शत्रु पराजय के लिए घरों से मंदिरों तक मां चंद्रघंटा की आराधना

Allahabad Bureauइलाहाबाद ब्यूरो Updated Sat, 28 Mar 2020 12:18 AM IST
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worshiping mother chandraghanta frome homes to temples for enemy defeat
worshiping mother chandraghanta frome homes to temples for enemy defeat - फोटो : CITY DESK

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चैत्र नवरात्रि की तृतीया को कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच शत्रु पराजय व सुख-समृद्धि के लिए मां दुर्गा की स्वरूप जगत प्रतिपालिका मां चंद्रघंटा देवी की घर-घर में उपासना की गई। मां की पंचोपचार विधि से पूजा केबाद आरती कर महामारी से बचने के लिए बच्चों ने जयकारे भी लगाए। उधर, मीरापुर स्थित शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी और मां ललिता देवी का शृंगार भी रंगे-बिरंगे फूलों से चंद्रघंटा स्वरूप में किया गया। इस दौरान कपाट पूरी तरह बंद रहे।
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नवरात्र के तीसरे दिन यानी तृतीया को मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। सूर्य देवता को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने घरों में अखंड ज्योति जाकर मां की आराधना आरंभ की। शुक्रवार को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए पिण्डजप्रवरारूढ़ाण्डकोपास्त्रकेर्युता/प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता...मंत्र से मां का ध्यान, पूजन किया गया। मां कल्याणी देवी के व्यवस्थापक पं श्याम जी पाठक ने बताया कि तृतीया को मां चंदघंटा के स्वरूप में देवी का शृंगार किया गया। मां के दरबार में कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए दुर्गासप्तशती के मंत्रों का संपुट पाठ किया गया। इसी तरह ललिता मंदिर के पुजारी पं शिव मूरत मिश्रा के आचार्यत्व में भोर में पांच बजे मां के तृतीय स्वरूप का रंग-बिरंगे फूलों से शृंगार किया गया। पुजारियों ने षोडशोपचार विधि से मां का पूजन कर महामारी के शमन के लिए आराधना की। इसी तरह मां अललोप शंकरी केदरबार में भी कोरोना वायरस के खात्मे के लिए विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
मां के घंटे की ध्वनि से होती है भय बाधा दूर
मान्यता है कि इस दिन मां चंद्रघंटा के पूजन से शत्रु पराजय में सफलता मिलती है। मांके घंटे की ध्वनि से अत्याचारी, अनाचारी कांप उठते हैं। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों में वीरता और निर्भीकता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार मां के शरीर का रंग सोने जैसा चमकीला है। 10 भुजाओं वाली मां चंद्रघंटा के हाथों में गदा के अलावा खड्ग और खप्पर तथा गले के गले में सफेद फूलों की माला शत्रु विनाश का प्रतीक है।
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