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26 जनवरी को लेकर अलर्ट, खंगाली गई ट्रेनें और बसें

 गणतंत्र दिवस के मद्देनजर रेलवे ने अलर्ट जारी कर दिया। 26 दिन के एक दिन पूर्व प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज रामबाग, प्रयागराज संगम, प्रयागराज छिवकी, प्रयाग जंक्शन आदि ट्रेनों में विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान संबंधित स्टेशनों पर आने वाली तमाम ट्रेनों की चेकिंग की गई। प्रयागराज जंक्शन पर डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई।

प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन पर प्रभारी निरीक्षक आरपीएफ राजेश कुमार के नेतृत्व में विभूति एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों की चेकिंग की गई। यहां जीआरपी के लल्लन यादव और आरपीएफ टीम ने संदिग्ध दिखने वाले लोगों से पूछताछ कर उनके सामान आदि की भी तलाशी ली।

लोगों को हेल्पलाइन नंबर 182 के बारे में भी जानकारी दी गई। इसी तरह जंक्शन पर भी ट्रेनों की जांच की गई। प्लेटफार्म के साथ सर्कुलेटिंग एरिया, यात्री प्रतीक्षालय आदि की भी जांच की गई।
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अनुमति नहीं फिर भी आज रैली निकालेगा किसान मंच

अनुमति नहीं होने के बावजूद गणतंत्र दिवस के दिन किसान आंदोलन एकजुटता मंच समेत अनेक संगठनों की ओर से मंगलवार को रैली की घोषणा की गई है। पाबंदी के बावजूद किसानों का ट्रैक्टर मार्च निकालने की भी योजना है।

वहीं प्रशासन की ओर से भी इन्हें रोकने की तैयारी की गई है। सोमवार को कई नेताओं को रोकने की बात भी कही जा रही है। ऐसे में टकराव की आशंका बन गई है।

तीन कृषि कानूनों के लिए विरोध में आंदोलनरत किसानों ने मंगलवार को ट्रैक्टर रैली निकालने की घोषणा की है। दिल्ली तथा सटे राज्यों के बार्डर पर निर्धारित मार्ग पर रैली की अनुमति भी है। इसके समर्थन में यहां भी अलग-अलग संगठनों ने रैली और मार्च की घोषणा की है लेकिन यहां इसकी अनुमति नहीं है।

किसान आंदोलन एकजुटता मंच के अविनाश मिश्रा का कहना है कि हाईकोर्ट स्थित डॉ.आंबेडकर चौराहा से चंद्रशेखर आजाद पार्क तक रैली निकाली जाएगी। ट्रैक्टर मार्च भी निकाले जाने की योजना है लेकिन प्रशासन ने कई ट्रैक्टर रोक लिए हैं। किसानों तथा नेताओं को भी पुलिस ने बुलाया है। इसके बावजूद ट्रैक्टर मार्च की निकालने की तैयारी है।

वहीं एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया का कहना है किसी तरह की रैली या मार्च की अनुमति नहीं दी गई है। किसान तथा अन्य संगठनों के आंदोलन की घोषणा को देखते हुए सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन और पुलिस के अफसरों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

ट्रैक्टर स्वामियों को पुलिस ने भेजा नोटिस

मंगलवार के आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने ट्रैक्टर स्वामियों को नोटिस भेजा है। एआईकेएमएस के अध्यक्ष राम कैलाश कुशवाहा ने बताया कि हरो तथा आसपास के गांवों में घर-घर जाकर किसानों को ट्रैक्टर मार्च में भाग न लेने का नोटिस दिया गया। किसान नेताओं ने इसकी तीखे स्वर में आलोचना की। रामकैलाश ने बताया कि मंगलवार को बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
 
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अगले तीन माह तक अनिवार्य किया जाए मास्क पहनना: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना की वैक्सीन भले ही आ गई मगर इसे सभी लोगों तक पहुंचने में अभी वक्त लगेगा। इसलिए अगले तीन महीनों तक मास्क पहनने के नियम में किसी प्रकार की ढील न दी जाए। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश में सौ फीसदी मास्क पहनना सुनिश्चित करें। कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों व रिहायशी इलाकों में वेंडिग जोन व नाइट मार्केट खोलने पर रोक लगा दी है। साथ ही पुलिस थानों के सामने सड़क पर खडे जब्त वाहनों को हटाने करने का निर्देश दिया है। 

कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों और प्रयागराज में यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने डीएम व एस एस पी प्रयागराज को माघ मेले में मास्क पहनकर आने व रहने की निगरानी बढ़ानने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि पीडीए द्वारा नगर निगम की जमीनों पर अवैध निर्माण हटाने के बाद दुबारा अतिक्रमण न होने पाए यह सुनिश्चित किया जाए। 

पोस्ट कोरोना मरीजों का रखें ध्यान

कोर्ट ने कहा कि वैक्सिनेशन में अभी समय लगेगा,ऐसे में ढिलाई न बरती जाए।कोर्ट ने एसआरएन अस्पताल के पोस्ट कोरोना वार्ड में वाई-फाई उपलब्ध कराने तथा मास्क पहनने पर जोनल अधिकारी का हलफनामा मांगा है। कहा है कि कोरोना मरीज ठीक होने के बाद इलाज के दौरान मास्क नहीं पहन रहे ।कोर्ट ने एंबुलेंस में आक्सीजन मशीन रखने को कहा है ताकि कोरोना मरीज को ठीक होने पर घर छोडते समय परेशानी न हो।

दूसरा चरण कब शुरू करेंगे जानकारी नहीं दी

कोर्ट ने कहा कि केन्द्र सरकार ने वैक्सिनेशन फेज 1फेज 2की जानकारी दी कि पहले चरण मे फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर व दूसरे चरण में 50 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी मगर यह नहीं बताया कि दूसरा चरण कब शुरू होगा। योजना जानकारी के साथ बेहतर  हलफनामा दाखिल किया जाए।

पार्किंग में ही खड़े हों वाहन

पीडीए ने कोर्ट को बताया कि छह व्यावसायिक संस्थानों की अंडर ग्राउंड पार्किंग बहाल की गई है। आठ नर्सिंग होम व अन्य संस्थानों में भी अंडर ग्राउंड पार्किंग बहाल की गई है।  कोर्ट ने चंदन शर्मा व शुभम् द्विवेदी कोर्ट कमिश्नर को इसका मुआयना कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है ।  कहा है कि ऐसे प्रतिष्ठानों के सामने पार्किंग न होने पाए,वाहन पार्किंग में खडे किए जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को पीडीए अधिकारियों को अतिक्रमण हटाते समय पुलिस संरक्षण दे। याचिका की सुनवाई पांच फरवरी को होगी।
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माघ मेले में 25 पॉजिटिव, दो सेक्टरों से नौ टेंट हटाए गए और 12 लोग क्वारंटीन

magh mela magh mela

जुलाई से महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे केंद्रीय और राज्यकर्मचारियों को लग सकता है झटका

69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा: पर्चा लीक प्रकरण में एसपी क्राइम को जांच का आदेश

 जिला न्यायालय ने प्राथमिक विद्यालय में 69000 सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती से संबंधित प्रकरण में पर्चा लीक होने व परीक्षा की प्रक्रिया में अनियमितता किए जाने के संबंध में मुकदमा दर्ज किए जाने की अर्जी पर सुनवाई के बाद एसपी क्राइम को जांच कर 10 फरवरी तक आख्या प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

यह आदेश स्पेशल सीजीएम प्रज्ञा सिंह ने वादी के अधिवक्ता मनीष खन्ना एवं संदीप मिश्रा को सुन कर दिया है। प्रकरण कर्नलगंज थाने का है। वादी आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की ओर से न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 156 (3 ) के तहत अर्जी प्रस्तुत कर राजू पटेल आदि के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट से संबंधित मुकदमा दर्ज करने की याचना की गई है । 

अर्जी में कहा गया है कि प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के पदों पर भर्ती से संबंधित प्रकरण में परीक्षा की प्रक्रिया में अनियमितता हुई थी। जिसका परिणाम आने पर और साफ हो गया था । वादी ने 28 मई 2020 को कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज करने की अर्जी दी थी। मुकदमा दर्ज न होने पर 10 जून 2020 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

