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एक माह तक वृंदावन बिहारी जी मंदिर में कराएं चन्दन तुलसी इत्र सेवा , मिलेगा नौकरी व व्यापार से जुड़े समस्याओं का समाधान
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एक माह तक वृंदावन बिहारी जी मंदिर में कराएं चन्दन तुलसी इत्र सेवा , मिलेगा नौकरी व व्यापार से जुड़े समस्याओं का समाधान

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कोई रह रहा खुद क्वारंटीन तो कोई कर रहा मनमानी

जयप्रकाश नगर। लॉकडाउन लागू होने के कारण कई राज्यों व जनपदों में लोग फंस गए थे जो धीरे धीरे अब घरों को पहुंच रहे हैं। जब से इनका आना शुरू हुआ तब से जनपद में कोरोना संक्रमण भी सामने आने लगा है।
कुछ प्रवासियों ने तो स्वयं अपने घर छोड़कर निजी व्यवस्था पर बाहर रहकर क्वारंटीन हो रहे हैं तो कुछ प्रधानों द्वारा भोजन आदि की व्यवस्था से क्वारंटीन सेंटरों पर रह रहे हैं। लेकिन सेंटरों पर रहने वाले लोग पूरे दिन गांव व अन्य स्थानों पर घूम रहे हैं। क्षेत्र के मठ योगेंद्र गिरि निवासी कुश कुमार गुप्ता, हंस कुमार गुप्ता, राजू गुप्ता, रोहित गुप्ता पूणे में रहकर कार्य किया करते थे। लॉकडाउन होते ही सभी कार्य बंद हो गए। कुछ दिनों तक यह लोग काफी दिन इंतजार करते रहे कि लॉकडाउन खुलेगा लेकिन जब नहीं खुला और उनके पास का पैसा समाप्त होने लगा इन लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया। इसके बाद सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेन से अपने गांव पहुंचे। इन लोगों ने घर पर रहने से मना करते हुए मठ योगेंद्र गिरी चट्टी पर स्थित बन्द दुकान में अपनी व्यवस्था बनाकर रहने लगे। इसी तरह कई लोग अब बाहर से आ रहे हैं तो अपने खेतों व बागीचों में क्वारंटीन रह रहे हैं। लेकिन कुछ गांवों में आए प्रवासी क्वारंटीन सेंटरों पर रह रहे हैं और यह मनमाने तरीके से घूम रहे हैं।
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रिहाई के लिए कार्यकर्ताओं ने रखा उपवास

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को कांग्रेसियों नें बलिया जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में उपवास रखा। इसके पूर्व कांग्रेसजनों ने चाचा नेहरू के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
इस दौरान जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि सरकार पुलिस के बल पर प्रदेश अध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के ऊपर लगाए गए फर्जी मुकदमे वापस लेने और तत्काल रिहा करने की मांग की। उपवास करने वालों में मुख्य रूप से विवेकानंद पाठक, फूलबदन तिवारी, विजय कुमार मिश्रा, बृजेश सिंह गाट, सुनील कुमार सिंह, विपिन कुमार पांडे, शिवप्रताप ओझा, अभिजीत तिवारी, सत्यम, विवेक ओझा, बंटी मिश्रा, जैनेंद्र पांडे, अमित दूबे, मिंटू, प्रमोद तिवारी, डबलू तिवारी, दिनेश राजभर आदि रहें।
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सड़क किनारे महिला का शव मिला

