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इलाहाबाद विवि में 25 अक्तूबर से जारी होंगे प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट

इविवि में स्नातक एवं परास्नातक प्रवेश परीक्षा के परिणाम 25 अक्तूबर से जारी किए जाएंगे। 28 अक्तूबर तक सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए जाएंगे और इसके साथ ही ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। इविवि में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के चार-पांच दिनों के बाद संघटक महाविद्यालय भी कटऑफ जारी कर प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करेंगे। कोविड-19 के कारण कॉलेजों में भी इस बार प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। 

इविवि में बीएससी एवं बीकॉम की प्रवेश परीक्षा 26 सितंबर को आयोजित की गई थी, जबकि बीए, बीएफए, बीपीए और बीएएलएलबी की प्रवेश परीक्षा 27 सितंबर को हुई थी। वहीं, एलएलबी की प्रवेश परीक्षा 29 सितंबर, पीजीएटी-1, एमकॉम एवं एलएलएम की प्रवेश परीक्षा 30 सितंबर और पीजीएटी-2 एवं इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा एक से पांच अक्तूबर तक हुई थी। 25 अक्तूबर को प्रवेश परीक्षा समाप्त हुए 20 दिन पूर हो जाएंगे और इसी के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों के परिणाम जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सबसे पहले स्नातक एवं आईपीएस के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट जारी किए जाएंगे। इसके बाद विधि एवं परास्नातक प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट आएंगे। ये सभी रिजल्ट 28 अक्तूबर को जारी कर दिए जाएंगे। इविवि प्रशासन को प्रवेश की प्रक्रिया भी जल्द ही पूरी करनी होगी, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय ने एक नवंबर से नया सत्र शुरू करने केनिर्देश दिए हैं।

परास्नातक प्रवेश परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों के प्रवेश संबंधित विभागों के माध्यम से लिए जाएंगे। जबकि, अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश की जिम्मेदारी इविवि के प्रवेश प्रकोष्ठ की होगी। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि सभी रिजल्ट 26 से 28 अक्तूबर तक जारी कर दिए जाएंगे और ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया 27 अक्तूबर से शुरू कर दी जाएगी।

नवंबर के तीसरे सप्ताह में क्रेट के आयोजन की तैयारी

इविवि में संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) का आयोजन नवंबर के तीसरे सप्ताह में कराने की तैयारी है। क्रेट के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 13 नवंबर तक यूजीसी नेट की परीक्षा है। इसी वजह से क्रेट का आयोजन अटका हुआ है। यूजीसी नेट के बाद क्रेट का आयोजन कराया जाएगा।
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UPPSC NEWS: पीसीएस-2020 में पदों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2020 और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ)-2020 के तहत होने वाली भर्ती में पदों की संख्या में बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने कवायद तेज कर दी है। इस बाबत आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों का अधियाचन मांगा है। आयोग अध्यक्ष ने 31 अक्तूबर तक की तिथि नियत की है।
 
पीसीएस-2020 और एसीएफ/आरएफओ-2020 का जब विज्ञापन जारी किया गया था, तब तक आयोग को पीसीएस के 200 पदों का अधियाचन मिला था और एसीएफ/आरएफओ के किसी पद का अधियाचन नहीं प्राप्त नहीं हुआ था। पीसीएस-2020 और एसीएफ/आएफओ-2020 की 11 अक्तूबर को हुई प्रारंभिक परीक्षा से पहले आयोग को शासन से 64 नए पदों का अधियाचन भी मिल गया, जिसमें 54 पद पीसीएस और 12 पद एसीएफ/आरएफओ के हैं।

इस तरह पीसीएस के अब 254 और एसीएफ/आरअरएफओ के 12 पद हैं। आयोग की मंशा है कि विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े अन्य पदों को भी पीसीएस और एसीएफ/आरएफओ में शामिल कर लिया जाए। नियमों के तहत प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने तक जितने नए पदों का अधियाचन आयोग को मिलता है, उन्हें संबंधित भर्ती में शामिल किए जाने का प्रावधान है।
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फूलपुर गैंगरेप पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराए पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फूलपुर की गैंगरेप पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का एसएसपी प्रयागराज को निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने एसएसपी को इस मामले की विवेचना की निगरानी स्वयं करने और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हर आपराधिक घटना खासतौर पर महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्राथमिकी तत्काल दर्ज की जाए।

कोर्ट ने कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता की तीन माह तक शिकायत नहीं दर्ज की और अब विवेचना में लापरवाही कर रहे हैं, उनकी जवाब देही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए। दुष्कर्म पीड़िता की अर्जी पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 

