स्नातक की छात्रा दो घंटे के लिए बनी उपजिलाधिकारी

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 10:30 PM IST
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नानपारा तहसील में दो घंटे के लिए एसडीएम बनी कल्पना द्वारा की जा रही जनता सुनवाई।
नानपारा तहसील में दो घंटे के लिए एसडीएम बनी कल्पना द्वारा की जा रही जनता सुनवाई। - फोटो : BAHRAICH

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नानपारा (बहराइच)। मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत नानपारा नगर निवासी स्नातक की छात्रा कल्पना जायसवाल को आईएएस सूरज पटेल ने दो घंटे का एसडीएम बनाया। छात्रा ने चार्ज संभाला। इसके बाद नायब तहसीलदार के साथ कार्यालयों व पटलों का निरीक्षण किया। तीन ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। जिसे निपटाने के निर्देश अधीनस्थों को दिए। एसडीएम ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने पर बल दिया।
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नानपारा के मोहल्ला जुबलीगंज निवासी कल्पना जायसवाल स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा है। वह रुपईडीहा में स्थित सीमावर्ती महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रही है। छात्रा को मिशन शक्ति अभियान के तहत उपजिलाधिकारी आईएएस सूरज पटेल ने दो घंटे के लिए एसडीएम बनाया। कल्पना ने उपजिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठकर दो घंटे के लिए चार्ज लिया। कल्पना ने तहसील में आए तीन फरियादियों की समस्याएं सुनीं। समस्याएं सुनकर कार्रवाई करने का आदेश अधीनस्थों को दिया। इसके बाद नायब तहसीलदार मनीष कुमार वर्मा ने एसडीएम कल्पना को तहसील सभागार के सभी विभागों का निरीक्षण कराया तथा उनके कार्यों के बारे में भी बताया।
एसडीएम के कार्यकाल के दौरान एएसपी ग्रामीण अशोक कुमार, एसडीएम सूरज पटेल, क्षेत्राधिकारी डॉक्टर जंग बहादुर यादव तथा नायब तहसीलदार मनीष कुमार वर्मा मौजूद रहे। उपजिलाधिकारी कल्पना ने इस क्षण को अपने जीवन का एक बहुत ही स्मरणीय बताते हुए कहां कि यह मेरे छात्र जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। मुझे इतना बड़ा सम्मान तहसील प्रशासन की ओर से दिया गया और मुझे दो घंटे के एसडीएम की कुर्सी पर बैठने का अवसर मिला। उसने कहा कि पढ़ाई कर प्रशासनिक सेवा में आने के लिए अथक प्रयास करूंगी।
पिता की हो चुकी है मौत
दो घंटे के लिए उपजिलाधिकारी बनी कल्पना ने बताया कि परिवार में पिता की मौत अरसा पूर्व हो चुकी है। पिता की मौत होने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पाए गए पैसे से मेरी मां ने आवास बनवाया। मां तीन बहनों का भरण पोषण किया। एक छोटा भाई भी है जो भी पढ़ाई के साथ एक प्राइवेट कंपनी में कार्य कर रहा है। ऐसे में निम्न परिवार की बेटी को उपजिलाधिकारी द्वारा अपनी कुर्सी पर बैठा कर जो सम्मान दिया, उसके लिए मैं आजीवन ऋणी रहुंगी।
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