योग-ध्यान: क्रोध से भंग हो जाती है जीवन की एकाग्रता, पढ़ें भगवान बुद्ध के संदेश

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 15 Jul 2019 08:51 AM IST
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गौतम बुद्ध
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एक दिन गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे। वे एकदम शांत थे, उन्हें इस प्रकार देखकर उनके शिष्य बहुत चिंतित हुए। शिष्यों ने सोचा कि शायद उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। तभी कुछ दूर खड़ा एक शिष्य जोर से चिल्लाया कि आज मुझे सभा में बैठने की अनुमति क्यों नहीं दी गई है? बुद्ध आंखें बंद करके ध्यान करने लगे। बुद्ध को ध्यान में बैठा देखकर वह शिष्य फिर से चिल्लाया कि मुझे प्रवेश की अनुमति क्यों नहीं दी है? तभी बुद्ध के सामने बैठे एक शिष्य ने बुद्ध से कहा कि कृपा कर उसे भी सभा में आने दीजिए। 
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गौतम बुद्ध ने दी गुस्सा न करने की सीख शिष्य को नहीं दी इजाजत 
बुद्ध ने आंखें खोलीं और बोले उसे आज्ञा नहीं दी जा सकती। ये सुनकर शिष्यों को बड़ा आश्चर्य हुआ। बुद्ध ने कहा कि आज वह क्रोधित होकर आया है। क्रोध से जीवन की एकाग्रता भंग होती है। क्रोधी व्यक्ति मानसिक हिंसा करता है। इसलिए उसे कुछ समय एकांत में ही खड़े रहना चाहिए। क्रोधित शिष्य भी बुद्ध की बातें सुन रहा था। अब उसे खुद किए व्यवहार पर पछतावा होने लगा। वह समझ चुका था कि अहिंसा ही हमारा धर्म है। उसने बुद्ध के सामने संकल्प किया कि अब वह कभी क्रोध नहीं करेगा। 
 
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