याचिका पर अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व स्थायी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा ने पक्ष रखा। पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि पुलिस ने पीड़िता को थाने में रखा है और परिवार के लोगों को मिलने नहीं दे रही है। इस पर कोर्ट ने पीड़िता को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पीड़िता को अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने  एसएसपी प्रयागराज व एसएचओ फूलपुर को भी तलब किया था। एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि पीड़िता की मां द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं है। 

कोर्ट ने जब पीड़िता से पूछा तो उसने भी पुलिस द्वारा किसी भी प्रताड़ना से इंकार किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़िता की मां ने गलत हलफनामा दाखिल किया है। मगर चूंकि वह गरीब और अशिक्षित है इसलिए अदालत उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने पीड़िता की मां को भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी है। 

एसएसपी ने बताया कि दरोगा प्रमोद कुमार ने संपत्ति के विवाद की रिपोर्ट दी, रेप पर जांच नहीं की तो एसएचओ बृजेश कुमार व दारोगा प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। विभागीय जांच की जा रही है। एएसपी सोरांव जांच करेंगे। एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी है ।
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फिल्म अभिनेता नवाज़उद्दीन सिद्दीकी और उनके परिवार को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, यौन शोषण और पास्को एक्ट में गिरफ्तारी पर लगी रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी व परिवार के तीन सदस्यों की यौन शोषण के मामले मे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश करने तक गिरफ्तारी पर रोक लगायी है और विवेचना मे सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

उनके खिलाफ सामान्य आरोप होने के कारण कोर्ट ने राहत दी है। जिसमें नवाज़ुद्दीन के साथ ही उनकी मां मेहरुन्निशा और दो सैनिकों फ़ैयाज़ुद्दीन और अयाज़ुद्दीन शामिल है।

 बच्ची के साथ दुष्कर्म के मुख्य आरोपी एक भाई मिनहाज़ुद्दीन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत नहीं दी, दी है। इसकी याचिका खारिज कर दी है। मुज़फ्फरनगर के बुढ़ाने थाने मे इसी साल 27 जुलाई को नवाज़ुद्दीन और उनके परिवार के खिलाफ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट के तहत प्रथमिकी दर्ज करायी गई है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र और न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने दिया है।  
 
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Prayagraj Prayagraj

फिल्म एक्टर नवाज़उद्दीन सिद्दीकी और परिवार को मिली बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिल्म ऐक्टर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी व परिवार के तीन सदस्यों की यौन शोषण के मामले मे गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवेचना जारी रखने का आदेश देते हुए पुलिस रिपोर्ट पेश होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगायी है और विवेचना मे सहयोग देने का निर्देश दिया है। 

इनके खिलाफ सामान्य आरोप होने के कारण कोर्ट ने राहत दी है जिसमें नवाज़ुद्दीन के साथ ही उनकी मां मेहरुन्निशा और दो भाइयों फ़ैयाज़ुद्दीन और अयाजुद्दीन शामिल हैं।  बच्ची के साथ दुष्कर्म के मुख्य  आरोपी एक भाई मिनहाज़ुद्दीन के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कोई राहत,नही दी है। इसकी याचिका खारिज कर दी है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की खंडपीठ ने दिया है।  मुज़फ्फरनगर के बुधाना थाने मे नवाज़ुद्दीन की पत्नी आलिया सिद्दीकी उर्फ अंजलि पांडेय ने एफआईआर दर्ज करायी है। इसी साल 27 जुलाई को नवाज़ुद्दीन की पत्नी ने उनके और परिवार के खिलाफ बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न व पाक्सो एक्ट के तहत दर्ज करायी है प्राथमिकी।
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प्रयागराजः अतीक के 11 बैंक खाते होंगे कुर्क, लेनदेन पर भी लगेगी रोक, कार्रवाई शुरू

अहमदाबाद जेल में बंद माफिया अतीक अहमद की करोड़ों की संपत्ति पर कार्रवाई के बाद पुलिस उसके बैंक खातों को भी कुर्क करने जा रही है। उसके 11 खातों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें सीज कराया जाएगा। जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने इस संबंध में संबंधित बैंकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

अतीक पर यह कार्रवाई धूमनगंज थाने में उस पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में धारा 14(1) के तहत की जाएगी। मुकदमे के विवेचनाधिकारी इंस्पेक्टर नीरज वालिया की ओर से उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर बताया गया था कि अतीक के 13 ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली है जो उसके अपराध जगत मेें आने के बाद खोले गए। इनमें से सात प्रयागराज, तीन नई दिल्ली, एक लखनऊ  व दो बलरामपुर स्थित बैंकों में खुलवाए गए।

