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गुठनी के श्रीकरपुर वार्डर पर टूटा लॉक डाउन का चैन

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 29 Mar 2020 09:27 PM IST
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रोडवेज के सामने अपने गनतब्य तक जाने के लिए वाहन के इंतजार में खडे बाहर से आए यात्रि।
रोडवेज के सामने अपने गनतब्य तक जाने के लिए वाहन के इंतजार में खडे बाहर से आए यात्रि। - फोटो : DEORIA
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गुठनी के श्रीकरपुर बॉर्डर पर टूटी लॉकडाउन की चेन
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कामगारों को आइसोलेट के लिए रात भर पुलिस लगाती रही दौड़
स्वास्थ्य जांच के बाद बिहार में दी गई एंट्री
अमर उजाला ब्यूरो
मेहरौनाघाट। दिल्ली, लखनऊ, आगरा, कानपुर और गोरखपुर से अपने परिवार सहित पैदल ही मजदूर अपने घरों को जा रहे हैं। सैकड़ों मजदूरों को रास्ते मे ही सरकारी बसों द्वारा शनिवार को देर रात लाकर यूपी बिहार के बॉर्डर के श्रीकरपुर चेकपोस्ट पर छोड़ दिया गया। इसको लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन सकते में आ गई।
आनन-फानन बिहार गुठनी के एसओ मनोरंजन कुमार ने अफसरों को सूचना दी। मामले की सूचना पर बीडीओ धीरज कुमार और सीओ राकेश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग की सहायता से सबकी प्रारंभिक जांच कराने के बाद उन्हें गुठनी के आरबीटी विद्यालय, मैरवा के हरेराम कॉलेज और कुछ मजदूरों को सुविधानुसार जीरादेई के महेंद्र सिंह उच्च विद्यालय में आइसोलेशन वार्ड बनाकर आइसोलेट करवाने की व्यवस्था की। अपने बीबी और दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ आगरा से आ रहा बिहार के सहरसा जिला निवासी जयशंकर ने कहा कि साहब काम बंद होने के कारण हम परिवार सहित भुखमरी के शिकार हो रहे थे घर आने या भूखे पेट सोने के अलावा कोई चारा नहीं था। गुठनी के श्रीकरपुर मेहरौना बॉर्डर पर लॉकडाउन की चेन टूटने की संभावित सूचना पर डीडीसी सुनील कुमार व एसडीओ जितेंद्र पांडेय सहित एडीएम और एसडीओ सीमा पर पहुंच कर स्थानीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। स्थिति को सामान्य बनाने में हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया।
लॉकडाउन में गैरजिम्मेदाराना हरकत से बढ़ा खतरा
रुद्रपुर। लॉकडाउन में लोगों की गैरजिम्मेदाराना हरकत से कोरोना वायरस बढ़ने का खतरा बना है। गांवों में महिला देवी स्थानों पर धार, कर्पूर चढ़ाने को भीड़ एकत्र कर रही है। थाना में सामान बेचने को पास बनवाने को व्यापारी और बाजार में खरीदारों के जमा होने से संक्रमण बढ़ने की आशंका बनी है।
एकौना थाना परिसर में सब्जी और फल बेचने को पास बनाए की सूचना पर व्यापारियों की भीड़ जमा हो गई। नायब तहसीलदार की मौजूदगी में व्यापार एक दूसरे से सटकर करीब दो घंटे तक रहे। सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था तार-तार होती हुई दिखी। श्रीनगर कोल्हुआ गांव में सुबह-शाम देवी मंदिर पर महिलाओं की भीड़ जुट रही है। गांव में महिलाएं कोरोना को दैवीय प्रकोप का बताकर जल चढ़ाने को मजमा लगा रही हैं। अंधविश्वास के कारण गांव में भीड़ इकट्ठा होने से अन्य लोगों में भय बना है। रविवार की सुबह तीन बजे से छह बजे तक खरीदारी की छूट मिलने पर लोग जुट जा रहे हैं। कुछ व्यापारी सेमरौना पुल पर ठेला लेकर पहुंच गए। देहात क्षेत्र से आए लोग आपस में धक्का-मुक्की कर खरीदारी करने लगे। इस बाबत एसडीएम ओमप्रकाश ने कहा कि लोगों से बार बार सोशल डिस्टेंसिंग दूरी बनाए जाने की अपील की जा रही है। उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
