मन की शांति के लिए प्रभु का स्मरण करना होता है जरूरी

स्वामी रामनरेशाचार्य Updated Mon, 08 Jan 2018 09:18 AM IST
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for the peace of mind It is necessary to remember the Lord

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यह आवश्यक है कि हम अपने चित्त को अनुशासित करें, इन्द्रियों को अनुशासित करें, लेकिन प्रश्न है कि हम कैसे अपने चित्त को अनुशासित करेंगे? उदाहरण के लिए, जब हम अपने घर से बाहर होते हैं, तो हमें वह शांति नहीं मिलती, जो घर आकर मिलती है। बाहर हमारी चंचलता बढ़ती है, अशांति बढ़ती है। अपने कमरे में बिस्तर पर आने के बाद जब हम अपने चित्त को समाहित करके कुछ समय बिताते हैं, तो हमें बहुत आनंद प्राप्त होता है।
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 योग दर्शन के अनुसार, समाधान है कि हम अपने मन के फैलाव को रोकें। यह कैसे किया जाए? यह चिंता हर किसी को रही है कि अपने चित्त को कैसे समाहित या एकाग्र करें। जो मन विभिन्न विषयों-चीजों से जुड़ रहा है, जो कभी शांत नहीं होता उसे हम कैसे जोड़ें? उसे हम कैसे रोकें? इसके लिए अच्छा समाधान प्रभु का स्मरण है। यदि कोई यम-नियम नहीं करता और समाधिस्थ होना चाहता है, मोक्ष की कामना करता है, तो उसके लिए विकल्प भी है।
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