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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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Corona Virus in UP Live: प्रदेश में 80 संक्रमित, लखनऊ में 9 दिनों से नहीं मिला कोई मरीज

शासन और प्रशासन संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लोगों से भी हर वक्त घरों में रहने की अपील की जा रही है।

30 मार्च 2020

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लखीमपुर खीरी

सोमवार, 30 मार्च 2020

पलायनः केजरीवाल की घोषणाएं भूख नहीं मिटा पाईं तो छोड़ आए दिल्ली, छलका मजदूरों का दर्द

हाईवे पर काफिलों की भरमार है। थके-मांदे और पसीने से तरबतर लोग लगातार चलते ही जा रहे हैं। एक-एक कदम बढ़ाना भारी पड़ रहा है लेकिन फिर भी सफर लगातार जारी है। चलते-चलते तमाम पैरों में चप्पलें और जूते फट गए हैं जो इस दर्दनाक यात्रा के गवाह के तौर पर हाईवे पर ही जगह-जगह छोड़ दिए गए हैं। सूजे हुए पैरों के खून से रिसते जख्म बता रहे हैं कि जिंदगी बचाने का यह सफर कितना भारी पड़ रहा है।

शनिवार तड़के ऐसे तमाम काफिलों की सेटेलाइट बस स्टैंड के अलावा बड़ा बाईपास पर विलयधाम ओवरब्रिज और इज्जतनगर के परातासपुर इलाके में सड़कों पर भरमार थी। ज्यादातर लोग दिल्ली से आ रहे हैं जिनके एक तरफ कोरोना की चुनौती थी और दूसरी तरफ भूख की। कभी उन्होंने भूख मिटाने के लिए ही दिल्ली का रुख किया था लेकिन लॉक डाउन होने के बाद जब भूख ही जिंदगी लेने पर आमादा हो गई तो दिल्ली छोड़ दी।

कहते हैं, केजरीवाल ने आधार कार्ड पर राशन के साथ सभी जरूरी सुविधाएं घर पर ही मुहैया कराने की घोषणा तो की लेकिन फिर भी जब कई दिन झुग्गियों में भूखे रहना पड़ा तो निकल आए। दिल्ली से आने वालों के अलावा अच्छी-खासी तादाद नोएडा और रुद्रपुर की फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों की भी है। रुद्रपुर से बेदखल हुए लोगों का सफर अपेक्षाकृत कम लंबा हैं लेकिन चिंताएं वही हैं कि घर लौटकर शायद कोरोना से तो बच जाएं लेकिन परिवार का पेट कैसे भरेंगे।

रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे दिल्ली से बाराबंकी का पैदल सफर

तीन दिन में बरेली पहुंचा भूखा-प्यासा दस मजदूरों का जत्था, अभी इससे भी ज्यादा सफर बाकी
बाराबंकी के सफदरगंज इलाके के धौरागांव में रहने वाला दस मजदूरों का जत्था दिल्ली से बुधवार को पैदल घर की ओर निकला था। इस जत्थे में शामिल रामबाबू, शिवांश और संदीप ने बताया कि उनमें से कोई दिल्ली में रिक्शा चलाता था तो कोई फैक्टरी में काम करता था। जनता कर्फ्यू के दिन से ही खाने के लाले पड़ गए और हवा फैलने लगी कि लॉक डाउन तीन महीने से पहले खत्म नहीं होगा। इसके बाद घर लौटना बेहतर समझा। काफी कोशिश की लेकिन किसी सवारी का इंतजाम नहीं हुआ। सड़क पर निकलने पर जगह-जगह पुलिस पीट रही थी। लिहाजा बुधवार रात सभी लोग अपने बैग लेकर अलग-अलग निकले और स्टेशन से अलग हटकर एक जगह इकट्ठे होने के बाद रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे सफर शुरू कर दिया। रेलवे ट्रैक पर सफर करने से पुलिस का खतरा नहीं था। जहां मौका मिला वहां सड़क पर आ गए। रामहजारे के पैर से खून निकल रहा था। शिवांश और उसके साथियों के पैर सूज गए थे। रामबाबू की हालत सबसे ज्यादा खराब थी जिनकी आंत का बमुश्किल 15 दिन पहले ही ऑपरेशन हुआ था।