अर्जी में कहा गया है कि छह जनवरी 2019 को परीक्षा विभिन्न जनपदों में आयोजित की गई थी। परीक्षा सही ढंग से संचालित नहीं की गई। परीक्षा होने के पूर्व ही पर्चा लीक हो गया था और सोशल मीडिया में प्रचारित हो गया था। परीक्षा में कई प्रकार की गड़बड़ी की गई थी।

जिसके संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं। कोर्ट से प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिए जाने की याचना की गई। न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई के बाद अपने आदेश में  कहा है कि इस मामले में एसपी क्राइम से जांच कराया जाना आवश्यक है। 
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एटीएम मशीन हैंग कर फर्जी एटीएम कार्ड बनाने वाले चार जालसाज गिरफ्त में

यमुनापार की औद्योगिक पुलिस ने सोमवार को एटीएम मशीन हैंग कर उसका डाटा चोरी कर दूसरा कार्ड तैयार कर लोगों को हजारों का चूना लगाने वाले गैंग के मुख्य आरोपी समेत चार को गिरफ्तार किया है। इनके ऊपर नैनी, औद्योगिक समेत कई थानों में सैकड़ों मामले दर्ज हैं।

गैंग के मुखिया पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। इसके साथ पुलिस ने उस पर पंद्रह हजार का इनाम भी घोषित कर रखा था। पकड़े गए बदमाशों के साथ कई एटीएम कार्ड, कार्ड रीडर समेत एक कार भी बरामद की गई है।

 करछना से औद्योगिक थाना जाने वाले रास्ते पर पकड़ा गया रवि पांडेय पुत्र महेंद्र प्रसाद पांडेय निवासी कौवा थाना करछना एटीएम कार्ड बदलकर लोगों से ठगी करने वाला गैंग का सरगना है। इस पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के साथ ही पंद्रह हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।

इस पर खुल्दाबाद, नैनी, कोरांव, घूरपुर और औद्योगिक क्षेत्र में कई मुकदमे दर्ज हैं। रवि के साथ ही उसके साथी परमेंद्र सिंह निवासी चौहान का पुरा, रामबाबू मिश्र निवासी मिर्जापुर तथा उमेश दुबे पुत्र रमाकांत दुबे निवासी मिर्जापुर को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन पर भी सोरांव, घूरपुर और औद्योगिक क्षेत्र में कई मुकदमे दर्ज हैं।

इंसपेक्टर बृजेश सिंह ने बताया कि पकड़े गए बदमाश एटीएम कार्ड रीडर के जरिये डाटा चोरी कर लोगों को हजारों का चूना लगाते थे। वे उसी एटीएम को अपना निशाना बनाते थे, जहां सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं रहते थे।

पकड़े गए जालसाजों के पास से कई एटीएम मशीन, कार्ड रीडर डाटा व ब्रेजा कार बरामद की गई है। पुलिस टीम में औद्योगिक क्षेत्र इंसपेक्टर बृजेश सिंह दरोगा मनोज कुमार, रवि कुमार कटियार, हेड कांस्टेबल धरणीधर राय, रामसूरत यादव, कांस्टेबल पंचदेव सिंह, सागर सिंह तथा बृजेश कुमार राय आदि शामिल थे।
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corona vaccination: तीसरे चरण में 13 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को लगेगा टीका

गिरफ्तार जालसाज
 स्वास्थ्य विभाग ने दो चरण के वैक्सीनेशन के बाद अब तीसरे चरण की तैयारी कर ली है। तीसरे चरण में तीन दिन टीका लगाया जाएगा। इन तीन दिनों में पहले दो दिन लगातार टीका लगाया जाएगा। इसमें 13 हजार स्वास्थ्य कर्मचारियों को पहली डोज लगाई जाएगी। तीसरे चरण में सरकारी और निजी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया जाएगा। टीका लगाने के लिए मुख्यालय से 26 हजार डोज आई है।

