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देवी दुर्गा का आठवां स्वरुप है महागौरी, इनके आशीर्वाद मात्र से ही दूर हो जातें है समस्त कष्ट !
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exclusive : केबीसी में अमिताभ बच्चन को याद आया अपना गांव बाबू पट्टी, कहा- वहां स्कूल बनवाने की इच्छा

दशहरे के पहले शुरू हो जाएगा गोपीगंज के फ्लाईओवर पर आवागमन

प्रयागराज-वाराणसी हाईवे नवरात्र बाद चालू हो जाएगा। हाईवे पर गोपीगंज में बन रहे सवा दो किलोमीटर का वृहत फ्लाईओवर काम ही लगभग बाकी रह गया है। नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया के अफसरों के मुताबिक बृहद फ्लाईओवर का काम भी दो-तीन दिन में ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद इस पर आवागमन शुरू हो जाएगा। 

प्रयागराज से वाराणसी के बीच में पांच बृहद फ्लाईओवर बनाए गए हैं। इनमें से चार फ्लाईओवर संचालित कर दिए गए हैं। जबकि गोपीगंज का फ्लाईओवर ही संचालित होने के बाकी है। इस पर अभी काम चल रहा है। नेशनल हाईवे अथारिटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एके राय के मुताबिक फ्लाईओवर का काम भी लगभग पूरा हो गया है। दो-तीन दिन का काम बचा है। उसके बाद फ्लाईओवर को खोला जाएगा। दशहरे तक इस पर संचालन शुरू होगा।

यह बृहद फ्लाईओवर भी काफी लंबा है। इसकी दूरी सवा दो किलोमीटर है। हंडिया बृहद फ्लाईओवर के बाद इस हाईवे पर यह दूसरा सबसे लंबा बृहद फ्लाईओवर है। इसके अलावा तीन अन्य फ्लाईओवर हैं, जो पहले ही संचालित हो चुके हैं। जबकि मार्ग का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। दो-तीन फ्लाईओवर का काम पूरा होने के बाद हाईवे को पूरी तरह से संचालित कर दिया जाएगा। लोगों को इसे दशहरे-दीपावली का तोहफा दिया जाएगा। 
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विधायक विजय मिश्रा पर दुष्कर्म के आरोप का मामला: चार दिन बीते, एक कदम भी नहीं चली पुलिस

इसे राजनीति का रसूख कहें या फिर पुलिस की ढिलाई कि विधायक विजय मिश्र पर जिस भजन गायिका ने सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया, चार दिन बाद भी पुलिस कार्रवाई एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। पीड़िता का न तो मेडिकल परीक्षण हुआ और न ही कोर्ट के सामने उसके बयान हुए। इतना ही नहीं इस मामले में अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस ने कोई प्रयास तक नहीं शुरू किए। पुलिस का कहना है कि नियमों के मुताबिक ही विवेचना की जा रही है। 

वाराणसी की रहने वाली एक युवती ने 18 अक्तूबर को गोपीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि विजय मिश्रा डरा धमकाकर 2014 से ही उसका यौन शोषण कर रहा है। वह भजन गायिका है। विजय ने अपने घर एक कार्यक्रम के लिए बुलाया फिर चेंजिंग रूम में जबरन घुसकर उसके साथ दुराचार किया। पहले भदोही फिर प्रयागराज के अल्लापुर में उसे बुलाकर लगातार कई दिन यौन शोषण किया गया। इसी दौरान उसने कई वीडियो भी बना लिए थे। धमकी देता था कि किसी से बताया तो पूरे परिवार समेत जान से मरवा दूंगा।

यौन शोषण के बाद उसने अपने बेटे विष्णु मिश्रा और रिश्तेदार विकास मिश्रा को उसे वाराणसी पहुंचाने के लिए भेजा तो उन लोगों ने उसके साथ एक कमरे में सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने फोन उठाना बंद कर दिया तो विजय मिश्रा ने चार आदमियों को भेजकर भरे बाजार से उसे उठवा लिया था। इसके बाद वह इतना डर गई कि वह मुंबई चली गई, लेकिन विजय मिश्रा ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा। धमकी दी कि जब भी वीडियो कॉल करें तो तुरंत उठना चाहिए। युवती ने इन्हीं वीडियो कॉल का स्क्रीन शाट लेकर पुलिस को भी दिया।

