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Live: अयोध्या में सड़कों पर कीर्तन और जय श्रीराम के नारे, हर ओर उल्लास

अयोध्या में हर ओर उल्लास अयोध्या में हर ओर उल्लास

भूमिपूजन के दिन एक अलग सुबह को जी रही है अयोध्या, तस्वीरों में देखें ऐसा है माहौल

शिखर को स्पर्श कर रही हनुमानगढ़ी की धार्मिक आभा, पीएम मोदी आज करेंगे पूजन-अर्चन

राममंदिर निर्माण के लिए आज पीएम मोदी के हाथों होने वाले भूमिपूजन को लेकर अयोध्या के राजा हनुमान जी महाराज के दरबार की धार्मिक आभा मंगलवार को शिखर को स्पर्श करती नजर आई।

पीएम मोदी अपने अयोध्या दौरे पर सर्वप्रथम हनुमानगढ़ी पहुंचकर हनुमान जी की पूजा अर्चना करेंगें। इसके लिए हनुमानगढ़ी को भव्य एवं दिव्य रूप से सजाया गया है। इससे पूर्व मंगलवार को हनुमानगढ़ी के निशान की पूजा अर्चना कर भूमि पूजन की अनुमति ली गई। इस दौरान हनुमानगढ़ी जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान नजर आई।

हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास रामलला के भूमिपूजन को लेकर अत्यंत उत्साहित नजर आते हैं। कहते हैं कि वर्षों से यह दिन देखने के लिए आंखें तरस रहीं थी। पीएम नरेंद्र मोदी अयोध्या आकर हमारा गौरव बढ़ा रहे हैं।

बताया कि हमें जो जानकारी दी गई है। उसके हिसाब से पीएम मोदी करीब सात मिनट तक हनुमानगढ़ी में पूजा अर्चना करेगें। इस दौरान कोरोना के नियमों का पालन करते कोई भी पीएम तक नहीं पहुंच पाएगा। इसके लिए हनुमानगढ़ी को भगवा रंग से सजाया गया है।
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सिंहद्वार से ही दिखेगी गर्भगृह में विराजमान रामलला की अद्भुत छवि

स्कंद पुराण के वैष्णव खंड सात में अयोध्या महात्म्य का जिक्र करते हुए श्लोक 18 से 25 में भगवान राम के जन्मस्थान का न सिर्फ महत्व बताया गया है, बल्कि आस-पास के पौराणिक स्थलों का जिक्र करते हुए एक-एक इंच माप भी तय की गई है। अब उसी गर्भगृह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच अगस्त को भूमिपूजन कर पहली ईंट रखेंगे।

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर कई मायने में अद्भुत और अकल्पनीय होगा। भक्तों को सिंहद्वार से ही करीब सवा तीन सौ फुट दूर गर्भगृह में विराजमान रामलला के दर्शन होंगे। पूरब स्थित मुख्य सिंहद्वार के अलावा प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप से होकर दो और बड़े द्वार होंगे। गर्भगृह का परिक्रमा पथ भी खुला रहेगा। 

भूमिपूजन अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी परिसर में निरीक्षण के दौरान राममंदिर के कॉरिडोर और परिसर की भव्यता को लेकर अहम सुझाव दे सकते हैं। सोमपुरा परिवार भी उन लम्हों का इंतजार कर रहा है, जब भूमिपूजन के साथ उनके डिजाइन पर भव्य राम मंदिर निर्माण शुरू होगा। राममंदिर के मुख्य वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा के पुत्र आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा व निखिल सोमपुरा अहमदाबाद से अयोध्या पहुंच चुके हैं। 

परिवार के अनुसार राममंदिर को खास नागर शैली में बनाया जाएगा। मंदिर दो की जगह अब तीन मंजिला होगा। मुख्य ढांचा वैसा ही रखा गया है, जैसा प्रस्तावित मॉडल में था।

नए डिजाइन के साथ भव्यता का वैभव

वास्तुकार के मुताबिक भारतीय मंदिरों के स्थापत्य की तीन शैलियां हैं- नागर, द्रविड़ और वेसर। राम मंदिर को उत्तरभारत की प्रचलित नागर शैली में डिजाइन किया गया है। इस शैली में मंदिर का गर्भगृह अष्टकोणीय आकार में होता है और मंदिर की परिधि वृत्ताकार बनाई जाती है। गुजरात में सोमनाथ मंदिर भी इसी शैली में बना है। मूल डिजाइन में बदलाव के बाद अब मंदिर में 318 खंभे बनेंगे।

मंदिर की लंबाई 360 फुट, चौड़ाई 235 फुट और ऊंचाई 161 फुट होगी। मंदिर के गर्भगृह से पहले तीन शिखर वाले स्थान होंगे। सबसे पहले भजन-कीर्तन का स्थान, दूसरे में ध्यान और तीसरे में राम लला के दर्शन की व्यवस्था होगी।

गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं

गर्भगृह में पुजारी के अलावा और किसी को जाने की अनुमति नहीं होगी। मंदिर के दूसरे तल पर राम दरबार होगा, जहां भगवान राम, सीता और लक्ष्मण-भरत, शत्रुघ्न के साथ हनुमान भी विराजमान होंगे।
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रामलला विराजमान...

