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पप्पू गंजिया को हाईकोर्ट से राहत : दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक

हाईकोर्ट ने माफिया पप्पू गंजिया को राहत देते हुए उसके दो मकानों के ध्वस्तीकरण पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। पप्पू की पत्नी  नगीना बेगम की याचिका पर कोर्ट ने जहांगीराबाद गंजिया प्रयागराज व चक दोंदी, नैनी, प्रयागराज स्थित भवनों के ध्वस्तीकरण के मामले में पीडीए उपाध्यक्ष को तीन सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अगले चार सप्ताह तक के लिए कोर्ट ने पीडीए को किसी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई  करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने याची को एक सप्ताह में ध्वस्तीकरण के खिलाफ अपना प्रत्यावेदन पीडीए के उपाध्यक्ष को देने तथा उपाध्यक्ष को उस पर सुनवाई कर तीन सप्ताह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने दशहरे की छुट्टी के दौरान दिया है।

याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना था कि अधिकारी लगातार मकान ध्वस्त करने की धमकी दे रहे हैं। याची को उसका पक्ष रखने का मौका दिए बिना मनमानी तरीके से कार्रवाई की जा रही है, जिस पर कोर्ट ने चार सप्ताह की राहत दी है। इससे पूर्व जिला प्रशासन और पीडीए द्वारा पप्पू गंजिया का अवैध रूप से निर्मित गेस्ट हाउस ध्वस्त कर दिया था तथा उसके अन्य मकान के भी ध्वस्तीकरण की तैयारी थी।
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डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य पद की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप से इनकार 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्तूबर को होने जा रही डिग्री कॉलेजों में प्राचार्यों की भर्ती परीक्षा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और राज्य सरकार व आयोग से याचिका पर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई चार सप्ताह के बाद होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने डॉ. अनुपम सोनी की याचिका पर दिया है।

याचिका पर आयोग के अधिवक्ता बीएन सिंह ने प्रतिवाद किया। इनका कहना था कि याची को आवेदन भरने का मौका दिया गया, किंतु उसने आवेदन ही नहीं किया है। याची का कहना है कि उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग ने दो मार्च 19 को प्राचार्य पद भरने का विज्ञापन 49  निकाला। उसने गलती से विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन कर दिया था। 18 अप्रैल 19 को स्पष्टीकरण प्रकाशित किया गया, जिसमें आवेदन की शर्तों को स्पष्ट किया गया है और कहा गया कि विज्ञापन संख्या 48 के अभ्यर्थियों को विज्ञापन संख्या 49 में नए सिरे से आवेदन करना होगा।

विज्ञापन संख्या 48 समाप्त कर नया विज्ञापन जारी किया गया है। याची अपरिहार्य कारणों से आवेदन जमा नहीं कर सका। उसने विज्ञापन संख्या 48 में आवेदन किया था। उसे 29 अक्तूबर की परीक्षा में बैठने दिया जाय।

कोर्ट ने कहा कि याची यह आधार नहीं ले रहा कि उसे आयोग द्वारा जारी स्पष्टीकरण की जानकारी नहीं हुई। उसने जानते हुए नया आवेदन नहीं दिया कि अब विज्ञापन संख्या 48 की जगह 49 में आवेदन करना है। ऐसे में अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार व आयोग से जवाब तलब किया है। याचिका की सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
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अधिकतम नीलामी बोली स्वीकार करने को बाध्य नहीं प्राधिकारी : हाईकोर्ट 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी टेंडर के तहत नीलामी में अधिकतम बोली स्वीकार करने के लिए प्राधिकारी बाध्य नहीं है। यहां तक कि यदि उचित कारण हो तो कम बोली की नीलामी भी स्वीकार की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि  किसी को सबसे अधिक बोली लगाने पर उसे स्वीकार किए जाने का विधिक अधिकार नहीं मिल जाता। बोली नीलामी शर्तों के अधीन होती है। अधिकारी मानने के लिए बाध्य नहीं है। पर्याप्त कारण होने पर नए सिरे से टेंडर जारी करने के लिए स्वतंत्र हैं। 

कोर्ट ने उच्चतम बोली के आधार पर टेंडर मंजूर करने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आगरा के बब्लू की याचिका पर दिया है। याची ने कृषि उत्पादन मंडी समिति, बरौली आगरा ने मंडी स्थल पर बनी 43 दुकानों का नीलामी से आवंटन के लिए टेंडर जारी किया था। इसमें से सात दुकानें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं।

