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Coronavirus in Uttar Pradesh Live Updates: यूपी में एक दिन में 14 नए मरीज, अब तक 65 लोग कोरोना संक्रमित

यूपी में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार को एक ही दिन 14 नए मरीज सामने आने के साथ ही प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 65 हो गई है।

28 मार्च 2020

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Sp baghpat said

28 मार्च 2020

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बरेली

रविवार, 29 मार्च 2020

मौसम का यूटर्न, आज भी हो सकती है हल्की बारिश

शनिवार को सुबह हल्की बारिश और दोपहर में चटख धूप खिलन के आसार

बरेली। दिनोंदिन खिलती चटख धूप से बढ़ रहा तापमान एक बार फिर मौसम के यूटर्न से करीब छह डिग्री तक लुढ़क गया है। शुक्रवार की सुबह दिन भर रुक रुक कर हुई बारिश ने हल्की ठंड का अहसास करा दिया। मौसम विभाग ने शनिवार को भी बारिश से पारा के लुढकने का सिलसिला जारी रहने के आसार जताए हैं।
आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के डारेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक गुरुवार से शहर पर पश्चिमी विक्षोभ हावी हो रहा था। शुक्रवार की देर रात अचानक शहर पर बादल घिरे और रह रह कर दिन भर बारिश करते रहे। दोपहर को सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी भी जारी रही। उन्होंने शनिवार को भी कमोवेश ऐसा ही मौसम बने रहने से तापमान में गिरावट दर्ज होने की आशंका जताई है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक शनिवार की सुबह हल्की मध्यम बारिश हुई तो दोपहर में आसमान साफ होने से चटख धूप खिल सकती है। बताया कि हवाओं की दिशा फिलहाल पश्चिम उत्तर पश्चिम है, जो अपने साथ पर्वतों के बादल का जमावड़ा शहर पर लगा रहे हैं। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 25.1 डिग्री और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस रिकॉड किया गया। जबकि बारिश 1.3 एमएम रिकॉर्ड हुई। दो दिन पहले तक अधिकतम तापमान 31 डिग्री था।

चिंता: मौसम का रुख कहीं कोरोना का कहर न बढ़ा दे

बरेली। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत का रुख कर चुका है। मौसम विभाग के मुताबिक जल्द ही इसका रुख पर्वतों की तरफ होगा और वहां तेज बारिश के साथ ही ओले गिरने की भी गिर सकते हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इससे कोरोना वायरस का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मगर चिकित्सकों की मानें तो ठंड मौसम वायरस के संक्रमण को बढ़ा सकता है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक कोरोना वायरस का मौसम और तापमान से क्या संबंध है। इस पर अभी कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। क्योंकि यह वायरस महज दो महीने पहले ही अस्तित्व में आया है। हालांकि फ्लू और कोल्ड वायरस ठंड में सक्रिय होता है, जबकि गर्मी में इसमें कमी देखी जाती है। बारिश के बाद तापमान गिरता है और ठंड बढ़ती है, इसलिए कोरोना वायरस में तेजी आने की आशंका बढ़ जाती है। कहा कि ऐसे में लोग अपने-अपने घरों में ही रहें, जब ज्यादा लोग एक-दूसरे के आसपास बने रहेंगे तो इंफेक्शन तेजी से बढ़ने की संभावना होती है। आशंका जताई कि चीन और इटली में वायरस के संक्रमण को बढ़ाने में ठंड ने ज्यादा भूमिका निभाई। क्योंकि लोगों की भीड़ कम नहीं हुई और हवा में तैरते वायरस ने लोगों को तेजी से चपेट में लिया।

नमी की वजह से हवा में तैरता रहता है वायरस

फिजीशियन डॉ. रवीश अग्रवाल के मुताबिक कोरोना वायरस सूक्ष्म कण यानी ड्रॉपलेट से बढ़ने वाली बीमारी मानी गई है, क्योंकि छींकने या खांसने के बाद इसके कण हवा में बिखर जाते हैं। बारिश के बाद, हवा में नमी बनती है और इस स्थिति में आशंका है कि कोरोना वायरस के ड्रॉपलेट हवा में ज्यादा देर तक मौजूद रह सकते हैंद। जैसे-जैसे धूप बढ़ती है वैसे-वैसे हवा में गर्मी बढ़ती है और ऐसे में कोरोना वायरस के ड्रॉपलेट जमीन पर गिरने लगते हैं। इस दशा में इनफेक्शन की संभावना कम होती है, जबकि हवा में तैरते वायरस तेजी से संक्रमण फैला सकते हैं।