एसएसपी ने रिपोर्ट के आधार पर खातों को कुर्क करने की संस्तुति करते हुए जिला प्रशासन को पत्र भेजा था। रिपोर्ट व संबंधित साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिलाधिकारी ने खातों को कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कुल 11 खातों को कुर्क करने की अनुमति प्रदान की गई है। आदेश में कहा गया है कि दो खाते पूर्व में ही कुर्क किए जाने की वजह से कुल 11 खातों पर कार्रवाई की अनुमति दी जा रही है। उधर अनुमति मिलने के बाद कैंट पुलिस ने खाते कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। 

बैंकों को भेजा जाएगा पत्र, सीज होंगे खाते

पुलिस सूत्रों का कहना है कि खातों पर कुर्की की कार्रवाई के तहत बैंकों को पत्र भेजकर संबंधित खातों को सीज कराया जाएगा। इसके तहत इन खातों में पड़ी रकम फ्रीज कराकर लेनदेन बंद कराया जाएगा। जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई के लिए पुलिस को 30 अक्तूबर तक की मोहलत दी गई है। 

किन खातों को किया जाएगा कुर्क
1- खाता संख्या 1363100008822 बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा खुल्दाबाद
2- खाता संख्या 6230100007966 बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा कनाट प्लेस नई दिल्ली
3- खाता संख्या 50114038581 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
4- खाता संख्या 50107884373 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
5- खाता संख्या 20448204075 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
6- खाता संख्या 50106221757 इंडियन बैंक शाखा लूकरगंज
7- खाता संख्या 30260753055 एसबीआई संसद भवन शाखा एनेक्सी नई दिल्ली
8- खाता संख्या 33108579911 एसबीआई नुरूल्लाह रोड
9- खाता संख्या 60167042171 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
10- खाता संख्या 60164021028 बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बलरामपुर
11- खाता संख्या 6177000100011488  पंजाब नेशनल बैंक, शाखा  कचहरी

नोट- कुल चिह्नित 13 में से खाता संख्या 10023823015 एसबीआई संसद भवन शाखा नई दिल्ली व खाता संख्या 10223011721 एसबीआई उप्र सचिवालय शाखा लखनऊ पूर्व मेें ही कुर्क किए जाने के कारण आदेश में सम्मिलित नहीं किए गए हैं।
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69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती : त्रुटि सुधार की अनुमति देने की मांग खारिज 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में गलत आवेदन फार्म भरने वाले अभ्यर्थी को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की लोक परीक्षाओं में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। कुछ लोगों को त्रुटि सुधारने की अनुमति देने से पूरी चयन  प्रक्रिया प्रभावित होगी। कोर्ट ने  सुप्रीमकोर्ट द्वारा अर्चना चौहान केस में दिए गए निर्णय को सामान्य आदेश न मानते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट का आदेश याची के मामले में विशेष तथ्यों के आधार पर दिया गया है। इस आदेश को नजीर मानते हुए सभी पर लागू नहीं किया जा सकता है।
 
धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने यह आदेश दिया। याची ने अपने बीए रतृतीय वर्ष तथा बीटीसी के रोल नंबर में सुधार करने का आदेश देने की मांग की थी। कोर्टने हाईकोर्ट द्वारा पूर्व राजेंद्र पटेल वर्सेंज स्टेट ऑफ यूपी, पूजा यादव वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी स्पेशल अपील और आरती वर्मा वर्सेज स्टेट ऑफ यूपी केस में दिए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेशों से स्प्ष्ट है कि चयन के इस स्तर पर त्रुटि सुधार की अनुमति देने से पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी और निर्धारित समय सीमा में उसे पूरा कर पाना संभव नहीं होगा। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। 

कोर्ट ने किया मुकदमों का उल्लेख

1- पूजा यादव केस - में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा याची ने आवेदन में त्रुटि सुधार का तबतक कोई प्रयास नहीं किया जबतक उसे मेडिकल टेस्ट में शामिल कारने से इंकार नहीं कर दिया गया। इस स्तर पर कोई आदेश देने से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसी तरह की और याचिकाएं आएंगी। इस लिए चयन के इस स्तर पर कोई राहत नहीं दी जा सकती है। 

आरती वर्मा केस- में हाईकोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थियों को आवेदन फार्म सही से न भरने का खामियाजा भुगतना होगा। जब आवेदक खुद अपने बारे में सही सूचना देने में नाकाम रहा है तो त्रुटि सुधार का आवेदन निरस्त करने में कोई गलती नहीं दिखाई देती है। याची ने अपने जाति वर्ग को गलत भरा और चयन के इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप से चयन प्रक्रिया प्रभावित होगी। 