आरक्षित दुकानों के लिए याची की कंपनी मेसर्स के जी एन ट्रेडिंग कंपनी सहित पांच लोगों ने ही टेंडर भरा। याची ने नीलामी में सर्वाधिक 16 लाख 15 हजार रुपये की बोली लगाई। आवंटन समिति ने इस आधार पर मानने से इनकार कर दिया कि सामान्य व ओबीसी के लिए आरक्षित दुकानों की तुलना में एससी वर्ग की दुकानों की काफी कम बोली लगी है।

नीलामी में कम आवेदकों के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं दिखाई दी। लिहाजा समिति ने याची की बोली स्वीकार करने और दुकान आवंटन से मना कर दिया। समिति के सचिव ने नए सिरे से टेंडर जारी करने का निर्देश दिया है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि उच्चतम बोली स्वीकार करने या न करने करने को लेकर अदालतों के कई फैसले हैं और सब में यही कहा गया है कि प्राधिकारी सबसे ऊंची बोली स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं हैं। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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Prayagraj magh mela 2021: संगम की रेती पर माघ मेला बसाने को शासन की मंजूरी

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वस्त्रोद्योग इकाइयों में 8000 करोड़ निवेश से 1.5 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

प्रदेश के वस्त्रोद्योग सेक्टर ने इन्वेस्टर्स समिट के एमओयू से जुड़ी 55 प्रतिशत से अधिक इकाइयों का क्रियान्वयन करने में सफलता हासिल की है। इनमें करीब 8000 करोड़ रुपये निवेश होगा और डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिल सकेगा। इसका लाभ प्रयागराज को भी मिलेगा। एमएसएमई एवं स्टार्टअप फोरम उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित ऑनलाइन सम्मेलन की प्रयागराज से अध्यक्षता करते हुए यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इसके साथ ही प्रदेश में जल्द ही हाईटेक बसों का संचालन होगा। अमेरिकी नागरिक ने 500 हाईटेक बसों को चलाने का प्रस्ताव भी भेज दिया है। जल्द ही इस पर निर्णय होगा। 

सम्मेलन में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने 35 देश के करीब 150 अप्रवासी भारतीयों को उत्तर प्रदेश में निवेश का न्योता दिया। इसी क्रम में अमेरिकी नागरिक ने प्रदेश में 500 बसों के संचालन में 250 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव भेजा। लखनऊ से जाकर कनाड़ा में बसे प्रशांत पाठक ने कृषि क्षेत्र में 300 करोड़ रुपये के निवेश की बात कही।

नाइजीरिया में रहने वाले देवरिया के देवेश मिश्रा ने एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत निर्यात की बात कही। गोरखपुर से न्यूयार्क जाकर बसने वाले केसी मिश्रा ने फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव रखा। वहीं रविंद्र कुलकर्णी ने बताया कि जर्मनी के कई उद्यमी प्रदेश में निवेश के इच्छुक हैं। उन्होंने नियमों के बारे में जानकारी चाही। इस पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने मेल से निवेशकों के लिए शुरू की गई्र योजनाओं की जानकारी भेजने की बात कही। इनके अलावा कई अन्य अप्रवासी भारतीयों ने भी प्रदेश में निवेश की इच्छा जताई। सिद्धार्थनाथ सिंह ने अप्रवासी भारतीयों को बताया कि प्रदेश में निवेश की हर बाधा दूर कर ली गई है। 72 घंटे में प्रस्ताव स्वीकृत किए जा रहे हैं। 

मंत्री ने बताया कि इन्वेस्टर्स समिट में 66 वस्त्रोद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए एमओयू हुआ था। इनमें से 39 इकाइयों का विभिन्न स्तर पर कार्य चल रहा है। इनमें से 11 इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। इन पर 641 करोड़ रुपये निवेश हुआ है और 2835 लोगों को रोजगार मिला है। 27 एमओयू से जुड़े निवेशक निष्क्रिय हैं। इन्हें क्रियान्वयन से बाहर मान लिया गया है।

