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कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए बनाया ढाई सौ चिकित्सकों का दस्ता

चल पड़े जिधर दो डग मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर...। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब मानवता कराह रही थी और बेड, आक्सीजन के लिए लोग असहाय होकर भटक रहे थे, तब शहर के एक अफसर ने मददगार चिकित्सकों का समूह सैकड़ों लोगों को काल के गाल सेे बाहर खींच लिया। डॉक्टर मित्र के नाम से गठित इस समूह के जरिए अब प्रयागराज ही नहीं देश भर के प्रमुख शहरों में कोरोना पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।

सीडीए पेंशन लेखा परीक्षक के पद पर तैनात दीपक अग्रहरि ने कोरोना संक्रमण के खिलाफ देश भर में चिकित्सकों का बड़ समूह तैयार किया है। इस समूह का नाम रखा गया है डॉक्टर मित्र। इस डॉक्टर मित्र समूह में स्वरूपरानी अस्पताल के अलावा, एसजीपीजीआई लखनऊ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर, दशरथ मेडिकल कॉलेज अयोध्या, झांसी मेडिकल कॉलेज, साइन हॉस्पिटल मुंबई, अंबेडकर हॉस्पिटल मुंबई, सर गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली, मैक्स हॉस्पिटल के अलावा जौनपुर, फतेहपुर, कानपुर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के एमबीबीएस चिकित्सक शामिल हैं।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जब चरम पर थी, तब एक फोन पर इस समूह की मदद से मरीजों को बेड और इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे थे। दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक वेंटिलेटर, आक्सीजन और आक्सीजन सिलेंडर डॉक्टरों के इस समूह के जरिए लोगों को उपलब्ध कराए गए। अब इस समूह में चिकित्सकों की संख्या बढ़कर 250 हो गई है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ राजेश अग्रहरि बताते हैं कि दीपक की पहल पर एक-एक कर चिकित्सक इस समूह से जुड़ते गए और मददगारों का कारवां खड़ा हो गया।?

अब इस समूह में एक फोन या मैजेस पर देश के किसी भी कोने में कोरोना संक्रमित को बेड या किसी भी तरह की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इसी तरह किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजिस्ट डॉ दिलीप चौरसिया इस समूह को असहायों के लिए वरदान मानते हैं। उनका कहना है कि किसी का भी फोन आने पर इस समूह के चिकित्सक उसे तत्काल राहत दिला रहे हैं।
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एसआरएन में युवती से गैंगरेप प्रकरण: दिन में आरोपी मेडिकल स्टाफ के नाम नहीं पता कर सकी पुलिस

एसआरएन अस्पताल में महिला मरीज से दुष्कर्म से आरोप मामले की जांच फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है। रिपोर्ट दर्ज होने के चार दिन बाद भी पुलिस अब तक कथित घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का नाम नहीं पता कर सकी है। इससे लोगों के बीच तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। कोतवाली पुलिस का कहना है कि स्टाफ की जानकारी मांगी गई है, लेकिन एसआरएन प्रबंधन ने नाम नहीं उपलब्ध कराए हैं। उधर एसआरएन अफसरों का कहना है कि नाम ही नहीं, बल्कि पूरी जांच रिपोर्ट पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है। 

एसआरएन में भर्ती महिला मरीज के भाई ने बहन के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आठ जून को इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई थी, जिसके बाद आननफनन रिपोर्ट दर्ज की गई। हालांकि मामले की विवेचना को लेकर पुलिस गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। हाल यह है कि चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस अब तक ऑपरेशन के दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा स्टाफ का नाम तक नहीं पता कर पाई है। ऐसे में उनका बयान भी नहीं दर्ज किया जा सका है। गौरतलब है कि सबसे पहले पीड़ित व आरोपी पक्ष का बयान दर्ज किया जाना चाहिए।
 
इसमें पीड़ित पक्ष का बयान तो दर्ज हो चुका है, लेकिन आरोपी पक्ष का बयान नहीं लिया जा सका। आरोपियों के बयान दर्ज करने के बाद ही विवेचना आगे बढ़ सकेगी। कोतवाली पुलिस का कहना है कि स्टाफ के बारे में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक एसआरएन प्रबंधन की ओर से इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एसआरएन के एसआईसी डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि चिकित्सा स्टाफ का नाम ही नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से कराई गई जांच संबंधी विस्तृत रिपोर्ट ही पुलिस को दे दी गई है। 
 

रिचा ने राज्यपाल को पत्र भेजा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

