खुद अपनी हिफाजत कर लेता है शरीर, जानिए कैसे

संपादकीय डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 05 May 2018 11:18 AM IST
विज्ञापन
body protects itself

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
योग की तरह अब स्वास्थ्य विज्ञान भी कहने लगा है कि थोड़ी जागरूकता और शरीर से सहयोग करने की जरूरत है, फिर तो शरीर अपना ध्यान खुद रखने लगता है। प्रसिद्ध शरीर विज्ञानी डॉ. अल्बर्ट टोंक ने लिखा है कि शरीर में बाहरी प्रभावों, खासकर बुरे प्रभावों को रोकने की अद्भुत क्षमता है। अपनी प्रयोगशाला में 1985 से शरीर का अध्ययन कर रहे डॉ. टोंक ने एक किताब लिखी ‘ह्यूमन बॉडी एंड हाऊ इट वर्क्स’। उनका कहना है कि रोग के वाहक कारणों को सबसे पहले तो त्वचा ही रोक देती है। बहुत से रोग वाहक ऐसे होते हैं, जो रोम छिद्रों से भी बारीक होते हैं और त्वचा से शरीर में चले जाते हैं। त्वचा के नीचे मृत कोशिकाओं की एक सुरक्षा पंक्ति होती है, जो उन्हें वहीं रोक देती है। रोगाणु यदि मुंह, नाक, कान, आंख आदि से शरीर में घुसे तो उन्हें रोकने के लिए भी रक्षा-चौकियां तैयार हैं। यदि वे नाक से भीतर जाएं, तो ऐसी श्लेष्मिक झिल्लियों का सामना करना पड़ता है, जिनसे एक तरल चिपचिपा द्रव स्त्रावित होता रहता है। अधिकांश उसी स्राव में फंस कर रह जाते हैं और आगे नहीं बढ़ पाते। इस पर भी कोई विजातीय द्रव्य आगे बढ़ जाए तो श्वास नली की झिल्लियां और श्लेष्मा की दीवारें हैं। इतने पर भी कोई विजातीय जीवाणु आगे बढ़ जाए तो आहार नली और पाचन क्षेत्र में ऐसा अम्लीय द्रव तैयार रहता है, जो उनके लिए जहर का काम करता है। जीवाणु इस अम्लीय विष से भी मर जाते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us