राममनोहर यादव केस- में हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भावी शिक्षक अपना एक पेज का आवेदन फार्म भी सही से नहीं भर सकते तो समझा जा सकता है कि यदि वे चयनित हुए तो भावी पीढ़ी को क्या पढ़ाएंगे।
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बदायूं सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव की पत्रावली कोर्ट में तलब

allahabad highcourt
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं की भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या के चुनाव से संबंधित पत्रावलियां तलब की है। संघ मित्रा के चुनाव सपा के धर्मेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने जिला निर्वाचन अधिकारी से पत्रावली हाईकोर्ट भेजने के लिए कहा है।यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव व दिनेश कुमार की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। 

कोर्ट ने  धर्मेन्द्र यादव के अधिवक्ता नरेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा दाखिल गवाहों की सूची रिकार्ड के साथ पेश करने का आदेश दिया है। संघमित्रा की तरफ से अधिवक्ता उदय नंदन ने कहा  कि वह बचाव में कोई गवाह पेश नहीं करना चाहती।याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रत्याशी दिनेश कुमार का नामांकन गलत तरीके से निरस्त किया गया है। यदि त्रुटि थी तो स्क्रूटनी के समय सुधारने का मौका देना चाहिए था।

दूसरे कुल  पड़े मतों से आठ हजार मत अधिक गिना गया है। जिसका कोई लेखा जोखा नहीं है।तीसरे मौर्या ने अपने पति की स्थिति व संपत्ति का व्योरा हलफनामे में नहीं दिया है।चुनाव नामांकन पत्र में पति के बजाय अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम लिखा है। जबकि अभी तक तलाक नहीं हुआ है। याचिका की सुनवाई 4नवंबर को होगी।
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फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते नहीं कर सकते अग्रिम विवेचना का आदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मुकदमे की फाइनल रिपोर्ट और उस पर दाखिल प्रोटेस्ट अर्जी लंबित रहते हुए पुलिस अधिकारी अग्रिम विवेचना का आदेश नहीं दे सकते हैं। उनको ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस संबंध में एसपी गाजीपुर और एडीजी वाराणसी जोन द्वारा पारित आदेशों को विधि विरुद्ध मानते हुए एसएचओ सैदपुर गाजीपुर से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। कहा है कि यदि यह पाया जाता है कि अग्रिम विवेचना का निर्णय इन दोनों अधिकारियों के दबाव में लिया गया है तो अदालत उनको तलब कर स्पष्टीकरण मांगेगी। यह भी कहा है कि यदि एसएचओ सैदपुर हलफनामा नहीं दाखिल करते हैं तो अदालत दोनों अधिकारियों को समन जारी कर तलब करेगी। 

गाजीपुर के गोविंद नारायण की याचिका पर शुक्रवार को अवकाश के बावजूद न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याची के अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्र का कहना था कि याची के खिलाफ सैदपुर थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। विवेचक ने विवेचना के बाद उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। रिपोर्ट पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेते हुए शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। शिकायतकर्ता ने फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट अर्जी दाखिल की जो अभी लंबित है। इस बीच कोराना के कारण अदालतें बंद हो गई। 

अधिवक्ता का कहना है कि मामला मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित होने के बावजूद इंस्पेक्टर सैदपुर ने एसपी गाजीपुर के 23 जुलाई 2020 के आदेश से विवेचक को इस मामले में अग्रिम विवेचना करने का आदेश दे दिया। एसपी के आदेश में अपेक्षा की गई थी कि अग्रिम विवेचना कोर्ट की अनुमति लेकर की जाए। और इसके परिणाम से अवगत कराया जाए। मगर उनको अग्रिम विवेचना के परिणाम से अवगत नहीं कराया गया। इस नाराजगी जताते हुए एडीजी वाराणसी जोन ने अग्रिम विवेचना की रिपोर्ट दो दिन में उनके समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। 

कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पुलिस अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। एडीजी, एसपी और एसएचओ को फाइनल रिपोर्ट लंबित रहते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश देने का अधिकार नहीं है। उनका कार्य विधि विरुद्ध है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
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यूपीः हाईकोर्ट का आदेश- पार्कों और खेल के मैदानों से हटाया जाए अतिक्रमण, तीन महीने में मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सार्वजनिक पार्कों और खेल के मैदानों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट तीन माह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आदेश पारित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण राज्य का वैधानिक दायित्व है। रोजगार और राजस्व पर लोक स्वास्थ्य, जीवन एवं पर्यावरण को वरीयता दी जानी चाहिए।

