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धार्मिक और आध्यात्मिक नजरिए से समझें माघ महीने का महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 24 Jan 2019 12:42 PM IST
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योग-ध्यान
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शास्त्रों में माघ का महीना अध्यात्म मार्ग के लिए अनुकूल माना जाता है। इसलिए माघ के महीने में तप, उपवास, ध्यान और पूजा-पाठ का महत्व ज्यादा होता है। दरअसल माघ के दिनों में पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक होती है। वैसे तो उत्तरी गोलार्ध में इसे सबसे गर्म महीना होना चाहिए, मगर यह सबसे ठंडा महीना होता है, क्योंकि पृथ्वी का उत्तरी भाग सूर्य के दूसरी तरफ होता है। 
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योग शास्त्र और विज्ञान के अनुसार मानसिक असंतुलन को जलतत्व के अनियंत्रित होने के रूप में देखा जाता है। माघ के महीने में पृथ्वी ऐसा कोण बनाती है कि सूर्य की किरणे यहां पहुंचते तक बिखर जाती हैं। वे धरती को गर्म नहीं कर पातीं।


सूर्य का गुरुत्वाकर्षण इन दिनों अधिकतम होता है। जनवरी में अर्थात माघ के महीने में पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है, इसलिए सूर्य का अधिकतम खिंचाव भी इन्ही दिनों होता है। यह समय सौरमंडल और उसमें रहने वाले जीवों के जीवन में संतुलन और स्थिरता लाता है। नीचे की ओर खिंचाव के कारण व्यक्ति का मूलाधार चक्र सक्रिय हो जाता है उत्तरी गोलार्ध में इन दिनों जीवन की गति मंद हो जाती है।

यहां तक कि कोई बीज बोया जाए तो उसका विकास भी प्रभावित होता है, उसका ठीक से अंकुरण नहीं हो पाया। शोध संस्थान के अनुसार इन दिनों जप तप, ध्यान पूजा और शीत उष्ण द्वंद्वों को सहने की के अभ्यासों का महत्व देखा गया है। जिन लोगों पर प्रयोग किए या उनके रहन सहन को जांचा परखा गया, उनके निष्कर्ष भी इस महीने की आध्यात्मिक ऊर्जा को रेखांकित करते हैं।

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