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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा

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Coronavirus in UP Live Updates: प्रदेश में 80 संक्रमित, लखनऊ में 9 दिनों से नहीं मिला कोई मरीज

शासन और प्रशासन संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लोगों से भी हर वक्त घरों में रहने की अपील की जा रही है।

30 मार्च 2020

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बांदा

सोमवार, 30 मार्च 2020

अब मस्जिदें भी बंद, नहीं हुई जुमे की नमाज

बांदा। ईश्वर-अल्लाह एक ही नाम, सबको सम्मति दे भगवान। बापू का यह प्रिय भजन कोरोना के खौफ और लॉकडाउन की पाबंदी से हकीकत बन गया। ईश्वर और अल्लाह दोनों के ही दर और द्वार बंद हो गए हैं। नवरात्र पर जहां सभी प्रमुख देवी मंदिरों के पट बंद हैं, वहीं लॉकडाउन के बाद शुक्रवार को पहले जुमे में मस्जिदों के भी गेट नहीं खुले। लोगों ने घरों पर जुमा/जोहर की नमाज अदा की।
शहर की प्रमुख नवाबी जामा मस्जिद समेत शेख सरवर की मस्जिद, रब्बानिया मस्जिद, हाथी खाना मस्जिद, ऊंट मोहाल मस्जिद, बोड़े की मस्जिद, मरकज वाली मस्जिद सहित शहर की अन्य मस्जिदों में भी जोहर में नमाजों की भीड़ नहीं जुटी।
इसके लिए पहले से ही मुस्लिम धर्मगुरुओं मुफ्ती, मौलाना, शहरकाजी आदि ने एलान किया था। उधर, महेश्वरी देवी मंदिर, काली देवी, सिंहवाहिनी, चौसठ जोगिनी, कालिका देवी मंदिर और जनपद के कस्बों व गांवों में स्थित प्रमुख देवी मंदिरों के पट भी बंद हैं। नवरात्र पर यहां दर्शन पूजा की अनुमति नहीं है।
नवरात्र के तीसरे दिन भी बंद पड़ा बांदा के प्रमुख महेश्वरी देवी मंदिर का गेट।
नवरात्र के तीसरे दिन भी बंद पड़ा बांदा के प्रमुख महेश्वरी देवी मंदिर का गेट।- फोटो : BANDA
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महानगरों से लौटे मजदूर घर में ही हुए बेगाने

अतर्रा/ओरन। महानगरों से लौट रहे पलायित मजदूरों को लेकर उनके अपने ही अब बेगाने हो गए हैं। उनके गांव वालों को इन मजदूरों में कोरोना वायरस का खतरा नजर आ रहा है। रिश्ते और मानवीय संवेदनाएं हांसिए पर आती जा रही हैं। गांवों के प्रवेश रास्ते पर अवरोध खड़े कर दिए गए हैं। पुलिस भी जनपद की सीमाओं पर नाकाबंदी किए हुए है।
रोजाना महानगरों से लौटने वालों का सिलसिला जारी है। भले ही उनमें कोरोना या कोई और बीमारी के लक्षण न हों, लेकिन उनके गांव वालों को वह खतरा नजर आ रहे हैं। घर के परिजन भी उनसे दूरी बना रहे हैं। इसके लिए रास्ते रोके जा रहे हैं। अतर्रा नगर में लाल थोक में यहां के बाशिंदों ने बस्ती में दाखिल होने वाली मुख्य सड़क पर बैलगाड़ी और अन्य अवरोध खड़े कर दिए हैं। ताकि कोई दाखिल न हो पाए।
घरों की दीवारों पर लिख दिया है कि- लॉकडाउन तक कोई उनके गांव न आए। उधर, बांदा-चित्रकूट की सीमा पर ओरन क्षेत्र के सिंहपुर पहडिय़ा के नजदीक बागै नदी पुल पर पुलिस ने बैरियर लगाकर रास्ता सील कर दिया है। सिर्फ आवश्यक सामग्री ही आने दी जा रही है। सिंहपुर चौकी इंचार्ज राजेश यादव यहां निगरानी कर रहे हैं।
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राहगीरों को रोका-टोका, सब्जी के भाव लिए

