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महोबा

सोमवार, 30 मार्च 2020

आग लगने से मटर की फसल जली

खन्ना (महोबा)। थाना खन्ना क्षेत्र के ग्राम ग्योढ़ी में खेत में रखी मटर की फसल में अचानक एचटी लाइन से निकली चिंगारी से आग लग गई। जिससे करीब 80 हजार रुपये की मटर की फसल जलकर राख हो गई।
ग्राम ग्योढ़ी निवासी जगन्नाथ ने करीब चार बीघा में मटर की फसल बोई थी। मटर पककर तैयार होने के बाद किसान ने कटाई कराकर खेत में रख दी थी। दो दिन से खेतों में रखी मटर की फसल की थ्रेसिंग कराने के लिए किसान थ्रेसर मशीन की तलाश कर रहा था। 28 मार्च को थ्रेसर मशीन आना थी लेकिन शुक्रवार को ही अचानक एचटी लाइन से निकली आग की चिंगारी फसल में गिर गई। जिससे मटर की फसल धूं-धूंकर जलने लगी। फसल में आग लगते ही किसान दौड़ पड़ेे और ट्यूबवेल चलाकर आग बुझाने में जुट गए लेकिन आग पर काबू नहीं हो सका। किसानों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे आसपास खेतों में खड़ी सूखी फसल बच गई। सूचना देने के बाद भी दमकल गाड़ी के मौके पर न पहुंचने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
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लॉकडाउन के चलते लोगों की थम सी गई जिंदगी

महोबा। जिले में लॉकडाउन के चलते लोगों की जिंदगी सी थम गई है। शुक्रवार से प्रशासन द्वारा दोपहर में 12 से दो बजे तक राशन सामग्री खरीद के लिए दी गई छूट से लोग घरों से निकल पड़े और आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी की। इसके बाद पूरे जिले में सन्नाटा छा गया। चारों तरफ पुलिस के गश्त करने से लोग सहमे रहे। अस्पताल में भी ओपीडी बंद होने से इमरजेंसी में भारी भीड़ जुट रही है। शहर में चारों तरफ लोडर से एनाउंस कराकर लोगों को घरों में रहने की अपील की जा रही है।
जिलाधिकारी ने समाचार पत्र वितरक और दूध विक्रेताओं को सुबह आठ बजे तक का समय दिया है। इससे लोग समय से काम निपटा ले। आल्हा चौक, ऊदल चौक, हवेली दरवाजा में बेवजह घूमने वालों को पुलिस खदेड़ रही है।
रामलीला मैदान में लगने वाली सब्जी मंडी की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते ही दुकानदारों को हटाया। साथ ही लोगों के घरों तक सब्जी पहुंचाने के लिए लोडरों का इंतजाम किया। कम लोडर लगाए जाने से हर मोहल्लों में सब्जी और खाद्यान्न नहीं पहुंच पा रही हैं। शुक्रवार को डीएम अवधेश कुमार तिवारी व पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार द्वारा लॉकडाउन के दौरान जिला अस्पताल में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और जानकारी प्राप्त कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अस्पताल परिसर में भी सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के पालन कराने की हिदायत दी गई। तत्पश्चात डीएम व एसपी द्वारा नगर क्षेत्र भ्रमण किया गया और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस दौरान जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा जरूरतमंदों को लंच पैकेट वितरित किए गए तथा लॉकडाउन नियमों के पालन की अपील के साथ-साथ हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया गया।
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कम उपज देख किसान की सदमे से मौत

