300 ग्रामीणों ने भरे आवेदन फार्म

Hamirpur Updated Sat, 19 Jul 2014 05:30 AM IST
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नाबार्ड और अमर उजाला का संयुक्त वित्तीय समावेशन जारी
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भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। विकासखंड क्षेत्र के इंगोहटा व टेढ़ा गांव में नाबार्ड व अमर उजाला के संयुक्त वित्तीय समावेशन के तहत जीरो बैलेंस पर खाता खोलने का काम हुआ। इस मौके पर करीब 300 आवेदन फार्म भरे गए। खाता खुलवाने को बड़ी संख्या में लोग प्रचार वाहन के निकट पहुंचे। यहां पर ग्रामीणों ने नाटकों व गीतों के माध्यम से बैंक सुविधाआें की जानकारी ली। साथ ही लकी ड्रा के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। बैंक खाता खुलवाने में ग्राम प्रधानों ने भी पूरा सहयोग दिया।
नाबार्ड व अमर उजाला ने अपने संयुक्त अभियान में ग्रामीण क्षेत्र के हर व्यक्ति को बैंक से रिश्ता रखने के लिए अभियान छेड़ रखा है। वित्तीय समावेशन के तहत लोगों को बैंकों से जुड़ने से होने वाले लाभों की जानकारियां दी जा रही है। साथ ही जीरो बैलेंस में ग्रामीणों के खाते खोले जा रहे है। प्रात:कालीन शिफ्ट में इंगोहटा गांव में शिविर लगाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर अपने आवेदन भरे। इस मौके पर इंगोहटा स्थित इलाहाबाद बैंक के कर्मचारियों ने मौजूद रहकर लोगों को जानकारी देकर खाता खुलवाने को प्रेरित किया। दोपहर बाद टेढ़ा गांव में शिविर लगा। जिसमें टेढ़ा, पचखुरा महान, सुरौली बुजुर्ग व भौंरा के ग्रामीणों के खाते खोले गए। टेढ़ा के ग्राम प्रधान परशुराम प्रजापति ने कहा कि नाबार्ड व अमर उजाला ने जीरो बैलेंस पर खाते खोलकर गरीबों की उम्मीदों को जगाया है। खाता खुलने से शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ गरीबों को मिल सकेगा। सुरौली बुजुर्ग के ग्राम प्रधान रामफूल निषाद ने कहा कि अमर उजाला समय-समय पर लोगों को लाभ पहुंचाने की योजनाएं संचालित करता है, जो एक सराहनीय कदम है। नाबार्ड के माध्यम से लोगों के विभिन्न बैंकों में खाता खोलने का जो अभियान चलाया गया है। उससे पंक्ति के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी लाभ मिलेगा। इंगोहटा के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राकेश यादव का कहना है कि अमर उजाला व नाबार्ड गांव-गांव पहुंचकर लोगों को बैंकों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। बैंकों से नया रिश्ता जोड़कर लोग आगे सुविधाओं का लाभ ले सकेंगे। इस मौके पर लकी ड्रा का आयोजन किया गया। जिसमें विजेताओं को उपहार देकर सम्मानित किया गया। शनिवार 19 जुलाई को सुमेरपुर
कसबा, मुुंडेरा, पचखुरा गांवो में लोगों के बैंक आवेदन भरवाए जाएंगे। जबकि 21 जुलाई को सुमेरपुर कसबा, पौथिया, हमीरपुर में शिविर लगाया जाएगा।
इसे कहते हैं वित्तीय समावेशन
हमीरपुर। समाज के वंचित, असहाय व कमजोर वर्ग को कम लागत, सही समय पर पर्याप्त मात्रा में ऋण और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया वित्तीय समावेशन कहलाती है। वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य गरीब तबके के लोगों को संस्थागत वित्तीय सेवाओं के दायरे में लाकर उन्हें गरीबी से मुक्त कराना है। इस कार्य को नाबार्ड के साथ मिलकर अमर उजाला गांव-गांव जाकर कर रहा है। नाबार्ड व अमर उजाला के समावेशन से गांव के घर घर जाकर ग्रामीणों को बैंको से जोड़कर उन्हें कई प्रकार के लाभो को दिलवाने का कार्य किया जा रहा है। बैंको से जुड़ने के बाद गरीब तबके के लोग अपनी जमा पूंजी में बचत कर सकते है तो बैंकों से ऋण भी ले सकते है। बीमा करवाने के साथ साथ धन प्रेषण व वित्तीय सलाह की सुविधाएं भी प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नही साहूकारों के शिकंजे भी बचा जा सकेगा।
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