शुक्रवार को चली बसें मगर दिल्ली नोएडा से बरेली लाकर छोड़ दिया

दिल्ली-नोएडा और गाजियाबाद से मजदूरों को लाने के लिए बरेली रीजन की करीब सवा सौ बसें शुक्रवार को चलनी शुरू हुईं तो हजारों लोगों को राहत भी मिली। इसके अलावा दिल्ली की भी तमाम बसें उन्हें यूपी के तमाम शहरों तक छोड़ रही हैं। लेकिन फिर भी हजारों की तादाद ऐसे लोगों की भी हैं जो बसें शुरू होने से पहले ही दिल्ली छोड़कर चल पड़े थे। खचाखच भरी बसों में उन्हें रास्ते में जगह नहीं मिली लिहाजा उन्हें परिवार के साथ पूरा सफर पैदल तय करना पड़ा।

साइकिल पर लादी पत्नी-बेटी के साथ पूरी गृहस्थी फिर रुद्रपुर से बरेली की यात्रा

पीलीभीत के बीसलपुर के गांव अखौली में रहने वाले नीरज रुद्रपुर की कंपनी में काम करते हैं। नीरज ने बताया कि रुद्रपुर में दस दिन पहले ही काम पूरी तरह बंद हो गया था। उनका पूरा परिवार कमरे में ही पूरा वक्त गुजार रहा था। ज्यादा दिक्कत तब शुरू हुई जब बाहर निकलने पर पाबंदी के बीच घर में रखा राशन खत्म हो गया और राशन, सब्जी-दूध जैसी चीजें खरीदने को पैसे भी नहीं बचे। कई बार बस और टेंपो स्टैंड गए ताकि गांव जाने के लिए कोई साधन मिल जाए लेकिन सब सुनसान पड़ा हुआ था। आखिर में साइकिल पर ही घर का जरूरी सामान लेकर लौटने का फैसला किया। पत्नी कुसुमा और दो साल की बेटी आकांक्षा के साथ रात में दो बजे चल दिए। नीरज ने उम्मीद जताई कि शाम तक घर पहुंच जाएंगे। रास्ते में पुलिसवालों ने कई जगह रोका पर परेशानी सुनकर जाने दिया।

पैर उठते नहीं, मां-बहनों का हाल देखकर दिल भी बैठा जा रहा है

शाहजहांपुर के सिंधौली कस्बे में रहने वाले तालिब अपने परिवार के साथ रुद्रपुर में रहते हैं जहां उनके पिता रिक्शा चलाते हैं और वह खुद फैक्टरी में काम करते हैं। तालिब विलयधाम पर अपनी मां, तीन बहनों और परिवार के और लोगों के साथ गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। उसने बताया कि शुक्रवार रात तीन बजे वे सभी पैदल ही घर के लिए चल दिए थे। रास्ते में टेंपो, डनलप. तांगा जो भी मिला, उस पर कुछ दूर के लिए बैठ लिए। कुछ नहीं मिला तो पैदल चलते रहे। बरेली आकर उनकी हिम्मत जवाब दे गई है। मां और बहनों की हालत देखकर दिल भी बैठा जा रहा है। बोले, काफी इंतजार के बाद यहां भी कोई गाड़ी नहीं मिल रही है। किसी तरह शाहजहांपुर पहुंच जाएं तो घर जाने की भी कोई जुगाड़ हो ही जाएगी।

 

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लॉकडाउन: जहां साधन मिला बैठ लिए नहीं तो पैदल ही चलते रहे

