योग विज्ञान में इंसान की प्रज्ञा के होते हैं सोलह भाग

सदगुरु Updated Sun, 13 May 2018 11:11 AM IST
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science of yoga in human body consists sixteen parts

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योग विज्ञान में इंसान की प्रज्ञा को सोलह भागों में दिखाया गया है। इन सोलह भागों को चार अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया है। इन पहलुओं को कैसे इस्तेमाल किया जाए, कैसे उनमें सुधार लाया जाए, ताकि इंसान की प्रज्ञा व बुद्धि और ज्यादा तेज और संपूर्ण बन सके। सबसे पहले यह कि अन्दर देखना किसे कहते हैं। अभी हम या कोई भी इंसान जिस तरह से बना है, उस स्थिति में वह अपने भीतर की ओर नहीं मुड़ सकता, क्योंकि हमारी पांचों इंद्रियों का रुख बाहर की ओर है। आप अपने आसपास तो देख सकते हैं, लेकिन अपनी आखों की पुतली को अंदर की तरफ घुमाकर अपने भीतर स्कैन नहीं कर सकते।
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अब आप अपने जीवन चलाने के उपकरणों के जरिए जानने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह तरीका काम नहीं करेगा, क्योंकि इन उपकरणों को इस तरह बनाया गया है कि ये आपको सब कुछ तुलना करके ही बता पाएंगे। पांचों ज्ञानेंद्रियों द्वारा जो कुछ भी समझते हैं, उसे ज्ञान कहते हैं। आप इन पांचों इंद्रियों, यानि देखने, सुनने, छूने, चखने और सूंघने द्वारा जो ग्रहण नहीं कर पाते, लेकिन फिर भी उसका बोध किया जा सकता है, उसे विशेष ज्ञान कहा जाता है। जिसे पश्चिम में साइंस कहा जाता है, उसे भारत में विज्ञान कहते हैं। बहुत सारी ऐसी चीजें हैं, जिन्हें हम खुली आंखों से नहीं देख सकते, कानों से सुन नहीं सकते, उन्हें कुछ उपकरणों की सहायता से देखा और सुना गया है।

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