श्रीनगर (महोबा)। थाना क्षेत्र के ग्राम ननौरा में खेत की कटाई के दौरान उपज कम देखकर किसान की सदमे से मौत हो गई। उस पर डेढ़ लाख रुपये का कर्ज था। किसान के पास 22 बीघा जमीन थी। अच्छी फसल होने के कारण किसान को कर्ज अदायगी की उम्मीद थी लेकिन अचानक ओलावृष्टि और आंधी-तूफान से फसल बर्बाद हो गई।
ग्राम ननौरा निवासी जगत देव (70) पुत्र मिहीलाल कृषि कार्य करके परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। बेटा कमलेश भी उसका हाथ बटाता था। इस साल 22 बीघा खेत में गेहूं, मटर, राई की फसल बोई थी। किसान जगत देव ने एक बैंक से डेढ़ लाख रुपये कर्ज भी लिया था। इस साल अच्छी फसल होने के कारण वह कर्ज की अदायगी की उम्मीद लगाए था लेकिन प्रकृति के कहर से उसकी फसल पहले खेतों में गिर गई। बाद में ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई।
शुक्रवार को किसान अपने खेतों की कटाई करा रहा था। जहां पर उपज काफी कम निकलने पर वह सदमा लगने पर खेत में ही गिरकर बेहोश हो गया। इससे आसपास के किसान दौड़ पड़े और उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल में लाया गया, जहां पर उसकी मौत हो गई। तहसीलदार बालकृष्ण सिंह का कहना है कि मौके पर लेखपाल को भेज दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार राहत दिलाई जाएगी।
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घर-घर जाकर दे रहे राशन सामग्री, डीएम ने झंडी दिखाकर 12 मोहल्लों के लिए रवाना किया राशन का वाहन

महोबा। लॉकडाउन के चलते लोगों को घर-घर जाकर सब्जी व राशन मुहैया कराने के लिए रविवार को करीब एक दर्जन वाहनों को रवाना किया गया। सब्जी व राशन सामग्री से भरे वाहनों को डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
लॉकडाउन के कारण जिले में पांच दिन से बाजार बंद हैं। सब्जी की भी दुकानें नहीं खुल रही हैं। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन ने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए घरों तक सामग्री पहुंचने की व्यवस्था की है। सुबह से आलू, टमाटर, करेला, लौकी, दूध, फल, चावल, आटा आदि सामग्री से लदे वाहन मोहल्लों में घूमने लगे हैं।
जहां पर लोगों ने घरों बैठे जरूरत की सामग्री मिल रही है। खास बात यह है कि सामग्री बाजार के रेट पर मिल रही है। वाहनों को रवाना करने के बाद जिलाधिकारी ने कहा लॉकडाउन का मतलब है लोग घरों से बाहर न निकले। मोहल्लों में भी भीड़ एकत्र न करें। उन्हें घर पर ही सारी जरूरत की चीजें मिलेंगी। इस मौके पर डीएसओ एसपी शाक्य, डिप्टी आरएमओ आरके पांडेय, एआरओ देवी सिंह विश्वकर्मा, पूर्ति निरीक्षक आलोक पटैरिया रहे।
कौन कहां भेजेगा राशन सामग्री
अजहर - मोहल्ला भटीपुरा
मोहम्मद अहमद - मोहल्ला विजयनगर कॉलोनी
दिलशाद - मोहल्ला गांधीनगर
दिलशाद, इरशाद - हमीरपुर चुंगी
इसराइल - डाकबंगला, कांशीराम कॉलोनी
ईशान - राठ चुंगी कॉलोनी
नूर मोहम्मद - जिकरिया पीर
रानू - रामनगर, चांदो
शाहिद - बजरिया, करहरा
मोहम्मद इमरान - तकियापुरा
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सब्जी व खाद्यान्न सामग्री से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाते डीएम अवधेश कुमार तिवारी सब्जी व खाद्यान्न सामग्री से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाते डीएम अवधेश कुमार तिवारी