चिलकहर चोगड़ा मार्ग पर रेलवे क्रासिंग से लगभग 700 मीटर दूर सड़क किनारे महिला का शव पड़ा मिला। सूचना पर पुलिस पहुंची और चिलकहर के गोरख ने उसकी पहचान अपनी मौसी सास के रूप में की।
गोरख ने बताया कि महिला का नाम माया देवी (45) पत्नी राजेंद्र था। वह उसके यहां लॉकडाउन से पहले ही आई थी और फिर यहीं फंस गई थी। उसने बताया कि बुधवार को सुबह सात बजे वह घर से हजौली जाने के लिए निकली थी। उसकी मौत कैसे हुई इसे लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थी। कोई कह रहा था कि अत्यधिक गर्मी के कारण उसकी मौत हुई हो सकती है तो कोई हादसे में मौत की बात कर रहा था। पुलिस चौकी प्रभारी संवरा जयशंकर राठौड़ ने बताया कि शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने पर ही मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
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मंत्री और सांसद के लापता होने का पोस्टर लगाने वाले छात्र नेता गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पिछले दिनों शहर में मंत्री व सांसद के लापता होने का पोस्टर देख लोग चौंक गए थे। पोस्टर में उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला व भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के लापता होने का आरोप लगाया गया था।
पोस्टर शहर के चौक स्टेशन रोड कचहरी आदि इलाकों में लगाए गए थे। इसके बाद भाजपा नेताओं ने पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने बुधवार की देर रात सतीश चंद्र कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष समेत दो छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।


बलिया शहर कोतवाली के प्रभारी विपिन सिंह ने बताया कि भाजपा नेता सुशील पांडेय की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें सतीश चंद्र डिग्री कालेज के पूर्व अध्यक्ष रोहित चौबे और मनन दुबे पर आरोप था कि उन्होंने प्रदेश के संसदीय कार्य राज्य मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल व भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की छवि को पोस्टर के माध्यम से नुकसान पहुंचाया है।
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गिरफ्तार छात्र नेता। गिरफ्तार छात्र नेता।

लू व भीषण गर्मी से चमगादड़ों की हो रही मौत..

मनियर। कोरोना वायरस का दंश पूरा विश्व झेल रहा है। कुछ जानकार इस वायरस के चमगादड़ से उत्पन्न होने की आशंका जता चुके हैं। पेड़ों से लू के थपेड़ों एवं भीषण गर्मी से चमगादड़ों को पेड़ों पर से गिरने एवं उन्हें कुत्तों के खाने के कारण क्षेत्र में दहशत व्याप्त है।
मनियर थाना क्षेत्र के बिशुनपुरा गांव के खड़ैंचा मौजे में साधन सहकारी समिति के पास बगीचे में कई वर्षों से पेड़ों पर चमगादड़ रह रहे हैं। पिछले दिनों चले लू के थपेड़ों एवं भीषण गर्मी के चलते चमगादड़ दर्जनों की संख्या में विगत सोमवार से पेड़ों से गिर रहे हैं। उन्हें कुत्ते इधर-उधर फैलाकर नोच रहे हैं। चमगादड़ों की मौत की सूचना ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्रीराम तिवारी उर्फ बब्लू ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सहाबुद्दीन को दिया। डॉक्टर सहाबुद्दीन सूचना पर चिकित्सकों की टीम एवं वन विभाग मौका मुआयना किया। जिसमें डॉ. लाल बहादुर, डॉक्टर के पी नारायण, डॉक्टर राज भैरव, प्रेमशंकर सिंह सहित आदि लोग मौजूद थे। इस संदर्भ में सीवीओ बलिया डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि तापमान ज्यादा बढ़ रहा है। इसकी वजह से चमगादड़ मर रहे हैं। उनका सैंपल आईवीआरआई बरेली जांच के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया है। जिसमें पशु चिकित्सा व वन विभाग के के लोग हैं।
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बेल्थरारोड विधायक ने सीएम को भेजा पाती