मंत्री ने बताया कि 11 अन्य इकाइयों को जमीन उपलब्ध करा दी गई है। इनका काम जल्द शुरू होगा। इन पर 1413 करोड़ रुपये निवेश होगा और करीब 5000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अगले सप्ताह अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अन्य 5 इकाइयों को जमीन आवंटन पर निर्णय हो जाएगा। इन इकाइयों से करीब 36 करोड़ रुपये निवेश और 670 लोगों को रोजगार मिलेगा। उत्तर प्रदेश डिजाइन संस्थान की अध्यक्ष क्षिप्रा शुक्ला ने स्वागत तथा एमएसएमई एंड स्टार्टअप फोरम के संस्थापक अध्यक्ष मनोज शाह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव आलोक कुमार, नवनीत सहगल आदि शामिल हुए।

महिला सुरक्षा पर लांच हुआ एप

कार्यक्रम में महिला एवं बाल सुरक्षा को समर्पित वीजीएम एप का लोकार्पण हुआ। आईआईटी बीएचयू की स्टार्टअप कंपनी ने यह एप तैयार किया है। मृत्युंजय सिंह ने एप के बारे में जानकारी दी।
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नौवीं के छात्र को कार में खींचकर किया अगवा, घंटे भर में पुलिस ने किया बरामद

थाना क्षेत्र के गणेश मार्केट में नौवीं के छात्र प्रिंस अनितेश को कारसवार तीन लोग अगवा कर ले गए। दिनदहाड़े हुई वारदात से हड़कंप मच गया। सूचना पर सक्रिय हुई पुलिस ने घंटे भर बाद दो अपहर्ताओं को गिरफ्तार कर अगवा छात्र को सकुशल बरामद कर लिया। जांच में पता चला कि पीड़ित छात्र अपने स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा से बातचीत करता था और इसी को लेकर आरोपी उससे नाराज थे।

आवास विकास योजना कॉलोनी दो में रहने वाले होम्योपैथी चिकित्सक संतोष यादव का 15 वर्षीय बेटा प्रिंस अनितेश नौवीं का छात्र है। बृहस्पतिवार सुबह 10.30 बजे केकरीब वह गणेश मार्केट में स्थित मिठाई की दुकान पर गया था। आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ यादव अपने दो साथियों जीतेंद्र यादव व अभिषेक यादव तीनों निवासी झूंसी के साथ आया और प्रिंस को कार में खींचकर अगवा कर ले गए।

दिनदहाड़े हुई वारदात से हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। जांच पड़ताल के बाद चौतरफा बैरिकेडिंग कराकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। करीब घंटे भर की मशक्कत के बाद एसआई मनोज यादव व उनकी टीम ने सरायतकी झूंसी स्थित इंटर कॉलेज के पीछे स्थित सुनसान स्थान पर पहुंचकर अगवा छात्र को बरामद करते हुए दो आरोपियों ऋषभ व जीतेंद्र को गिरफ्तार किया। जबकि उनका साथी अभिषेक मौके से भाग निकला।

पुलिस के मुताबिक, थाने लाकर पूछताछ में पता चला कि पीड़ित छात्र की अपने स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा से बातचीत होती थी जिसके लिए आरोपी उसे मना करते थे। इसी खुन्नस में उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। एसपी गंगापार धवल जायसवाल ने बताया कि दो आरोपियों को गिररफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एक की तलाश की जा रही है। घटना में प्रयुक्त कार भी बरामद कर ली गई है।

एलएलबी का छात्र है आरोपी

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला कि मुख्य आरोपी ऋषभ सहसों स्थित कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है। जबकि वारदात में साथ देने वाले उसके दोनों साथी भी छात्र हैं। ऋषभ झूंसी में ही रहने वाले एक मिठाई कारोबारी का भतीजा भी है और पिता की मौत के बाद दुकान पर रहकर ही चाचा का सहयोग करता है। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ विवाह के लिए किया गया धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ विवाह करने के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं है, क्योंकि ऐसा धर्म परिवर्तन किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया जाता है। धर्म परिवर्तन के बाद विवाह करने वाले जोड़े द्वारा संरक्षण देने की मांग में दाखिल याचिका खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया है।