पूर्व के वायरस का कुछ यूं रहा ट्रेंड्र

चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना वायरस का तापमान से क्या संबंध है, अभी इस पर रिसर्च चल रही है, लेकिन पूर्व के दो जानलेवा वायरस सार्स और मर्स का ट्रेंड देखें तो उनका प्रसार ठंड में बढ़ा और गर्मी में गिरता चला गया। इसे देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि गर्मी बढ़ने से कोरोना वायरस का प्रभाव भी गिरेगा लेकिन इसका अभी कोई पुख्ता आधार नहीं है।
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मौसम की मार से परेशान किसानों के लिए मुसीबत बना लॉकडाउन

पुलिसकर्मी किसानों को खेतों पर नहीं जाने दे रहे, अफसरों से लगाई मदद की गुहार

बरेली। पिछले दिनों मौसम की मार से परेशान किसानों को धूप खिलने के बाद फसल काटने का मौका मिला तो कोरोना के संक्रमण के चलते देश में लॉक डाउन हो गया। तीन से चार माह तक मेहनत के बाद अब खेतों में खड़ी फसल को काटने की बारी आई तो पुलिस किसानों के खेत तक पहुंचने में बड़ी बाधा बने हुए हैं। घर से बाहर निकलने पर किसानों के साथ पुलिस बर्बरता कर रही है। ऐसे में किसानों ने पुलिस और प्रशासन के आला अफसरों से मांग की है।
किसानों के मुताबिक लॉकडाउन होने के चलते खाद और बीज की दुकानें बंद हैं। खेतों में फसल खड़ी है। इसमें कुछ किसानों की फसलें कटने लायक भी हो चुकी हैं। अगर वह समय से नहीं काटी जाएंगी तो पक्षी उनकी बालियां तोड़कर थोड़ा खाएंगी और उससे कहीं ज्यादा बरबाद करेंगी। सरकार ने इस लॉक डाउन में किसानों को खेतों पर फसल काटने आदि के लिए राहत दी गई है। फिर भी घर से बाहर निकलने पर पुलिस वाले उन्हें परेशान कर रहे हैं। खाद और बीज की दुकान बंद होने से किसानों को बुवाई और छिड़काव के लिए भी कोई जतन नहीं हो पा रहा है। आशंका जताई है कि अगर पकी फसल पर तेज हवाओं संग बारिश हुई तो फसल गिर जाएगी और दाने बिखर जाएंगे। नवाबगंज, भोजीपुरा, क्यारा, बिथरी चैनपुर, कैंट समेत अन्य ब्लॉकों के किसानों का कहना है कि फसल कभी अकेले नहीं काटी जा सकती है, इसमें काफी लोग लगते हैं।

खेतों में फसल काटना किसी अकेले के वश की बात नहीं है। इसके लिए 10 से 15 लोगों का समूह कटाई में जुटता है तब कहीं जाकर फसल कटती है। मौसम खराब हो रहा है अगर ऐसे में फसल काटकर सुरक्षित नहीं किया जाएगा तो आगे खाद्यान्न का संकट हो सकता है। - डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान

खेतों में पहुंचकर पुलिसकर्मी किसानों को फसल काटने के दौरान दो से चार लोगों के ही मौजूद रहने का सुझाव दे रहे हैं। अगर कहीं, पुलिस या अन्य किसी के द्वारा किसानों को रोका जा रहा है तो यह गलत है। फसल कटेगी नहीं तो बरबाद हो जाएगी। इसी के साथ पीएम और सीएम की मंशा भी पूरी नही होगी। - अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान
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पंजाब-महाराष्ट्र से सबक लीजिए जहां लॉकडाउन विफल हुआ तो कर्फ्यू लगा

तमाम लोग अभी खतरे से आगाह नहीं, आपस में नहीं रख रहे हैं दूरी
कर्फ्यू लगा तो अर्द्धसैनिक बलों के हाथों में भी आ सकती है कमान

बरेली। जनता कर्फ्यू और फिर लॉक डाउन के पहले ही दिन ने बता दिया कि कुछ लोग समझकर भी नहीं समझ रहे हैं कि आने वाला खतरा कितना बड़ा है। ये लोग पंजाब और महाराष्ट्र से भी सबक नहीं ले रहे हैं जहां लॉक डाउन विफल होने के बाद ही कर्फ्यू लगाया गया है। यही हालात अब बरेली में दिख रहे हैं। लोग खुद जागरूकता दिखाने को तैयार नहीं हैं और समझाबुझाकर हारा प्रशासन भी आखिरी विकल्प कर्फ्यू को ही मान रहा है।
दुनिया भर में कोरोना के कहर में सबसे महत्वपूर्ण आपस में दूरी बनाए रखना है। लॉक डाउन की घोषणा इसी के मद्देनजर की गई है। सरकार का मानना है कि लॉक डाउन के जरिये सामाजिक दूरी बनाने में मदद मिलेगी। लोग घरों में रहेंगे और वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा लेकिन लोग लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं। भविष्य की उन मुश्किलों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं जो कर्फ्यू लगने के बाद प्रशासन की सख्ती के तौर पर उनके सामने आएंगी। जाहिर है कि ऐसे में चंद लोगों की बेपरवाही का खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ेगा.