बेल्थरारोड। विधायक धनंजय कन्नौजिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेज कोटेदारों द्वारा राशन वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है। पत्र में उल्लेख है कि इस आपातकाल में लाभार्थियों को सहयोग और लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे दिन प्रतिदिन खाद्यान्न का संकट बढ़ता ही जा रहा है। कहा कि बेल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सीयर और नगरा ब्लाक के अधिकांश कोटेदारों द्वारा राशन वितरण में बड़े पैमाने पर घटतौली और मनमानी की शिकायतें मिल रही हैं। जिस पर मैंने व्यक्तिगत रूप से कोटेदारों से बात करके इस आपातकाल की स्थिति में लाभार्थियों के हित के विषय में सोचने और कार्य करने के लिए कई प्रयास भी किए, परंतु इस पर कोटेदारों द्वारा मनमानी का ही स्वरूप बना हुआ है। जिससे जनता को राशन सुविधा का भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है। विधायक ने मुख्यमंत्री से एक विजिलेंस टीम गठित कर राशन वितरण में धांधली कर रहे कोटेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की, ताकि कार्ड धारकों को त्वरित लाभ प्राप्त हो सके। बताया कि पूर्व में कोटेदारों द्वारा राशन वितरण में मनमानी की समस्या पर गत दस फरवरी को मुख्यमंत्री को पत्र दिया जा चुका है, किंतु अभी तक कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। ... और पढ़ें

घर पहुंचने से पहले जिंदगी की जंग हारे पूर्वांचल के आठ प्रवासी

लंबी जद्दोजहद के बाद घर के लिए चले आठ प्रवासी बुधवार को रास्ते में ही जिंदगी की जंग हार गए। तीन लोगों ने बलिया में जान गंवा दी। दो लोग वाराणसी पहुंची ट्रेन में म़त मिले। जौनपुर में एक की क्वारंटीन सेंटर और दूसरे की अस्पताल में जान चली गई। मिर्जापुर में एक प्रवासी की बस में तबीयत खराब हुई और अस्पताल पहुंचने के बाद दम तोड़ दिया। 

मुंबई से वाराणसी आई श्रमिक स्पेशल ट्रेन में जौनपुर के बदलापुर निवासी दशरथ प्रजापति (20), रौनापार, आजमगढ़ निवासी रामरतन गौड़ (50) मृत मिले। सूरत से ट्रेन से बिहार के छपरा जाते समय भूषण सिंह (58) की बलिया पहुंचने से पहले ही ट्रेन में मौत हो गई।

महाराष्ट्र से ट्रेन से हाजीपुर जाते समय नेपाल के शोभरन को तबीयत बिगड़ने पर बलिया में उतारा गया, जिला अस्पताल ले गए जहां मौत हो गई। सूरत से बस से बलिया पहुंचे बैरिया निवासी मुनीब शाह (25) को बीमार होने पर अस्पताल ले जाया गया जहां मौत हो गई।  

मुंबई से ट्रेन से लौटे मुंगराबादशाहपुर निवासी आजम खां (45) को मछलीशहर के क्वारंटीन सेंटर भेजा गया था, यहां जांच के लिए लाइन में खड़े रहने के दौरान तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने के बाद मौत हो गई। मुबई से ट्रेन से जौनपुर आई जलालपुर के ठौर गांव की प्रेमशीला की जौनपुर जंक्शन पर उतरने के बाद तबीयत बिगड़ी और जिला अस्पताल ले जाने के दौरान सांसें थम गईं। मिर्जापुर के चैनपुरा ग्राम पंचायत निवासी शिवलोचन (55) मुंबई से बस से लौट रहे थे, मध्यप्रदेश के सागर जिले में बीमार हो गए। वहां के जिला अस्पताल में ले जाने के दौरान जान चली गई।
 
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महिला को भगाने व दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार, जेल