प्रियांशी उर्फ सबरीन और उसके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि उन्होंने स्वेच्छा से विवाह किया है, मगर लड़की के पिता इससे खुश नहीं हैं। दंपती ने कोर्ट से अपने वैवाहिक जीवन में किसी के द्वारा हस्तक्षेप न करने और पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश देने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले को देखने से स्पष्ट है कि लड़की जन्म से मुस्लिम है और उसने 29 जून 2020 को धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म स्वीकार किया और 31 जुलाई को उन्होंने हिंदू रीति से शादी कर ली। इससे स्पष्ट है कि धर्म परिवर्तन सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से किया गया है।

नूर जहां बेगम केस की दी नजीर
कोर्ट ने 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के नूरजहां बेगम केस की नजीर देते हुए कहा कि, इसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। नूरजहां बेगम केस में कई याचिकाओं में एक ही प्रश्न था कि क्या सिर्फ विवाह करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन मान्य है, जबकि धर्म बदलने वाले को स्वीकार किए गए धर्म के बारे में न तो जानकारी थी और न ही उसमें आस्था और विश्वास ।

सभी याचिकाओं में एक ही मुद्दा था कि लड़कियों ने मुस्लिम लड़के के कहने पर इस्लाम स्वीकार किया था, जबकि उनको न आस्था और विश्वास था और न ही इस धर्म के बारे में कोई जानकारी थी। कोर्ट ने कहा कि यह पवित्र कुरान के शूरा दो आयत 221 के निर्देशों के विपरीत है। अदालत ने इसे कुरान की शिक्षाओं के मद्देनजर स्वीकार्य नहीं माना है। सुप्रीमकोर्ट ने भी लिली थॉमस केस में कहा है कि इस्लाम में सच्ची आस्था के बिना सिर्फ विवाह के लिए किया गया धर्म परिवर्तन मान्य नहीं है।
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Prayagraj News: बसपा में बगावत से सपा में उत्साह लेकिन दिग्गजों के असंतोष को दबाना होगी चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट
विधानसभा चुनाव से पहले प्रतापपुर के विधायक मुजतबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद की बगावत को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। सपा नेताओं का मानना है कि अगर दोनों नेता पार्टी का दामन थाम लेते हैं तो इसका सीधा लाभ चुनाव में मिलेगा। मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ बिंद वोटों के सपा में जाने से दोनों सीटें सपा के खाते में ही आएंगी। इसके साथ जिले की अन्य सीटों पर भी यह फॉर्मूला काम करेगा। क्योंकि जिले की अन्य विस सीटों पर भी मुस्लिम और बिंद वोटों का खासा दखल है। हालांकि ऐसा होने पर पार्टी के सामने हंडिया और प्रतापपुर में दिग्गज नेताओं के असंतोष का सामना करने की चुनौती भी होगी। 

बसपा के बागी दोनों विधायकों के सपा में आने के आसार के साथ ही पार्टी में असंतोष की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है। हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस मामले में अभी कुछ बोलने से बच रहे हैं। प्रतापपुर सीट से जोखू लाल यादव और विजमा यादव विधायक रह चुकी हैं। ये दोनों दिग्गज नेता अब भी प्रबल दावेदार हैं। वहीं हंडिया में सपा से टिकट के लिए मजबूत दावेदारों की लंबी सूची है।

पिछले चुनाव में पार्टी टिकट से भाग्य आजमा चुकीं निधि यादव और प्रशांत सिंह तो दावेदार हैं ही, निधि यादव के पिता बासुदेव यादव के भी वहां से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। बासुदेव यादव का एमएलसी का कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म हो रहा है। इसके अलावा यदि प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो उनके मंत्री बनने की भी प्रबल संभावना है। ऐसे में 2022 में उनके हंडिया से चुनाव लड़ने की चर्चा अभी से शुरू हो गई है। इसके अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति यादव, पूर्व अपर महाधिवक्ता कमल सिंह यादव भी हंडिया से दावेदार हैं।

इसके विपरीत मुजतबा सिद्दीकी और हाकिम लाल बिंद के तेवर से साफ है कि टिकट के साथ उचित सम्मान मिलने की शर्त पर ही वे सपा में शामिल होंगे। ऐसे में इन दोनों नेताओं के सपा में आने से शीर्ष नेतृत्व के सामने विरोध को दबाने की चुनौती होगी। जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव का कहना है कि बसपा से दोनों विधायकों के आने का सभी स्वागत कर रहे हैं। किसे कहां भेजा जाएगा यह पार्टी हाईकमान तय करेगा।

