Sawan 2020: सावन के बचे हुए दिनों में कुछ इस तरह करें शिव उपासना और पाएं शिवकृपा

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 27 Jul 2020 12:48 PM IST
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sawan 2020: श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव शंकर के पवित्र महीने सावन का आखिरी दिन है
sawan 2020: श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव शंकर के पवित्र महीने सावन का आखिरी दिन है

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सार

  • पांचवां और अंतिम सावन सोमवार 3 अगस्त को है।
  • शिवपुराण में कहा गया है कि किसी भी सोमवार को शिव-शक्ति का अभिषेक करने से प्राणी को दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिल जाती है।

विस्तार

27 जुलाई को सावन का चौथा सोमवार है। इसके बाद पांचवां और अंतिम सावन सोमवार 3 अगस्त को है। श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव शंकर के पवित्र महीने सावन का आखिरी दिन है। सावन में भोलेनाथ की उपासना और जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है।  श्रावण मास भगवान शिव की शक्ति पृथ्वी पर निवास कर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। शिवभक्त सावन के पावन महीने में कीर्तन करते हुए कांवड़ द्वारा तीर्थजल अथवा गंगाजल शिवलिंग पर चढाते हैं जगह-जगह भंडारे लगते हैं। भगवान की किसी भी रूप की पूजा-अर्चना करने वाले भक्त भी ॐ नमः शिवाय कहते हुए शिवमय हो जाते हैं। इस माह में सावन के बचे हुए दिनों में खाततौर पर किसी भी सोमवार के दिन 'श्रीरुद्राभिषेक' करने अथवा वैदिक विद्वानों द्वारा करवाने से घर से नहीं वरन कुल से ही दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा जैसे भूत-प्रेत बाधा, जादू-टोने से तो मुक्ति मिलती ही है अपितु जीवन में चंद्रमा द्वारा होने मानसिक पीड़ा भी शांत हो जाती है। आइए जानते हैं सावन के बचे हुए दिनों में भगवान भोलेनाथ की कैसी आराधना करें कि भोले भंडारी प्रसन्न हो जाएं।
  • शुक्ल 'यजुर्वेद' के अनुसार भक्तों के अलग-अलग उद्देश्य के लिए अलग-अलग पदार्थों के द्वारा किया गया 'अभिषेक' संकल्प की पूर्ण सिद्धि प्रदान करता है, इनमें मुख्य रूप से क्रमशः दूध, दही, घी, शहद, मिश्री मिश्रित दूध, गन्ने का रस, अन्य फलों का रस, गंगाजल, तीर्थजल, समुद्र्जल आदि के द्वारा भगवान श्रीरूद्र का अभिषेक करने से उत्तम पत्नी, लाभकारी व्यापार, कर्ज से मुक्ति, धन ऐश्वर्य वृद्धि, मकान-वाहन के सुख, संतान सुख, उच्च शिक्षा, बड़े पद प्रतिष्ठा एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
  • शिवपुराण में कहा गया है कि किसी भी सोमवार को शिव-शक्ति का अभिषेक करने से प्राणी को दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों तापों से मुक्ति मिल जाती है। इस माह में यदि एक बेलपत्र भी शिवलिंग पर अर्पण किया जाए तो वह अमोघ फलदायी कहा गया है।
  • श्रावण माह में जब सूर्यदेव कर्क राशि पर भ्रमण करते हैं तब सभी देवी-देवता, नाग, यक्ष, गंधर्व, किन्नर आदि दिव्यलोक वासी पृथ्वी पर आकर 'श्रीरूद्र' की प्रसन्नता हेतु उनका अभिषेक करते हैं यही नहीं इंद्र आदि देव, तिथि, वार, ग्रह, नक्षत्र एवं शिवगण आदि सभी श्रावण माह में पृथ्वी पर ही वास करते हुए अहर्निश मंत्र जाप एवं शिव कीर्तन करते हैं। 
  • गृहस्थ प्राणी भी इस दिन शिव चालीसा, रुद्रसूक्त, लिंगाष्टक, अथवा 'ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय' आदि मन्त्रों से भी अभिषेक करके ईष्ट कार्य सिद्ध कर सकते हैं।
  • शिवलिंग पर भांग, धतूर बेलपत्र, पंचामृत, आदि चढाने एवं सर्पों को दूध पिलाने से जातकों की जन्मकुंडलीयों में मारकेश ग्रहदशा, ग्रहण, पितृ एवं कालसर्प-दोष से ग्रसित पापदोषों से मुक्ति मिलती है।
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