लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक, सब्जी की खेती कर बने आत्मनिर्भर

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Wed, 03 Jun 2020 09:57 PM IST
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फोटो 12, अश्विनी तिवारी सब्जी किसान।
फोटो 12, अश्विनी तिवारी सब्जी किसान। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR

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राजेसुल्तानपुर। लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद शहाबुद्दीनपुर निवासी अश्विनी तिवारी सब्जी की खेती के जरिए तरक्की का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। वे यह मिथक तोड़ने की कोशिश में जुटे हैं कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद आय का जरिए सिर्फ नौकरी ही है। वे अपने गांव में ही बिना संकोच बड़े पैमाने पर सब्जी का उत्पादन कर युवाओं के लिए नई प्रेरणा व उर्जा देने का काम कर रहे हैं। बताते हैं कि लॉकडाउन के इस दौर में थोड़ी मुश्किल जरूर हो रही है, लेकिन आम दिनों में सब्जी की खेती से आर्थिक प्रगति का मार्ग तय हो रहा है।
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शहाबुद्दीनपुर निवासी अश्वनी तिवारी पिछले पिछले कई वर्ष से सब्जी की खेती करते आ रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के बाद कहीं रोजगार तलाशने की बजाए उन्होंने खेती को अपने रोजगार का माध्यम बनाया। बताया कि गत वर्ष उन्होंने 2 बीघा करैला की खेती की थी। इसमें उन्होंने करीब 60 हजार रुपए की लागत लगायी थी। इसके एवज में उन्हें करीब 1 लाख 40 हजार रुपए का लाभ मिला, 10 बिस्वा भिंडी में 10 हजार रुपए की लागत लगाकर खेती की थी।
इसमें करीब 60 हजार रुपए का लाभ मिला। इससे पहले के वर्ष में भी उन्हें सब्जी से अच्छा खासा मुनाफा हुआ था। इस बार 1 बीघा लौकी की खेती में 20 हजार रुपए, एक बीघा खीरा में 18 हजार रुपए, एक बीघा कद्दू में 25 हजार रुपए, 1 बीघा करैला में 35 हजार रुपए तथा 2 बीघा भिंडी में करीब 40 हजार रुपए की लागत लगाया। फसल भी अच्छी हुई, लेकिन जब सीजन आया तो लॉकडाउन हो गया। इससे आय जरूर प्रभावित हुई है, लेकिन उनका हौसला कम नही हुआ है।
बकौल अश्विनी लॉकडाउन की मार से सब्जी की खेती प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन यह सिर्फ इस वर्ष की बात है। ऐसी परिस्थितियां आती जाती रहेंगी, लेकिन सब्जी की खेती के जरिए आर्थिक तरक्की का मार्ग तय करने से वे पीछे नहीं हटेंगे। अन्य युवाओं को भी कृषि कार्यों में भरपूर रुचि लेनी चाहिए। कृषि प्रधान देश होने के कारण युवाओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। रोजगार के सिलसिले में इधर उधर भटकने की बजाए अच्छा हो कि पढ़े लिखे युवक भी पूरी रुचि के साथ खेती की तरफ ध्यान दें। इससे एक तरफ जहां वे अपने परिवार के साथ रहने का सुख उठा सकेंगे, वहीं सब्जी के जरिए आर्थिक मजबूती भी हो सकेगी।
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