बाहर से आए मजदूरों को गांव में जाने से रोका, दूर एक चबूतरे पर बिताई रात

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Mon, 27 Apr 2020 11:36 PM IST
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नवीन गल्ला मंडी में चबूतरे पर बैठे पल्लेदार
नवीन गल्ला मंडी में चबूतरे पर बैठे पल्लेदार - फोटो : LALITPUR

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कडे़सराकलां / तालबेहट। लॉकडाउन को एक माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन इसके बाद भी कड़ेसराकलां सहित आसपास के कई गांवों में बाहर से गुपचुप तरीके से मजदूरों का लौटना जारी है। ऐसे मजदूरों पर प्रशासन का खास ध्यान नहीं है। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि जानकारी देने के बाद भी इनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रविवार की रात में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रविंद्र अगरिया को सूचना मिली कि ग्राम के मजरा मनेरा में कुछ लोग इंदौर से लौटे हैं। इन मजदूरों को गांव से बाहर रोककर एक चबूतरे पर रात में ठहरा दिया गया। सुबह एंबुलेंस के जरिए इन्हें क्वारंटीन सेंटर कडे़सराकलां भेजा गया।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिथि रविंद्र अगरिया ने बताया कि उन्हें जानकारी मिलने पर वह एक साथी को लेकर रात दस बजे मनेरा गांव पहुंचे। उन्होंने इंदौर से वापस लौटे हरि, पत्नी कौशल्या और तीन बच्चों के आने की सूचना चिकित्सा अधीक्षक को देकर कहा कि कौशल्या को रात में चलने में परेशानी है और क्वारंटीन सेंटर भी दूर है। ऐसी हालत में एंबुलेंस भेजने की बात कही। परंतु, उन्होंने एंबुलेंस नहीं होने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके बाद सभी को रात में गांव से दूर बाहर बने एक चबूतरे पर रुकवाया गया। सोमवार को सुबह पांच बजे उन्हें क्वारंटीन सेंटर कडे़सराकलां ले जाया गया, जहां पर रोककर उनका परीक्षण किया गया। लोगों ने इंदौर से आने वाले मजदूरों के सैंपल जांच को भेजने की ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है।
रात में दस बजे सूचना मिलने पर ग्राम मनेरा गया था। प्रशासन का रात में कोई सहयोग नहीं मिला। मैंने चिकित्सा अधीक्षक तालबेहट को फोन लगाया, तो उन्होंने एंबुलेंस नहीं होने की बात कहकर फोन काट दिया। सुबह उप जिला अधिकारी को फोन किया तो उनका सीयूजी नंबर बंद था। - रविंद्र अगरिया, प्रधान प्रतिनिधि
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रात्रि में सूचना मिलने पर मैं भी प्रधान प्रतिनिधि के सहयोग में साथ में गया था। मेरे सामने संबंधित अधिकारियों को फोन किया गया, लेकिन किसी का कोई सहयोग नहीं मिला। - सौरभ जैन
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मेरा सीयूजी नंबर कभी बंद नहीं रहता है। हो सकता है कि सुबह जब डिस्जार्च हो गया था, उसी समय संपर्क किया हो तो फोन बंद मिला हो। - मोहम्मद कमर, उपजिलाधिकारी तालबेहट
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