बलिया। पिता की बीमारी का बहाना बना नवविवाहिता को भगाकर दुष्कर्म करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर बुधवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया।
एक गांव की महिला से एक युवक एकतरफा प्यार करता था। युवक ने योजनाबद्ध तरीके से महिला के पिता की बीमारी का बहाना बनाकर 22 नवम्बर 2017 की रात में फोन कर घर का दरवाजा खुलवाया। इसके बाद उसे घर से जबरन अपने सहयोगियों के साथ लेकर भाग गया। कई दिनों तक इधर उधर रहने के बाद महिला को लेकर आरोपी मुम्बई चला गया। वहां साथियों के साथ दुष्कर्म करता रहा। पीडि़ता के पति ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही उसकी तलाश जारी रखा। उधर, किसी तरह महिला उसके चंगुल से भागकर बलिया आई और न्यायालय की शरण में गई। जहां सीजेएम के आदेश पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की तलाश में शुरु कर दी। बुधवार को पुलिस ने आरोपी गड़वार थाना क्षेत्र के जनउपुर निवासी चन्दन पुत्र मोहन राजभर को गिरफ्तार कर कर न्यायालय में पेश किया।
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13 नामजद व एक अज्ञात पर तीसरा दलित उत्पीड़न का केस दर्ज

बैरिया। सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 24 मई को हुए बवाल के मामले में बैरिया पुलिस ने तीसरा मुकदमा दलित उत्पीड़न का दर्ज किया है। यह मुकदमा अर्जुन पासवान निवासी किशुनपुरा थाना दोकटी की तहरीर पर मंगलवार की देर शाम दर्ज किया गया। इसमें प्रशांत उपाध्याय, विनय उपाध्याय, रजनीश उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय, अजीत उपाध्याय, दीपक उपाध्याय, चुन्नू उपाध्याय, पिंटू उपाध्याय, रवि उपाध्याय, किशन उपाध्याय, अमित उपाध्याय, अंकित उपाध्याय निवासी सोनबरसा को नामजद किया गया है। मामले में दूसरे पक्ष की भगमनिया देवी पत्नी स्व. विश्वनाथ राम निवासी मठ योगेंद्र गिरी के मठिया की तहरीर पर ओमप्रकाश यादव, धमेंद्र यादव, हीरा यादव, वीरेंद्र यादव, गोपाल यादव, जितेंद्र यादव, कमलेश यादव, बिजली यादव, अंकित यादव, उधारी यादव व एक अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज कर चुकी है।
मालूम हो कि सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 24 मई की देर शाम दो दर्जन से अधिक लोग अस्पताल परिसर में आए और मेडिकोलीगल बनाने के लिए तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. अविनाश पर दबाव बनाने लगे। उनके द्वारा मना करने पर अस्पताल परिसर में हो-हल्ला मचाया और बवाल काटा। सोनबरसा निवासी कृष्ण कुमार उपाध्याय से उक्त लोगों ने मारपीट व हाथापाई की। इसके बाद चिकित्साधिकारी डॉ. अविनाश ने दो दर्जन अज्ञात लोगों पर अस्पताल परिसर में बवाल करने, शांतिभंग करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने व गोलबंद होकर अपराध करने का मामला बैरिया थाने में दर्ज कराया था। उधर, अर्जुन पासवान का आरोप है कि 24 मई को इलाज कराने पहुंचे थे, जहां पर पहले से मौजूद प्रशांत उपाध्याय व उनके साथ के अन्य लोगों ने रुपये की मांग की। मेरे द्वारा देने से इंकार किया गया तो मुझे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारने लगे। इसी बीच ओमप्रकाश व गोपाल यादव आदि पहुंचे और बीचबचाव करने लगे। तब उन्हें भी राड व चाकू से हमलाकर घायल कर दिया गया। जाते-जाते वे जान से मारने की धमकी भी दे गए।
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उद्योग जारी, सप्लाई ठप, उद्यमियों के साथ ग्रामीण महिलाओं की कमाई बंद