बांदा। लॉकडाउन में शहर का जायजा लेने शुक्रवार को डीएम अमित सिंह बंसल और एसपी डा.सिद्धार्थ शंकर मीणा लाव लश्कर के साथ निकल पड़े। डीएम ने एक तरफ जहां सब्जी मंडी में घुसकर दुकानदारों से भाव पूछे। वहीं सड़कों पर नजर आए लोगों को रोका-टोका। कुछ को बेवजह घूमने पर चेतावनी दी।
डीएम औ र एसपी ने भ्रमण की शुरूआत अलीगंज पुलिस चौकी से की। मंडी समिति, छोटी बाजार, छिपटहरी, कोतवाली रोड आदि का पैदल भ्रमण किया। मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि लॉकडाउन का कड़ाई से अनुपालन कराएं। डीएम ने सब्जी मंडी में सब्जियों के भाव पूछे। गैस लेकर जा रहे हॉकरों को रोककर उनसे पूछताछ की और सिलेंडर के रेट की जानकारी ली।
शाम को शहर की सड़कों को डिस इन्फेक्शन करने के लिए हाइपो सोडियम क्लोराइड सॉल्यूशन का फायर ब्रिगेड के चार फायर टेंडरों से शहर में छिड़काव कराया। इन्हें हरी झंडी देकर अलीगंज चौकी से रवाना किया। कहा कि तीन दिन शहर में यह छिड़काव चलेगा। कुछ मोबाइल फोन पर कोरोना वायरस की दवा मिलने के फेक और भ्रामक मैसेज पर संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।
व्यापारी की रिपोर्ट, 12 बाइक चालकों पर कार्रवाई
बांदा। लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर पुलिस ने 188 के तहत एक और दुकानदार के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज की है। अब तक तीन दुकानदारों व 23 वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद भी लोग सड़कों पर नजर आ रहे है। ऐसे में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। गुरूवार को प्रतिबंध के बाद भी दुकान खोलने पर एक दुकानदार के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई है। 13 वाहन चालकों का चालान किया गया।
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कैंसर पीड़ित समाजसेवी ने बनाया एलोवेरा सैनिटाइजर

बांदा। बड़ोखर खुर्द गांव में कैंसर पीड़ित समाजसेवी महिला फूला देवी कोरोना वायरस को लेकर भी सक्रिय हो गई हैं। उन्होंने गांव में लगे ग्वारपाठा (एलोवेरा) की पत्तियों के गूदे से सैनिटाइजर तैयार किया है। गांव के लगभग डेढ़ सौ महिला-पुरुषों और नेशनल हाईवे से गुजर रहे मजदूरों को बोतलों में पैक करके बांटा है।
फूला देवी ने बताया कि एलोवेरा में औषधि गुणों की भरमार है। इससे तैयार किया सैनिटाइजर कीटाणुओं और वायरस से बचाएगा। फूला देवी के पुत्र सत्येंद्र कुमार यादव (पूर्व सचिव सपा) ने बताया कि इच्छुक लोगों को वे सैनिटाइजर उनके घर तक पहुंचाएंगे।
कोरोना संक्रमण के मंडराते खतरे के बीच लॉकडाउन में डाक्टर, नर्स, पुलिस, सफाई कर्मी, मीडिया कर्मी और राहत व बचाव से जुड़े अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों के प्रति बच्चों ने अपना आभार और सम्मान खुद के हाथों से तैयार किए गए पोस्टर से जताया है।
एसीडी स्टूडियो के बच्चे आर्या गुप्ता, अभिमान गुप्ता और अमायरा गुप्ता ने अपनी पेंटिंग के जरिये राहत कार्यों में लगे सभी कर्मियों और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए उन्हें कोरोना योद्धा बताया है।
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कैंसर पीड़ित समाजसेवी फूला देवी ग्रामीणों को स्वनिर्मित एलोवेरा सैनिटाइजर वितरित करतीं। कैंसर पीड़ित समाजसेवी फूला देवी ग्रामीणों को स्वनिर्मित एलोवेरा सैनिटाइजर वितरित करतीं।