लखीमपुर खीरी/ मैगलगंज । कोरोना संकट के बीच बंदी के चलते दिल्ली और अन्य प्रदेशों में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले हजारों लोग पैदल ही अपने अपने घरों की ओर रवाना हो गए हैं। इस कारण दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। इन लोगों का कहना है कि जहां कोई साधन मिलता है वे लोग उसका सहारा ले लेते हैं वरना पैदल ही सफर कर रहे हैं।
दिल्ली, हरिद्वार, गाजियाबाद, राजस्थान में मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते थे, अचानक लॉकडाउन से मजदूर जहां थे, वहीं फंस गए। मजदूरों ने एक दो दिन किसी तरह गुजर बसर की। अब पैसा व खाद्य सामग्री के अभाव में वह घरों को पैदल ही लौटने लगे हैं। मजदूरों की हालत खराब है। इनमें बिहार के हुगली, फैजाबाद, गोंडा, बाराबंकी सहित कई अन्य जिलों के लोग अधिक हैं। शनिवार को इनके खाने-पीने की व्यवस्था एक समाजसेवी ने निर्माणाधीन टोल प्लाजा पर कराई। लंच पैकेट मिलने के बाद उनके चेहरे पर रौनक दिखी।
मैगलगंज में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर दोपहर पहुंचे एसडीएम मितौली दिग्विजय सिंह ने भी मजदूरों को लंच पैकेट, पानी की बोतल दीं, उनके हाथ सैनिटाइजर से धुलवाए। सावधानी बरतने की अपील की।
पलियाकलां में संपूर्णानगर थाना क्षेत्र के गोविंदनगर गांव में एक शादी समारोह में आए लगभग 50 लोग लॉकडाउन के चलते यहीं फंस के रह गए। ऐसे में विधायक रोमी साहनी ने डीएम शैलेंद्र सिंह से वार्ता कर बस से सभी को सकुशल देवरिया के लिए रवाना किया। इस पर सभी लोगों ने विधायक के प्रति आभार जताया।
दिल्ली से पैदल चलकर आए करीब 12 लोग यहां पहुंचे थे। उनको यहां से बहराइच जाना था। जिसके बाद सीओ राकेश कुमार नायक व पुलिस बल ने उनके लिए खाने का इंतजाम करने के साथ ही उनको यहां से शुक्रवार की देर रात जाने के लिए पिकअप का इंतजाम किया। जिसके बाद वह सभी अपने गंतव्य को रवाना हो सके।
मैलानी में कुकरा क्षेत्र के लैलून नगर के रहने वाले मजदूर रुद्रपुर में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन के कारण ये लोग वहां से पैदल ही अपने घरों को रवाना हुए और शुक्रवार की शाम यहां पहुंचे और यहां से जलपान करने के बाद फिर अपने गांव को रवाना हो गए।
गोला मेंशनिवार को रोडवेज डिपो परिसर, चौराहा, तिराहा पर थके, हारे, भूखे, प्यासे मुसाफिरों को समाजसेवी विजय माहेश्वरी, अनिल जलोटा आदि समाजसेवियों ने भोजन कराया।
‘दो दिन से नहीं मिला खाना’
ममरी में लॉकडाउन के चलते गाजियाबाद से मजदूरी कर वापस आए गोला कोतवाली क्षेत्र के गांव वनभल्लिया निवासी नितिन सिद्धार्थ, अन्नू, कपरहा के मेराज, अलीगंज निवासी सलमान अली, शमसाद आदि मजदूरों ने अपना दर्द बयां कर बताया कि उन्हें दो दिन से खाना नहीं मिला है। गाजियाबाद से कुछ दूर पैदल चलने के बाद उन्हें शाहजहांपुर तक निजी बस मिली और जैसे-तैसे मोहम्मदी से पैदल घर जा रहे हैं। वहीं अजबापुर फैक्टरी से पैदल घर जा रहे संपूर्णानगर निवासी विजय कुमार, मनोज, अजीत ने बताया कि लॉकडाउन के चलते मैनेजर ने उन्हें फैक्टरी से भगा दिया है। घर तक पहुंचने के लिए साधन न मिलने से वह पैदल ही संपूर्णानगर वापस जा रहे हैं।
सोनीपत में फंसे मजदूरों ने वीडियो वायरल कर मांगी मदद
ईसानगर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांव से मजदूरी करने हरियाणा के सोनीपत गए दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के चलते वहां फंस गए हैं। ऐसे में मजदूरों ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर मदद की गुहार लगाई है।
करीब बीस दिन पहले ईसानगर क्षेत्र के गांव सेमरिया, कटौली सहित कई गांवों से 80 मजदूर हरियाणा के सोनीपत की एक कैमिकल फैक्ट्री में काम करने गए थे लेकिन लॉकडाउन होने के कारण सारे मजदूर वहां फंस गए। शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मजदूर अपने घरों पर आने की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि न तो उनके पास पैसा है और न राशन। जिसके चलते वह संक्रमण से पहले भूख से ही मर जाएंगे।
एसडीएम धौरहरा एस सुधाकरन का कहना है कि उन्होंने वीडियो देखा है कि कौन कांट्रेक्टर इन मजदूरों को सोनीपत ले गया था। उसका पता कराया जा रहा है। यह मजदूर अभी वही रहेंगे। इनके भोजन के प्रबंध के लिए जिलाधिकारी सोनीपत और कंपनी को पत्र जारी किया गया है।
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मिठाई-केक और पेस्ट्री के कारोबारियों को 2.45 करोड़ की चपत

