दिन की थकान मिटाने और तरोताजा होने के लिए चालीस मिनट काफी है

Rakesh Jhaराकेश कुमार झा Updated Sat, 01 Aug 2015 11:02 AM IST
विज्ञापन
yognidra benefits

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
दस बारह घंटे लगातार काम करने के बाद अक्सर छह-सात घंटे की नींद जरूरी होती है। नहीं सोएं तो दो-तीन बाद बीमार पड़ने की आशंका हो जाती है। लेकिन योग ने और अब विज्ञान ने भी कहा कि पंद्रह से चालीस मिनट की एक गहरी नींद आयोजित कर ली जाए तो आठ दस घंटे बचाए जा सकते हैं और ताजगी गहरे विश्राम जैसी।
विज्ञापन

योग ने इस विधि से मिले विश्राम को योगनिद्रा कहा है। योगदर्शन के अब तक के सबसे लोकप्रिय और सर्वांगपूर्ण भाष्य स्वामी ओमानंद तीर्थ का कहना है कि अभ्यास कायदे से किया जाए तो दिन में बाईस-तेईस घंटे काम किया जा सकता है।
योगनिद्रा पर काम कर रहे रूस के फिजिओलाजिस्ट एंकतिया चोस्की ने कहा है कि सचमुच बिना सोए काम करते रहा जा सकता है। महाभारत में अर्जुन के निद्राजित कहे जाने का सच जानने और योग का अध्ययन करते समय उन्होंने नींद की जरूरत पर खोज और प्रयोग शुरु किए। पाया कि नींद के समय व्यक्ति शरीर एवं श्वास के प्रति अचेत रहता है।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

सिर्फ चालीस मिनट ही ऐसी स्थिति विश्राम देती है

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us