सपा को भरोसा, मजबूत होगा बिंद-मुस्लिम गठजोड़

मुस्लिम सपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है। नेताओं का कहना है कि प्रतापपुर के विधायक मुजतबा सिद्दीकी के आने से मुस्लिमों के साथ यह जुड़ाव और मजबूत होगा। मतों की गणित को देखें तो प्रतापपुर के अलावा शहर दक्षिणी, शहर पश्चिमी, फूलपुर में मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक संख्या है। इसके अलावा जिले की अन्य सीट पर भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 20 से 35 हजार तक है। वहीं तीन बार के विधायक मुजतबा सिद्दीकी की इनके बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है। सपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जिले में फिलहाल उनसे बड़ा कोई मुस्लिम नेता नहीं है।

वहीं, हाकिम लाल को बिंद समाज का नेता माना जाता है। वोट बैंक के लिहाज से देखें तो अकेले हंडिया में करीब एक लाख बिंद मतदाता हैं। यही वजह है कि हंडिया विधानसभा के अलावा भदोही लोकसभा सीट पर भी बिंद मतदाताओं की निर्णायक भूमिका होती है। इसके अलावा नवाबगंज, सोरांव को छोड़ दें तो अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इनकी संख्या आठ से 12 हजार के बीच है। ऐसे में इन दोनों विधायकों को पार्टी से जुड़ने को लेकर जिलाध्यक्ष योगेश चंद्र यादव काफी उत्साहित दिखाई दिए। उनका कहना है कि हाकिम लाल के पार्टी से जुड़ने से बिंद समाज का भरोसा बढ़ेगा, जिससे पार्टी और मजबूत होगी। 
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कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हटाए जा सकते नगर पंचायत अध्यक्ष : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी निर्वाचित व्यक्ति को पद से हटाने  की प्रक्रिया कानून में निर्धारित की गई है। इसका पालन करके ही उसे पद से हटाया जा सकता है। कोर्ट ने रामपुर के मसवासी नगर पंचायत के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग में दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है । कोर्ट ने कहा है कि जनता की ओर से चुने हुए किसी भी प्रतिनिधि को पद से हटाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए पंचायत सदस्य याची को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति डा.वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने नगर पंचायत सदस्य महेश चंद्र भारद्वाज की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने ठेकों के आवंटन एवं विकास कार्यो में भारी वित्तीय अनियमितता की है, जिसकी जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसके बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। घोटाले रोकने के लिए उन्हें पद से हटाया जाए।

सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि नगर पालिका अधिनियम की धारा 48 में चुने हुए पंचायत अध्यक्ष को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गई है। ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है, खारिज की जाए।

कोर्ट ने संविधान के 74वें संशोधन से स्थानीय चुनी हुई जनतांत्रिक सरकार के उपबंधों एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की मंशा निचले स्तर पर जनतंत्र को लागू करने की है। संविधान संशोधन से लोकल सेल्फ गवर्नमेंट की परिकल्पना को साकार करने का सिस्टम बनाया गया है। पंचायत राज को सांविधानिक दर्जा दिया गया है। चुने हुए प्रतिनिधि को पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया दी गयी है। ऐसे में कानून के तहत ही किसी को पद से हटाया जा सकता है। प्रशासनिक आदेश से नहीं। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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विधायक विजय मिश्रा को फिलहाल राहत, मिला पक्ष रखने का मौका

विधायक विजय मिश्रा को बाघंबरी गद्दी स्थित भवन के ध्वस्तीकरण मामले में फिलहाल राहत मिल गई है। बुधवार को सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण का प्रकरण वापस प्रयागराज विकास प्राधिकरण को भेजा और अपीलकर्ता का पक्ष सुनकर नए सिरे से निर्णय पारित करने का आदेश दिया। अपीलकर्ता को पक्ष रखने के लिए दो नवंबर तक का समय दिया।

पांच मजिला इस भवन के भूतल पर दुकानें हैं तथा ऊपर के चार मंजिल में फ्लैट हैं। नक्शा स्वीकृति नहीं होने के आधार पर इलाहाबाद (प्रयागराज) विकास प्राधिकरण ने 2007 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। अब गैंगस्टर ऐक्ट के तहत माफियाओं की संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में विजय मिश्रा की इस संपत्ति के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस मामले में दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय ने अपीलीय प्राधिकारी के यहां अपील करने का आदेश दिया था।