लॉक डाउन

लॉक डाउन को आमतौर पर महामारी अधिनियम 1897 के तहत लागू किए जाने का इतिहास रहा है। यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है और इसका इस्तेमाल विकराल समस्या से निपटने के लिए होता है। केंद्र या राज्य सरकार दोनों में से कोई भी इस अधिनियम को लागू कर सकती है। अधिनियम की धारा दो सरकार को ऐसी शक्तियां भी प्रदान करती है जिसके तहत सरकार बीमारी की रोकथाम के लिए कई अस्थायी नियम बना सकती हैं। इसी नियम के तहत राज्यों में लॉकडाउन का आदेश दिया गया है।
फिलहाल पाबंदी इतनी सी
1- लॉक डाउन में जरूरी सेवाओं के अलावा सारी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा जाता है।
2- लॉक डाउन को एक तरह से बिना सजा के प्रावधान वाला कर्फ्यू कहा जा सकता है। बाहर निकलने वालों को पुलिस समझाकर वापस भेजती है। हालांकि सरकार सख्ती भी कर सकती है। यूपी सरकार ने साफ किया है कि लॉक डाउन में भी बाहर आने पर छह महीने की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।
3- लॉक डाउन में पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, मीडिया, डिलीवरी, पेट्रोल पंप, सुरक्षा सेवाएं, पोस्टल सेवा, टेलिकॉम एवं इंटरनेट, बैंक, एटीएम, पानी-बिजली, नगर निगम, ग्रॉसरी और दूध जैसी सेवाओं को छूट दी गई है।

कर्फ्यू

सीआरपीसी की धारा 144 के तहत कर्फ्यू लगाया जाता है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट नोटिफिकेशन जारी करता है। जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां लोग इकट्ठे नहीं हो सकते। आमतौर पर इस कानून का उपयोग विरोध प्रदर्शन और दंगों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए किया जाता है। कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर पुलिस जेल भेज सकती है। नागरिक अधिकार काफी हद तक सीमित हो जाते हैं।

फिर इतनी बढ़ सकती है सख्ती

1- कर्फ्यू में जरूरी सेवा जैसे पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल्स, बस स्टैंड, पानी, बिजली, ग्रॉसरी और दूध आदि सेवाओं को छूट दी जाती है। इनसे जुड़े लोग सीमित समय के लिए बाहर निकल सकते हैं।
2- गैरसरकारी सेवाओं से संबद्ध लोगों पर कर्फ्यू के दौरान पास होना जरूरी है। कर्फ्यू पास मजिस्ट्रेट की ओर से जारी होता है। पास की अनुपलब्धता पर बाहर जाने पर सजा हो सकती है।
3- अगर कोई धारा 144 तोड़ता है तो धारा 188 के तहत उसे चार महीने तक की कैद या जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं।
4- गैरजरूरी काम के लिए गाड़ियां भी बाहर नहीं निकाली जा सकती हैं।
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बानखाना में पंजाब से आई वृद्धा की मौत, कोरोना की दहशत

बानखाना में पंजाब से आई वृद्धा की मौत, कोरोना की दहशत
वायरल वीडियो में एंबुलेंस तक खुद ही महिला को लाता दिखा परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बानखाना में पंजाब से आई वृद्धा की मौत के बाद रिश्तेदारों ने उसकी अंत्येष्टि कर दी। इससे पहले एंबुलेंस आई तो स्टाफ का कोई सदस्य नीचे नहीं उतरा। इस वजह से शोर मच गया कि वृद्धा की मौत कोरोना से हुई है।
प्रेमनगर के बानखाना में चौक के पास रहने वाले एक परिवार की रिश्तेदार कुछ महीने पहले पंजाब से आई थीं। उनका यहां इलाज चल रहा था। शुक्रवार को वृद्धा की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर 108 पर सूचना दी गई। एंबुलेंस स्टाफ बाहर नहीं निकला तो परिजन वृद्धा को गोद में उठाकर गली के बाहर खडी़ एंबुलेंस तक ले गए। तब छत पर खडे़ किसी पड़ोसी ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। बाद में अस्पताल पहुंचने से पहले वृद्धा की मौत हो गई तो परिजन शव ले आए। उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। कई व्हाट्सएप ग्रुप में पड़ोसी का बनाया वीडियो पहुंच गया जिससे बानखाना और शहर के लोग दहशत में आ गए। कई जनप्रतिनिधियों ने भी स्थानीय नेताओं को कॉल कर वीडियो की सत्यता पूछी। पता लगा कि वृद्धा की स्वाभाविक मौत हुई है। इंस्पेक्टर प्रेमनगर बलवीर सिंह ने इस तरह की किसी जानकारी से इंकार किया।
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७ दिन का झटका, १७३५ करोड़ का कारोबार हजम कर चुका कोरोना

