अवतार यानी ईश्वर का हस्तक्षेप, जानिए इसका महत्व

महात्मा भगवानदीन Updated Sat, 05 May 2018 10:42 AM IST
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God intervention and know its importance

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विज्ञान तो कहता है कि ब्रह्मांड क्रमशः फूलता-फलता जा रहा है और एक दिन महाप्रलय के साथ यह नष्ट हो जाएगा। आर्ष-वांग्मय कहता है कि विश्व इतिहास में संकट की घड़ियां आती रही हैं, जिनमें विनाश के बादल सब कुछ डूबा देने की चुनौती देकर बरसे भी हैं। यह सब होते हुए भी सृष्टिकर्ता की क्षमता और न्याय पर मनुष्य को विश्वास है। अवतार की धारणा इसी आशा का संचार करती है। अवतार कोई जादूगर बनकर नहीं आते, बल्कि भागवत मनुष्य के एक दृष्टान्त बनकर आते हैं।  
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बुद्धिवादी का कोई तर्क अवतारवाद के खिलाफ टिक नहीं सकता, इतना सशक्त देव संस्कृति का यह प्रतिपादन है। संस्कृति चिंतन यह कहता है कि भगवान जब भी अवतार लेकर आते हैं, तो मानव और अपने बीच के परदे को फाड़ने के लिए आते हैं। उस परदे को, जिसे अपनी प्रकृति में सीमित मनुष्य उठा तक नहीं पाता। ‘अवतार’ शब्द का अर्थ है उतरना या अवतरित होना। भगवान का उस विभाजन रेखा से नीचे उतर आना, जो भगवान को मानव जगत या मानव अवस्था से पृथक करती है। इस तरह अवतार का आगमन एक प्रकार से मानवमात्र की सहायता के लिए, आस्था संकट की बेला में मानव जाति को एक साथ रखने के लिए, अधोगामी प्रवृत्तियों को चूर्ण-विचूर्ण करने के लिए, मनुष्य के अंदर की चेतना को जगाने के लिए व सत्प्रवृत्तियों की स्थापना के लिए तथा अशुभ सत्ताओं के विनाश के लिए होता है। यह क्रम अनादि काल से चलता चला आया है।
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