प्रयागराज। एसआरएन मामले में सपा नेता रिचा सिंह ने राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले में  उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसमें कहा गया है कि दुष्कर्म मामले में फोरेंसिक जांच के लिए एसओपी निर्धारित है। इसके तहत सूचना मिलते तुरंत रिपोर्ट दर्ज करना, पीड़िता की पहचान गुप्त रखना, महिला पुलिस अधिकारी की ओर से पीड़िता का बयान दर्ज करना, संभव हो तो महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 का बयान कराना, 24 घंटे के भीतर मेडिकल कराना आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। लेकिन इस केस में रिपोर्ट ही आठवें दिन दर्ज हुई। ऐसे में अब फोरेंसिक जांच औचित्यहीन है।
 
इससे पहले डीजीपी के सर्कुलर का हवाला देकर आईजी, सीएमओ को पत्र भेजकर सवाल उठाए थे। पूछा था कि  सर्कुलर के हिसाब से ऐसे मामलों में जांच के लिए अधिकतम समय सीमा सात दिन है तो आठवें दिन रिपोर्ट दर्ज होने पर जांच कैसे होगी। पीड़िता के कपड़े व उसके आंतरिक अंगों व शरीर पर मिले घावों के सैंपल जांच के लिए भेजने, धारा 532(2ए) सीआरपीसी के तहत आरोपियों की मेडिकल जांच व डीएनए प्रोफाइलिंग और आईजी व सीएमओ की तथाकथित जांच के दौरान एसओपी  फॉलो नहीं करने को लेकर भी सवाल उठाए थे।
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अतीक के शूटर तोता की 14 करोड़ की संपत्ति कुर्क 

अतीक अहमद के शूटर जुल्फिकार उर्फ तोता की 14 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति कुर्क कर दी गई। पुलिस ने कसारी मसारी स्थित इन संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किया। साथ ही संपत्तियों पर नोटिस बोर्ड भी चस्पा कराया कि संबंधित संपत्तियों पर अतिक्रमण करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। 

गैंगस्टर के मामलों में नामजद अतीक गिरोह के सदस्यों पर इन दिनों कार्रवाई की जा रही है। पिछले दिनों अशरफ, माजिद व अकबर के खिलाफ कार्रवाई की गई। शुक्रवार को अतीक के शूटर जुल्फिकार उर्फ तोता की 70 बिस्वा जमीन को कुर्क किया गया। पुलिस का दावा है कि तोता ने यह संपत्ति अपराध के जरिए अर्जित की। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि अप्रैल में जिलाधिकारी की ओर से इन संपत्तियों को कुर्क करने संबंधी अनुमति प्रदान की गई थी।
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प्रयागराज : विवाह में द्वारचार के दौरान भड़के गजराज, कई वाहन पलटे, बारात में मची भगदड़ (देखें तस्वीरें)

prayagraj news : बारात में भड़के हाथी ने कार को कई बार पलटा। prayagraj news : बारात में भड़के हाथी ने कार को कई बार पलटा।

विवाह करने वाले जोड़े की सुरक्षा में धर्मांतरण महत्वपूर्ण तथ्य नहीं - हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धर्म परिवर्तन करके शादी करने वाले दो बालिग लोगों को सुरक्षा प्रदान करने में धर्मांतरण महत्वपूर्ण तथ्य नहीं है। यदि जबरदस्ती धर्मांतरण का आरोप नहीं है तो ऐसे जोड़े को सुरक्षा देना पुलिस और प्रशासन की बाध्यता है। कोर्ट ने कहा कि यदि दो बालिग लोग अपनी मर्जी से विवाह कर रहे हैं या विवाह नहीं भी किया है तब भी उनको साथ रहने का अधिकार है। भले ही उनके पास विवाह का प्रमाण नहीं है। संबंधित पुलिस अधिकारी को ऐसे लोगों को प्रमाण देने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। 

यशीदेवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने दिया है। याची 20 वर्षीय यशी देवी ने इस्लाम स्वीकार करने के बाद 40 वर्षीय गुच्छन खान से 11 फरवरी 2021 को शादी की थी। उसने याचिका दाखिल कर परिवार वालों पर परेशान करने और धमकाने का आरोप लगाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट है।
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डेढ़ साल बाद अचेत हालत में मिली ससुराल से ठुकराई महिला