फोटो:
फ्लैग: 4440 करोड़ का व्यापार प्रभावित होने की आशंका 14 अप्रैल तक
टुल्ला: 7 दिन का झटका
1735 करोड़ का कारोबार हजम कर चुका कोरोना
बड़ा झटका दे जाएगा लॉक डाउन: बरेली के हर क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों ने जताई बड़े नुकसान की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लॉक डाउन के सात दिनों में ही कोरोना ने अर्थव्यवस्था के लिए खौफनाक तस्वीर का खाका खींच दिया है। अब तक के आंकड़े ही बता रहे हैं कि इन सात दिनों में कोरोना का खौफ जिले के बाजार और इंडस्ट्रियल सेक्टर में 1735 करोड़ की बड़ी धनराशि निगल चुका है। लॉक डाउन की अवधि खत्म होने यानी 14 अप्रैल तक यह नुकसान करीब साढ़े चार हजार करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। कारोबारी इस आशंका से भी दहले हुए हैं कि आने वाले दिनों में कोरोना की तरह आगे यह नुकसान भी गुणात्मक तौर पर बढ़ सकता है।
कोरोना ने पूरे देश में ऐसे वक्त में दस्तक दी जब गेहूं की फसल कटने वाली है और इसी के साथ सहालग की भी शुरुआत होनी थी। कारोबारी क्षेत्रों में हर साल फरवरी की शुरुआत से ही पूरे साल के सबसे चमकदार रहने वाले इस सीजन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कारोबारियों का कहना है कि सर्दी भर सिर्फ गर्म कपड़ों और कुछ हद तक इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रॉनिक्स के उपकरणों के बाजार में बूम रहने के बाद यह सीजन सभी सेक्टरों के लिए होता है लिहाजा सभी कारोबारी पहले से अपने स्टाक फुल कर लेते हैं। इस लिहाजा से देखा जाए तो यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि जिले भर के कारोबारियों ने इस सीजन की मांग पूरी करने के लिए कितने अरब के सामान का स्टाक कर रखा है। कोरोना की दहशत के बीच लॉक डाउन होने के बाद यह सारा स्टाक भी जहां के तहां डंप हो गया है।
हफ्ते भर के लॉक डाउन में सबसे ज्यादा नुकसान रेडिमेड गारमेंट और कपड़ा कारोबार को होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक चूंकि गर्मियों में सबसे ज्यादा शादी-ब्याह ग्रामीण इलाकों में होते हैं, लिहाजा सिर्फ बड़े और ब्रांडेड शोरूम पर ही छोटे कारोबारी भी इस सीजन के लिए काफी तैयारी करते हैं। ये सारी तैयारी रखी रह गई हैं। कोरोना की वजह से नुकसान झेलने वाले कारोबारों में दूसरा नंबर सराफा कारोबार का है। आम तौर पर शादी-ब्याह के लिए फरवरी से ही सराफा बाजार में खरीददारी शुरू हो जाती है लेकिन चीन में कोरोना फैलते ही यह बाजार ऐसा डाउन हुआ कि फिर रफ्तार पकड़ने की नौबत ही नहीं आई।
कोरोना में निपटा कारोबार
बाजार दुकानें अनुमानित कारोबार
गारमेंट 3000 100
नमकीन 95 1.5
कपड़ा 500 27
कंप्यूटर-मोबाइल 1000 5
होटल-रेस्त्रां 250 2
घरेलू उपकरण 400 3.50
सरायन-खाद 700 10
रस्क-बिस्कुट 50 0.90
हलवाई-कैटर्स 650 2
बारात घर 250 3
सराफा 650 10
अन्य -- 10
करोड़ रुपये/प्रतिदिन
वर्जन फोटो सहित:
लॉक डाउन ऐसे मौके पर हुआ है जब सहालग के सीजन में बाजार सबसे ज्यादा बूम पर रहता है। सप्ताह भर में काफी बड़ा नुकसान हो चुका है। गारमेंट सेक्टर में करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। - नरेेंद्र गुप्ता पप्पू, गारमेंट व्यापारी
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बाजार को कोरोना ने बहुत तगड़ा झटका दिया है। इस नुकसान का आंकलन करना आसान नहीं है। कारोबार भूलकर सारे कारोबारी घर में कैद हैं। करोड़ोें का कारोबार एक सप्ताह में ही ढेर हो चुका है।- विभोर गोयल, कारोबारी
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बरेली में नमकीन कारोबार अपनी जगह बना रहा था लेकिन लॉक डाउन में बड़ा झटका लगा है। यहां से उत्पाद पहाड़ों के साथ कई जिलों में सप्लाई होते हैं। फैक्टरियां बंद होने से भारी नुकसान हुआ है। - धर्मेंद्र देवनानी, नमकीन निर्माता
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सहालग शुरू होने से पहले ही बाजार में कपड़ों और साड़ियों की सेल शुरू हो जाती है। लॉक डाउन से यह सारा कारोबार ठप हो गया है। अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। - अनुपम कपूर, थोक कपड़ा कारोबारी
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कंप्यूटर, मोबाइल सेक्टर तो चीन में कोरोना फैलने से ही प्रभावित हो गया था। अब लॉक डाउन होने के बाद पूरा बाजार और चौपट हो गया है। करोड़ों का रोज कारोबार करने वाले बाजार में सन्नाटा है। - विपुल गर्ग, कंप्यूटर कारोबारी
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होली के बाद होटल कारोबार में सीजन होता था। सहालग से पहले ही तमाम लोगों ने होटलों में बुकिंग करा दी थी। होटल भी आयोजनों की तैयारी में जुटे हुए थे लेकिन ऐसी आपदा आई कि सब कुछ धरा रह गया। - सतीश अग्रवाल, होटल एसोसिएशन
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शादी-ब्याह के लिए घरेलू इलेक्ट्रानिक उपकरणों की सबसे ज्यादा खरीददारी होती है। सामान्य दिनों में भी इसका कारोबार चलता रहता है। बाजार बंद होने से करोड़ों का नुकसान हो चुका है।- हरीश अरोरा, इलेक्ट्रानिक विक्रेता एसोसिएशन
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गन्ना जैसी कई फसलों की बुवाई का समय है। खाद और कीटनाशक दवाएं लॉक डाउन होने से किसानों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। खेतों में फसलें तबाह हो रही हैं और शहर में कारोबारी। - आयुष अग्रवाल, खाद कारोबारी
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शहर में हर दिन रस्क और बिस्कुट का करोड़ों का कारोबार होता है। अब सारी फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। उनमें लाखों का कच्चा माल भी बर्बाद हो गया है। समझना मुश्किल है कि इसकी भरपाई कैसे होगी। - केके चंदानी, रस्क निर्माता
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हलवाई, रेस्टोरेंट, कैटरिंग कारोबार बड़े पैमाने पर फैला हुआ है। समोसा, नमकीन, जलेबी, चाट का ही शहर में हर दिन लाखों का कारोबार होता है। दुकानों में रखा लाखों का माल खराब हो गया है। - पंकज माहेश्वरी, हलवाई एंड कैटरर
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सहालग से पहले ही लोगों ने बरातघर बुक करा दिए थे। लॉक डाउन लागू होने से करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ है। हम लोगों की बुकिंग की एडवांस रकम अगली तारीखों में एडजस्ट करेंगे। - गोपेश अग्रवाल, बैंक्वेट हाल एसोसिएशन
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सहालग से सराफा बाजार सीधे जुड़ा हुआ है। हालांकि पूरे साल सराफा आयटम की खरीददारी होती है। अब एक सप्ताह से सब कुछ ठप पड़ा हुआ है। अब तक करोड़ों का कारोबार चौपट हो चुका है।- संदीप अग्रवाल मिंटू, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन
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कल फिर छाएंगे बादल मगर बारिश के आसार नहीं