ठेकेदार और युवती ने अलग-अलग लगाई फांसी

बांदा। अलग-अलग घटनाओं में घर में शटरिंग ठेकेदार और ससुराल में युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवती तीन दिन पहले ही मायके से आई थी। परिजन घटना की वजह नहीं बता सके। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के चहितारा गांव में राजाभइया (42) पुत्र बद्री ने शनिवार को शाम घर में प्लास्टिक की रस्सी से फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा। पिता ने बताया कि राजाभइया निर्माणाधीन मकानों में शटरिंग का ठेका लेता था। मृतक के तीन बच्चे हैं।
वह आत्महत्या की वजह नहीं बता सके। एक अन्य घटना में कोतवाली नगर क्षेत्र के टिकरी गांव में राजश्री (29) पत्नी कमल पाल ने शनिवार को शाम अटारी में साड़ी से फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ससुर कामता ने बताया कि छह साल पूर्व शादी हुई थी। पति कमल सूरत में मजदूरी करने गया है। लॉकडाउन से वहीं फंस गया। यह भी बताया कि तीन दिन पहले ही अपने मायके से आई थी।
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश सिंह ने बताया कि मायके पक्ष से तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, संदिग्ध परिस्थितियों में चार वर्षीय चंदन पुत्र रमेश कुमार निवासी कुलसाढी (फतेहगंज) की शनिवार की रात मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। परिजन मौत की वजह नहीं बता सके। पुलिस ने कीड़ा काटने से मौत की आशंका जता रही है।
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पांचवें दिन एक हजार मजदूर लौटे, तीन मेडिकल कालेज रेफर

बांदा। पलायित मजदूरों का महानगरों से घर लौटने का सिलसिला थम नहीं रहा। रविवार को पांचवें दिन करीब 1000 मजदूर यहां आए। पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल ले जाकर जांच कराई। इंफ्रारेड मशीन से उनके शरीर का तापमान नापा गया। इनमें तीन मजदूरों को जुकाम-खांसी और शरीर का तापमान बढ़ा होने पर मेडिकल कालेज भेज दिया गया। ये दिल्ली से लौटे हैं। बीते पांच दिनों में महानगरों से लौटने वाले मजदूरों की संख्या लगभग दो हजार पहुंच गई है।
दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और कानपुर से जत्थों में लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचे। पुलिस ने सभी को रोककर जिला अस्पताल में लाइन में खड़ा कर बारी-बारी से जांच कराई। ये तेज धूप में खड़े होकर बारी का इंतजार करते रहे। ट्रामा सेंटर चिकित्साधिकारी डा.विनीत सचान, फिजीशियन डा.एसडी त्रिपाठी व डा.हृदयेश पटेल और सर्जन डा.आरएस दोहरे स्वास्थ्य परीक्षण करते रहे।
डाक्टरों के मुताबिक जुकाम-बुखार से ग्रसित तीन युवकों को कोरोना संक्रमण की आशंका पर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया गया। ये तीनों दिल्ली से आए हैं। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि तीनों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। फिलहाल अब तक आए मरीजों कोई कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया।
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महानगरों से आए मजदूरों को 30 बसों में भेजा

बांदा। महानगरों से पैदल या किसी अन्य जुगाड़ से लौट रहे मजदूरों का रोडवेज बस स्टैंड पर जमावड़ा लग रहा है। रविवार को तो इनकी संख्या हजार का आंकड़ा पार कर गई। परिवहन निगम ने पुलिस के पहरे में विभिन्न रूटों पर 15 बसों से इन यात्रियों को रवाना किया। 24 घंटे के अंदर 30 बसें यात्रियों को लेकर रवाना हो चुकी हैं। लगभग 800 यात्रियों को उनके गंतव्य स्थानों पर रवाना किया गया। अफरा-तफरी में सोशल डिस्टेंस का मानक भी नहीं अपनाया जा सका।
महानगरों से लौटने वालों का सिलसिला रात-दिन जारी है। इनमें बच्चे और महिलाएं भी हैं। सिरों पर सामान की पोटली और युवा पीठ पर बैग टांगे लगातार चल रहे हैं। दिल्ली, सूरत, महाराष्ट्र आदि से लौट रहे हजारों मजदूरों में ज्यादातर जिले के ग्रामीण इलाकों के हैं। रास्ते में इन्हें विभिन्न संगठनों और समाजसेवियों द्वारा पानी और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शनिवार को 15 बसों की खेप इन मजदूरों को लेकर कानपुर और सीमावर्ती मध्य प्रदेश के सतना जनपद गई थीं। अगले दिन रविवार को भी इतनी ही बसों से मजदूरों को प्रयागराज, कानपुर, हमीरपुर, फतेहपुर और मध्य प्रदेश के कटनी भेजा गया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह और तहसीलदार अवधेश निगम भी फोर्स के साथ उपस्थित रहे। बांदा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद ने बताया कि यात्रियों की उपलब्धता पर आगे भी बसें भेजी जा सकती हैं। रविवार को भी पैदल चलकर यहां पहुंचने वाले मजदूरों का सिलसिला जारी है।
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अंशदान जमा होने पर ही मिलेगी दैवी आपदा आर्थिक सहायता

