चार दिन मंडी बंद रहने से 80 करोड़ का फटका

Ghaziabad Bureauगाजियाबाद ब्यूरो Updated Thu, 24 Sep 2020 11:10 PM IST
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पत्रकार वार्ता करते गल्ला व्यापारी।
पत्रकार वार्ता करते गल्ला व्यापारी। - फोटो : BULANDSHAHR

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चार दिन मंडी बंद रहने से 80 करोड़ का लगा फटका
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बुलंदशहर। कृषि विधेयक के विरोध के चलते चौथे दिन भी गल्ला मंडी बंद रही। जिसके चलते करीब 80 करोड़ का नुकसान हुआ है। गल्ला मंडी व्यापारियों ने अब हरियाणा की तर्ज पर मंडी शुल्क एक प्रतिशत करने की मांग की है।
सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि विधेयक का विरोध अब लगातार बढ़ता जा रहा है। गल्ला मंडी एसोसिएशन के आह्वान पर जिले की सभी मंडियां बंद पड़ी है। वहीं, भाजपा के नेताओं का दावा है कि बड़े स्तर पर वार्ता की जा रही है। जल्द ही समाधान निकाल लिया जाएगा। गल्ला मंडी व्यापारी सरकार को किसान विरोधी बता रहे हैं। इसको लेकर मंडी समिति के कार्यालय पर एक बैठक का भी आयोजन हुआ। जिसमें आगे की रणनीति बनाई गई। व्यापारियों का कहना है कि 26 सितंबर तक सरकार का रुख देखेंगे उसके बाद आगे की लड़ाई लड़ी जाएगी। उनका कहना है कि कृषि विधेयक के विरोध में जनपद की गल्ला मंडी 21 सितंबर से बंद हैं। गल्ला मंडी एसोसिएशन के नेतृत्व में व्यापारियों ने मंडी परिसर में ढाई प्रतिशत और बाहर शून्य शुल्क प्रणाली का विरोध किया। व्यापारियों ने कहा कि सत्ता में आने से पूर्व भाजपा मंडी व्यापारियों को किसानों का एटीएम बताती थी लेकिन अब इन्हें बिचौलिया और दलाल के रूप में पेश कर रही है। जबकि यूपीए सरकार में बिचौलिया कहने पर भाजपा नेता आग बबूला हो जाते थे। व्यापारियों ने मांग पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है। व्यापारियों ने प्रदेश सरकार से हरियाणा की तर्ज पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क करने की मांग की है।
कृषि विधेयक और मंडी शुल्क को लेकर गल्ला मंडी व्यापारियों ने एक पत्रकार वार्ता की। उनका कहना है कि सरकार को हम टेक्स देते है तो बिचौलियां और दलाल शब्द का प्रयोग क्यों किया जा रहा है।
अनूपशहर रोड स्थित मंडी परिसर में गल्ला व्यापारियों ने प्रेसवार्ता की। एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा की तर्ज पर मंडी शुल्क एक प्रतिशत होना चाहिए। महामंत्री चंद्रकांत सिंहल ने कहा कि मंडी परिसर में ढाई प्रतिशत और बाहर जीरो शुल्क से व्यापारियों के पास कौन फसल बेचेेगा। मुकुट लाल गुप्ता ने कहा कि जनपद से कई धान मिलें व्यापारियों का पैसा लेकर भाग गई। कृषि विधेयक में किसान को किसी को भी फसल बेचने का अधिकार दिया है जबकि फसल खरीदकर पैसा दिलाने की जिम्मेदारी किसकी होगी। बताया कि हम बिचौलिए नहीं बल्कि सरकार को शुल्क देने वाले लाइसेंस धारक हैं। मौके पर जयप्रकाश गर्ग, गिरीराज सिंह, मूलचंद, इरफान, राहुल सिंह, अतुल गर्ग, जिवेंद्र नारायन बंसल, रनवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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