लखीमपुर खीरी। कोरोना की सबसे बढ़ी मार मिठाई और पेस्ट्री, केक कोरोबारियों पर पड़ी है। एक अनुमान मुताबिक लॉकडाउन के चलते मिठाई की ब्रांडेड दुकानों पर ही लाखों की मिठाइयां डंप होकर रह गईं। बेकरियों में तैयार लाखों रुपये की केक, पेस्ट्री बाजार तक पहुंचने की नौबत नहीं आई। मावा मार्केट भी अपने भरे-पूरे स्टाक के साथ बंद हुआ तो हफ्ते भर बाद भी खुलने की नौबत नहीं आई। माल बर्बाद होने की चिंता में डूबे कारोबारी कई दिन तक उसे सस्ते मद्दे में खपाने के लिए राहत भरी खबर मिलने का इंतजार करते रहे, लेकिन 21 दिन का लॉकडाउन घोषित होते ही उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं।
शहर में मिठाइयों की सैकड़ों दुकानें हैं, लेकिन सिर्फ ब्रांडेड दुकानों की गिनती की जाए तो यह संख्या 50 से ज्यादा है। कारोबारियों के मुताबिक ब्रांडेड दुकानों पर रोजाना 25 से 30 लाख रुपये कीमत की मिठाइयों की सेल होती है। इस वजह से उनके शोरूम के अलावा गोदामों में भी लाखों का माल तैयार रहता है। 21 मार्च को आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू की घोषणा से पहले तक किसी को अंदाजा नहीं था कि कोरोना के कहर के बीच एकाएक ऐसा कोई सख्त फैसला भी लिया जा सकता है। लिहाजा कारोबारी क्षेत्र में सबकुछ सामान्य तौर पर चल रहा था और नवरात्र को लेकर भी व्रत वाली मिठाई अलग से तैयार कराई जा रही थी। मिठाई कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें तब खिंचनी शुरू हुई, जब 22 मार्च की शाम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता कर्फ्यू खत्म होने से पहले ही एलान कर दिया कि यूपी में तीन दिन और लॉकडाउन लागू रहेगा। मिठाई कारोबारियों को और भी तगड़ा झटका तब लगा जब मुख्यमंत्री की ओर से 25 मार्च तक के लिए घोषित जनता कर्फ्यू की सीमा खत्म होने से एक दिन पहले 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पूरे देश में 21 दिन का यानी 14 अप्रैल तक लॉकडाउन की घोषणा कर दी।
मैगलगंज के गुलाब जामुन का कारोबार भी ठप
शहर के अलावा लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर स्थित मैगलगंज गुलाब जामुन के लिए प्रसिद्ध है। यहां भी करीब 50 दुकानें गुलाब जामुन के कारोबार में लगी हैं, जिनमें प्रतिदिन लाखों रुपये की बिक्री होती है। लॉकडाउन होने से कारोबारियों को लाखों की चपत लगी है। कई दिनों के इंतजार के बाद मिठाइयां सडने के डर से दुकानदारों ने अपने वर्करों और परिचितों में मिठाइयां बांट दी हैं।
लॉकडाउन से हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। जो मिठाइयां स्टाक में थीं, उनका वर्करों और परिचितों में वितरण करा दिया गया। नहीं तो मिठाइयां खराब हो जाती।
शिवनरायन मिठाईवाला
मिठाई, बेकरी, मावा के बाजार में लाखों का नुकसान हुआ है। अभी अगर अंदाजा लगाए तो दो करोड़ से ज्यादा कीमत का माल खराब हुआ है।
संजय गुप्ता, व्यापारी नेता
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अब तक 125 लोग विदेश से लौटे, एक निकला पॉजिटिव

लखीमपुर खीरी। विश्व में कोरोना का संक्रमण बढ़ता देख विदेशों में रह रहे जिले के 125 लोगों ने घर वापसी कर ली है। जिनमें से एक की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई जबकि वहीं 76 लोगों को घरों में डॉक्टर की सलाह पर आइसोलेट किया जा रहा है।
बता दें कि जिले में तुर्की से वापस आया मैगलगंज का कारोबारी जांच में पॉजिटिव पाया गया था जिसका लखनऊ में इलाज चल रहा है। वहीं उसके परिवार समेत आसपास के लोगों को भी आइसोलेट किया जा रहा है। इसके अलावा बाहरी जनपदों से आने वालों पर भी निगरानी रखी जा रही है। इधर, 125 में से 48 लोगों को आइसोलेट किया जा चुका है जबकि अब भी 74 लोगों को घरों में 14 दिनों तक आइसोलेट किया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि दिल्ली समेत बाहरी जनपदों से आने वाले दिहाड़ी मजदूरों को सीधे गांव न भेजकर उन्हें 14 दिनों तक रैनबसेरों में रोका जाएगा जिससे उन्हें आइसोलेट किया जा सके।
विदेश से लौटे 125 लोगों में एक पॉजिटिव केस मिला था उसका उपचार लखनऊ में चल रहा है। 76 लोगों को घरों में ही आइसोलेट किया जा रहा है। जिला अस्पताल के डॉक्टर उनका नियमित हाल ले रहे हैं। दिल्ली आदि स्थानों से आने वाले लोगों के लिए रैन बसेरा तैयार करा दिए गए है, जहां उनके खाने आदि का इंतजाम भी किया गया है।
-शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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बंदर के दौड़ाने पर छत से गिरकर गंभीर जख्मी, लखनऊ में भर्ती