श्रमिकों की मदद को आगे आए लोग, गरीबों को राशन सामग्री दी और कराया भोजन

महोबा/कुलपहाड़। लॉकडाउन के चलते गरीबों व महानगरों से लौट रहे लोगों को खाने-पीने की परेशानी को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ जागरूक लोग मदद के लिए आगे आए हैं।
शहर में पुलिस ने महानगरों से लौटे सैकड़ों श्रमिकों को जिला अस्पताल में जांच के लिए लंबी कतार में लगा देखा। भूखे-प्यासे श्रमिकों को पुलिस ने एक-एक मीटर की दूरी बनाकर लंच पैकेट वितरित किए। लाइन में लगे लोगों ने लंच खाकर राहत महसूस की।
कस्बा कुलपहाड़ में शोभित सोनी, राहुल अग्रवाल आदि ने उपजिलाधिकारी मोहम्मद उवैस व तहसीलदार सुबोध मणि शर्मा की मौजूदगी में लॉकडाउन से परेशान गरीब लोगों को उनके घर जाकर जरूरत की राशन सामग्री उपलब्ध कराई। रेलवे स्टेशन कुलपहाड़ में दिल्ली से पटरी के रास्ते पैदल चलकर आए मुसाफिरों को भोजन का इंतजाम किया गया।
खरेला प्रतिनिधि के अनुसार नगर पंचायत खरेला और पुलिस ने बंदी से परेशान गरीबों को लंच पैकेट वितरित कर मदद की। रविवार को थाना प्रभारी राजू सिंह, नगर पंचायत के लिपिक महेंद्र श्रीवास्तव ने अन्य कर्मियों के साथ दलित बस्ती और रोजमर्रा प्रभावित गरीब वर्ग के घर-घर जाकर उनको परिवार और बच्चों की संख्या के अनुसार लंच पैकेट वितरित किए।
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बीस बसों से लाए गए दो हजार श्रमिक, सुबह से शाम तक यात्रियों की बस अड्डा पर लगी रही भीड़, जांच के बाद घर भेजा गया

महोबा। लॉकडाउन के बाद दिल्ली सहित तमाम महानगरों में फंसे करीब दो हजार श्रमिकों को शनिवार रात को विशेष 20 बसों से महोबा लाया गया। रविवार शाम चार बजे तक बसों का आने का सिलसिला जारी रहा। जिससे महोबा रोडवेज परिसर में भीड़ का रेला जिला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। महानगरों से लौटे श्रमिकों की जांच भी कराई गई।
दिल्ली, नोएडा, आगरा, झांसी, मथुरा से शनिवार की रात को एक के बाद एक करके 20 बसों में करीब दो हजार श्रमिक शहर आए। महोबा आने के बाद यात्रियों को राठ, मुस्करा, कानपुर, बांदा, कर्वी, चित्रकूट के अलावा मध्यप्रदेश के छतरपुर, चंदला, खजुराहो व महाराजपुर के लिए यहां से 17 बसों से भेेजे गए। अकेली 12 बसें कानपुर भेजी गई। जिससे रविवार को सारा दिन रोडवेज में सुबह सात बजे से बसों को कानपुर सहित तमाम स्थानों पर भेजा गया। दिल्ली से महोबा 12 से 13 घंटें में बसें आईं। नोएडा से पांच स्लीपर कोच बसें भेजी गईं।
बाहर से आए सभी यात्रियों की सारा दिन जिला अस्पताल में जांच कराकर उन्हें घर भेजा गया। जांच कराने के बाद गांव पहुंचे ग्रामीणों ने भी कोई भी आपत्ति नहीं की। महानगरों से श्रमिकों का रेला उमड़ने के बाद इनकी जांच और नामों की लिस्ट बनाने में स्वास्थ्य कर्मियों को खासा दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त टीमें लगा दी है। इसके बाद भी शाम तक जांच का सिलसिला चलता रहा। करीब आठ दिनों के बाद रविवार को रोडवेज बसें चलने की खबर फैलते ही रोडवेज में लोगों का जमावड़ा लग गया। सुबह से शाम तक लोगों को यहां से दूसरे शहरों के लिए भेजा गया।
बच्चों के घर आने की जागी उम्मीद
महोबा। आठ दिन से बंद चल रही बसों के अचानक चलने से परिवार के लोग अपने-अपने बच्चों को लेने के लिए महानगरों की तरफ निकल गए। अब माता-पिता को अपने बच्चों के घर आने की उम्मीद जाग गई है। नोएडा, कानपुर, दिल्ली व लखनऊ में तैयारी कर रहे बच्चे लॉकडाउन के चलते फंसे थे। अब बच्चे जल्द ही मां-बाप से मिल सकेंगे।
पैदल चलकर सात दिन में पहुंचे गांव
खन्ना। लॉकडाउन के चलते परदेस में रह रहे लोगों की आवाजाही तेज है। कई दिन तक वाहनों की व्यवस्था न होने पर फंसे ग्रामीण महानगरों से पैदल ही चल दिए। जगह-जगह पुलिस की पूछताछ के बाद भी डग नहीं रुके। दिल्ली, नोएडा और आगरा से पैदल चलकर छह से सात दिन में आए ग्रामीणों को पहले नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खन्ना में जांच के लिए भेजा गया। इसके बाद उन्हें गांव जाने दिया गया। महीनों बाद घर लौटे बेटों और भाइयों को पाकर परिजन खासा खुश हैं। चिचारा निवासी सुनील कुमार, गोविंद, विनय कुमार, लक्ष्मी, बरभौली निवासी मइयादीन, महेश, सिरसीखुर्द निवासी श्याम बाबू, प्रेमिका ने बताया वह दिल्ली और नोएडा में काम करते थे। पैदल चलकर गांव आए हैं।
रोडवेज बस स्टैंड में बस से उतरते श्रमिक
रोडवेज बस स्टैंड में बस से उतरते श्रमिक- फोटो : MAHOBA
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प्रदेशों से लौटे लोगों की रहीं भीड़, दो लोगों के बीच की दूरी का नहीं हो सका पालन, जांच कराकर गांव गए लोग

