कबरई बना कब्रगाह: अवैध खनन से 300 पहाड़ गायब, धरोहर भी तबाह

सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 19 Sep 2020 12:58 PM IST
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कबरई बना कब्रगाह
कबरई बना कब्रगाह - फोटो : अमर उजाला

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महोबा जिले में अवैध खनन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त करने के साथ प्राकृतिक तबाही भी मचाई है। अवैध खनन से सैकड़ों बीघे में फैले तालाब सिमट गए हैं। अब ये तालाब नजर ही नहीं आते। वहीं पिछले तीन चार दशक के खनन से जिले के करीब तीन सौ पहाड़ गायब हो गए हैं।
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खनन इस कदर किया गया कि पहाड़ी गायब होने के साथ-साथ जमीन को भी पचास से सौ फीट तक खोद डाला। महोबा का मुख्य पेशा पहाड़ों का खनन है। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर बताते हैं कि पिछले तीन चार दशकों में करीब तीन सौ पहाड़ गायब हो चुके हैं।
गायब का मतलब खनन से वो खत्म हो चुके हैं। उनकी कुछ जड़ें बाकी हैं। आशीष के मुताबिक, खनन माफिया तय पट्टे से अधिक दायरे में खनन करते हैं। इससे पूरी पहाड़ियां खत्म हुई हैं। एक तरह से इसी अवैध खनन करने को अफसरों तक रकम पहुंचाई जाती है।
जिम्मेदार अफसर खनन माफिया की करतूतों से वाकिफ हैं, लेकिन अनजान बने हुए हैं। कबरई गांव की आबादी एक समय गांव के जोगन तालाब पर निर्भर रहती थी। पानी की जरूरतें ग्रामीणों की इसी तालाब से पूरी होती थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये तालाब करीब ढाई सौ साल पुराना है।
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