मैलानी (लखीमपुर खीरी)। बंदर भगाने गया युवक छत से गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसे लखनऊ के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
मोहल्ला दामोदरपुर निवासी अनिल कुमार (39) की छत पर बने जाल पर पड़ी पॉलिथीन को बंदर फाड़ रहे थे। शनिवार शाम लगभग पांच बजे अनिल छत पर चढ़कर बंदरों को भगाने के लिए गया तो वह उसपर दौड़ पड़े। इस पर घबराकर छत से नीचे गिर गया और गंभीर रूप से जख्मी हो गया। घरवाले फौरन उसे निजी चिकित्सक के यहां ले गए, जिन्होंने उसे बाहर ले जाने की सलाह दी। उसे पहले जिला चिकित्सालय ले जाया गया। जहां से उसे लखनऊ के मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अत्यंत गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में उसे भर्ती करने से इंकार करने पर अब उसका इलाज यहीं निजी चिकित्सालय में चल रहा है। अनिल मूलरूप से पीलीभीत जिले का रहने वाला है और उसकी पत्नी रेनू आर्या यहां शिक्षामित्र है। संवाद
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अनियंत्रित होकर बाइक सड़क पर गिरी, एक की मौत,साथी घायल

निघासन-रकेहटी। खेत से घर लौटने के दौरान एक बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गिर गई। इससे बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंचे परिवारवालों ने दोनों को जिला अस्पताल भेज दिया। जहां एक युवक ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक सवार हेलमेट नहीं लगाए थे।
बता दें कि क्षेत्र के गांव रकेहटी निवासी वारिस का बेटा इसराइल (20) अपने पड़ोसी राजन (30) के साथ शनिवार शाम करीब सात बजे बाइक से खेत देखने गया था। अचानक वापस आते समय धवई पुरवा मोड़ के पास उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गिर गई, जिससे दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही परिवार वाले मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस से उन्हें तत्काल सीएचसी ले गए। जहां डॉक्टर ने हालत गंभीर बताते हुए दोनों को जिला अस्पताल भेज दिया। तभी रास्ते में इसराइल की मौत हो गई। वहीं राजन को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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मंडी में अनाज की नहीं हो सकी खरीद बिक्री

