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मंत्र का ही प्रभाव माने जाते हैं शाप और वरदान

साधु विज्ञानभिक्षु Updated Fri, 12 Jan 2018 11:59 AM IST
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dhyan yoga and mantra
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मंत्र शब्दों, अक्षरों से संबंधित एक ऐसा विज्ञान है कि उसके संपर्क में आते ही किसी चमत्कारिक शक्ति का बोध होता है। यही शक्ति सामान्य इंसान को विशेष बना देती है। समझा जाता है कि पुराने समय में योगी, ऋषि और महापुरुषों ने मंत्र बल से पृथ्वी, देवलोक और ब्रह्मांड से संपर्क साधा और अनंत शक्तियां प्राप्त कीं। वह इतने समर्थ बन गए कि किसी भी पदार्थ को अपनी इच्छा के अनुरूप, शक्ति को पदार्थ और पदार्थ को शक्ति में बदल देते थे। 
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शाप और वरदान को मंत्र का ही प्रभाव माना जाता है। किसी का रोग पल भर में अच्छा कर देना और किसी भी क्षण करोड़ों मील दूर की बात जान लेना, शरीर की 72 हजार नाड़ियों के एक-एक जोड़ की जानकारी लेने की अलौकिक शक्ति मंत्र में ही है। इसलिए भारतीय तत्वदर्शन में मंत्र शक्ति पर जितने शोध हुए हैं, उतने किसी पर भी नहीं।


मंत्र का सीधा संबंध उच्चारण या ध्वनि से है। इसे 'ध्वनि विज्ञान' भी कह सकते हैं। जो अनुसंधान हुए हैं उनके अनुसार, वह वक्त करीब ही है, जब ध्वनि विज्ञान ऋषियों जैसे ही काम करने लगेगा। उदाहरण के लिए 'ट्रांसड्यूसर' यंत्र से सूक्ष्मतम आपरेशन किए जा सकते है। डॉ. फ्रिस्टलाव ने एक ऐसा यंत्र (अलट्रासोनोरेटर) बनाया है, जो दो रासायनिक द्रव्यों को कुछ सेकेंड में ही मिला सकता है।

 
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