Padmini Ekadashi Vrat 2020: अधिक मास में है इस एकादशी व्रत का बड़ा महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 22 Sep 2020 09:05 AM IST
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पद्मिनी एकादशी व्रत 2020
पद्मिनी एकादशी व्रत 2020 - फोटो : Rohit Jha

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सार

पद्मिनी एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी को बेहद प्रिय है। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति पद्मिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। 

विस्तार

पद्मिनी एकादशी मलमास या अधिकमास में आती है और अधिक मास प्रारंभ हो चुका है जो 16 अक्टूबर को समाप्त होगा। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसलिए इस महीने में पड़ने वाली एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों इस एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। पद्मिनी एकादशी व्रत इस महीने 27 सितंबर रविवार के दिन रखा जाएगा। जबकि व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाएगा।
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पद्मिनी एकादशी व्रत विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद अपने पितरों का श्राद्ध करें। भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें। ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवाएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें। इस दिन इंदिरा एकादशी व्रत कथा सुनें। फिर द्वादशी के दिन पारण मुहूर्त में खोलें।
पद्मिनी एकादशी व्रत का महत्व
पद्मिनी एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी को बेहद प्रिय है। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि जो व्यक्ति पद्मिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से व्यक्ति हर प्रकार की तप-पपस्या, यज्ञ और व्रत आदि से मिलने वाले फल के समान फल प्राप्त करता है। ऐसा कहते हैं कि सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को पुरुषोत्तमी एकादशी के व्रत की कथा सुनाकर इसके माहात्म्य से अवगत करवाया था।

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा
त्रेता युग में एक पराक्रमी राजा कृतवीर्य था। राजा की कई रानियां थीं लेकिन फिर भी उसकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की कामना से राजा ने अपनी रानियों सहित कठोर तपस्या की। किंतु उन्हें उनकी तपस्या का फल प्राप्त न हुआ। ऐसे में रानियों ने माता अनुसूया से इसका उपाय पूछा। तब माता ने उन्हें राजा सहित मल मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने के लिए कहा।

रानियों ने देवी अनुसूया के बताये विधान के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा। व्रत की समाप्ति पर भगवान प्रकट हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। उन्होंने भगवान से यह वर मांगा कि हमें ऐसा पुत्र प्रदान करें जो सर्वगुण सम्पन्न हो जो तीनों लोकों में आदरणीय हो और आपके अतिरिक्त किसी से पराजित न हो। भगवान ने उन्हें ऐसा वर दे दिया। कुछ समय पश्चात रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया जो कृतवीर्य अर्जुन के नाम से जाना गया। कालान्तर में यह बालक अत्यंत पराक्रमी राजा हुआ जिसने रावण को भी बंदी बना लिया था।
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