लखीमपुर खीरी। राजापुर मंडी में रविवार को आढ़तिए आए, लेकिन लॉकडाउन के चलते लेबर और किसान नहीं पहुंचे। इससे मंडी में अनाज की खरीद-फरोख्त शुरू नहीं हो पाई है। आढ़ती, व्यापारियों ने लेबर को पास देने समेत कई मांगे मंडी प्रशासन के सामने रखी है। मंडी में आने वाले किसानों की मेडिकल जांच कराने, चाय-नाश्ते की दुकान खोलने आदि मांगे भी रखी हैं। अब मंडी मंगलवार को खुलेगी, जबकि बुधवार से सरकारी गेहूं खरीद के लिए क्रय केंद्रों को भी खोला जाना है।
शासन ने मंडी समितियों को खोलकर किसानों का अनाज खरीदने के आदेश दिए हैं, जिसके बाद एसडीएम/सभापति अमरेश कुमार मौर्या ने मंडी सचिव रामबाबू शर्मा को खरीद शुरू कराने के निर्देश दिए थे। रविवार को मंडी में आढ़ती, व्यापारी पहुंचे, लेकिन लेबर और किसान एक भी नहीं पहुंचा। इससे मंडी में सन्नाटा ही पसरा रहा। मंडी आढ़ती संघ के उपाध्यक्ष सरवन गुप्ता ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या लेबरों की है, जिन्हें पास जारी नहीं किए गए हैं। इससे पुलिस उन्हें गांवों से बाहर मंडी तक आने-जाने नहीं देेगी। मुनीम और आढ़तियों को भी पास जारी किए जाएं। मंत्री अमरीश गुप्ता ने बताया कि बारदाना दुकानें खुलनी चाहिए और चाय-नाश्तेे की दुकानें खोलने की परमीशन दी जाए। तभी मंडी में काम सुचारु रूप से हो पाएगा। आढ़ती वेदप्रकाश मिश्रा, कमलेश गुप्ता, आरिफ पहलवान, रिंकू मिश्रा ने मंडी प्रशासन से मंडी में आने वाले किसानों की मेडिकल जांच की व्यवस्था कराने की मांग रखी है। उधर, मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने बताया कि किसानों के लिए मंडी खोल दी गई है। कोई भी किसान मंडी आकर अपनी उपज बिक्री कर सकता है। आढ़तियों की समस्याओं को दूर कराया जाएगा।
गेहूं क्रय केंद्रों पर नहीं दिखे इंतजाम
मंडी समिति में प्रस्तावित गेहूं क्रय केंद्रों पर अभी इंतजाम नहीं हुए हैं, जबकि एक अप्रैल से क्रय केंद्र खोले जाने हैं। किसानों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई है और न ही बैनर लगाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही हाल है।
मंडी में किसानों की उपज खरीद शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए लेबरों की समस्या दूर करने के लिए पास जारी किए जाएंगे। कोरोना से बचाव के लिए भी मेडिकल टीम लगाई जाएगी।
अमरेश कुमार मौर्या, सभापति/एसडीएम
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125 करोड़ का कारोबार हजम कर चुका कोरोना

लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन के सात दिनों में ही कोरोना ने अर्थव्यवस्था के लिए खौफनाक तस्वीर का खाका खींच दिया है। अब तक के आंकडे़ ही बता रहे हैं कि सात दिनों में कोरोना का खौफ जिले के बाजार और आटोमोबाइल सेक्टर में 125 करोड़ की धनराशि निगल चुका है। लॉकडाउन की अवधि खत्म होते यानी 14 अप्रैल 2020 तक यह नुकसान करीब 375 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। कारोबारी इस आशंका से दहले हुए हैं कि आने वाले दिनों में कोरोना की तरह आगे यह नुकसान भी गुणात्मक तौर पर बढ़ सकता है।
कोरोना ने पूरे देश में ऐसे वक्त में दस्तक दी है, जब गेहूं की फसल कटने वाली है और इसी के साथ ही सहालग की भी शुरुआत होती थी। कारोबारी क्षेत्रों में हर साल फरवरी की शुरुआत से ही पूरे साल के सबसे चमकदार वाले सीजन की तैयारी शुरू हो जाती हैं। कारोबारियों का कहना है कि सर्दी भर सिर्फ गर्म कपड़ों और कुछ हद तक इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रनिक्स के उपकरणों के बाजार में धूम रहने के बाद यह सीजन सभी सेक्टरों के लिए होता है। लिहाजा सभी कारोबारी पहले से अपना स्टॉक फुल कर लेते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो अंदाजा लगाना मुश्किल है कि जिले भर के कारोबारियों ने इस सीजन की मांग पूरी करने के लिए कितने अरब के सामान का स्टाक कर रखा है। कोरोना की दहशत के बीच लॉकडाउन होने के बाद यह सारा स्टाक भी जहां के तहां डंप हो गया है। हफ्ते भर के लॉकडाउन में सबसे ज्यादा नुकसान आटोमोबाइल सेक्टर, पेट्रोलियम सेक्टर और रेडीमेड को होने का अंदाजा लगाया जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक गर्मियों में सबसे ज्यादा शादी-ब्याह ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं। इसमें बाइक, रेडीमेड के ब्रांडेड शोरूम के अलावा छोटे कारोबारी इस सीजन में काफी तैयारी करते हैं। कोरोना की वजह से नुकसान झेलने वाले कारोबारों में दूसरा नंबर सराफा कारोबार का है। आम तौर पर शादी-ब्याह के लिए मार्च से ही सराफा बाजार में खरीदारी शुरू हो जाती है, लेकिन चीन में कोरोना के फैलते ही यह बाजार ऐसा डाउन हुआ कि फिर रफ्तार पकड़ने की नौबत नहीं आई।
लगभग दो लाख का दुधवा को हो चुका है नुकसान
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के द्वार लॉकडाउन होने के बाद से सैलानियों के लिए बंद कर दिए गए हैं। लगभग सात दिनों से सैलानियों के लिए पार्क के द्वार बंद हैं। इसको लेकर इनदिनों में पार्क को लगभग दो लाख रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है। बता दें कि पिछले माह की अगर तुलना की जाए तो पार्क प्रशासन को प्रतिमाह लगभग सात लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता आ रहा है। इस माह 23 मार्च से दुधवा नेशनल पार्क के द्वार सैलानियों के लिए बंद हैं। इससे इन सात दिनों में पार्क को लगभग दो लाख रुपये के आसपास का राजस्व नुकसान हुआ है। हालांकि कोरोना के चलते वैसे भी लोग दूरी बनाए हुए हैं।
आटोमोबाइल सेक्टर में सहालग के दौरान काफी बूम रहता है। जिले भर के सभी शोरूम पर प्रतिदिन करीब 15 से 20 करोड़ का टर्नओवर होता है, जिसमें गाड़ियों के सर्विस सेंटर भी शामिल हैं। कोरोना के चलते लॉकडाउन से एक सप्ताह में करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।
-प्रेमशंकर अग्रवाल, आटोमोबाइल कारोबारी
कोरोना से बाजार को तगड़ा झटका लगा है। लॉकडाउन होने से ट्रांसपोर्ट बंद हो गया है। इससे जिले भर के करीब 200 पेट्रोल/डीजल पंपों पर प्रतिदिन करीब दो करोड़ की सेल डाउन हो गई है। इससे सप्ताह भर में करोड़ों का नुकसान हुआ है।
- शरद वाजेपयी, पेट्रोलियम कारोबारी
लॉकडाउन से सराफा बाजार काफी प्रभावित हुआ है। मार्च में होली के बाद सोने-चांदी के जेवरात की बिक्री खूब रहती है। प्रतिदिन लाखों का कारोबार होता था, लेकिन कोरोना के चलते दुकानें बंद है। व्यापार ठप है।
-हर्ष सेठ, सराफा कारोबारी
लॉकडाउन से सात दिनों में किराना को छोड़कर अन्य दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह ठप है। इससे करोड़ों रुपये प्रतिदिन की सेल प्रभावित हुई है। रेडीमेड, रेस्टोरेंट कारोबार को भी काफी नुकसान हुआ है।
-संजय गुप्ता, व्यापारी नेता
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नवरात्र के पांचवे दिन मां स्कंदमाता का हुआ पूजन

