाने वाले भगवान महाकाल का पूजन-अनुष्ठान पाठ आदि वैदिक विद्वानों द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में शिवरात्रि को 'महानिशीथकाल' में श्रीमहाकाल का विशेष पूजन-अर्चन होगा जिनमें अष्ठमूर्ति, पंचवक्र, पंचतत्व में पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश आदि स्वरूपों का वेदमंत्रों द्वारा स्तवन होगा। वर्षपर्यंत ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भष्म आरती महाशिवरात्रि को न होकर दूसरे दिन दोपहर को अभिजित मुहूर्त में होती है।

महाशिवरात्रि का शुभ मुहू्र्त 
महाशिवरात्रि तिथि - 11 मार्च 2021, बृहस्पतिवार
निशिता काल का समय - 11 मार्च, रात 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक 
पहला प्रहर - 11 मार्च, शाम 06 बजकर 27 मिनट से 09 बजकर 29 मिनट तक 
दूसरा प्रहर - 11 मार्च, रात 9 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक 
तीसरा प्रहर - 11 मार्च, रात 12 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 32 मिनट तक 
चौथा प्रहर - 12 मार्च, सुबह 03 बजकर 32 मिनट से सुबह 06 बजकर 34 मिनट तक 
शिवरात्रि पारण का समय - 12 मार्च, सुबह 06 बजकर 34 मिनट से शाम 3 बजकर 02 मिनट तक
पूजा का समय
महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है। 

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