 इस मामले में पुलिस ने 18 अक्तूबर को रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में है। युवती का पुलिस ने आज तक मेडिकल परीक्षण नहीं कराया, बिना मेडिकल के कोर्ट के सामने पीड़िता का बयान भी नहीं होगा। इस मामले में विजय मिश्रा समेत तीन लोगों को नामजद किया गया है। उनमें बेटा विष्णु और रिश्तेदार विकास मिश्रा भी शामिल हैं। पुलिस उन्हें भी अब तक नहीं पकड़ पाई है। युवती ने एफआईआर में बताया था कि भदोही, प्रयागराज और वाराणसी में उसका यौन शोषण किया गया। पुलिस अभी कहीं भी तफ्तीश करने नहीं पहुंची है। इस मामले में जब भदोही के एएसपी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला सब ज्यूडिस है। इसलिए वह इस मामले पर कोई बयान नहीं दे सकते।
  • एफआईआर के बाद अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। कोरोना टेस्ट के बाद लड़की का मेडिकल का परीक्षण होगा। - इंस्पेक्टर गोपीगंज
 

रेप का मुकदमा पहली बार, 60 से अधिक मुकदमे हैं दर्ज

प्रयागराज। विजय मिश्रा पर 60 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। रेप की एफआईआर पहली बार हुई है। एफआईआर के बाद युवती ने बयान दिया था कि उसका इतना आतंक है कि उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की किसी ने हिम्मत नहीं की। अगर पुलिस जांच करे तो कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। जब उसे पता चला कि विजय मिश्रा जेल चला गया तो उसने रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत की है।

कई दलों में रह चुके हैं विजय मिश्रा

विजय मिश्रा ने1990 में कांग्रेस से ब्लाक प्रमुख के रूप में राजनीति की शुरूआत की थी। 2002, 2008 और 2012 में विजय मिश्रा सपा के टिकट से ज्ञानपुर के विधायक चुने गए। 2017 में अखिलेश यादव ने जब टिकट नहीं दिया तो निषाद पार्टी में चले गए और उसी पार्टी के विधायक बने। विजय पर 60 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। मंत्री नंदी पर हमले का आरोप भी उन पर लग चुका है, लेकिन भाजपा सरकार बनने के साढ़े तीन साल तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब शासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
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यूपीः हाईकोर्ट का आदेश- पार्कों और खेल के मैदानों से हटाया जाए अतिक्रमण, तीन महीने में मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी सार्वजनिक पार्कों और खेल के मैदानों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट तीन माह में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आदेश पारित करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण राज्य का वैधानिक दायित्व है। रोजगार और राजस्व पर लोक स्वास्थ्य, जीवन एवं पर्यावरण को वरीयता दी जानी चाहिए।

राम भजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने कहा है कि सभी पार्कों का स्थानीय निकायों की मार्फत ठीक से रखरखाव किया जाए ताकि आम लोग पार्कों का उपयोग कर सकें। कोर्ट ने कहा कि पार्कों में किसी को भी कूड़ा  डालने, इकट्ठा करने या अन्य उपयोग में लाने की अनुमति न दी जाए।

कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी पार्कों, खेल मैदानों का सही रखरखाव करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों को दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। याची का कहना है कि उसके आवास के सामने सेक्टर 11 विजय नगर ,गाजियाबाद में स्थित नगर निगम के पार्क का अतिक्रमण कर लिया गया है। उसका उपयोग वाहन खड़ा करने के लिए किया जा रहा है, जबकि जिलाधिकारी ने कहा कि पार्क के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि निगम या प्राधिकरण पार्क के रखरखाव करने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है। वे अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकते।

कोर्ट ने कानून एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि पार्कों, खेल मैदानों के अतिक्रमण पुलिस से हटवाए जाएं और उनका रखरखाव किया जाए। कोर्ट ने कहा कि पार्क में कूड़ा फेंकना कानूनन अपराध है। ऐसा करने वाले पर अर्थ दंड और एक माह के जेल की सजा दी जा सकती है।

पार्कों, खेल मैदानों की देखभाल स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय निकायों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि वह पार्कों खेल मैदानों की देखभाल करें। देश के स्वस्थ पर्यावरण के लिए यह जरूरी भी है। संविधान का अनुच्छेद 21 प्रदूषण मुक्त जीवन का अधिकार देता है। विकास के नाम पर उद्योग लगाकर इस अधिकार में कटौती नही की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51ए नागरिकों के कर्तव्य बताता है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पार्कों, खेल मैदानों की स्वच्छता का ध्यान रखे। 
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Allahabad High Court Allahabad High Court