लखीमपुर खीरी। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन देवी मंदिरों से लेकर घरों में मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप माता स्कंदमाता का पूजन हुआ। पुजारियों ने मंदिरों में तो भक्तों ने घरों पर ही मां का विधि विधान से हवन पूजन किया। रविवार को स्कंदमाता के पूजन को लेकर मंदिर से लेकर घर भक्तिमय हो गए। लॉकडाउन के कारण मंदिरों से भीड़ नदारद रही, लेकिन घरों से मां के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने मां की उपासना कर कोरोना मुसीबत से छुटकारा पाने की मन्नत मांगी। संकटा देवी मंदिर के पुजारी मदन शुक्ला ने बताया कि मां के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता चेतना का निर्माण करने वाली हैं। इनकी उपासना से अलौकिक तेज और कांति प्राप्ति होती है। मां अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती हैं। संवाद ... और पढ़ें

रामनगर लहबड़ी में मिले प्रतिबंधित पशु के अवशेष

धौरहरा। कोतवाली क्षेत्र के रामनगर लहबड़ी गांव में गोवंशीय पशु के अवशेष मिलने पर ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना पर कोतवाली प्रभारी हरिओम श्रीवास्तव फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और मांस का नमूना लेकर परीक्षण के लिए भेज दिया। गोवंश का सिर सहित अवशेष मिट्टी में दफना दिया गया। भाजपा सहित हिंदू संगठनों ने रोष व्यक्त करते हुए दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध गोवध अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रामनगर लहबड़ी गांव में गोकशी की सूचना मिली थी मौके पर कटे अवशेष और कुछ मांस मिला है जिसका परीक्षण कराया जा रहा है। मामले में अज्ञात लोगों के विरुद्ध गोवध निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है दोषियों की जल्द गिरफ्तारी भी होगी।
हरिओम श्रीवास्तव, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक धौरहरा
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रैन बसेरे का हाल: कोई मिला खाली तो कहीं सोता मिला पिल्ला