फोटो:
कल फिर छाएंगे बादल मगर बारिश के आसार नहीं
आज शाम हवाओं की दिशा बदलने के आसार, उच्च वायु दाब में है शहर.. इसलिए बारिश मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। दो दिन पहले हुई रिमझिम बारिश के बाद शनिवार को लोगों को खासी राहत मिली। हवाओं की दिशा बदलने से सुबह आसमान साफ रहा और चटख धूप खिली। मौसम विभाग ने सोमवार को फिर हल्के बादल मंडराने के आसार जताए हैं, लेकिन बारिश नहीं होने की उम्मीद जताई है। अगले करीब हफ्ते भर आसमान साफ रहने के आसार हैं।
आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक शुक्रवार की सुबह हवाओं की दिशा फिर से बदल गई। पूर्व दक्षिण पूर्व दिशा से हवा चलने पर मंडरा रहे बादलों का जमावड़ा खत्म होने से चटख धूप खिली। उन्होंने सोमवार को फिर सूरज और बादलों के बीच लुकाछिपी जारी रहने की आशंका जताई है। मगर बारिश की संभावना से इनकार किया है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि शुक्रवार को हुई बारिश के बाद शहर में उच्च वायु दाब क्षेत्र बन गया है। इसके चलते बादलों का जमावड़ा लगने के बाद भी बारिश नहीं होगी। हालांकि, हवा में नमी का प्रतिशत बढ़ने के चलते हवाओं में हल्की ठंड का एहसास लोगों को होगा। शनिवार को दिन भर खिली धूप के चलते अधिकतम तापमान में भी चार डिग्री सेल्सियस की बढोत्तरी दर्ज की गई।
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एडीजी समेत अफसरों ने मजदूरों को बांटा खाना, बुखार नपवाया