राम भजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने कहा है कि सभी पार्कों का स्थानीय निकायों की मार्फत ठीक से रखरखाव किया जाए ताकि आम लोग पार्कों का उपयोग कर सकें। कोर्ट ने कहा कि पार्कों में किसी को भी कूड़ा  डालने, इकट्ठा करने या अन्य उपयोग में लाने की अनुमति न दी जाए।

कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी पार्कों, खेल मैदानों का सही रखरखाव करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। याची का कहना है कि उसके आवास के सामने सेक्टर 11 विजय नगर ,गाजियाबाद में स्थित नगर निगम के पार्क का अतिक्रमण कर लिया गया है। उसका उपयोग वाहन खड़ा करने के लिए किया जा रहा है, जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि पार्क के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि निगम या प्राधिकरण पार्क के रखरखाव करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है। वे अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकते।

कोर्ट ने कानून एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पार्कों, खेल मैदानों के अतिक्रमण पुलिस से हटवाए जाएं और उनका रखरखाव किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पार्क में कूड़ा फेंकना कानूनन अपराध है। ऐसा करने वाले पर अर्थ दंड और एक माह के जेल की सजा दी जा सकती है।

पार्कों, खेल मैदानों की देखभाल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकायों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह पार्कों खेल मैदानों की देखभाल करें। देश के स्वस्थ पर्यावरण के लिए यह जरूरी भी है। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रदूषण मुक्त जीवन का अधिकार देता है। विकास के नाम पर उद्योग लगाकर इस अधिकार में कटौती नही की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51ए नागरिकों के कर्तव्य बताता है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पार्कों, खेल मैदानों की स्वच्छता का ध्यान रखे। 
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बच्ची चोरी में सरकारी डॉक्टर व पत्नी समेत पांच गिरफ्तार 

कीडगंज से एक वर्षीय बच्ची चोरी होनेे मामले का शनिवार को खुलासा हो गया। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद करते हुए सरकारी डॉक्टर व उसकी पत्नी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। डॉक्टर ने अपने नि:संतान भाई के लिए 60 हजार मेें तीन लोगों को बच्ची चुराने का ठेका दिया था। पुलिस ने सभी को जेल भेज दिया है। 

15 अक्तूबर को रामबाग रेलवे स्टेशन के पास रहने वाले रिजवान की एक वर्षीय बच्ची चोरी हो गई थी। मुकदमा दर्ज कर पुलिस तलाश में जुटी थी। अफसरों का दावा है कि सटीक सूचना पर शनिवार को परेड ग्राउंड पुलिया के पास से पांच  लोगों को पकड़ा गया जिनके कब्जे से बच्ची भी बरामद हुई। इनमें नईम अली व जमीला निवासी नहरपुर हंडिया, रामसूरत निवासी बरगढ़ चित्रकूट के अलावा झूंसी निवासी डॉ. रंजन गौतम व उसकी पत्नी वंदना गौतम शामिल हैं।

डॉ. रंजन प्रतापगढ़ स्थित राजकीय होम्योपैथ चिकित्सालय में बतौर सरकारी चिकित्सक तैनात है। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई तो पता चला कि डॉक्टर व उसकी पत्नी के कहने पर अन्य तीन आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया था। उधर, सूत्रों का कहना है कि वारदात के बाद आरोपियों ने बच्ची को आरोपी डॉक्टर दंपती को सौंप दिया था, जिसके एवज में उन्हें 35 हजार रुपये मिले थे और शेष 25 हजार बाद में दिए जाने थे। सर्विलांस से जानकारी मिलने के बाद क्राइम ब्रांच ने बच्ची को झूंसी से ही बरामद किया। 

अस्पताल में हुई थी मुलाकात

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सोते समय बच्ची को चुराकर ले जाने वाले नईम व रामसूरत थे। जिनकी तस्वीर सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुई थी। पूछताछ में दोनों ने बताया कि डॉक्टर रंजन का भाई चितरंजन जो सरकारी अध्यापक है, नि:संतान है। इलाज के लिए हंडिया महिला चिकित्सालय में जाने के दौरान उसकी मुलाकात जमीला से हुई। जिसने 60 हजार में उसे बच्ची देने का वादा किया। जमीला ने अपने परिचित नईम को यह बात बताई, जो रेलवे स्टेशन के आसपास रिक्शा चलाता था। जिसने रामसूरत संग मिलकर वारदात अंजाम दी।
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