चैत्र नवरात्रि 2020: मां कुष्माणा की पूजा से मिलती है सभी रोगों से मुक्ति, संतान सुख का मिलता है आशिर्वाद

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 28 Mar 2020 07:39 AM IST
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चैत्र नवरात्र: चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा
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मां कुष्माण्डा हैं मां दुर्गा का चतुर्थ स्वरुप। जब सृष्टि नहीं थी और चारों तरफ सिर्फ अन्धकार ही अन्धकार था, तब मां दुर्गा के इसी स्वरुप ने हल्की सी मुस्कान बिखेर कर चारों तरफ प्रकाश ही प्रकाश उत्पन्न कर ब्रह्माण्ड की रचना की। इसीलिए मां कुष्माण्डा को आदिस्वरूपा व आदिशक्ति कहा गया। मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि अति प्रिय है और संस्कृत में कुम्हड़े को कूष्माण्ड कहते हैं। इसीलिए मां दुर्गा के इस स्वरुप को कूष्माण्डा कहा जाता है |
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मां कूष्माण्डा का निवास

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