श्राप के कारण और कहीं नहीं होती ब्रह्माजी की पूजा, कार्तिक एकादशी पर विराजते हैं देवता

अनीता जैन, वास्तुविद Updated Wed, 25 Nov 2020 12:20 PM IST
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पुष्कर: राजस्थान के पुष्कर जिले में विश्व प्रसिद्द जगत के सृष्टि रचियता  ब्रह्माजी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।
पुष्कर: राजस्थान के पुष्कर जिले में विश्व प्रसिद्द जगत के सृष्टि रचियता  ब्रह्माजी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।

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सनातन धर्म के अनुसार तीन प्रधान देव माने जाते है, ब्रह्मा, विष्णु और महेश। ब्रह्मा जी ने इस जगत की रचना की, विष्णुजी इस जगत का पालन करते है और महेश यानि भगवान शिव संहारक है। राजस्थान के पुष्कर जिले में विश्व प्रसिद्द जगत के सृष्टि रचियता  ब्रह्माजी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। पुष्कर की रचना कैसे हुई इस विषय में पद्मपुराण समेत कई प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। 
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कमल के पुष्प से बना पुष्कर
पुष्कर का अर्थ है एक ऐसा सरोवर जिसकी रचना पुष्प से हुई हो। शास्त्रों के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी ने पृथ्वी पर यज्ञ करने की इच्छा प्रकट की थी उस वक्त धरती पर वज्रनाभ नामक राक्षस का आंतक फैला हुआ था। वह बच्चों को जन्म लेते ही मार देता था। ब्रह्माजी ने कमल के पुष्प से प्रहार कर इस दैत्य का वध कर दिया। यह पुष्प धरती पर उछलकर तीन जगह गिरा। तीनों ही स्थान पर जलधारा बहने लगी तथा सरोवर की उत्पत्ति हुई। ये तीनों सरोवर ज्येष्ठ पुष्कर, मध्य पुष्कर, कनिष्ठ पुष्कर के नाम से प्रसिद्ध हुए। ज्येष्ठ पुष्कर में ब्रह्माजी ने यज्ञ किया, जिससे इस सरोवर को आदि तीर्थ होने का गौरव मिला।


डुबकी लगाने से मिलता है पुण्य
ब्रह्माजी ने पुष्कर सरोवर में कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक यज्ञ किया तभी से पुष्कर में पांच दिनों का धार्मिक मेला आयोजित होता आ रहा है। पौराणिक मान्यता है कि इन पांच दिनों के दौरान सभी देवी-देवता अंतरिक्ष से उतरकर पुष्कर में प्रवास करते है। ऐसी मान्यता है कि इस माह सरोवर में स्नान करने से पूरे एक साल के स्नान के बराबर पुण्य मिलता है तथा आखिरी पांच दिनों के दौरान ब्रह्मा जी समेत सभी 33 कोटि देवी- देवता पुष्कर में ही विद्यमान रहते है। सरोवर में डुबकी लगाने मात्र से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लाखों तीर्थ यात्री पुष्कर आते हैं, पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान कर ब्रह्मा जी के मंदिर में पूजा करते हैं दीपदान करते हैं।
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