अचेत हालत में फूलपुर पुलिस को मिली एक महिला आखिरकार महीने भर के इलाज के बाद शनिवार को होश में आ गई। मनोचिकित्सकों की मदद से उसकी काउंसलिंग कराकर परिजनों का पता लगाया गया। अंतत: उसे उसकी बहन को सुपुर्द कर दिया गया। सड़क के किनारे पटरी पर बेहोशी की हालत में मिली एक महिला के बारे में पुलिस ने बीती 23 मई को जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्र को सूचना दी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस की मदद से प्रोबेशन अधिकारी ने उसे खुल्दाबाद स्थित सखी वन स्टाफ सेंटर भिजवा दिया। मानसिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वहां उसकी हालत और भी बिगड़ गई। महिला की तबीयत खराब होने पर उसे काल्विन अस्पताल में दिखाया गया।

लगातार उपचार केे बाद अंतत: महिला को होश आ गया। होश आने के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर की परामर्शदाता प्रिंयका पांडेय ने उसकी काउंसलिंग की तब पता चला कि उसकी बहन पुराना कटरा में रहती है। उसने अपना घर वाराणसी बताया। महिला की सूचना के आधार पर उसकी मां से वीडियो कांफ्रेंसिंग कराई गई तो उसने अपनी बेटी को पहचान लिया, लेकिन उसे लेने के लिए आने में असमर्थता जताने लगी। इस पर वन स्टाफ सेंटर की प्रभारी शिष्या सिंह ने पुलिस की मदद से उसकी पुराना कटरा स्थित बहन से संपर्क किया। शनिवार की दोपहर उसकी बहन खुल्दाबाद स्थित सेंटर पहुंची और फिर डेढ़ साल बाद महिला अपने परिजनों के पास पहुंच सकी।
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88 हजार रुपये प्रति माह वेतन लेने वाले बाबू के खिलाफ शुरू हुई जांच

स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में जूनियर क्लर्क द्वारा 88 हजार रुपये वेतन लेने के मामले की जांच शुरू हो गई है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने वित्त नियंत्रक की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बैठा दी है। इसके साथ ही बाबू की दो महीने की वेतन पर्ची देखकर मामले को प्रथम दृष्टया सही पाया है। बाबू को एसआरएन चिकित्सालय से हटाकर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एसपीएम विभाग में संबद्ध कर दिया गया। 

एसआरएन में एक बाबू द्वारा प्रतिमाह 88 हजार रुपये का वेतन लेने की अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने वित्त नियंत्रक शिवेंद्र सिंह, प्रोफेसर मोहित जैन और क्रय सचिव डॉ. राजेश कुमार राय की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी ने जूनियर लिपिक की दो महीने की सैलरी की रैंडम जांच की।

पाया कि जूनियर लिपिक वरिष्ठ लिपिक और कार्यालय प्रमुख से अधिक वेतन ले रहा है। इस आधार पर उसे तुरंत स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय से हटाकर मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित एसपीएमडी विभाग से संबद्ध कर दिया गया। मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। इस संबंध में डीजी और शासन को भी सूचित कर दिया गया है। पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद बाबू के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

जूनियर लिपिक दे रहा आत्महत्या की धमकी
अधिक सैलरी लिए जाने के मामले में जांच शुरू होने पर जूनियर लिपिक ने परिवार सहित आत्महत्या की धमकी है। जूनियर लिपिक ने स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक को एक पत्र भेजा है। उसमें कहा है कि उसने अपनी सैलरी मेें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की है। उसने इस संबंध में चिकित्सालय के एक दूसरे बाबू पर आरोप लगाया है। 
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पत्नी से झगड़े के बाद गायब युवक संदिग्ध हाल में मृत मिला

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करेली के बक्शीमोढ़ा में पत्नी से झगड़े के बाद दिलीप भारतीया (45) संदिग्ध हाल में मृत मिला। खून से लथपथ शव ससुरखदेरी नदी में मिला। जांच पड़ताल के बाद पुलिस का मानना है कि उसने खुदकुशी की। फिलहाल शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच पड़ताल की जा रही है। 

मृतक दिलीप मूल रूप से नैनी के पूरा फतेह मोहम्मद तलैया मोहल्ला का रहने वाला था। वह प्राइवेट काम करता था। पिछले काफी समय से वह ससुराल मेें ही रहता था। शनिवार को उसके साले की बेटी की शादी थी। जिसमें वह भी शामिल हुआ था। रात में अचानक वह लापता हो गया। शादी का माहौल था ऐसे में घरवालों का ध्यान भी नहीं गया। उधर सुबह विदाई की रस्म चल रही थी तभी सूचना मिली कि दिलीप ससुरखदेरी नदी में मृत पड़ा मिला है। जांच पड़ताल में मृतक की पीठ व आसपास के हिस्सों में चोट मिली।

