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ड्रैगन फ्रूट की खेती कर फंसे किसान

अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Mon, 12 Sep 2016 12:29 AM IST
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 जिले के किसानों को ड्रैगन फ्रूट (पिताया) की खेती करना महंगा साबित हो रहा है। अधिकारियों के झांसे में आए किसानों के पौधे बर्बाद हो गए हैं। उद्यान विभाग ने तमाम दावे कर पौधे तो बेच दिए, लेकिन खेती का तौर-तरीका नहीं बताया। पौधे बर्बाद होने लगे तो अधिकारी उन्हें ही जिम्मेदार ठहराने लगे हैं।
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   जिले में औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने एक अच्छी पहल की थी। किसानों की तरक्की के लिए उन्होंने ड्रैगन फ्रूूट की खेती जनवरी माह में शुरू कराई थी। इस खेती के लिए यही मौसम अनुकूल होता है। जिले में शहजादपुर, शाहपुर, टेंगाई, शमसाबाद, बरेठी आदि गांवों के किसानों को छह हजार पौधे बेचे गए थे। एक पौधे की 50 रुपये कीमत थी। पौधे देकर उद्यान विभाग ने अपना हाथ खींच लिया है।
कई किसानों ने कड़ी मशक्कत के बाद पौधे तो बचा लिए,  लेकिन कई किसानों की लागत ही डूब गई। वह पौधों को सुरक्षित नहीं कर पाए। किसानों का आरोप है कि उद्यान विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिली। पौधे खराब हो गए तो किसानों ने मुंह खोलना शुरू कर दिया। अब अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि विभाग की ओर से इस खेती के लिए कोई मदद नहीं मिलती है।
200 रुपये किलो बिकता है फल
ड्रैगन फ्रूट का पौधा तैयार हो जाता है तो उसका फल दो सौ से ढाई सौ रुपये किलो में बिकता है। यह फल कई बीमारियों में काम आता है। सुगर, हड्डी में दर्द होने पर बहुत लाभकारी साबित होता है। इसके गुणों को देखते हुए ही डीएम ने खेती शुरू कराई थी, लेकिन उद्यान विभाग ने उनकी सोच पर पलीता लगा दिया। वहीं अपर उद्यान अधिकारी मेवाराम का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती पहली बार जनपद में हो रही है। रिजल्ट अच्छा है। कुछ पौधे खराब हो गए हैं, लेकिन वह क्या करें। किसानों की लापरवाही से ऐसा हुआ है। किसानों की मदद के लिए शासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है।
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