एडीजी समेत अफसरों ने मजदूरों को बांटा खाना, बुखार नपवाया
बरेली। दिल्ली से आई भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें गंतव्य तक भेजना पुलिस प्रशासन की चुनौती बन गई है। बरेली रीजन की करीब सवा सौ बसें दिल्ली से इन लोगों को लेकर आ रही हैं। जरूरत के मुताबिक लोगों को बसों से शाहजहांपुर, सीतापुर, कानपुर तक भेजा जा रहा है। प्रशासन ने कुछ प्राइवेट बसें भी अधिकृत की हैं। एडीजी, एसएसपी ने मजदूरपेशा लोगों को भोजन के पैकेट व पानी उपलब्ध कराया।
एडीजी जोन अविनाश चंद्र, डीआईजी रेंज राजेश कुमार पांडेय और एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने अलग-अलग समय में शहर के सेटेलाइट बस स्टैंड व अन्य हाईवे के अन्य स्थानों पर पहुंचे। यहां अधिकारियों ने व्यवस्था देखी और मजदूरों को भोजन व अन्य सहूलियत उपलब्ध कराईं। एडीजी ने इन्हें भोजन के पैकेट बांटे। चिकित्सा विभाग की एक टीम बुलवाकर इनका बुखार नपवाया और जरूरत के मुताबिक दवा व सलाह दी गई। एसएसपी ने सेटेलाइट बस स्टैंड पर दिल्ली व अन्य स्थानों से आए मजदूरों से बात की। इन्होंने वाहन न होने की बात बताई तो एसएसपी ने प्रशासन के अधिकारियों से इस बारे में संपर्क किया। लोगों से कहा कि वह दूर दूर रहें, सभी को उनके नजदीकी स्थानों तक भिजवा दिया जाएगा। एएसपी अभिषेक वर्मा, इंस्पेक्टर बारादरी नरेश त्यागी, इज्जत नगर इंस्पेक्टर केके वर्मा ने भी लोगों की मदद की। हालांकि पुलिस प्रशासन के दिए पैकेट के अलावा कोई होटल, रेस्टोरेंट न खुला होने से लोग काफी परेशान रहे। बसें या दूसरे वाहन आते ही लोगों में पहले घुसने को मारामारी मच जाती थी।
एडीजी बोले- घर में दिक्कत हो तो सैनिकों को याद कर लें
एडीजी अविनाश चंद्र ने लॉकडाउन में घरों से बेवजह निकलने वालों पर और सख्ती के निर्देश पुलिस को दिए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग घरों में रहने की वजह से परेशान हैं उन्हें सैनिकों का ध्यान कर लेना चाहिए जो निर्जन स्थानों व पहाड़ों में महीनों तैनात रहकर सीमाओं की निगरानी करते हैं। उन लोगों का न परिवार पास होता है और न ही मनोरंजन व इंटरनेट की सुविधा होती है। प्रशासन लोगों के घरों तक राशन, सब्जी पहुंचाने की व्यवस्था कर रहा है पर अगर कोई चीज नहीं मिल पा रही तो उसके लिए धैर्य रखें। देश और समाज हित में घरों से बाहर न निकलें। साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें।
प्राइवेट बसों और डग्गामारों ने काटी चांदी
रोडवेज बसों के कम होने की स्थिति में प्रशासन ने लोगों को उनके घर पहुंचाने के लिए प्राइवेट बसों व डग्गामार वाहनों का सहारा लिया। इस तरह के वाहनों को यात्रियों को घर पहुंचाने की अस्थायी अनुमति मिली तो इन्होंने चांदी काट दी। निजी बसों में दिल्ली से बरेली तक पांच सौ रुपये प्रति यात्री तक वसूले गए। बच्चों का पूरा किराया लिया गया। दिल्ली में चलने वाले कई ऑटो भी यहां तक मुसाफिर बुक करके लाए थे। इन्होंने भी मोटी कमाई की। यहां तक कि विलयधाम से शहर के सेटेलाइट स्टैंड तक लोगों को लाने के लिए ऑटो ने पचास रुपये तक वसूले। कई लोग ऐसे थे जिनके पास यह रुपये न थे। ऐसे लोग पैदल ही चलने को मजबूर थे।
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मालगाड़ी की चपेट में आया ग्रामीण, बायां हाथ कटा