रोडवेज बस में मजदूरों की उमड़ी भीड़।
बांदा। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण द्वारा संचालित दैवी आपदा आर्थिक सहायता योजना में वही मजदूर लाभान्वित होंगे, जिन श्रमिकों का अंशदान अद्यतन (अपडेट) जमा हो। ऐसे मजदूरों को एक हजार रुपये मासिक की दर से वार्षिक/छमाही/तिमाही या मासिक मिलेंगे।
इसका निर्णय केंद्र/राज्य सरकार या बोर्ड करेगा। चित्रकूटधाम मंडल के उप श्रमायुक्त ने बताया कि पहले चरण में ऐसे पंजीकृत मजदूरों को हितलाभ का लाभ दिया जा रहा है, जिनका बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड और मोबाइल नंबर कल्याण बोर्ड की साइट पर उपलब्ध है।
बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के मुताबिक चित्रकूटधाम मंडल में मौजूदा समय में ऐसे श्रमिकों की संख्या 69,751 है। उपायुक्त ने बताया कि जिन पंजीकृत मजदूरों ने अपना बैंक ब्योरा श्रम कार्यालयों को उपलब्ध नहीं कराया है और अब वह लॉकडाउन के चलते कार्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं वे अपना बैंक खाता संख्या, आईएफएससी कोड, मोबाइल नंबर और पंजीयन कार्ड उप श्रमायुक्त के व्हाट्सएप नंबर- 8423004466 या 9161373754 या 8382012904 अथवा ई-मेल आईडी पर उपलब्ध कराएं, ताकि मजदूरों के खाते में आपदा राहत राशि भेजी जा सके।
कोरोना से बीमार हुए तो 28 दिन की सवेतन छुट्टी
बांदा। कोविड-19 से ग्रस्त हो जाने अथवा संदिग्ध होने पर अलग रखे जाने की स्थिति में कर्मचारियों/कर्मकारों को उनके नियोजकों द्वारा 28 दिन की छुट्टी वेतन सहित प्रदान की जाएगी, लेकिन यह अवकाश तभी स्वीकृत होगा जब कर्मकार स्वस्थ होने के बाद अपना चिकित्सा प्रमाणपत्र नियोजक या प्राधिकृत व्यक्ति को प्रस्तुत करे।
चित्रकूटधाम मंडल के उप श्रमायुक्त राजीव कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। बताया कि ऐसी दुकानें/वाणिज्यिक अधिष्ठान या कारखाने जो राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट के आदेशों से अस्थाई रूप से बंद हैं उनके कर्मचारियों को भी बंदी अवधि का अवकाश मजदूरी समेत प्रदान किया जाएगा।
साथ ही जिन दुकानों या कारखानों आदि में 10 या उससे अधिक कर्मकार हों वहां अधिष्ठान के सूचना पट व मुख्य द्वार पर कोविड-19 की रोकथाम के लिए केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए सुरक्षा उपायों को प्रदर्शित (लिखना) होगा। सभी नियोजकों और सेवायोजकों से इन आदेशों का पालन करने को कहा गया है।
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छूट का झूठ : हॉकर को झापड़, दूधिये का चालान

