धनुष टूटते ही झूम उठे दर्शक, लगने लगे जय श्रीराम के जयकारे

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 11:15 PM IST
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फोटो-11, अंबेडकरनगर के बहोरिकपुर में आयोजित रामलीला में मंचन करते कलाकार
फोटो-11, अंबेडकरनगर के बहोरिकपुर में आयोजित रामलीला में मंचन करते कलाकार - फोटो : AMBEDKAR NAGAR

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अंबेडकरनगर। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र अन्तर्गत श्रीरामलीला समिति बहोरिकपुर में गुरुवार रात कलाकारों ने फुलवारी लीला, रावण-बाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ व लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मनमोहक मंचन किया। सीता स्वयंवर में भगवान श्रीराम ने जैसे ही धनुष पर चाप चढ़ाई तो जय श्रीराम के जयकारों से पंडाल गुंजायमान हो गया। देर रात तक चले मंचन का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया।
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दूसरे दिन के मंचन का शुभारंभ भगवान श्रीराम की भव्य आरती से हुई। समिति संचालक प्रदीप श्रीवास्तव, भूपेंद्र मोहन श्रीवास्तव, प्रवीण उपाध्याय आदि ने श्रीराम स्तुति प्रस्तुत कर भगवान श्रीराम की आरती की। मंचन के पहले दृश्य में दिखाया जाता है कि विश्वामित्र यज्ञ करते हैं, जहां मामा मरीच राक्षसों के साथ पहुंचकर यज्ञ को दूषित कर विघ्न उत्पन्न कर देता है। राक्षसों की इस उद्दंडता को देख विश्वामित्र काफी नाराज होते हैं। मंचन की अगली कड़ी में विश्वामित्र अयोध्या पहुंचते हैं और राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की बात करते हैं। यह सुन दशरथ दुखी हो जाते हैं।
कहते हैं कि गुरुदेव राम और लक्ष्मण सुकुमार हैं। वे दोनों उन राक्षसों का सामना कैसे कर पाएंगे। इस पर विश्वामित्र काफी नाराज होते हैं। हालांकि गुरू वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ राम और लक्ष्मण को उनके साथ भेज देते हैं। रास्ते में भगवान श्रीराम ताड़का नाम की राक्षसी का उद्धार करते हैं। इसके बाद गुरु आश्रम पहुंचकर राक्षसों से यज्ञ की रक्षा करते हैं।
मंचन के अगले दृश्य में गुरु विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुर सीता स्वयंवर के लिए प्रस्थान करते हैं। रास्ते में भगवान श्रीराम पति की श्राप से शिला बनी अहिल्या का उद्धार करते हैैं। जनकपुर पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाता है। इसी कड़ी में फुलवारी लीला का भी मंचन कलाकारों ने किया। उधर सीता स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के महाबली सीता से शादी का अभिलाषा लेकर स्वयंवर में विराजमान होते हैं। राजा जनक अपना प्रण सुनाते हैं। इसके बाद धनुष पर चाप चढ़ाने का क्रम शुरू होता है।
तमाम प्रयासों के बाद कोई भी महाबली धनुष को उठाना तो दूर उसे हिला सकने में भी सामर्थ्य नहीं दिखा। राजा जनक की पीड़ा को देख गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम धनुष को एक हाथों से उठा लेते हैं। यह देख सभा में मौजूद सभी राजा सन्न हो जाते हैं। चाप चढ़ाने के दौरान धनुष खंडित हो जाता है, जिसके आवाज से दिशाएं कंपायमान हो जाती हैं। अगले दृश्य में धनुष् तोड़ने को लेकर भगवान परशुराम व लक्ष्मण में तीखी बहस भी होती है। मंचन के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया गया।

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