काशीपुर। मालगाड़ी की चपेट में आने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका बायां हाथ कट गया। 108 एंबुलेंस से उसे गंभीर हालत में उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, लोको पायलट सुंदरलाल मीणा ने बताया कि यह व्यक्ति अचानक झाड़ियों से निकलकर मालगाड़ी के आगे लेट गया। उसने कहा कि इस व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास किया है।
शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे एक मालगाड़ी काशीपुर होते हुए मुरादाबाद की ओर जा रही थी। टांडा उज्जैन रेलवे फाटक से आगे फसियापुरा राजकीय प्राथमिक स्कूल के पास अधेड़ इसकी चपेट में आ गया। सूचना पर पहुंची टांडा उज्जैन पुलिस ने 108 से उसे सरकारी अस्पताल में पहुंचाया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। जीआरपी एएसआई मुकेश चंद ने बताया कि घायल की पहचान ग्राम मुकुटपुर धनाड़ी बदायूं निवासी संजय सिंह (50) के रूप हुई है।
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ओवररेटिंग की शिकायत पर पहुंची पुलिस टीम पर हमला, इंस्पेक्टर समेत तीन घायल

पीलीभीत। लॉकडाउन में निर्धारित समय के बाद भी केशोपुर गांव में शुक्रवार रात को नौ बजे दुकान खोलकर ओवररेट सामान बेच रहे एक दुकानदार ने शिकायत पर आई बरखेड़ा थाने की पुलिस टीम पर हमला कर दिया। परिवार वालों के साथ मिलकर किए गए इस हमले में थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। बाद में भागते समय छत से गिरकर दुकानदार भी घायल हो गया।
बरखेड़ा इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी शुक्रवार रात करीब आठ बजे क्षेत्र में घूम रहे थे। केशोपुर गांव पहुंचने पर कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि गांव का सुनील गंगवार रात में भी किराने की अपनी दुकान खोलकर सैनिटाइजर, मास्क समेत अन्य खाद्य पदार्थों की अधिक दाम पर बेच रहा है। इस शिकायत पर इंस्पेक्टर वहां पहुंचे और ओवररेटिंग की जांच करते हुए दुकान बंद करने को कहा। इस पर दुकानदार सुनील ने अपने परिवार वाले और आसपास के कुछ लोगों के साथ मिलकर हमला कर लाठी-डंडे से पीटना शुरू कर दिया। पुलिस कर्मियों के मुताबिक उनके गले भी दबाने की कोशिश की गई। हमले में इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी, दरोगा रामगोपाल आर्य और सिपाही अंकित कुमार घायल हुए। वायरलेस पर हमले की खबर मिलने पर अतिरिक्त फोर्स पहुंचा। इसके बाद हमलावर भाग गए। दुकानदार सुनील पुलिस से बचने को छत से कूदा तो वह भी गिरकर घायल हो गया। घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां से इंस्पेक्टर सोलंकी और दुकानदार को बरेली के मेडिकल भेज दिया गया। इस बीच एएसपी रोहित मिश्र पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और जानकारी जुटाई। दरोगा की ओर से नौ नामजद समेत 29 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। एसपी अभिषेक दीक्षित ने कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नौ हुए नामजद और 13 धाराएं लगाई
दरोगा रामगोपाल आर्य की तरफ से सुनील कुमार गंगवार, हरेंद्र कुमार, मुनेंद्र कुमार, प्रभुदयाल, सुरेंद्र, ज्वालाप्रसाद, मिढ़ईलाल, कपलेंद्र उर्फ कपिल, जयप्रकाश और 20 अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें बलवे की धारा 147 व 149, सरकारी कार्य में बाधा संबंधी 332, 333, 353, गाली-गलौज की 504, जानलेवा हमले की 307, नियमों की अवहेलना करने संबंधी धारा 269, 270, क्वारंटीन के नियम को तोड़ने की धारा 271, महामारी अधिनियम की धारा 3 व 4 और एसीएसटी एक्ट की धारा लगाई गई है।
लॉकडाउन का उल्लंघन कर खोली गई किराना दुकान में ओवररेटिंग की शिकायत पर पुलिस गई थी। तभी दुकानदार ने साथियों संग हमला कर दिया। घायल पुलिसकर्मी अस्पताल भर्ती कराए गए हैं। एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है, सख्त कार्रवाई होगी। - अभिषेक दीक्षित, एसपी
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धनगढ़ी: हवाई पट्टी से फिसल कर मैदान में जा घुसा विमान, बाल-बाल बची कोरोना मरीज का नमूना लेने गई टीम

