प्यार में पिता सा अहसास

अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 19 Jun 2016 01:02 AM IST
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गिफ्ट खरीदते युवा अपने पिता के लिये
गिफ्ट खरीदते युवा अपने पिता के लिये - फोटो : अमर उजाला

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 शहर में कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने पिता न होते हुए भी पिता से बढ़कर काम किया। बच्चों के सुख-दुख का पूरा ख्याल रखा। पिता के जाने के बाद बड़े भाई अपने छोटे-भाई बहनों का सहारा बन गए। कभी उन्हें पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। इंटरनेशनल फादर्स डे पर हम आपको ऐसे ही लोगों से रूबरू करा रहे हैं।
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अनाथ बच्चों को दिया सहारा
इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे अजय शर्मा के मन में शुरू से ही कुछ अलग करने का मन था। नौकरी में आने पर वो सपना कहीं ठहर गया। तभी एक दिन अजय को ब्रेन हेम्रेज हुआ और दो महीने कोमा में बिताने पड़े। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद 2004 में अजय ने सरकारी नौकरी छोड़ दी। एक बार फिर मन अनाथ और बेसहारा बच्चों की तरफ मुड़ गया। 2010 में उन्होंने गंगानगर में सत्यकाम मानव सेवा समिति बनाकर उन बच्चों को पिता का सहारा दिया, जिन्हें दुनिया ठुकराती है। अजय ने एचआइवी पॉजिटिव बच्चों क ो अपनाया और उनके लालन-पालन का बीड़ा उठाया। एड्स से पीड़ित 12 बच्चों को अजय पिता का प्यार दे रहे हैं। ये बच्चे इन्हें पिताजी ही बुलाते हैं।  बकौल अजय समाज में एड्स पीड़ितों के लिए कोई जगह नहीं, लेकिन इसमें बच्चों का क्या दोष। इन्हें क्यों सजा मिले, इन्हें हमारी तरह जीने का हक है।
चाचा ने दिया पिता का प्यार
पापा हमारे लिए कितने आइडियल हैं, इसे बताने के लिए इंटरनेशनल फादर्स डे से बढ़कर दूसरा दिन नहीं हो सकता। अमर उजाला का थैंक्यू जो उन्होंने मुझे यह मौका दिया। शास्त्रीनगर ई ब्लॉक निवासी नेहा अपने पिता नरेश गिरधर को अपना प्रेरणास्त्रोत कहती हैं। नेहा के पिता ने अपने तीन बच्चों के साथ बड़े भाई के बेटे को पाला-पोसा बड़ा किया। बकौल नेहा तीन साल की थी, जब हमारे ताऊ-ताई जी रोड एक्सीडेंट में गुजर गए। उनका बेटा हमारा बड़ा भाई धीरज गिरधर उस वक्त कुल 5 साल का था। पापा ने बिना किसी भेदभाव के धीरज भइया को अपने साथ रखा। हम तीनों भाई-बहनों की तरह उनकी पढ़ाई, खर्चा सब पूरा किया। पापा ने चाचा होने के बाद भी पिता की तरह उन्हें प्यार दिया। भइया को एमबीए, एमसीए डिग्री कराई। आज भइया लेक्चरार हैं, उनकी शादी भी हो गई। पापा के प्यार को धीरज भइया ने भी पूरा सम्मान दिया। अपनी शादी से पहले उन्होंने मेरी शादी कराई, सगे भाई की तरह हर रस्म अदा की। नेहा की मां प्रमिला ने भी पूरा साथ दिया।  

भाई ने दिया पिता का प्यार
माधवपुरम निवासी निशा ने बताया कि 14 साल पहले पापा हमें छोड़कर चले गए। पापा पुलिस में थे, ऑनड्यूटी उनकी मौत हो गई। उस वक्त हम तीनों भाई बहन बहुत छोटे थे। बड़ी दीदी, नीरज भइया और मैं। एक पल को लगा हमारी दुनिया ही उजड़ गई। खिलौने तो दूर मुझे तो अपनी पढ़ाई भी बंद होती नजर आई। लेकिन भइया ने हमारे एक भी सपने को टूटने नहीं दिया। उन्होंने छोटी सी उम्र में हम दोनों बहनों और मम्मी को संभाला। भइया खुद पढ़ते और खाली वक्त में जॉब करके घर का खर्चा चलाते। पापा की पेंशन से हमारा घर चल रहा था। भइया ने पापा के जाने के बाद हमें कभी भी उनकी कमी महसूस नहीं होने दी। पहले दीदी और मेरी शादी के बाद अपनी शादी की। 2009 में भइया ने पुलिस में जॉब शुरू की। फादर्स डे पर मैं भइया को ही हैप्पी फादर्स डे कहूंगी।
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