आपदा को अवसर में बदला... दोनों पैरों से अशक्त सलमान बने दिव्यांग साथियों का सहारा

फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी।

मुरादाबाद शहर से करीब बारह किलोमीटर दूर काशीपुर मार्ग पर स्थित हमीरपुर गांव निवासी 25 वर्षीय  दिव्यांग सलमान ने कोरोना काल में झटका खाया, पर आपदा को ही अवसर बना लिया।

वे अपने दिव्यांग साथियों और जरूरतमंद लोगों का सहारा बने हैं। सलमान ने हाथ से मास्क बनाकर घर-घर पहुंचाए। साथ ही जरूरतमंदों को राशन भी उपलब्ध करा रहे हैं। हमीपुर गांव निवासी हुस्नजहां के बेटे सलमान दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। 

सलमान ने बीए तक पढ़ाई की और सरकारी नौकरी का प्रयास किया, सफलता नहीं मिल पाई, लेकिन हार नहीं मानी। अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर दिसंबर 2019 में  अपना रोजगार खड़ा करने के साथ ही अपने जैसे दिव्यांग युवकों को नौकरी देने की ठान ली। 

गांव में पांच लाख रूपये लगाकर टारगेट नाम से कंपनी खोली। जिसमें चप्पल और डिटर्जेंट बनाने का काम शुरू किया गया। 30 दिव्यांग युवकों को रोजगार दिया। मेहनत रंग लाने लगी, मगर कुछ माह बाद ही लॉकडाउन लग गया। फैक्टरी बंद हो गई। 

सलमान ने बताया कि उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जो जमापूंजी जुटाई उससे जरूरतमंदों को राशन और घरेलू सामग्री पहुंचाना शुरू कर दिया। खुद मास्क बनाकर लोगों को बांटे हैं। अब फिर से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काम शुरू कर दिया गया है। इससे फिर नई राह खुल गई है। साथी भी खुश हैं।  

मन की बात कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी भी समलान के हौसले और हिम्मत की तारीफ कर चुके हैं। तब सलमान और उसके गांव का नाम राष्टीय स्तर पर चर्चा में आया था। पीएम ने सलमान के संघर्ष और सफलता का जिक्र किया था। सलमान ने बताया कि दस अगस्त को उनकी शादी की तारीख तय हुई है। जिसकी तैयारियों में परिवार जुट गया है।

(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)
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काल की कसौटीः साकेत से जुड़ती है सोमनाथ के संयोग की कहानी, नेहरू का इनकार पर मोदी बने मुख्य किरदार

आजाद भारत में यूं तो कई मंदिरों के पुनरुद्धार, जीर्णोद्धार, नवनिर्माण और पुनर्निर्माण की कहानियां कही व सुनी जाती हैं। पर, सोमनाथ में शिवलिंग की पुनर्स्थापना और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण देश के लोकतांत्रिक इतिहास में चारों स्तंभों की काल की कसौटी बनते हुए आगे बढ़े हैं। 

दोनों की ध्वंस व सृजन की कहानी काफी मिलती-जुलती है और पात्रों का भी गुजरात व उत्तर प्रदेश से कोई न कोई रिश्ता रहा है। सोमनाथ से साकेत की धरती तक ऐसे संयोगों का दिलचस्प योग देखने को मिलता है। सोमनाथ ने 1026 ई. में मो. गजनी के बर्बर विध्वंस को झेला तो 1528 ई. में बाबर के सिपहसालार मीर बांकी की बर्बरता का निशाना अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि स्थान पर मंदिर बना।

ऐसे शुरू हुआ सोमनाथ का काम
उपप्रधानमंत्री व गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 12 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ की बड़ी सार्वजनिक सभा में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण व शिवलिंग की पुनर्स्थापना के संकल्प की घोषणा की। जूनागढ़ के नवाब ने विरोध किया और पाकिस्तान को जूनागढ़ में मिलाने का साजिश रच डाली। तब पटेल ने सेनाओं को जूनागढ़ भेज नवाब की स्टेट का देश में विलय करा दिया और शिवलिंग की पुनर्स्थापना के काम को साकार करने की योजना पर काम शुरू कर दिया।

कैबिनेट से प्रस्ताव पर गांधी ने कराया बदलाव  
पटेल ने महात्मा गांधी से आशीर्वाद लेने के बाद नेहरू से मिलकर कैबिनेट में प्रस्ताव लाने का आग्रह किया। 1951 के प्रारंभ में कैबिनेट की बैठक हुई। सरकारी खर्च पर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित हुआ। कैबिनेट मीटिंग के बाद कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी और एनवी गाडगिल गांधी के पास गए। वहां गांधी ने सरकारी खर्च पर मंदिर के जीर्णोद्धार पर आपत्ति  जताई व जन सहयोग का सुझाव दिया। इसके बाद कैबिनेट ने पुनर्विचार कर सोमनाथ मंदिर जीर्णोद्धार ट्रस्ट की स्थापना की। इसके संचालन की जिम्मेदारी मुंशी को सौंपी गई। मुंशी 1952 से 1957 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे ।

नेहरू आयोजन में नहीं हुए शामिल  
ट्रस्ट की स्थापना से पूर्व सौराष्ट्र के तत्कालीन राजा दिग्विजय सिंह ने 8 मई, 1950 को मंदिर के जीर्णोद्धार के काम की आधारशिला रख दी। इस बीच, सरदार पटेल की मृत्यु के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार में खाद्य एवं रसद मंत्री के साथ-साथ गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देख रहे केएम मुंशी ने सोमनाथ मंदिर में शिवलिंग की पुनर्प्रतिष्ठा व पुनर्निर्माण के काम के शुभारंभ की तिथि 11 मई, 1951 तय कराई। राममंदिर आंदोलन से जुड़े रहे अमित पुरी बताते हैं कि मुंशी ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद व प्रधानमंत्री नेहरू को आमंत्रित किया। नेहरू ने कार्यक्रम में भाग लेने से इन्कार कर दिया और राजेंद्र बाबू को भी रोका। पर राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू को अनसुना करके आयोजन में भाग लिया और पूजा-अर्चना भी की। साथ ही कहा कि दुनिया देख ले कि विध्वंस से निर्माण की ताकत बड़ी होती है। 
 
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