महोबा। दिल्ली, नोएडा, आगरा आदि स्थानों से 24 घंटे के अंदर सैकड़ों की संख्या में लोग जिले में आए। कोई बस से तो कोई पैदल ही घर पहुंचा। इस दौरान सभी की जांच जिला अस्पताल में कराई गई। जांच कराने के लिए लोगों की जिला अस्पताल में लंबी कतारें लगी रहीं। एक मीटर की सामाजिक दूरी बनाने का नियम भी काम नहीं आया। एक दूसरे के पीछे सटकर खड़े लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर महानगरों में परिवार समेत काम करने वाले लोग घरों को लौट रहे हैं। शासन ने कुछ बसों को भी विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया। जिससे घरों को लौटने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में अचानक महानगरों से आने वाले लोगों की जांच के लिए संख्या बढ़ गई। तब अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टरों की तीन टीमें लगाकर सभी की जांच कराई। सुबह से लेकर शाम तक अस्पताल के बाहर सड़क तक लोगों की कतारें लगी रहीं।
अस्पताल प्रशासन द्वारा सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए एक-एक मीटर की दूरी बनाए गए गोले पर कोई भी व्यक्ति खड़ा नजर नहीं आया। धूप तेज होने के चलते लोग एक दूसरे से सटकर खड़े रहे। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी मिश्रा स्वयं व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पहुंच बाहर से लौटे तमाम लोगों को भोजन कराया। श्रमिकों को जांच कराने में पांच से छह घंटे का समय लगा।
श्रमिकों के गांव पहुंचने पर लोग अशंकित
खरेला (महोबा)। खरेला से जुड़े एक दर्जन से अधिक गांवों में महानगरों से श्रमिकों के घर लौटते पर ग्रामीण कोरोना के चलते डरे हैं। ग्राम प्रतिनिधियों की जागरूकता से कई श्रमिकों की जांच हो रही है लेकिन अधिकांश लोग जांच कराए बगैर ही घरों में पहुंच रहे हैं। खरेला के नगर पंचायत की आबादी के अलावा जुड़े 22 गांव में बीते तीन दिन से बाहर रहने वाले लोगों के आने का सिलसिला जारी है।
सरकार की तमाम अपील और बंदी के बावजूद श्रमिकों के गांव पहुंचने से ग्रामीण दहशत में हैं। ग्राम कुड़ार में 15, धवारी में 10, बारी में 12, खरेला देहात में 11, पुन्नियां में 15, कुआं में 9, पड़ोरा में 10, पहरेथा में 8, ऐचाना में 13, बराय में 9 श्रमिकों के गांव में आने की जानकारी प्रधानों द्वारा दी गई है। थाना प्रभारी राजू सिंह ने बताया रोग की भयावह दशा को देखते हुए जानकारी मिलते ही गांव जाकर ग्रामीणों और आने वाले श्रमिकों को जागरूक कर रहे है।
छात्रवृत्ति खर्च कर बांटे साबुन
खरेला। केरोना से बचाने को भले ही समाजसेवा का दम भरने वाले सामने न आ रहे हो, लेकिन शिक्षित युवा पीड़ितों की मदद करने में पीछे नहीं है। ग्राम परथनिया निवासी मोतीलाल अहिरवार की स्नातक कर रही पुत्री पूजा ने संक्रमण से ग्रामीणों को बचाने के लिए खाते में जमा छात्रवृत्ति के पैसों से एक हजार साबुन खरीदें हैं। अब वह घर-घर साबुन वितरित कर महिलाओं, बच्चों और वृद्धों को रोग की भयावहता बताते हुए रोजाना दिन ने पांच बार हाथ धोने की अपील कर रही हैं।
जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए कतारों में लगे लोग
जिला अस्पताल में जांच कराने के लिए कतारों में लगे लोग- फोटो : MAHOBA
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निर्धनों की मदद को बढ़े हाथ, बांटे लंच पैकेट