मनियर। वैसे तो बलिया जिला उत्पाद शून्य है। यहां लघु या मध्यम ऑन रिकॉर्ड कोई भी उद्योग नहीं है। हां, जिले के मनियर नगर पंचायत में बिंदी बनाने का काम कुटीर उद्योग की तर्ज पर होता है। यहां के उद्यमी बाहर से कच्चा माल लाते हैं उसकी काट-छांट करते हैं। इसके बाद महिलाओं के घर दे आते हैं। अपने दैनिक कार्य निपटाने के बाद महिलाएं बिंदी के पत्ते तैयार करती हैं और उद्यमी बाद में आकर उन्हें ले जाते हैं। फिर संख्या के आधार पर महिलाओं को पैसे दिए जाते हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक समस्या भी दूर होती है। लेकिन कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगे लाकडाउन के कारण यह उद्योग भी ठप पड़ा हुआ है। माल की सप्लाई और कच्चा माल ना मिलने से उद्यमियों की कमर टूट गई है। उद्योग ठप पड़ने के कारण महिलाओं को होने वाली आर्थिक मदद भी पूरी तरह से बंद हो गई है।
जिला उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस कार्य में लगभग 500 से 650 महिलाएं लगी हुई हैं। इसके लिए उन्हें एक दिन की मजदूरी के रूप में 100-150 रुपये तक प्राप्त हो जाते हैं। महिलाएं इसे पार्ट टाइम जॉब के तौर पर करती हैं।
1950 बिंदी उद्योग की शुरूआत
मनियर कस्बा दशकों से बिंदी (टिकुली) उद्योग के लिए मशहूर है। बिंदी के बहुत से कुटीर उद्योग यहां पर वर्षों से चल रहे हैं। इस उत्पाद का व्यापार स्थानीय बाजारों के अतिरिक्त देश के विभिन्न भागों में भी होता है। यह उद्योग जनपद के लिए आय का एक बहुत बड़ा स्रोत है। बताया जाता है कि मनियर में बिंदी उद्योग की शुरुआत 1950 के करीब हुई थी। तब शीशे को गला कर बिंदी बनती थी। उस पर सोने और चांदी का पानी चढ़ाकर खूबसूरत बिंदी बनाने का काम किया जाता था।
इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुस्लिम परिवार के लोग कोलकाता और अन्य जगहों पर जाकर नई डिजाइन की बिंदी बनाने के गुर भी सीखते थे और उसे यहां के कारीगरों से बनवाते थे। 1975 के आसपास शीशे की बिंदी का चलन समाप्त हुआ और बाजारों में नए किस्म की बिंदी आने लगी। हालांकि बदलते समय के अनुसार मनियर का बिंदी उद्योग तरक्की की राहों में इसलिए पीछे रह गया कि क्योंकि इस ओर कारीगर अपना पांव ही आगे नहीं बढ़ाना चाहते। वे इस ओर प्रयास करें तो वे भी आधुनिक तरीके से बिंदी का निर्माण कर सकते हैं।
यह सही है कि लाकडाउन ने कई उद्योगों की कमर तोड़ी है। उसमें मनियर का बिंदी उद्योग भी शामिल है। पहले लाकडाउन में वाहनों के नहीं चलने के कारण दिक्कत हुई थी। अब उद्यमियों को जरूरत के अनुसार विभाग की ओर से पास बनवा कर दिया जा रहा है। वे देश में कहीं भी अपने माल की सप्लाई कर सकते हैं और कच्चा माल ला सकते हैं।
- राजीव मिश्रा, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, बलिया
पहले की अपेक्षा अब कुछ बिंदी उद्योग अच्छा है। लाकडाउन में छुट के बाद उद्योग को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लाकडाउन ने उद्योग को कई साल पीछे कर दिया है। इस समय ग्राहक बिंदी की मांग ही नहीं कर रहे हैं।
शेराज शमशिद, बिंदी उद्यमी
तैयार माल बाहर ले जाने में परेशानी हो रही है। पास नहीं बनने के कारण हम लोगों का माल बाहर नहीं जा पा रहा है। एडीएम के यहां गुहार लगाई गई फिर भी पास नहीं बन रहा है, इससे माल रुका हुआ है। जब तक माल की डिलीवरी नहीं करेंगे, नया माल कहां से लाएंगे।
इफ्तेखार अहमद, बिंदी उद्यमी
प्रदेश व अन्य जगहों पर माल नहीं जा पा रहा है। यह दिक्कत वाहनों का पास नहीं बनने के कारण आ रही है। पास नहीं बनने से हमें माल को बेचने में समस्या उत्पन्न हो रही है। वहीं देहात में भी लोग काम करने से कतरा रहे हैं।
इरफान अहमद, बिंदी उद्यमी
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सरकार की तरफ से बिंदी बनाने वाले को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है। खुद से उद्योग को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है, फिर भी माल सप्लाई नहीं हो पा रही है। एक जनपद एक उत्पाद के नाम पर बलिया को बिंदी उद्योग को शामिल करने के बाद भी कोई लाभ समझ में नहीं आ रहा है।
प्रिंस खान, बिंदी उद्यमी
लाकडाउन के चलते घरों में रहने पर परेशानी तो है, लेकिन सबसे पहले अपने आपको और परिवार को सुरक्षित रखते हुए भी बिंदी का काम करने जाने पर कहते हैं की माल की सप्लाई ही नहीं हो रही तो हम काम कहां से दें।
चांदमुनी देवी, बिंदी कारीगर
लाकडाउन के चलते बिंदी उद्योग का कार्य नियमित नहीं चल रहा है। इसलिए इस धंधे को छोड़ कर रोजी रोटी के लिए हम लोग अन्य धंधे की सोच रहे हैं। यदि ऐसा नहीं किया गया, अब लगता है कि परिवार का भरण पोषण भी मुश्किल हो जाएगा।
लालती देवी, बिंदी कारीगर
----------------लाकडाउन के चलते तैयार माल पर धूल जम रही है। माल खराब हो रहा है। माल की सप्लाई नहीं हो पाने से अब काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब तो यही लग रहा है कि इस काम से किनारा करना पड़ेगा। हालांकि इससे काफी राहत हो जाती थी और घर का खर्च चलाने में आसानी होती थी।
तारा देवी, बिंदी कारीगर
परिवार चलाने में लाकडाउन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते हम लोग बिंदी चिपकाने का कार्य नहीं कर पा रही हैं। चर्चा है कि कोरोना वायरस काफी समय तक कपड़ा, मेटल अन्य वस्तुओं पर सक्रिय रहता है। इधर तो माल भी नहीं मिल रहा है।
कौशल्या देवी, बिंदी कारीगर
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लॉकडाउन में भी तस्करों व रेत माफियाओं की चांदी