लॉकडाउन में घर पर ही कार्टून बनाकर दूर करें बोरियत, बच्चों के लिए कार्टूनिस्ट सैफ ने शुरू किया फेसबुक पेज

लॉकडाउन में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए कार्टूनिस्ट सैफ असलम खां ने फेसबुक और व्हाट्सएप का सहारा लिया है। बच्चे घर में ड्राइंग बनाकर अपने नाम व पते के साथ व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल रहे हैं, जिनको सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जा रहा है। जिससे बच्चों को कुछ क्रिएटिव करने की ललक जागे और लॉकडाउन के चलते बोर होने से बचे रहें।

सैफ असलम खां ने बताया कि वह इस काम को विस्तार देना चाहते हैं। फिलहाल तो वह शाहजहांपुर स्कैच के नाम से पेज चला रहे हैं। अब बच्चों के द्वारा बनाए जाने वाले कार्टूनों के लिए अलग से पेज बनाएंगे, जिसको क्रिएटिव लॉकडाउन का नाम देंगे। 

उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे जुड़ रहे हैं, अब तक 50-60 बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग, सिनरी और कार्टून के फोटो व्हाट्सएप पर आ चुके हैं। जिनको फेसबुक के साथ ही अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर शेयर किया जाएगा।
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बदायूं: गांव-कस्बों में अभी भी नहीं कर रहे लॉकडाउन का पालन, बरत रहे हैं लापरवाही 

उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर का पढ़ा-लिखा तबका जहां कोरोना वायरस की भयावहता को समझते हुए घरों से नहीं निकल रहा है, वहीं देहात क्षेत्र में लोग अभी भी लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसा करके वे न केवल खुद को संकट में डाल रहे हैं, बल्कि औरों को भी खतरे में डाल रहे हैं।
 
पुलिस की भी मजबूरी है कि वह गली मोहल्लों में बार-बार नहीं जा पा रही, हालांकि फिर भी मोहल्लों में जाकर लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोगों पर कोई असर नहीं पड़ रहा। 

कई इलाकों में लोग लगातार झुंड के रूप में या तो घरों के बाहर बैठे हैं या फिर समूह बनाकर घूम रहे हैं। यदि ऐसा ही रहा तो लॉकडाउन का कोई असर नहीं रह जाएगा। वजीरगंज, बिसौली, कादरचौक आदि इलाकों में लोग, खासकर युवा वर्ग लापरवाही बरतता दिखाई दे रहा है।
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लॉकडाउन के बीच मजदूर को गांव से लेने पहुंचा किसान, रोका तो चला दी गोली, ग्रामीण आगबबूला

देश भर में चल रहे लॉकडाउन के बीच लखीमपुर खीरी के भीरा थाना क्षेत्र से एक अलग तरह का मामला सामने आया है। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही लालू टांडा गांव के ग्रामीणों ने गांव में बाहरी लोगों के आने जाने पर रोक लगाने की शुरुआत की थी। 

इस रोक के बाद भीरा के एक किसान को गांव के कुछ मजदूरों को लेकर जाना था, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार कर दिया था। शनिवार सुबह 8 बजे किसान गांव पहुंच गया और कुछ मजदूरों को साथ लेकर जाने लगा। यह देख ग्रामीणों ने जब उसे रोककर पूछताछ की तो विवाद बढ़ गया। 

आरोप है कि किसान ने अपने ट्रैक्टर में रखे कपड़ों के बीच से लाइसेंसी दोनाली बंदूक निकाल ली और भीड़ को धमकाने लगा। इसपर भी लोग डटे रहे तो उसने फायरिंग कर दी। गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण तितर-बितर हो गए। इसके बाद किसान ट्रैक्टर लेकर मौके से भाग खड़ा हुआ।

फायरिंग की बात सुनकर ग्रामीण जमा हो गए और भीरा पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंचे भीरा कोतवाली प्रभारी प्रदीप सिंह ने एक जिंदा कारतूस व दो दागे गए कारतूस को कब्जे में लिया। एसओ ने बताया कि ग्रामीण रमेश की तहरीर पर आरोपी हरबंस सिंह उर्फ बंशा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। 


आरोपी को हिरासत में लेकर घटना में प्रयुक्त बंदूक को कब्जे में ले लिया है। इस समय थाने में एक दर्जन से ज्यादा ग्रामीण प्रधान पुत्र शिवराज सिंह के नेतृत्व में जमा है, वहीं आरोपी हरभजन सिंह के पक्ष के लोग भी थाने में एकत्र हो रहे हैं। पुलिस ने बताया कि स्थिती सामान्य है। गांव वालों को वर्तमान हालात देखते हुए भीड़ न लगाने की सलाह दी गई है।
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