घर-घर साबुन बांटती छात्रा पूजा
कबरई (महोबा)। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों की भूख मिटाने के लिए अब समाजसेवी आगे आ रहे हैं। शनिवार को समाजसेवियों ने श्रमिकों में खाद्यान्न व लंच पैकेट वितरित किए।
पत्थर व्यवसायी राजेंद्र पालीवाल, अविनाश पालीवाल, रजनी, चंद्रशेखर नामदेव आदि ने विवेक नगर स्थित अपने कार्यालय से मंडी में भुखमरी झेल रहे श्रमिकों को राहत सामग्री पहुंचाई। कल्ली देवी, रामबाई, रजिया, कौशल्या कुशवाहा, प्रेमवती, लल्लू समेत दर्जनों को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए खाद्यान्न के पैकेट दिए गए। प्रत्येक पैकेट में आटा, चावल, दाल, मसाले, चीनी आदि सामग्री थी।
समाजसेवी राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि लॉकडाउन के चलते 20 अप्रैल तक यह व्यवस्था चलती रहेगी। जरूरतमंद का फोन आने पर राशन व अन्य सामान उसके बताए पते पर पहुंचा दिया जाएगा। उन्होंने अपने फोन नंबर भी लोगों को दिए। ताकि जरूरतमंद कॉल करके आवश्यकता बता सकें। शहर में भी तमाम समाजसेवियों ने गरीबों व असहायों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
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बाहर से आए लोगों के घरों में लगाए जा रहे पंपलेट

महोबा। कोरोना से बचाव के लिए जिले में बाहर से आने वालों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। उन्हें होम क्वारंटीन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों के घरों के बाहर पंफ्लेट चस्पा किया जा रहा है। पंफ्लेट में संबंधित व्यक्ति का नाम और घर में रहने की तारीख के साथ लोगों को इनके घर न जाने की अपील की जा रही है। सीएमओ डॉ. सुमन ने चिकित्सा अधीक्षकों को दो दिनों में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सीएमओ ने बताया कि जिले में अन्य राज्यों या देशों से आए लोगों के घर के बाहर पंफ्लेट होम क्वारंटीन लिखकर चस्पा किया जा रहा है। इसमें बाहर से आए व्यक्ति का नाम, पता, व्यक्तियों की संख्या और क्वारंटीन की तिथि दर्ज की जा रही है। बाहर से आए व्यक्ति को घर पर भी परिवार से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।
अगर परिवार में एक भी कोरोना संक्रमित है तो उस घर के सभी लोगों को यह बीमारी हो सकती है। ऐसे में इस बीमारी से परिवार को बचाने के लिए कम से कम 14 दिन अलग रहें। सीएमओ ने कहा कि सभी चिकित्सा अधीक्षक, चिकित्सा अधिकारियों व प्रभारियों को बाहर से आए लोगों के घरों के दरवाजे पर पंफ्लेट लगाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। रोजाना कोरोना के मरीजों में इजाफा हो रहा है।
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बीमारी की चपेट में आने से दो लोगों की मौत