बलिया। लॉकडाउन के नियम केवल आम लोगों तक के लिए सीमित होकर रह गए हैं। इन नियमों का असर प्रांतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करों व रेत माफियाओं पर नहीं है। इसका नजारा नरही क्षेत्र ो भरौली गंगा पुल पर देखने को मिल रहा है। शाम होते ही जब लॉकडाउन के चलते लोग घरों में होते हैं तो तस्करों के वाहन खाद्यान्न आदि लेकर फर्राटा भरने लगते हैं। इतना ही नहीं गंगा किनारे जगह जगह सफेद बालू का खनन शुरू हो जाता है। पूरी रात इन तस्करों व रेत माफियाओं का खेल चलता रहता है।प्रांतीय सीमाओं के रास्ते दो तरफा तस्करी सालों से कुख्यात है। खासकर नरही थाना क्षेत्र के भरौली स्थित भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित गंगा पुल तस्करों के लिए मुफीद है। इस लॉकडाउन में सीमा सील होने के बावजूद यह तस्कर अपना खेल जारी रखे हुए हैं। बताया जाता है कि तस्करों के हाथ इतने लंबे हैं कि किसी भी सरकार में इनका धंधा नहीं रुकता है। लॉकडाउन में भी तस्करों ने अपना धंधा जारी रखने का तरीका निकाल लिया है। आवश्यक सेवा के नाम पास लेकर यूपी की सीमा पार करते हैँ बिहार की सीमा में सेटिंग करक वाहनों को पार कराते हैं। शाम ढलते ही खाद्यान्न आदि लदे छोटे वाहनों की गंगा पुल के रास्ते शुुरु हो जाती है। उधर, शाम होने के बाद नरहीं थाना क्षेत्र के गंगा किनारे के गांवों के सामने अवैध सफेद बालू खनन का खेल भी शुरु हो जाता है। इलाके के सरायकोटा, नसीरपुर मठ, सरयां, उजियार, भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, पलियाखास, कोट अंजोरपुर आदि गांवों के सामने रात के अंधेरे में जेसीबी से बालू निकालने का काम शुरु हो जाता है जिसे रात में ही ट्रालियों से जगह-जगह डंप कर दिया जाता है।
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जल्द ही एक टीम सीमावर्ती इलाकों में निगरानी के लिए तैनात की जाएगी जो सभी तरह के पास की जांच करेगी। गंगा किनारे किसी तरह का खनन अवैध है, इसे रोकने का निर्देश खनन विभाग के अधिकारी को दिया जा रहा है।
- राम आसरे, एडीएम, बलिया
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जिले में तीन कोरोना संदिग्ध की मौत, जांच हेतु भेजा गया सैम्पल