बनारस से पैदल रुद्रपुर पहुंचे भूख से तड़पते मजदूर
रुद्रपुर। भूख की तड़प बर्दाश्त नहीं होने पर मजदूर बनारस से पैदल चलकर रविवार की सुबह रुद्रपुर पहुंचे। वह बनारस में सड़क निर्माण और दोहरीघाट में जल निगम की एक पानी की टंकी बनाने में मजदूरी कर रहे थे। लॉकडाउन होने पर ठेकेदार उन्हें उनकी हालत पर छोड़कर फरार हो गया। मजदूरों को देवरिया जिले का एक ठेकेदार लेकर गया था। नगर में पहुंचे मजदूरों के चेहरे पर भूख की तड़प और शरीर से थकान साफ झलक रही थी। प्रशासन ने उन्हे नहलाकर भोजन कराने के बाद जिले की सीमा तक वाहन से छोड़ा।
बिहार प्रांत के गोपालगंज जिले के दिलीप, हरेराम, राजू मांझी, मुन्ना मुसहर, अजय कुमार, परेबाद के हरीलाल, बिट्टू, सारंग के शक्ति कुमार, सोनपुर के रविंद्र राय, गनेश कुमार और कुशीनगर जिले के तरयासुजान निवासी सबरू, नितेश कुमार, पिपरा मिश्र के उपेंद्र पाल, तमकुही के सत्तन प्रसाद, मंटु कुमार बनारस से गोरखपुर तक निर्माणाधीन सड़क में मजदूरी का कार्य रह थे। इनमें से कुछ मजदूर एक सप्ताह से मऊ जिले के दोहरीघाट में पानी की टंकी के निर्माण में लगे थे। देश में कोरोना के संक्रमण को देखते हुए 21 दिन के लॉकडाउन पर ठेकेदार मौके से फरार हो गया। बकौल मजदूर उनके पास महज दो दिन का राशन बचा था। राशन समाप्त होने के बाद मजदूर भूख से बेहाल होने लगे। भूख सहन नहीं हुई तो मजदूर शनिवार की सुबह बनारस से पैदल चल दिए। रास्ते में मिलने वाले हैंडपंपों से वह गला तर करते रहे। सुबह नगर में पहुंचने पर एसडीएम ओमप्रकाश ने उन्हें जूनियर हाईस्कूल में ठहराया। करीब दो घंटे तक उन्हें नाश्ता, भोजन कराने के बाद वाहन से जिले की सीमा तक छोड़ा गया। भीमसेन माझा गांव के समीप भी तहसील प्रशासन की ओर से मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराया गया।
विभिन्न जगहों से जिले में आए तीन हजार से अधिक लोग
देवरिया/बैतालपुर। बाहर के प्रदेशों में फंसे लोग रविवार को जिले में आए। सीमा में प्रवेश करते ही उनकी स्क्रीनिंग की गई। पानी और लंच पैकेट दिया गया। पुलिसवालों ने उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर नोट किए। ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क किया जा सके।
रविवार को पछुआ हवाओं ने अपना रूप दिखाया। तेज हवा के चलते सड़क पर बैठकर स्क्रीनिंग और अन्य कार्य करने में पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और चिकित्सकों को दिक्कत होने लगी। इसके बाद उन्हें पास ही में एक नवनिर्मित होटल के पास ले जाया गया। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ सोशल ने डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए लाइन लगवाकर उनकी स्क्रीनिंग की। इसके बाद पुलिस वालों ने उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर एक रजिस्टर में नोट किया। दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और अन्य शहरों से जिले में आ रहे भूखे-प्यासे लोगों के खाने-पीने का इंतजाम किया गया था। सभी को लंच पैकेट दिया गया। यहां सीओ बरहज अंबिका, मदनपुर इंस्पेक्टर श्यामलाल यादव और गौरीबाजार इंस्पेक्टर विजय सिंह गौर समेत तमाम पुलिसकर्मी मौजूद रहे। इस बाबत गौरीबाजार इंस्पेक्टर विजय सिंह गौर ने बताया कि रविवार को तीन हजार से अधिक लोग बस और अन्य साधनों से आए हैं। इनकी यहां विधिवत स्क्रीनिंग कराई गई।
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