पास ही पत्थर भी पड़े हुए थे। एसओ बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि मृतक नशे का आदी था और इसे लेकर उसका अपनी पत्नी से झगड़ा भी होता रहता था। शनिवार को भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। जिसके बाद ही वह घर से निकल गया था। आशंका है कि इसके बाद ही उसने पुल पर पहुंचकर ससुरखदेरी नदी में छलांग लगा दी। मृतक के शरीर पर मिली चोट के बाबत बताया कि वर्तमान में नदी में पानी नहीं है। संभवत: ऊंचाई से गिरने की वजह से उसे चोटें आईं। 
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पूर्व सांसद अतीक के गुर्गे माजिद को सवा दो करोड़ की एक और चोट

अतीक अहमद के गुर्गे माजिद के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। शनिवार को गैंगस्टर के इस मुल्जिम को एक और चोट देते हुए पूरामुफ्ती पुलिस ने सवा दो करोड़ रुपये की 30 बिस्वा जमीन कुर्क कर दी। पुलिस का दावा है कि यह संपत्तियां अपराध से अर्जित की गई थी। 

मरियाडीह निवासी माजिद अतीक अहमद का गुर्गा और शूटर आबिद का भाई है। जनवरी में तत्कालीन जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने पुलिस की रिपोर्ट पर उसकी 19 संपत्तियों को कुर्क करने की अनुमति प्रदान की थी। लंबे समय तक उसके खिलाफ कार्रवाई लंबित रही थी। इसके बाद बीते आठ जून को उसकी पांच करोड़ रुपये मूल्य की 60 जमीनें कुर्क की गई थीं।

इसी क्रम में शनिवार को बम्हरौली चौकी प्रभारी शिवेेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस व राजस्व टीम ने मरियाडीह स्थित उसकी 30 बिस्वा अन्य जमीन कुर्क कर दी। पुलिस का कहना है कि इसकी कुल कीमत सवा दो करोड़ के आसपास है। यह कार्रवाई माजिद के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत की गई। यह मुकदमा 2018 में धूमनगंज थाने में कायम हुआ था। पुलिस का कहना है कि गैंगस्टर के शेष मुल्जिमों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। 
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यूपीपीएससी : संशोधित कैलेंडर में भी शामिल नहीं की गई एपीएस भर्ती

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से जारी संशोधित परीक्षा कैलेंडर में भी अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती को जगह नहीं दी गई, जबकि एपीएस के ढाई सौ पदों का अधियाचन आयोग को काफी पहले ही मिल चुका है। वहीं, एपीएस-2013 की भर्ती प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की जा सकी है। ओवरएज हो रहे अभ्यर्थियों ने आयोग ने मांग की है कि एपीएस भर्ती का नया विज्ञापन शीघ्र जारी किया जाए, ताकि वे नई भर्ती वे वंचित न हों।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अपने संशोधित कैलेंडर में 14 परीक्षाओं को शामिल किया है। इनमें से 13 भर्ती परीक्षाएं पूर्व में जारी कैलेंडर में भी शामिल की गईं थी, जबकि स्टाफ नर्स की नई भर्ती को संशोधित कैलेंडर में जगह दी गई है। एपीएस भर्ती के अभ्यर्थियों का कहना है कि जब संशोधित कैलेंडर में स्टाफ नर्स की भर्ती को शामिल किया जा सकता है तो एपीएस भर्ती को जगह क्यों नहीं दी गई, जबकि आयोग को काफी पहले ही एपीएस के तकरीबन ढाई सौ पदों का अधियाचन मिल चुका है। इस मसले पर अभ्यर्थी आयोग के बाहर कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं और ज्ञापन भी दिया है।

हालांकि पूर्व में इस मसले पर आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को बताया गया था कि एपीएस भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। अभ्यर्थी अब दावा कर रहे हैं कि पाठ्यक्रम संशोधन के मसले पर शासन से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन आयोग भर्ती शुरू नहीं कर रहा है। अभ्यर्थी दीपक कुशवाहा, उमेश चंद्र पांडेय, विपिन पटेल, कौशलेंद्र सिंह, शैलेंद्र पांडेय का कहना है कि आयोग ने एपीएस-2013 की भर्ती प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं की है। 

कई चरणों की परीक्षा भी करा दी गई और उनका रिजल्ट भी आ गया, लेकिन कंप्यूटर की परीक्षा अब तक नहीं कराई गई और इसी वजह से भर्ती फंसी हुई है। भर्ती शुरू हुए आठ साल हो चुके हैं। इस बीच कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं तो कुछ होने जा रहे हैं। पुरानी भर्ती पूरी न होने से अभ्यर्थियों को भविष्य अधर में है और अगर नई भर्ती जल्द शुरू नहीं की गई तो तमाम अभ्यर्थी ओवरएज होने के कारण एपीएस की नई भर्ती में शामिल होने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने आयोग से नई भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी करने की मांग की है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक को लेकर विवाद