दिहाड़ी मजदूरों को एक माह का मिलेगा नि: शुल्क राशन-डीएम

महोबा। लॉकडाउन में दैनिक मजदूरों के भरण-पोषण की व्यवस्था के लिए डीएम अवधेश तिवारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। डीएम ने कहा कि सभी ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के अंत्योदय कार्ड धारकों, मनरेगा मजदूरों, श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक व दिहाड़ी मजदूरों को एक माह का राशन निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।
कलक्ट्रेट सभागार में डीएम ने कहा पेंशन ले रहे लाभार्थियों को अग्रिम पेंशन व गृहस्थी कार्ड धारक जो अन्य लाभ से वंचित हैं उनको भी राशन दिया जाएगा। सभी निर्माण श्रमिक, ठेला, खोमचा लगाने वाले व घुमंतू जिनके पास भरण-पोषण की सुविधा नहीं है उन्हें एक हजार रुपये दिया जाएगा।
डीएम ने एसडीएम व ईओ को निर्देश दिए कि वे पात्रों की सूची दो दिन में उपलब्ध कराएं ताकि जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने अपील की कि सभी लोग धैर्य बनाए रखें और लॉकडाउन के नियमों का पालन करें। बैठक में सीडीओ हीरा सिंह, एडीएम आरएस वर्मा, पीडी डीएन पांडेय, एसडीएम चरखारी राजेश यादव, एसडीएम कुलपहाड़ मोहम्मद उवैस, एसडीएम महोबा राकेश कुमार, डीएसओ एसपी शाक्य, एलईओ महेंद्र सिंह, डीआईओ सतीश यादव मौजूद रहे।
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लॉकडाउन के चलते चौथे दिन पुलिस की सख्ती बढ़ने से पसरा सन्नाटा

महोबा। कोरोना के डर से लोग सहमे हैं। लॉकडाउन के बाद पुलिस ने शनिवार को सख्ती दिखाई तो सड़कें और गलियां सुनसान हो गईं। सुबह से ही पुलिस के तेवर सख्त रहे। लोगों को खदेड़कर पुलिस ने घर भेजा। उधर पालिका ने सड़कों पर दरवाजों पर एंटी लार्वा का छिड़काव कराया।
लॉकडाउन के चलते आवश्यक सामग्री की दुकानें बंद हैं। बाजार में सन्नाटा है। चौराहों पर तैनात पुलिस आने-जाने वालों को लौटाती रही। पुलिस की सख्ती से सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखा। कुछ स्थानों पर पुलिस की छूट से लोग सड़क पर दिखे। मेडिकल स्टोरों पर ग्राहकों को एक-एक मीटर दूर गोले में खड़ाकर हाथ सैनिटाइज कराए गए। इसके बाद दवा दी गई। किराना दुकानों में माल कम होने पर लोगों को दो घंटे की छूट के दौरान अधूरा सामान ही मिल सका।
स्वच्छ भारत मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबधंक रूबी बानो और ईओ लालचंद सरोज के निर्देश पर शहर की गलियों में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव हुआ। जिलाधिकारी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। वार्डों में सफाई के निर्देश दिए। एसडीएम चरखारी राजेश यादव, सीएमओ डॉ. सुमन मौजूद रहीं।
पनवाड़ी प्रतिनिधि के अनुसार जिलाधिकारी अवधेश तिवारी और पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार ने पंचायत भवन पनवाड़ी में बनाए जा रहे लंच पैकेटों का जायजा लिया। जरूरतमंदों को लंच पैकेट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम कुलपहाड़ मोहम्मद उवैस, खंड विकास अधिकारी भी मौजूद रहे। इसके बाद अफसरों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ी का निरीक्षण किया।
दिल्ली से आया श्रमिक अस्वस्थ, हड़कंप : चरखारी। जरौली निवासी रविकरन (40) लॉकडाउन होने के बाद मालगाड़ी में बैठकर महोबा पहुंच गए। पैदल अपने गांव जरौली पहुंच गए। बुखार, सिरदर्द और जुकाम की शिकायत पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी ले जाया गया। डॉक्टरों ने 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचा दिया। श्रमिक के अस्वस्थ होने की सूचना से हड़कंप मच गया। लोग दहशत में आ गए। मौके पर पहुंचे डीएम-एसपी ने उसे महोबा भेजकर जांच कराई, लेकिन उसमें कोरोना के लक्षण नहीं मिले।
कानपुर बस जाने की खबर से रोडवेज में जुटी भीड़ : महोबा। कानपुर में फंसे श्रमिकों को महोबा लाने के लिए शनिवार को रोडवेज की बसें भेजने की खबर से रोडवेज परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। लोग कानपुर जाने वाली दो बसों में बैठ गए। डीएम की अनुमति न मिलने पर बसों को रोक दिया गया। इससे बच्चों को लेने जाने वाले मायूस होकर लौट गए। एआरएम महोबा एके जैन ने बताया उच्चाधिकारियों ने बस न भेजने का आदेश दिया था। इसी वजह से बस नहीं भेजी गई।
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