भदोही में एक गांव ऐसा जहां आज भी नाला ही है आम रास्ता

प्रदेश के भदोही जिले में एक गांव ऐसा है जहां आजादी के 73 साल बाद भी लोग नाले से होकर आते-जाते हैं। गांव को जोड़ने के लिए यही एक मात्र आम रास्ता है। यह रास्ता राजस्व रिकार्ड में नाले के तौर पर दर्ज है। भदोही के राकेश कुमार ने इस गांव में सड़क बनाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। 

कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए भदोही के डीएम को मौके पर जाकर यथास्थिति देखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने डीएम को यह भी बताने के लिए कहा है कि गांव वालों को सड़क देने के लिए उनके पास क्या उपाय है। मामला भदोही के डुबही गांव का है। जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने जिलाधिकारी से 23नवम्बर तक व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने को कहा है। 

याची का कहना है कि गांव में प्राइमरी स्कूल भी है।2013में जिला पंचायत राज अधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया है। गांव में रहने वाले 300 लोग नाले होकर गांव में आते जाते हैं। बरसात  के दिनों में आने जाने का कोई रास्ता नहीं होता है। गांव को संपर्क मार्ग बनाकर जोड़ने के लिए जनप्रतिनधियों को कई प्रत्यावेदन दिए गए मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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गांव सभा के प्रस्तावों पर क्यों नहीं होते ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमावली की गंभीर खामियों को उजागर करने वाली जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि गांव सभा के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य क्यों नहीं हैं।  कोर्ट ने कहा कि संविधान के भाग नौ में  73 वे संविधान संशोधन द्वारा गांव सभा को पूर्ण संवैधानिक दर्जा दिया गया  है । ऐसे में इसके क्रियाकलापों में संविधान की मंशा के अनुरूप कार्य न होकर मनमानी तरीके काम करना आश्चर्यजनक है। 

कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि गांव सभा में पारित हो रहे प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर बगैर उनकी  सहमति कैसे मानी जा सकती है । कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रस्तावों  का दुरुपयोग करने पर जिम्मेदारी कैसे तय होगी ।

जौनपुर के मुकेश सिंह की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविन्द माथुर व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। । याची के अधिवक्ता आरके सिंह का कहना था कि गांव सभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए सदस्यों की  उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए और बैठक के प्रस्तावों पर सदस्यों के हस्ताक्षर की अनिवार्यता का प्रावधान रखा जाए ।

कहा गया है कि कानून की इन कमियों का गांव सभा स्तर पर प्रदेश भर में जमकर  दुरुपयोग किया जा रही है ।  यही  वजह है कि गाँव सभा स्तर पर भ्रष्टाचार जैसी आपराधिक घटनाओं में दिनों दिन वृद्धि हो रही है । कहा गया है कि पंचायत राज नियमावली में कमी के कारण संविधान की भावनाओं  के अनुरूप गांव सभा में कार्य नहीं हो रहा है ।कोर्ट ने इस जनहित याचिका पर यूपी सरकार से जवाब तलब किया है और सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तिथि नियत की है ।
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नशेड़ी व्यक्ति को उसकी मर्जी के खिलाफ नशामुक्ति केंद्र भेजना अवैध : हाईकोर्ट

court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी नशेड़ी व्यक्ति को  यदि उसका दिमाग ठीक है, तो उसकी मर्जी के खिलाफ नशा मुक्ति केंद्र  भेजना अवैध निरूद्धि मानी जाएगी। किसी को ऐसा करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने मेरठ के अंकुर कुमार को जबरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र भेजने के मामले में एसएसपी मेरठ को दोषी लोगों पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में ऐसा किसी के साथ भी नहीं करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने  नशा मुक्ति केंद्र से अदालत में पेश  किए  याची को स्वतंत्र कर दिया है और उसे अपनी मर्जी से जहां चाहे जाने की छूट दी है। 

कोर्ट ने कहा है कि जीवन रक्षक ड्रग डे एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर मुजफ्फरनगर या जिसने भी याची को केन्द्र में जबरदस्ती भर्ती कराया है ,उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।साथ ही यह सुनिश्चित करे कि  याची को भविष्य में कोई नुकसान न पहुंचाने पाए। अंकुर कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सुनवाई की। 

