गोदामों से लेकर कोटेदार तक करते हैं अनाज की कालाबाजारी

अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Sun, 05 Jun 2016 12:04 AM IST
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 क्षेत्र की बेपटरी हुई सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर खाद्यान्न माफिया का कब्जा है। वे हर माह अपने झोले से नोट बांटकर कई गुना बटोरकर अपनी तिजोरी भरते चले आ रहे हैं। सरकारी खाद्यान्न की काला बाजारी में वे हर स्तर पर सजदा करते है ताकि उनके कारोबार पर किसी की बुरी नजर न लग पाए। उनके तिलिस्म को तोड़ना आसान बात नहीं है।
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खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार होगा। गरीबों के पेट पर डाका डालने वालों के पैर में बेड़ी पड़ जाएगी। पर, आम लोगों की यह धारण कुछ ही महीने में गलत साबित हो गई। सूत्रों पर यकीन करें तो आपूर्ति विभाग के पूरे सिस्टम पर खाद्य माफिया ने अपनी बैठ बना रखी है। वे अपना मायाजाल फैला हर स्तर पर अपना काम बनाने में माहिर होते हैं। कहते हें कि जब से खाद्यान्न का दाम सस्ता हुआ है। सरकारी अनाज की कालाबाजारी करने वालोें की राह और भी आसान हो गई है।
वे पहले की ही तरह चालान जमा कराए जाने के साथ क्षेत्र में सक्रिय होकर कोटेदारों से सौदा तय कर लेते हैं कि वे उठान में से कितना अनाज ब्लैक करेंगे। सौदा तय होने के बाद वे बाजार रेट से तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल की कम की दर से कोटेदार को भुगतान कर देते हैं। सूत्रों का कहना है कि सकारी अनाज की कालाबाजारी करने वालों का खेल गोदाम से कोटेदार के घर के बीच ही पूरा हो जाता है। वहीं विपणन विभाग में कोटेदारों को घटतौली का शिकार होना पड़ता है। कोटेदारों से बचाए अनाज को अधिकारी ऊंचे दामों पर बेंच देते है।
गोदाम से अनाज पहुंच जाता है बाजार में
 क्षेत्र में सक्रिय खाद्यान्न माफिया दो तरह से सरकारी अनाज की कालाबाजारी कराते हैं। ऊंची पकड़ वाले खाद्यान्न को नैनी गोदाम से स्थानीय गोदाम पहुंचने से पूर्व अनाज को मुट्ठीगंज में ही उतराकर बेच लेते हैं। दूसरे स्तर पर खाद्यान्न माफिया गोदाम प्रभारी की मिली भगत से स्थानीय गोदाम से खाद्यान्न को गोपनीय तरीके से ट्रक में लादकर अजुहा मंडी ले जाकर खास अढ़तिया के अड्डे पर खड़ा कर देते हैं। अढ़तिया पहले से तैयार मजदूर सरकारी बोरी को फाड़कर अनाज का ढेर लगा देते हैं, जिससे देखने वालों को लगे कि किसान का अनाज है। सूत्रों का कहना है कि अजुहा की एक मिल में भी अनाज उतारा जाता है।

अधिकारियों की जेब भरने के लिए होती है कालाबाजारी
 क्षेत्र का एक कोटेदार 25 से 30 फीसदी सरकारी अनाज की कालाबाजारी कराता है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा करना कोटेदाराें की मजबूरी भी रहती है। वे खाद्यान्न माफिया के हाथ सरकारी अनाज नहीं बेचें तो सिस्टम वालों का पेट कहां से रुपया लाकर भरें।

गोदाम के आसपास होता है माफिया का ठिकाना
 क्षेत्र के खाद्यान्न माफिया स्थानीय गोदाम में कि सी न किसी रूप में  सक्रिय रहते हैं। वे गोदाम के आसपास किसी दुकान को अपना अड्डा बना लेते हें। दुकान में मौजूद रह कर अपनी सरपरस्ती चलाते हैं। वे उठान के दौरान कोटेदारों पर पैनी निगाह भी अपने गुर्गों के जरिए रखते हैं। वहीं जिला आपूर्ति अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन रहते हैं।

क्या सब कुछ टेलीफोन पर ही पूछ लेंगे। नियमानुसार जो भी कार्रवाई की जरुरत होगी वो की जाएगी।
अनूप तिवारी, जिलापूर्ति अधिकारी
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