इसी परिप्रेक्ष्य में अपीलकर्ता ने मंडलायुक्त के यहां अपील की। बुधवार को दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद मंडलायुक्त ने अपीलकर्ता को दो नवंबर तक पीडीए के जोनल अधिकारी के सामने पक्ष रखने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया है कि अपीलकर्ता को पूर्व में निर्गत नोटिस तामील कराने में निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया गया। इसके अलावा 2007 यानी, अब 13 वर्ष बाद कार्रवाई के आदेश को अमल में लाया जा रहा है। उन्होंने आदेश दिया कि अब पूरा प्रकरण अपीलकर्ता के संज्ञान में है।

इसलिए अपीलकर्ता दो नवंबर तक जोनल अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित हों। जोनल अधिकारी को भी सुनवाई के बाद छह नवंबर तक संशोधित निर्णय पारित करने का आदेश दिया। मंडलायुक्त ने आदेश दिया कि कि अपीलकर्ता यदि दो नवंबर तक अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं होती हैं तो जोनल अधिकारी दिसंबर 2007 में पारित आदेश के क्रम में कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे।
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टाइनी शाखा संचालक की गला रेतकर हत्या, एक दिन पहले से था गायब

थाना क्षेत्र के लालतारा गांव में टाइनी शाखा संचालक श्रीकांत पटेल 26 की गला रेतकर हत्या कर दी गई। वह बुधवार शाम से लापता था जिस पर परिजनों ने गुमशुदगी भी दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप है कि हत्यारे मृतक के पास मौजूद 1.5 लाख रुपये, मोबाइल व बाइक भी लूट ले गए। पुलिस ने बताया कि जांच पड़ताल की जा रही है।

श्रीकांत मेजा व खीरी थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित  सिलौधी गांव में रहने वाले अवध नारायण पटेल के दो बेटों में छोटा था। वह कोहड़ार बाजार में टाइनी शाखा का संचालन करता था। वह रोज बाइक से शाखा पर आता था और शाम को लौट जाता था। बुधवार रात नौ बजे तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। कोहड़ार बाजार के कुछ परिचितों ने बताया कि वह शाम 7.30 बजे केकरीब शाखा बंद कर चला गया था। रात भर खोजबीन के बाद भी कुछ पता नहीं चला तो परिजनों ने सुबह थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई।

पुलिस तलाश में जुटी थी कि दोपहर बाद एनटीपीसी के बगल स्थित नहर के पास झाड़ियों में युवक की रक्तरंजित लाश मिली। जानकारी पर आसपास केलोग भी जुट गए और इसी दौरान किसी ने मृतक की शिनाख्त श्रीकांत केरूप में की। तब तक पुलिस भी आ गई। जांच में पता चला कि गला रेतकर उसकी हत्या की गई थी। जानकारी मिली तो परिजन भी आ गए। भाई इंद्रजीत ने बताया कि श्रीकांत ने सुबह ही उससे 1.5 लाख रुपये लिए थे। मौके से उसका मोबाइल व बाइक भी गायब है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल परिवार के लोगों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है।

शाम को हुई थी बात, फिर बंद हो गया मोबाइल

मृतक केपरिजनों ने बताया कि श्रीकांत से उनकी आखिरी बार शाम छह बजे केकरीब बात हुई थी। भाई इंद्रजीत ने बताया कि फोन कर उसने बताया था कि एक घंटे में घर आ जाएगा। आठ बजे तक नहींआया तो लगा कि कहीं रुक गया होगा। नौ बज गए तो खोजबीन शुरू की गई। बताया कि मृतक की दो साल पहले अंजू देवी से शादी हुई थी। पति की मौत पर उसकेआंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उधर मां फुलवंती व अन्य परिजनों का भी बुरा हाल था। 

मौकेसे मिली शराब की खाली बोतलें, दो संदिग्धों की तलाश

युवक केशव से कुछ दूरी पर शराब की खाली बोतलें मिलीं हैं। उधर जांच पड़ताल में यह भी सामने आया है कि वह कोहड़ार बाजार स्थित टाइनी शाखा से दो युवकों संग बाइक पर जाता दिखा था। हालांकि युवक कौन थे, इसका पता नहीं चल सका है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल परिजनों ने किसी रंजिश केबाबत इंकार किया है, ऐसे में अज्ञात में केस लिखकर जांच की जा रही है। 
  • दो संदिग्ध युवकों की तलाश की जा रही है। मृतक के पास मौजूद रुपये कहां गए, इसका पता लगाने के लिए उसकेबैंक खाते का विवरण मंगाया जा रहा है। बाइक व मोबाइल का भी पता लगाया जा रहा है। - चक्रेश मिश्रा, एसपी यमुनापार 