 याचिका में कहा गया कि याची को उसके मामा ने जबरदस्ती नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवा दिया है। उसने रिहाई की मांग की तो कोर्ट ने याची को पेश करने का निर्देश दिया। दरोगा कपिल कुमार ने नशा मुक्ति केंद्र मुजफ्फरनगर से लाकर याची को पेश किया।

29 वर्षीय अंकुर कुमार ने कोर्ट को बताया कि उसे उसके मामा बीरेन्द्र सिंह उर्फ बिल्लू कई लोगों के साथ आए और उसे जबरदस्ती  गाड़ी में बैठाकर नशा मुक्ति केंद्र में मर्जी के खिलाफ भर्ती करा दिया है। जब कि विपक्षी अधिवक्ता का कहना था कि मामा ने नहीं अंकुर की  मां ने उसे भर्ती कराया है।केन्द्र के 21अक्तूर के पत्र से यह स्पष्ट है। अदालत ने इस  तर्क को नहीं माना और कहा कि मामा ने जबरदस्ती उसे केन्द्र में भर्ती कराया है।
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कोरोना को लेकर हाईकोर्ट सख्त, प्रयागराज सहित यूपी के पांच जिलों में लागू किया यह आदेश

UPPSC NEWS: पीसीएस-2020 में पदों की संख्या बढ़ाने की तैयारी

सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (पीसीएस) परीक्षा-2020 और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ)-2020 के तहत होने वाली भर्ती में पदों की संख्या में बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने कवायद तेज कर दी है। इस बाबत आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों का अधियाचन मांगा है। आयोग अध्यक्ष ने 31 अक्तूबर तक की तिथि नियत की है।
 
पीसीएस-2020 और एसीएफ/आरएफओ-2020 का जब विज्ञापन जारी किया गया था, तब तक आयोग को पीसीएस के 200 पदों का अधियाचन मिला था और एसीएफ/आरएफओ के किसी पद का अधियाचन नहीं प्राप्त नहीं हुआ था। पीसीएस-2020 और एसीएफ/आएफओ-2020 की 11 अक्तूबर को हुई प्रारंभिक परीक्षा से पहले आयोग को शासन से 64 नए पदों का अधियाचन भी मिल गया, जिसमें 54 पद पीसीएस और 12 पद एसीएफ/आरएफओ के हैं।

इस तरह पीसीएस के अब 254 और एसीएफ/आरअरएफओ के 12 पद हैं। आयोग की मंशा है कि विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े अन्य पदों को भी पीसीएस और एसीएफ/आरएफओ में शामिल कर लिया जाए। नियमों के तहत प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने तक जितने नए पदों का अधियाचन आयोग को मिलता है, उन्हें संबंधित भर्ती में शामिल किए जाने का प्रावधान है।
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इलाहाबाद विवि में 25 अक्तूबर से जारी होंगे प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट

इविवि में स्नातक एवं परास्नातक प्रवेश परीक्षा के परिणाम 25 अक्तूबर से जारी किए जाएंगे। 28 अक्तूबर तक सभी पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम जारी कर दिए जाएंगे और इसके साथ ही ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। इविवि में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के चार-पांच दिनों के बाद संघटक महाविद्यालय भी कटऑफ जारी कर प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करेंगे। कोविड-19 के कारण कॉलेजों में भी इस बार प्रवेश की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। 

इविवि में बीएससी एवं बीकॉम की प्रवेश परीक्षा 26 सितंबर को आयोजित की गई थी, जबकि बीए, बीएफए, बीपीए और बीएएलएलबी की प्रवेश परीक्षा 27 सितंबर को हुई थी। वहीं, एलएलबी की प्रवेश परीक्षा 29 सितंबर, पीजीएटी-1, एमकॉम एवं एलएलएम की प्रवेश परीक्षा 30 सितंबर और पीजीएटी-2 एवं इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज (आईपीएस) के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा एक से पांच अक्तूबर तक हुई थी। 25 अक्तूबर को प्रवेश परीक्षा समाप्त हुए 20 दिन पूर हो जाएंगे और इसी के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों के परिणाम जारी किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

सबसे पहले स्नातक एवं आईपीएस के विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट जारी किए जाएंगे। इसके बाद विधि एवं परास्नातक प्रवेश परीक्षाओं के रिजल्ट आएंगे। ये सभी रिजल्ट 28 अक्तूबर को जारी कर दिए जाएंगे। इविवि प्रशासन को प्रवेश की प्रक्रिया भी जल्द ही पूरी करनी होगी, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय ने एक नवंबर से नया सत्र शुरू करने केनिर्देश दिए हैं।

