योग-ध्यान: नाभिकेंद्र से लिए गए फैसलों को संकल्प के रूप में देखा जा सकता है

आचार्य भगवानदेव Updated Sun, 07 Jan 2018 07:45 AM IST
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 according to yog dhyan how to take decisions from nabhi kendra

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मन में आने वाले विचार और किसी कार्य के लिए लिया गया संकल्प का केंद्र, शरीर विज्ञान मस्तिष्क को मानता है। जबकि योगशास्‍त्र कहता है कि इनका असली केंद्र तो नाभि है। विश्लेषण भले ही दिमाग करता हो, पर उसे अमल में लाने का फैसला इसी केंद्र से होता है। 
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इंडोनेशिया के बालीद्वीप के द लोटस सेंटर के डॉ. हाशिम नासर का कहना है कि जन्म लेने के बाद अलग होने पर भी बच्चा मां से जुड़ा रहता है। उस जुड़ाव का आधार विद्युत कंपन या सूक्ष्म तंरगें होती हैं, जिन्हें परिभाषित नहीं किया जा सका है। डॉ. हाशिम नासर ने शोधपत्र में लिखा है कि जन्म के बाद बालक रोता है, हाथ-पैर चलाता है और रक्त संचार आरंभ हो जाता है। 
हृदय से रक्त फेफड़ों में पहुंचता है और वह सक्रिय हो जाते हैं। अब मां के गर्भाशय में स्थित ‘प्लेसेंटा’ रूपी फेफड़ों की उसे जरूरत नहीं रह जाती। लिगामेंटम टेरेस जैसे कुछ सूत्रों की मानें, तो नाभि लिवर से जुड़ी रहती है, लेकिन लिवर पर दबाव पड़ता है, तो यही निष्क्रिय सूत्र जीवंत हो जाते हैं और फूली शिराओं के रूप में दिखाई देते हैं। 
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