बांदा। लॉकडाउन के लिए सीएम और डीएम द्वारा जारी निर्देश/गाइडलाइन यहां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। पुलिस कर्मियों को इसके बारे में बताया नहीं गया या फिर अति उत्साह में ड्यूटी कर रहे हैं। सुबह दूध विक्रेता और हॉकर को दूध और अखबार बांटने की शासन और डीएम से छूट है। इसके बाद भी पुलिस ने हॉकर को थप्पड़ जड़ दिया और दूधिये का चालान कर दिया।
लॉकडाउन को लेकर प्रदेश के गृह सचिव ने शुरू में ही दिशा-निर्देश जारी किए थे। डीएम ने भी इन निर्देशों को जारी किया था। 25 मार्च को डीएम अमित सिंह बंसल और पुलिस अधीक्षक डा.एसएस मीणा ने अपने संयुक्त हस्ताक्षरों से जारी आदेश में कहा था कि किराना, दवा, दूध, ईंधन सहित मीडिया संस्थाएं और मीडियाकर्मी निषेधाज्ञा से मुक्त रहेंगे। माल ढोने वाले वाहनों को भी मुक्त रखा गया है।
शासन ने सुबह 6.30 से 9.30 बजे तक अखबार व दूध बांटने की छूट दी है, लेकिन इन पर अमल नहीं हो रहा। उल्लंघन में पुलिस कर्मी आगे हैं। हालांकि शनिवार को चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी दीपक कुमार ने भी पुलिस कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि लॉकडाउन में लोगों के साथ दुर्व्यवहार न करें, लेकिन इन दिशा-निर्देशों और आदेशों पर अमल कितना हो रहा है इसकी कुछ बानगियां ही काफी हैं। प्रमुख अखबार के हॉकर को सुबह 7 बजे अखबार बांटते समय बलखंडी नाका चौकी प्रभारी ने थप्पड़ जड़ दिया।
दोबारा न निकलने की चेतावनी दी। उधर, घर-घर दूध पहुंचा रहे दूधियों का देहात कोतवाली में चालान काट दिया। इससे दूधियों में नाराजगी है। ये आपूर्ति भी बंद कर सकते हैं। इसी तरह शासन ने लॉकडाउन के दौरान सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के कर्मियों को ड्यूटी पर आने-जाने की छूट दी है, लेकिन यहां छूट भी झूठ में शामिल हो गई है। नर्सिंगहोम के कर्मियों को लगातार रोका-टोका जा रहा है। इससे अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
बेटे को पुलिस से बचाती मां।
बेटे को पुलिस से बचाती मां।- फोटो : BANDA
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दरोगा के शव का गांव में हुआ अंतिम संस्कार

ओरन (बांदा)। सड़क हादसे में चल बसे उप निरीक्षक अशोक पटेल का शनिवार को यहां पैतृक गांव पल्हरी में अंतिम संस्कार किया गया। देर रात औरैया पुलिस अपने वाहन में उनका शव लेकर यहां पहुंची। 45 वर्षीय अशोक औरैया में सुजानपुर चौकी के इंचार्ज थे।
उनकी बाइक को किसी वाहन ने टक्कर मार दी थी। शव आते ही गांव में शोक और परिजनों में कोहराम मच गया। शनिवार को दिन में करीब 3 बजे गांव में स्थित उनके ही कृषि फार्म में बनाई गई चिता में उनका दाह संस्कार किया गया। छोटे भाई ने मुखाग्नि दी।
बड़ी तादाद में गांव के लोग उपस्थित रहे। मृतक अशोक की शादी करीब 15 वर्ष पूर्व सुनीता के साथ हुई थी। कोई संतान नहीं हुई।
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40 अध्यापक लेंगे बाहर से आने वालों की खबर