पोते ने की थी बुजुर्ग की हत्या, गिरफ्तार

मांडा केभरारी गांव में 72 वर्षीय शोभनाथा यादव की हत्या का बृहस्पतिवार को खुलासा हो गया। पुलिस का दावा है कि वारदात को मृतक केपोते ने ही अंजाम दिया था जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शोभनाथ की हत्या नौ सितंबर को रात में सोते समय की गई थी। अफसरों ने बताया कि शक के आधार पर मृतक के पोते नीरज यादव पुत्र रविशंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल ली।

बताया कि वारदात से एक दिन पहले यानी आठ सितंबर को दादा ने उसे खाद लाने केलिए रुपये दिए थे। लेकिन वह खाद लाना भूल गया। यह पता चलने पर दादा ने उसे गालियां देते हुए जमकर पीट दिया। इसी बात पर आपा खोते हुए उसने धक्का मारकर दादा को गिरा दिया जिससे वह चोटिल हो गए। इसकेबाद चक्की का एक पल्ला पैर व दूसरा पल्ला सीने पर रखकर उन्हें मार दिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 
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बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हाकिमलाल के बहाने सपा ने साधे कई तीर, चुनाव से पहले दिखाई ताकत

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधायकों के बगावती तेवर को सपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस बहाने पार्टी ने कई सियासी समीकरणों को साधा है। पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के साथ पार्टी ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के खिलाफ सपा ही मुख्य विपक्षी दल है। हालांकि विधायकों ने बसपा से बगावत की बात तो स्वीकार की है, लेकिन वह किस तरफ जाएंगे इसे लेकर अभी उन्होंने मौन साध रखा है। उनकी इस चुप्पी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात को नकाराने को विधायकी बचाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सभी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सपा के साथ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक दिख रही है। सभी विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत होने की होड़ है, ताकि मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके। इस कवायद के बीच प्रतापपुर के बसपा विधायक मुज्तबा सिद्दीकी और हंडिया के हाकिम लाल बिंद समेत पांच विधायकों की बगावत सपा के लिए लाभकारी मानी जा रही है। प्रयागराज की सियासी समीकरण को देखें तो सपा के पूरे मंडल में एक मात्र विधायक उज्जवल रमण सिंह है। ऐसे में हाकिम लाल और मुज्तबा सिद्दीकी की बसपा से नाराजगी पर सपा नेताओं की नजर रही। ये दोनों नेता पार्टी में लंबे समय से खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव में इन पर बसपा उम्मीदवार के खिलाफ जाने का भी आरोप लगा था। मौजूदा विधायक होने के बावजूद इनके टिकट कटने की बात भी सामने आने लगी थी। इसके अलावा सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती हाथरस समेत कई मुद्दों पर उस तरह से मुखर होकर सामने नहीं आईं, जोकि उनकी पहचान है।

ऐसे में बसपा विधायकों ने दूसरे दलों में संपर्क साधना शुरू कर दिया। इस नाराजगी को बगावती रूप देने के लिए सपा हाईकमान ने कभी बसपा में रहे अपने वरिष्ठ नेता को आगे किया। बताया जा रहा है कि उन्हीं सपा नेता की अगुवाई में बगावत की पूरी पटकथा लिखी गई और दोनों विधायकों की अखिलेश यादव से मुलाकात भी कराई गई। हालांकि राज्यसभा के लिए सपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद बसपा समेत अन्य सभी दावेदारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में बसपा विधायकों के इस बगावत का सपा को तात्कालिक तौर तो बड़ा फायदा होने नहीं जा रहा लेकिन 2022 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर इसे बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

