Sawan 2020: शिव स्वरुप ही है पारद शिवलिंग,सावन में पूजा से होती है मनोकामना पूर्ण

अनीता जैन, वास्तुविद Updated Thu, 23 Jul 2020 01:37 PM IST
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sawan 2020: ॐ नमः शिवाय का जप करते हुए शिव आराधना करें
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सार

जो मनुष्य पारद शिवलिंग की भक्ति पूर्वक पूजा-अभिषेक तथा दर्शन करता है ,उसे तीनों लोकों में स्थित समस्त शिवलिंगों के  पूजन का फल मिलता है एवं सौ अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर  का फल प्राप्त होता है।

विस्तार

देवों के देव महादेव श्री शिव कल्याणकारी हैं। सावन में उनकी पूजा-अभिषेक अनेक मनोरथों को पूर्ण करने वाली है। तरह-तरह के सभी शिवलिंगों की पूजा सिद्धिदायक होती है, पर हमारे प्राचीन पुराणों में पारद शिवलिंग की पूजा को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समूचे ब्रह्मांड में सर्वोत्तम दिव्य वस्तु के रूप में पूजित रससिद्ध पारद शिवलिंग समस्त दैहिक,दैविक एवं भौतिक महादुखों से मुक्ति दिलाने वाला है। पारद शम्भुबीज है यानि पारद की उत्पत्ति महादेव के शरीर से उत्पन्न पदार्थ शुक्र से मानी जाती है इसलिए शास्त्रों में पारद को साक्षात शिव का रूप माना गया है और पारद लिंग का सबसे ज़्यादा महत्त्व बताकर उसे दिव्य बताया गया है।
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ऐसी मान्यता है कि पारद शिवलिंग में ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों ही देव विद्धमान रहते हैं। पारद शब्द में प-विष्णु,अ-अकार ,र-शिव और द- ब्रह्मा का प्रतीक है। पारद एक विशिष्ठ तरल अवस्था में धातु और स्वयं सिद्ध पदार्थ है। विशिष्ठ शास्त्रोक्त व तंत्रोक्त गोपनीय विधियों से व अनेक जड़ी-बूटियों की सहायता से दिव्य पारद शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार रावण रससिद्ध योगी था । पारद शिवलिंग की पूजा से शिव को प्रसन्न कर अनेक दिव्य शक्तियों को प्राप्त किया । वाणासुर ने भी पारद शिवलिंग की पूजा कर शिव से मनोवांछित वर प्राप्त किया।
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अदभुत है पारद शिवलिंग
भगवान  शंकर को पारा अत्याधिक प्रिय है तथा रसराज पारद  शिव का शक्ति रुपी विग्रह होने के कारण ही समस्त असुर तथा देवी-देवताओं के लिए वंदनीय है शिवमहापुराण में शिवजी का कथन है कि करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल प्राप्त होता है उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और उसके दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है  ब्रह्म हत्या ,गौहत्या जैसे जघन्य अपराध पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं। इसके स्पर्श मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जो मनुष्य पारद शिवलिंग की भक्ति पूर्वक पूजा-अभिषेक तथा दर्शन करता है ,उसे तीनों लोकों में स्थित समस्त शिवलिंगों के  पूजन का फल मिलता है एवं सौ अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर  का फल प्राप्त होता है।यह सभी तरह के लौकिक तथा परलौकिक सुख देने वाला है। इस शिवलिंग का जहां पूजन होता है वहां साक्षात शंकर का वास होता है।

शिवलिंग पूजा से मिलता है सुख-सौभाग्य
शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है।श्रीलिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा,मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्रीविष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणवसंज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं।लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं,वे (सत,रज,तम) तीनों गुणों से तथा त्रिदेवों युक्त रहती हैं। जो प्राणी उस वेदी के साथ लिंग की पूजा करता है वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है।शिवलिंग पर जल से अभिषेक करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि,दूध से उत्तम संतान की प्राप्ति,गन्ने के रस से यश,मनोनुकूल पति/पत्नी की प्राप्ति,शहद से कर्ज मुक्ति,कुश के जल से रोग मुक्ति,पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है।इसी प्रकार तरह-तरह के सभी शिवलिंगों की पूजा सुख-सौभाग्य एवं सिद्धि प्रदान करने वाली होती है।
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