खाद्य संकट में फंस सकता है भारत

Aligarh Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। डीएस कॉलेज में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ शनिवार को हुआ। जाने-माने अर्थशास्त्री और कृषि वैज्ञानिकों ने ‘भारत में कृषि संकट’ पर मंथन किया। तय किया गया कि सेमिनार में आए सुझावों को अमली जामा पहनाने के लिए भारत सरकार के पास भेजा जाएगा। गिरि इंस्टीट्यूट्स आफ डेवलपमेंट स्टडीज के निदेशक प्रो. एके सिंह ने कहा कि फूड ग्रेन आउटपुट नहीं बढाया गया तो भारत फिर खाद्य संकट में फंस सकता है। उन्होंने देश में घटती कृषि जोत, क्लाइमेट चेंज जैसी पर्यावरणीय समस्या, जल का अधिक दोहन, कृषि सपोर्ट सिस्टम और भूमि अधिग्रहण जैसे समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। आईआईपीए नई दिल्ली के प्रो. पीके चौबे ने कृषि निर्यात, जमींदारी उन्मूलन, भूमि व जल संरक्षण व कृषि व्यापार को मजबूत बनाने की आवश्यकता जताई। यूपीयूईए के महासचिव डा.एसके मिश्रा ने कहा कि अपेक्षित आय नहीं होने के कारण किसान ठीक से जीवन-निर्वाह भी नहीं कर पा रहे। सरकारी नीति कृषि विरोधी होती जा रही है। डीएस कॉलेज के प्राचार्य डा. आरएन सिंह ने आज वास्तविक किसानों के पास खाने की रोटी, पहनने को वस्त्र और सोने का विस्तर नहीं है। आकड़ों के खेल में वास्तविकता उलझ कर रह जाती है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि शोध वास्तविकता के करीब हो। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पूर्व मंडलायुक्त डा. आरके भटनागर व संचालन आयोजन सचिव डा. इंदू वार्ष्णेय ने की। कन्वेनर डा. एके तोमर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डा. संध्या, डा. मृदुला सिंह, डा. सुनीता आदि मौजूद थे। सेमिनार में कई प्रदेश के शिक्षक शामिल हुए है। सेमिनार में अतिथियों ने सेवेनियर का विमोचन किया।
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