जिले की सियासत को देखें तो खासतौर पर, पिछड़ी जाति बहुल वाले हंडिया और प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र में सपा का मजबूत आधार रहा है। ऐसे में इन दोनों विधायकों के आने से सपा को अपने परंपरागत मतों के ध्रुवीकरण में मदद मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बसपा से बगावत करने वाले दोनों नेताओं की विधानसभा सदस्यता बची रहती है तो सपा जिले में तीन मौजूदा विधायकों के साथ आगामी चुनाव में उतरेगी। वहीं अन्य विपक्षी दलों के खाते में एक भी विधायक नहीं होगा। इसका भी सपा को फायदा हो सकता है। ऐसे में बसपा विधायकों के बगावत को सपा के लिए उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
  • ‘बहनजी (मायावती)  आज भी हमारी नेता हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है। हमारी नाराजगी पार्टी कोऑर्डिनेटर से है। पार्टी में हमारी उपेक्षा की जा रही है। बैठकों में हमें नहीं बुलाया जाता है। बैठक में पहुंच भी गए तो पीछे की सीट पर बैठाया गया। बहनजी से मिलने की कोशिश की गई लेकिन उनसे भी नहीं मिलने दिया गया। उनसे मिलकर अपनी बात रख लेते तो हमारा दर्द कुछ कम हो जाता। इसके अलावा हम विधायक हैं। इसके बाद भी दूसरे प्रत्याशी की तलाश की जा रही है। दूसरे दल में जाने का हमलोगों का कोई इरादा नहीं है। हम बसपा में हैं और रहेंगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की बात भी झूठी है। यदि पार्टी हमारे के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो हम 2021 तक देखेंगे और हमें लगेगा कि बसपा से टिकट नहीं मिलेगा तो दूसरी राह पकड़ने के बारे में भी विचार करेंगे।’ - हाकिम लाल बिंद, विधायक
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पूर्व सांसद अतीक अहमम के करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू 

अतीक अहमद के 11 खाते सीज करने के बाद अब उसके करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू हो गई है। इतना ही नहीं अतीक गिरोह के खास शूटरों और गुर्गों के बैंक लोन का बैंकों से हिसाब किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि अतीक के परिजनों तथा अन्य करीबियों ने उसके रसूख का इस्तेमाल करते हुए संपत्ति अर्जित की है। ऐसे खातों को गैंगस्टर एक्ट के तहत सीज किया जा सकता है। पुलिस जल्द ही अतीक के परिजनों तथा अन्य गुर्गों के खातों को सीज कर सकती है। 

अतीक अहमद के अलग-अलग बैंकों में 11 खाते थे जिसमें तकरीबन एक करोड़ से ज्यादा की रकम थी। सभी खातों को सीज कर उन्हें कुर्क कर दिया गया। अब पुलिस अतीक की पत्नी, बच्चों, भाई और अन्य करीबी रिश्तेदारों के खातों की जांच शुरू कर दी है। उनके खातों के बारे में बैंकों से जानकारी ली गई है। परिवार वालों के साथ ही खास गुर्गों और शूटरों के खातों के बारे में पुलिस जानकारी इकट्ठी की है।

उनके खाते जिस बैंक में हैं, अधिकारियों से उनका हिसाब-किताब मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि सभी खातों के लेन-देन का विवरण मिल जाने के बाद उनकी आय, उस आय पर दिये गए इनकम टैक्स समेत तमाम बिंदुओं की जांच की जाएगी। इसके बाद उन्हें सीज कर कुर्क करने के लिए डीएम से अनुमति मांगी जाएगी। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14-1 के तहत अतीक अहमद की संपत्तियों की जांच करने वाले इंस्पेक्टर नीरज वालिया ने बताया कि अतीक के साथ ही उनके करीबी रिश्तेदारों, शूटरों और गुर्गों के खातों की जांच की जा रही है। 

अशरफ, आबिद और तोता की संपत्तियों की भी जांच 

अतीक अहमद के साथ-साथ अशरफ, आबिद प्रधान और तोता की संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। अशरफ के खिलाफ धूमनगंज थाने में गैंगस्टर की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। गैंगस्टर के उसी मामले में पुलिस आबिद प्रधान और जुल्फिकार उर्फ तोता की भी जांच शुरू कर दी गई है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को जांच सौंपी गई है। इंस्पेक्टर ने बताया कि यह जांच अतीक के गैंगस्टर के मुकदमे से अलग है। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि अशरफ, आबिद प्रधान और तोता ने अपराध के माध्यम से कितनी संपत्ति बनाई है। 
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