बांदा। लॉकडाउन में स्कूलों से छुट्टी मिल जाने पर घरों में दिन बिता रहे परिषदीय स्कूलों के अध्यापकों को अब कोरोना के काम में लगा दिया है। 40 अध्यापक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों और महानगरों से लौट रहे लोगों पर निगरानी रखने के लिए विकास भवन में खोले गए कंट्रोल रूम में ड्यूटी देंगे। शनिवार से उन्हें प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो गया।
डीएम के निर्देशों का हवाला देकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिश्चंद्र नाथ ने जनपद के विभिन्न पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त 40 सहायक अध्यापकों की सूची जारी करते हुए कहा है कि यह सहायक अध्यापक कोविड-19 के मद्देनजर बाहर से आने वालों को चिन्हित करके उन्हें होम क्वारंटीन सुनिश्चित कराने के लिए फोन पर उनसे बात करेंगे।
अध्यापकों की ड्यूटियां दो पालियों में लगाई गई है। बीएसए ने बताया कि शनिवार को उन्हें विकास भवन में डीएम अमित सिंह बंसल की अध्यक्षता में प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो गया। यह अध्यापक बाहर से आने वालों से फोन पर बात कर उनके स्वास्थ्य की स्थिति आदि का पता करेंगे।
बीमारी आदि मिलने पर उसका नाम-पता, मोबाइल नंबर आदि संबंधित क्षेत्र के चिकित्साधिकारी को देंगे। प्रशिक्षण में सीडीओ हरिश्चंद्र वर्मा, बीएसए हरिश्चंद्रनाथ, अर्थ एवं संख्याधिकारी संजीव बघेल, एनआरएलएम उपायुक्त करुणाशंकर पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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फंदे पर झूला युवा किसान

जसपुरा। बटाई पर खेती करने वाले खेतिहर युवा मजदूर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जान गंवाने के लिए उसने गांव के बाहर खेत में लगे बबूल के पेड़ का सहारा लिया। उस पर रस्सी बांधकर फंदे से झूल गया। परिजन आत्महत्या की वजह फसल की बर्बादी और आर्थिक तंगी का तनाव बता रहे हैं।
जसपुरा कस्बे में प्रमोद यादव (27) पुत्र बलवीर यादव गांव में ही बटाई पर खेत लेकर किसानी करता था। मजदूरी भी कर लेता था। इसी में उसका परिवार चल रहा था। सोमवार को सुबह वह पत्नी प्रियंका के साथ खेत गया था। कुछ देर बाद प्रियंका घर आ गई। प्रमोद खेत में ही रुक गया। करीब दो बजे पत्नी वापस खेत गई तो वहां बबूल के पेड़ पर प्लास्टिक की रस्सी में प्रमोद का फांसी पर शव टंगा मिला। परिजनों ने थाने में सूचना दी।
थानाध्यक्ष आलोक सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और शव कब्जे में ले लिया। पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पिता ने बताया कि प्रमोद उसका इकलौता पुत्र था। परिजनों का कहना है कि फसल की बर्बादी और आर्थिक तंगहाली से परेशान होकर आत्महत्या की। उधर, पैलानी उप जिलाधिकारी रामकुमार ने बताया कि किसान की आत्महत्या की वजह स्थिति आदि के बारे में जांच कराई जा रही है। पैलानी तहसीलदार को जांच के लिए भेजा गया है।
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बिहार और दिल्ली से पैदल पहुंचे 57 मजदूर

बांदा। रेल और बस सेवा बंद होने के बाद महानगरों से सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल चलकर मजदूरों का अपने-अपने घरों में पहुंचना जारी है। शनिवार को भी दिल्ली, बिहार और अलीगढ़ से करीब 57 मजदूर अपने-अपने घरों को पहुंचे। इन सभी का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।
कोविड-19 संक्रमण न पाए जाने पर एहतियातन उन्हें होम क्वारंटीन की सलाह देकर गांवों को रवाना किया गया है। दूसरे सूबों से चलकर मजदूर कड़ी मशक्कत के बाद यहां पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को 21 मजदूरों को जत्था पहुंचा था। उन्हें भी होम क्वारंटीन में भेजा गया है। शनिवार को बिहार और दिल्ली से मजदूर लौटे। दिल्ली वाले मजदूर कानपुर के रास्ते से आए हैं, जबकि बिहार वाले प्रयागराज होकर यहां पहुंचे।
मजदूरों के चेहरों पर पैदल चलने की थकान साफ नजर आ रही थी। ट्रामा सेंटर में इनको एक-एक मीटर की दूरी पर खड़ा कर पंक्तिबद्ध कर डॉक्टर हृदयेश पटेल और डॉक्टर एसडी त्रिपाठी ने स्वास्थ्य परीक्षण किया।
फौरीतौर पर कोविड-19 जैसा कोई संक्रमण न मिलने पर डाक्टरों ने उन्हें घरों में ही अकेले रहने की हिदायत देकर रवाना कर दिया। संक्रमण न होने की पुष्टि जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर एसएन मिश्र ने भी की।
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