प्रयागराजः कलश स्थापना संग पूजी जाएंगी शैलपुत्री,

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vinod kumar singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 06 Apr 2019 01:09 AM IST
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भगवती की आराधना का पर्व वासंतिक नवरात्र शनिवार से आरंभ होगा। पहले दिन प्रतिपदा पर देवी की शैलपुत्री स्वरूप में पूजा की जाएगी। शक्तिपीठों और घरों में कलश स्थापना के साथ देवी का आवाहन किया जाएगा। पर्व के मद्देनजर शुक्रवार की देर रात तक जहां शक्तिपीठों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। वहीं घरों में भी देवी दुर्गा के मंदिर को साफ सुथरा करने के साथ ही सजाया गया।  शक्तिपीठों में गर्भ गृह से लेकर मंदिर परिसर और बाहर की ओर भी बिजली की झालरों से आकर्षक सजावट की गई। शक्तिपीठों की ओर आने वाले रास्तों पर बल्लियां लगाकर पताकाएं फहराई गईं।
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मीरापुर स्थित सिद्धपीठ त्रिपुर सुंदरी भगवती ललिता देवी के मंदिर के गर्भगृह को सजाया गया। भगवती अबकी चांदी के नए भव्य दरबार में ही विराजेंगी। मंदिर समिति के महामंत्री धीरज नागर की देखरेेख में जड़िया बंधुओं कृष्ण कुमार एवं रमेश कुमार बनारसी ने चांदी के नए दरबार को यथास्थान जड़ा। अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा के मुताबिक सुबह पांच बजे से दर्शन पूजन का क्रम आरंभ होकर दिन में एक बजे तक चलेगा। फिर श्रद्धालु शाम चार बजे से देर रात तक दर्शन कर सकेंगे। दुर्गा पाठ, शतचंडी महायज्ञ के अतिरिक्त प्रतिपदा पर भगवती जागरण भी होगा।


कल्याणी देवी स्थित सिद्धपीठ कल्याणी देवी में देवी का फूलों और आभूषणों से श़ृंगार किया जाएगा। पंडित श्यामजी पाठक के मुताबिक शृंगार की अवधि को छोड़कर देवी का भोर से लेकर रात तक दर्शन किया जा सकेगा। अलोपीदेवी स्थित अलोपशंकरी देवी मंदिर में दर्शन, पूजन के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा। परिसर में श्रद्धालुओं की ओर से भी कलश स्थापना की जाएगी। साथ ही पाठ, यज्ञ होंगे। भगवती को निशान चढ़ाने के अतिरिक्त मुंडन, कर्णछेदन सहित अन्य संस्कारों के लिए भी श्रद्धालु जुटेंगे।

इसी क्रम में चौक गंगादास स्थित शक्तिस्वरूपा मां खेमामाई, मुट्ठीगंज स्थित कालीबाड़ी, हाईकोर्ट हनुमान मंदिर स्थित अष्टभुजी माता मंदिर, कटरा कालीथान, भारद्वाज आश्रम परिसर स्थित कालीबाड़ी, हाईकोर्ट पानी टंकी स्थित देवी अष्टभुजी मंदिर, सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन के दुर्गा मंदिर, शास्त्रीनगर तिराहे स्थित देवी मंदिर, सुल्तानपुर भावा स्थित काली मंदिर सहित शहर के अन्य शक्तिपीठों में भी कलश स्थापना के साथ ही देवी की पूजा आराधना की जाएगी।

शक्तिपीठों के साथ ही घरों में भी श्रद्धालु दुर्गासप्तशती पाठ, सहस्रचंडी पाठ के साथ याज्ञिक अनुष्ठान करेंगे। प्रतिपदा की शाम को देवी भजन संध्या के अतिरिक्त ललिता देवी मंदिर में भगवती जागरण होगा। कल्याणी देवी मंदिर परिसर में छह से तेरह अप्रैल तक शाम सवा सात बजे से कथाव्यास ऋषि महाराज की रामकथा होगी। पंडित सुशील कुमार पाठक के मुताबिक इस बीच रोजाना सुबह 8.30 से 11 तथा शाम चार से 7.30 बजे तक शतचंडी पाठ होगा।

वासंतिक नवरात्र पर नीम के पेड़, चौक के कारोबारी प्रेम बहादुर श्रीवास्तव ‘कल्लू बाबा’ की ओर से चौफटका जीटी रोड से लेकर बहादुरगंज, सुलाकी चौराहे तक के मंदिरों पर सवा मीटर की पताका नि:शुल्क बांटी जाएगी। राजरूपपुर निवासी कल्लू बाबा का कहना है कि बीते दो दशकों से यह मुहिम जारी है। अन्य साथियों का भी सहयोग मिला तो मंदिरों को अन्य सामग्री भी दी जाएगी।

अबकी वासंतिक नवरात्र छह से 14 अप्रैल तक है। हालांकि प्रतिपदा तिथि का संचरण पांच अप्रैल को दिन में 1.36 बजे से आरंभ हुआ। तिथि छह अप्रैल को दिन में 2.58 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के कारण नवरात्र की प्रतिपदा छह अप्रैल को ही रहेगी। ज्योतिर्विदों के मुताबिक अभिजित मुहूर्त्त दिन में 11.30 बजे से 12.18 बजे तक है। सुबह 7.20 बजे से 8.53 के बीच कलश स्थापना का उत्तम योग है लेकिन कलश स्थापना सूर्योदय से लेकर दिन में 2.58  बजे तक की जा सकेगी। वहीं तेरह अप्रैल को महानवमी का व्रत रखा जाएगा और रामनवमी मनाई जाएगी।

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