भारत को अमेरिका-इंग्लैंड जैसा बनाना धरती का शोषण

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 09 Sep 2018 02:02 AM IST
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद

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प्रख्यात इतिहासकार एवं पर्यावरणविद् रामचंद्र गुहा ने कहा कि भारत को भी अमेरिका और इंग्लैंड जैसा बनाना धरती के शोषण के बराबर होगा। झूंसी के गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में शनिवार को आयोजित व्याख्यानमाला ‘गांधी एक पर्यावरणविद के रूप में’ विषय पर उन्होंने अपने विचार रखे। कहा, वर्तमान में गांधी के विचारों और कार्य की व्यापक रूप उपेक्षा की जा रही है।
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रामचंद्र गुहा ने बताया कि महात्मा गांधी कहते हैं कि भगवान न करे कि भारत भी कभी पश्चिमी देशों के ढंग का औद्योगिक देश बने। कहा कि भारत को  इंग्लैंड और अमेरिका जैसा बनाना धरती के कुछ स्थानों और नस्लों को शोषण के लिए तलाशने जैसा होगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन और उनके जीवन को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका जीवन व कार्य भारत में समकालीन पर्यावरणीय आंदोलन पर विशेष प्रभाव रखता है। वास्तव में यह आंदोलन अप्रैल 1973 के चिपको आंदोलन के साथ शुरू हुआ। चिपको के शुरुआती छपे लेखों में एक प्रतिबद्ध पत्रकार ने घोषित किया कि गांधी की दृष्टि ने हिमालय के वृक्षों को बचाया है। तब से महात्मा गांधी पर्यावरणीय आंदोलन के संरक्षक संत की भांति माने जाते हैं। गुहा ने कहा कि गांधी गांवों में रोशनी एवं हवादार घर बनाने के हिमायती थे। उनका मानना था कि ऐसे खुले और हवादार घरों में एक आंगन हो जिसमें परिवार के सदस्य घरेलू उपयोग के लिए सब्जियां उगा सकें।
कहा कि पंडित नेहरू के लिए गांव बौद्धिक एवं सांस्कृतिक दोनों रूपों से पिछड़ी स्थिति में था। आर्थिक नियोजन के मुख्य उद्देश्य के रूप में नेहरू ने अति उपभोग को नहीं बल्कि हर भारतीय के लिए भोजन, कपड़े, आवास और स्वास्थ्य की समुचित पर्याप्तता’ को निर्धारित किया। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के अध्यक्ष प्रो. राजन हर्षे ने व्याख्यान की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने मार्क्स और गांधी के विचारों की तुलना करते हुए गांधी के सत्याग्रह, अहिंसा और पर्यावरण को उनके योगदान का जिक्र किया। इसके पहले पंत संस्थान के निदेशक प्रो. बद्रीनारायण ने अतिथियों का परिचय दिया। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर एस.के पंत ने किया इस मौके पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एचएस उपाध्याय, प्रो. भास्कर मजूमदार, प्रो. केएन भट्ट, प्रो. पंत, प्रो. जी सी रथ, सहायक प्रो. डॉ. अर्चना सिंह, कुणाल केशरी, चंद्रईया गोपानी और समस्त छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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