लखीमुपर खीरी। दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य प्रदेश एवं जिलों से पलायन कर लौट रहे लोगों के रुकने के लिए जिला प्रशासन ने रोडवेज बस अड्डा सहित रेलवे स्टेशन के सामने के बाथम वैश्य धर्मशाला में रैन बसेरे बनवाए हैं। जहां पर मुसाफिरों के ठहरने की व्यवस्था की गई है, लेकिन रविवार को अमर उजाला टीम के निरीक्षण में रोडवेज बस अड्डे के रैन बसेरे में कुत्ता सोता मिला तो वहीं बाथम वैश्य धर्मशाला में रुके छह लोगों को स्वास्थ्य टीम ने घर भेज दिया। दिल्ली से लौटे सुनील कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य टीम ने सर्दी जुकाम बुखार के बारे में पूछा था। इसकी शिकायत न मिलने पर घर जाने की सलाह दी, इसलिए घर चले आए। हां, टीम सदस्यों ने घर पर सावधानी पूर्वक रहने के साथ सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल जाने को कहा था।
पुरुष रैन बसेरे में सो रहा पिल्ला
रोडवेज बस अड्डे पर महिला और पुरुष यात्रियों को रोकने के लिए अलग-अलग रैन बसेरे बनाए गए हैं। वहां पर चाक चौबंद व्यवस्था के लिए एक कर्मचारी को भी तैनात किया गया है। जिसके गायब रहने से रैन बसेरे को पिल्ले सो रहे हैं।
धर्मशाला में रुके लोगों को भेज दिया घर
गाजियाबाद और दिल्ली से पलायन कर आए धौरहरा के छह और प्यारेपुर के दो लोग रविवार सुबह धर्मशाला पहुंचे। राजस्व निरीक्षक अंकित अवस्थी ने इसकी सूचना स्वास्थ्य महकमे को दी। टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण कर सभी को घर भेज दिया।
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खुलेंगी मंडी समितियां, किसान बेच सकेंगे अनाज

लखीमपुर खीरी। जनपद की सभी मंडी समितियां अपने निश्चित समय पर खुलेंगी। इस दौरान बाहर गांवों से आने वाले किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से अनाज लाकर बेच सकेंगे। इस बात की जानकारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने दी है।
उन्होंने बताया कि शासन ने मंडी समितियों में किसानों के अनाज की खरीद-फरोख्त की अनुमति दी है, क्योंकि कृषि उपज आवश्यक सेवाओं में शामिल है। गेहूं की आवक होने वाली है और एक अप्रैल से सरकारी गेहूं खरीद शुरू होनी है। ऐसी स्थिति में मंडी समितियों में आढ़तियों को अनाज की खरीद करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आढ़तियों के साथ सभापति/एसडीएम अमरेश कुमार की अगुआई में बैठक करके आवश्यक जानकारी दे दी गई है। इस मौके पर बैठक में जिला पूर्ति अधिकारी विजय प्रताप सिंह और मंडी सचिव रामबाबू शर्मा समेेत आढ़ती मौजूद रहे। इसके बाद अधिकारियों की टीम ने आटा बनाने वाली मिलों का निरीक्षण किया और कालाबाजारी होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। संवाद
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जल्द पहुंचेगी जरूतमंदों तक आर्थिक मदद: डीएम

लखीमपुर खीरी। कोरोना से जंग के बीच लॉकडाउन से आम जिंदगी की रफ्तार थम गई है। एक ओर जहां कारोबार ठप होने से दिहाड़ी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, तो वहीं गरीब और प्रतिदिन खोमचा लगाकर जीविकोपार्जन करने वाले लोगों को भी अब तक सरकार से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई है। हालांकि डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि लाभार्थियों की सूची तैयार कराई जा रही है। एक अप्रैल से लोगों तक मदद पहुंचने लगेगी।
उन्होंने कहा कि सभी तहसीलों और कुछ विभागों को जरूरी इंतजाम के लिए धनराशि मुहैया कराई गई है। दिहाड़ी मजदूरों, पंजीकृत श्रमिकों और खोमचे लगाने वालों को एक-एक हजार रुपये आर्थिक मदद प्रतिमाह दी जानी है, जिसके लिए सूची बनाई जा रही है। इसके अलावा गरीबों और मजदूरों को फ्री राशन बांटा जाएगा। डीएम ने बताया कि एक अप्रैल से अंत्योदय कार्डधारकों को मुफ्त राशन का वितरण कराया जाएगा। जल्द ही एक-एक हजार रुपये भी खातों में भेजे जाएंगे, जिसके लिए तीन करोड़ रुपये शासन से मिले हैं।
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