जिले में इसके पहले टीकाकरण का दो चरण का अभियान चलाया जा चुका है। दो चरण के लिए 32 हजार डोज आई हुई थी। इन दोनों चरणों में कॉल्विन, डफरिन, मेडिकल कॉलेज, कमला नेहरू चिकित्सालय सहित आधा दर्जन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण किया गया। इसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ भी शामिल रहा।

अब तीसरे चरण में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा ही निजी अस्पतालों के कर्मचारी भी शामिल होंगे। हालांकि, डोज के मुकाबले निजी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या इससे कहीं अधिक है। तीसरे चरण 13 हजार कर्मचारियों को कोविशील्ड लगाई जाएगी जबकि तकरीबन सरकारी और निजी चिकित्सालयों को मिलाकर यह संख्या 30 हजार से अधिक है।

वैक्सीनेशन के प्रभारी डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि तीन दिनों में 13 हजार स्वास्थ्य कर्मियों को डोज लगाई जाएगी। वैक्सीनेशन अभियान किन-किन अस्पतालों, नर्सिंग होमों में चलेगा यह एक-दो दिन में तय कर लिया जाएगा। जिन 13 हजार कर्मचारियों का तीसरे चरण में वैक्सीनेशन होगा, उनके लिए दूसरी डोज भी रखी जाएगी। 28 दिन बाद उन्हें दोबारा वैक्सीन लगा दी जाएगी। 

वैक्सीन रखने के लिए 10 और आईएलआर आई

 स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीन रखने के लिए 10 और आईएलआर मशीन यहां भेजी है। ये मशीनें यहां आ गई हैं और बेली के पास पहले से  बनाए गए केंद्रीय स्टोर सेंटर पर रख दी गईं हैं। 10 नई आईएलआर मशीन आने से कोरोना वैक्सीन रखने की क्षमता और अधिक बढ़ गई है।

पहले यहां तीन ही आईएलआर मशीन थी। अब इनकी कुल संख्या 13 हो गई है। डिप्टी सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि 10 आईएलआर मशीन को स्टोर में रख दिया गया है। अब शासन से जो भी वैक्सीन आएगी, उसे इसी में रखा जाएगा। 
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high court news: अदालत से सच्चाई छिपाने पर लगा तीन लाख रुपये हर्जाना

अदालत से सच्चाई छिपाकर गुमराह करने की कोशिश को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत की नूर हसन पर तीन लाख रुपये हर्जाना लगाया है। साथ ही चेतावनी दी है कि वह भविष्य में ऐसी गलती न करे।

याचिका पीलीभीत के चंदरपुरा की ग्राम प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार छीनने के खिलाफ दाखिल की गई थी। इसी मामले में हाईकोर्ट में दाखिल तीन याचिकाएं खारिज पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस बार दाखिल की गई याचिका में इस बात की जानकारी नहीं दी गई।

तथ्य छिपाकर फिर से याचिका दायर करने पर कोर्ट ने याची पर तीन लाख रुपये हर्जाना लगाते हुए याचिका खारिज कर दी है और एक माह में हर्जाना न जमा करने पर राजस्व वसूली प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने ग्राम प्रधान नूर हसन की याचिका पर दिया है। 

बार-बार याचिका दाखिल करने पर कोर्ट ने याची को तलब किया था। याची ने हाजिर होकर कहा वह पांचवीं तक पढ़ी है। कानून की जानकारी नहीं है। भविष्य में ऐसी गलती नहीं दुहराएगी। उसे माफ किया जाए। कोर्ट ने शर्तों के साथ गलती मानने को अवमानना माना और हर्जाने के साथ याचिका खारिज कर दी।
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high court news: इंटरमीडिएट के बाद किया गया डीएलएड प्रशिक्षण मान्य

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि इंटरमीडिएट के बाद किया गया डीएलएड प्रशिक्षण सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए मान्य है। कोर्ट ने ऐसी अर्हता रखने वाली सहायक अध्यापक को वेतन व एरियर के भुगतान का निर्देश दिया है। पूजा कुमारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र प्रथम ने दिया है। 

याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची 68500 सहायक अध्यापक के लिए चयनित हुई। चार सितंबर 2018 को उसे नियुक्ति पत्र दे दिया गया और उसने गोरखपुर में सहायक अध्यापक के पद पर ज्वाइन कर लिया।

मगर बीएसए गोरखपुर ने उसका वेतन इस आधार पर रोक दिया कि याची ने राजस्थान से इंटरमीडिएट के बाद दो वर्ष का डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जबकि स्नातक के बाद दो वर्ष का प्रशिक्षण होना चाहिए। बीएसए ने इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा को पत्र भेजा मगर उस पर कोई जवाब नहीं आया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 

अधिवक्ता का कहना था कि एनसीटी द्वारा जारी 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुसार सहायक अध्यापक के लिए इंटरमीडिएट में पचास प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण और दो वर्षीय प्रशिक्षण चाहे वह किसी भी नाम से जाए आवश्यक है। याची ने डीएलएड के बाद स्नातक किया है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची को वेतन व एरियर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
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high court: प्रमुख सचिव सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रशासक नियुक्त

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश देने से इंकार करते हुए अपर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ के 30 सितम्बर 20 के आदेश को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने प्रमुख सचिव को प्रशासक नियुक्त कर 28 फरवरी तक बोर्ड का चुनाव कराकर चार्ज सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 30 सितंबर का आदेश रद्द होने से इस दौरान लिए गए फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले वैध माने जाएंगे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने नसीमुद्दीन व अन्य की याचिका पर दिया है। 

याची का कहना था कि बोर्ड का चुनाव पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के पहले करा लिया जाना चाहिए। एक अप्रैल 20 को कार्यकाल समाप्त हो गया। कोविड 19 के कारण छह माह के लिए कार्यकाल बढाया गया। इसके बाद भी चुनाव न कराकर कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।

ऐसा करने का राज्य सरकार को अधिकार नहीं है। छह सौ से कम वोटर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये चुनाव कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने की अधिकारिता नहीं है।

ऐसी आपात आवश्यकता नहीं थी, जिससे कार्यकाल बढ़ाना अपरिहार्य था। सरकार का कहना था कि कोविड संक्रमण के चलते डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने जिसे नहीं माना और चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
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high court news: नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को दुबारा नौकरी देने पर विचार करने का निर्देश

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपनिरीक्षक पद पर चयन हो जाने के कारण बिजली विभाग की नौकरी छोड़ने वाले तीन कर्मचारियों को दुबारा बिजली विभाग में नौकरी देने पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

सात याचीगण ने सहायक ग्रेड तीन पद से इस्तीफा देने के बाद पुनर्वापसी की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने इनकी मांग पर नियुक्ति अधिकारी को दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। 

पुलिस उपनिरीक्षक पर पर नियुक्ति के बाद बिजली विभाग के इन सात कर्मचारियों के इस्तीफा देने के बाद प्रशिक्षण पर भेजा गया था। किंतु हाईकोर्ट ने उपनिरीक्षक पद की भर्ती पर रोक लगा दी। इसके बाद याचियों ने बिजली विभाग के छोड़े गए पद पर बहाली की मांग में हाईकोर्ट की शरण ली है।

कोर्ट ने याचियों की मांग के गुणदोष पर कोई विचार न व्यक्त करते हुए बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता को विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अखिलेश यादव व 6 अन्य की याचिका पर दिया है। 

 याचीगण राज्य विद्युत सेवा चयन आयोग से चयनित होकर बिजली विभाग में सहायक ग्रेड तीन पद पर नियुक्त हुए। एक साल बाद इनका पुलिस उपनिरीक्षक पद पर चयन हो गया। प्रशिक्षण पर भेजने से पहले बिजली विभाग से इस्तीफा देना पड़ा।

जब पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती अधर में लटक गई तो मूल विभाग में वापसी की मांग की। बिजली विभाग का कहना था कि इनका इस्तीफा स्वीकार हो चुका है। इसलिए इन्हें बहाल नहीं किया जा सकता। इसपर कोर्ट ने याचियों की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है।
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