परास्नातक प्रवेश परीक्षाओं में चयनित अभ्यर्थियों के प्रवेश संबंधित विभागों के माध्यम से लिए जाएंगे। जबकि, अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश की जिम्मेदारी इविवि के प्रवेश प्रकोष्ठ की होगी। प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि सभी रिजल्ट 26 से 28 अक्तूबर तक जारी कर दिए जाएंगे और ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया 27 अक्तूबर से शुरू कर दी जाएगी।

नवंबर के तीसरे सप्ताह में क्रेट के आयोजन की तैयारी

इविवि में संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) का आयोजन नवंबर के तीसरे सप्ताह में कराने की तैयारी है। क्रेट के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 13 नवंबर तक यूजीसी नेट की परीक्षा है। इसी वजह से क्रेट का आयोजन अटका हुआ है। यूजीसी नेट के बाद क्रेट का आयोजन कराया जाएगा।
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फूलपुर गैंगरेप पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराए पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फूलपुर की गैंगरेप पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का एसएसपी प्रयागराज को निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने एसएसपी को इस मामले की विवेचना की निगरानी स्वयं करने और लापरवाह पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हर आपराधिक घटना खासतौर पर महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्राथमिकी तत्काल दर्ज की जाए।

कोर्ट ने कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता की तीन माह तक शिकायत नहीं दर्ज की और अब विवेचना में लापरवाही कर रहे हैं, उनकी जवाब देही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए। दुष्कर्म पीड़िता की अर्जी पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 

याचिका पर अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्र, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व स्थायी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा ने पक्ष रखा। पीड़िता की मां ने हाईकोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि पुलिस ने पीड़िता को थाने में रखा है और परिवार के लोगों को मिलने नहीं दे रही है। इस पर कोर्ट ने पीड़िता को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पीड़िता को अदालत के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने  एसएसपी प्रयागराज व एसएचओ फूलपुर को भी तलब किया था। एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि पीड़िता की मां द्वारा लगाए गए आरोप सही नहीं है। 

कोर्ट ने जब पीड़िता से पूछा तो उसने भी पुलिस द्वारा किसी भी प्रताड़ना से इंकार किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि पीड़िता की मां ने गलत हलफनामा दाखिल किया है। मगर चूंकि वह गरीब और अशिक्षित है इसलिए अदालत उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने पीड़िता की मां को भविष्य में ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी है। 

एसएसपी ने बताया कि दरोगा प्रमोद कुमार ने संपत्ति के विवाद की रिपोर्ट दी, रेप पर जांच नहीं की तो एसएचओ बृजेश कुमार व दारोगा प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया गया है और पुलिस लाइन से संबद्ध कर दिया गया है। विभागीय जांच की जा रही है। एएसपी सोरांव जांच करेंगे। एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी है ।
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रामपुर की स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने का हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर की स्वार विधान सभा का चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह सीट यहां के विधायक अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने की वजह से रिक्त हो गई है। नगर पालिका परिषद स्वार के पूर्व अध्यक्ष  शफीक अहमद द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दिया। 

याची के अधिवक्ता विक्रांत पांडेय के मुताबिक स्वार विधान की सीट का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को रद्द कर दिया था। क्योंकि वहां के निर्वाचित निर्वाचित विधायक अब्दुल्ला खान ने गलत जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था। वर्तमान में यूपी की सात रिक्त सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।

मगर स्वार विधान सभा को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि जनप्रितिनधित्व कानून के तहत  विधानसभा की सीट छह माह से अधिवक्ता रिक्त नहीं रखी जा सकती है, इसलिए स्वार की रिक्त सीट पर भी चुनाव कराया जाए। चुनाव आयोग की ओर से इस पर आपत्ति की गई कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील लंबित है। दूसरे याची ने चुनाव आयोग को कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
 
याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट द्वारा कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है। हाईकोर्ट को इस मामले में सीधे सुनवाई कर आदेश पारित करने का अनुच्छेद 226 में अधिकार है। राज्य सरकार का कहना था कि चुनाव अधिसूचना जारी करना निर्वाचन आयोग का काम है। राज्य सरकार स्वार सीट को रिक्त घोषित कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने स्वार विधान सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।
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