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जेल में बीमारी का बहाना बनाकर कैदी नहीं आ सकेंगे बाहर

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Sat, 22 Feb 2020 01:33 AM IST
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prisioners did not go out of jail pretend sick
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झांसी। जेल मे बंद कैदी अब गंभीर बीमारी का बहाना बनाकर बाहर नहीं आ सकेंगे। अब जेल के अंदर ही उनकी जांच के निर्देश मिले हैं। सीएमओ द्वारा डॉक्टरों की टीम भी तैयार की जा रही है। टीम जेल में जाकर हर माह कैदियों का इलाज करेगी।
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बंदी इलाज के बहाने बड़े-बड़े अस्पतालों में जाकर मनचाही गतिविधियां न कर सकें, इसके लिए अब जेल से कैदी बाहर नहीं जा सकेंगे। शासन ने अब जेल में ही बंदियों की जांच और गंभीर बीमारियों के इलाज की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए हैं। शासन ने सीएमओ को डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें सभी बीमारियों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके बाद जिला कारागार में व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं। सीएमओ के नेतृत्व में सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैयार की जा रही है। डॉक्टरों की यह टीम जेल में जाकर कैदियों का इलाज करेगी।
अब तक जेलों में गंभीर बीमारी से पीड़ित कैदियों को इलाज के लिए जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। आपातस्थिति में जेल अस्पताल के ही डॉक्टर जेल में जाकर उनका इलाज करते हैं। लिहाजा कई बीमारियों का इलाज नहीं हो पाता था और कैदियों को जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में जेल प्रशासन को बंदियों को दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर काफी दिक्कतें आती हैं।
हर 15 दिन पर पहुंचेगी टीम
चिकित्सकों की यह टीम पखवारे में एक बार जेल में पहुंचकर कैदियों का चिकित्सीय परीक्षण करेगी और वहीं उनका इलाज करेगी। सीएमओ ने डॉक्टरों की टीम गठित करने के लिए विशेषज्ञों का चयन करना शुरू कर दिया है। टीम में सभी रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ ही गायनोकोलॉजिस्ट भी होंगी। जेल में निरुद्ध महिला बंदियों का इलाज भी बाकी बंदियों की तर्ज पर करवाया जाएगा।
1200 कैदियों के इलाज में आती है दिक्कत
जेलों में ही बंदियों का इलाज कराने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी अहम होगा। जिला जेल में दर्जनों बड़े अपराधी बंद हैं, वहीं कई बैरकों में डकैतों से लेकर शातिर बदमाश व करीब 1200 कैदी भी सलाखों के पीछे हैं। बीमार होने की स्थिति में जेल प्रशासन को इन बंदियों को अस्पताल पहुंचाने व लाने में काफी कसरत करनी पड़ती है। इसके लिए सुरक्षा के भी कड़े बंदोबस्त करने पड़ते हैं।
शासन से जेल में ही कैदियों का इलाज कराने के निर्देश मिले हैं। सीएमओ स्तर पर चिकित्सकों की टीम भी गठित की जा रही है। इस फैसले के पीछे तर्क है कि कैदी इलाज के बहाने बडे़ अस्पतालों में पहुंचकर मनचाही गतिविधियां न कर सकें। बंदियों का इलाज जेलों में करवाने का फैसला सुरक्षा की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
राजीव कुमार शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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