इलाहाबाद विश्ववविद्यालय (इविवि) में शारीरिक शिक्षा विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक को लेकर विवाद हो गया है। विभाग के एक प्रोफेसर का आरोप है कि बैठक हुई ही नहीं और विभागाध्यक्ष ने कागज पर दिखा दिया कि बैठक हुई। साथ ही इसकी आड़ में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी ले लिए। वहीं, इविवि प्रशासन ने प्रोफेसर के आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि बैठक हुई थी और बैठक की कार्यवृत्ति में सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं।

शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रो. डीसी लाल ने डीन कला संकाय को पत्र लिखकर बताया है कि 25 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन यह बैठक नहीं हो सकी। यह बात तब सामने आई जब 10/11 जून को प्रस्तावित फैकल्टी बोर्ड कला संकाय की बैठक का एजेंडा प्राप्त हुआ, जिसमें 25 मार्च की बैठक का उल्लेख भी किया गया है। प्रो. डीसी लाल का दावा है कि  ज्यादातर सदस्यों के उपस्थित न होने के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। उनका आरोप है कि बैठक न होने के बावजूद विभागाध्यक्ष ने कागज में बैठक दिखा दी और फर्जी तरीके से शारीरिक शिक्षा विभाग के पीएचडी के परीक्षक तय कर लिए। 

इसके अलावा शारीरिक शिक्षा विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज में दो बाह्य सदस्यों को फर्जी तरीके से नियुक्त कर लिया गया, जबकि नियमानुसार बैठक में उनकी नियुक्ति होनी चाहिए थी। प्रो. लाल ने मांग की है कि बोर्ड ऑफ स्टडीज के दो बाह्य सदस्यों की नियुक्ति को न माना जाए। इस बारे में इविवि की पीआरओ डॉ. जया कपूर का कहना है कि शारीरिक शिक्षा की विभागाध्यक्ष ने बैठक होने की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि बैठक की कार्यवृत्ति में सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी हैं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : अंतिम वर्ष 10591 छात्र-छात्राएं प्रमोट, रिजल्ट जारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों के स्नातक तृतीय यानी अंतिम वर्ष के 10591 छात्र-छात्राओं के बिना परीक्षा प्रमोट कर दिया गया है। इविवि प्रशासन ने शनिवार को स्नातक अंतिम वर्ष का रिजल्ट भी जारी कर दिया। सभी विद्यार्थियों के अंकों का विवरण मार्कशीट के रूप में इविवि की वेबसाइट पर उपलब्ध है। विद्यार्थी अंकों का विवरण वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं और संबंधित इकाई से मार्कशीट की मूल प्रति भी प्राप्त कर सकते हैं।

इविवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. रमेंद्र कुमार सिंह की ओर से जारी परिणाम के अनुसार स्नातक तृतीय वर्ष के शतप्रतिशत छात्र-छात्राओं को प्रमोट किया गया है। स्नातक तृतीय वर्ष के प्रमोट किए गए कुल 10591 छात्र-छात्राओं में सर्वाधिक 5449 यानी 51.54 फीसदी विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में प्रमोट हुए हैं। वहीं, प्रथम श्रेणी में 3975 विद्यार्थियों (37.53 फीसदी) और तृतीय श्रेणी में सबसे कम 1167 विद्यार्थियों (11 फीसदी) को प्रमोशन दिया गया है। 
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चार साल तक दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण कराने के आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

युवती से चार साल तक दुष्कर्म करने और धर्म बदलने के दबाव डालने के आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिकायत दर्ज कराने वाली पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। कोर्ट ने कहा अपनी मर्जी से चार साल तक आरोपी के साथ रहने वाली पीड़िता को प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश लागू होते ही अचानक अपने अधिकारों की जानकारी हो गई। उसके कृत्य से उसकी मानसिकता उजागर होती है।

महोबा निवासी मुन्ना खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने कहा कि पीड़िता याची के सभी कार्यों में अपनी मर्जी से सक्रिय सहभागी रही है। इससे जाहिर है कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ रह रही थी और यहां तक की दूसरे व्यक्ति के साथ शादी हो जाने के बाद भी उसने आरोपी से रिश्ते बनाए रखे। याची मुन्ना खान के खिलाफ पीड़िता ने चार मार्च 2021 को महोबा कोतवाली में आईपीसी की धाराओं के अलावा धर्मांतरण विरोधी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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