बलिया। गुजरात के सूरत से श्रमिक ट्रेन से बिहार के छपरा जाते समय एक वृद्घ की रास्ते में जाते वक्त तबीयत बिगड़ गई और बलिया पहुंचने से पूर्व उसकी मौत हो गई। जबकि दूसरा महाराष्ट्र से बिहार के हाजीपुर जाते वक्त उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसकी जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उधर, तीसरा व्यक्ति सूरत से रोडवेज बस से बलिया आ रहा था, जिसकी बलिया पहुंचने से पूर्व बस में ही तबीयत बिगड़ गई, जिसकी अस्पताल जाते वक्त रास्ते में मौत हो गई। सूचना पर पहुंची जीआरपी व सिविल पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजवाया। जहां तीनों को कोराना संदिग्ध मानते हुए जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा जांच के लिए सैम्पल भेजा जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार बिहार के छपरा जिला निवासी भूषण सिंह 58 पुत्र अयोध्या गुजरात के सूरत में किसी प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। जहां श्रमिक स्पेशन ट्रेन से अपने घर जा रहे थे। जिनकी श्रमिक स्पेशल ट्रेन में तबीयत खराब हो गई और बलिया पहुंचने से पूर्व उनकी मृत्यु हो गई। इसकी जानकारी होते ही बलिया जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जबकि दूसरा नेपाल देश के जनकपुर जिला के दुभी थाना क्षेत्र के चिकाना निवासी शोभरन पुत्र रामनारायण महाराष्ट्र से स्पेशल ट्रेन से हाजीपुर जा रहा था। जिसकी ट्रेन में तबीयत बिगड़ने पर उसके दोस्तों ने उसे बलिया में ट्रेन को रुकवा कर जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टर ने कोरोना संदिग्ध मानते हुए दोनों शवों को मर्चरी में रखवाया। वहीं तीसरा बैरिया थाना क्षेत्र के बैरिया निवासी मुनीब शाह (25) पुत्र केशव शाह सूरत से रोडवेज बस से मंगलवार की देर शाम बलिया पहुंचे थे। जिनकी तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अंत्य परीक्षण के लिए भेजा। उधर, जिला अस्पताल प्रशासन तीनों को कोरोना संदिग्ध मान रहा हैं और तीनों का सैम्पल जांच के लिए भेज रहा है। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस डा. बीपी सिंह ने बताया कि तीनों शवों को मर्चरी हाउस में रखवा दिया गया हैं और तीनों शवों का सैम्पल जांच के लिए भेजा जाएगा।
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