मेरठ में सत्ता के इशारे पर नाचती खाकी

अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Fri, 18 Mar 2016 01:53 AM IST
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पुलिस केरीकेचर।
पुलिस केरीकेचर। - फोटो : फाइल केरीकेचर।

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सत्ताधारी नेताओं के इशारों पर मेरठ पुलिस नाच रही है। कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले पुलिस अधिकारी अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। यहां तक कि पुलिस अपनी खुद की साख भी आम जनता के सामने गिराने लगी है। सत्ताधारी नेताओं का दबाव ऐसा है कि टीपी नगर थाने में घुसकर दरोगा पर जानलेवा हमले करने वालों को अभयदान दिया जा रहा है तो खरखौदा थाना क्षेत्र की लाखों की लूट के साजिशकर्ता को पकड़ने के बाद मेहमाननवाजी करके छोड़ा जा रहा है।
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आरोपी को गिरफ्तार करने की परमीशन एसएसपी डीसी दूबे ने दी थी और फिर सपा नेता का दबाव पड़ते ही उन्हें उसको छोड़ना पड़ा। बात यहीं खत्म नहीं होती। सदर बाजार, इंचौली, किठौर, भावनपुर और अन्य कई थानों में सत्ताधारी नेता अपने इशारे पर पुलिस को नचाते हैं। मेरठ में पुलिस अधिकारी सत्ताधारी नेताओं के दबाव में आकर कानून की मजाक बना रहे हैं।
लूट के साजिशकर्ता को थाने से छोड़ दिया
14 जनवरी 2016 को खरखौदा इलाके में पशु व्यापारियों से 25 लाख की लूट के साजिशकर्ता जफर चौधरी निवासी लिसाड़ी गेट को पुलिस ने एक सत्ताधारी नेता दबाव में छोड़ दिया।  आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर चुका हैं। बावजूद आरोपी को बेकसूर बताकर सत्ताधारी नेता ने एसओ पर एक लाख रुपये की वसूली करने का आरोप लगाकर दूसरे जनपद में स्थानांतरण भी करा दिया। बता दें कि आरोपी जफर को पहले भी खरखौदा पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था। दो दिन बंद करने के बाद उससे सत्ताधारी नेता के दबाव में छोड़ा गया था। एसएसपी ने एसओ खरखौदा को तलब कर 48 घंटे में जफर की गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए थे। अब पुलिस ने आरोपी जफर को पकड़ा तो मानो महकमे पर आफत टूट गई। 

इंचौली थाने से छुड़ाए लुटेरे  
मेरठ। एक नेता ने इंचौली थाने में बंद दो लुटेरों को छह मार्च को पुलिस पर दबाव बनाकर जबरन छुड़ा लिया। आरोपियों ने शहर और देहात के इलाके में एक दर्जन से अधिक लूट की। इसका खुलासा बृहस्पतिवार को तब हुआ जब इन लुटेरों को क्राइम ब्रांच ने पकड़ा। आरोपियों ने बताया कि एक नेता और पुलिस को उन्होंने 80 हजार रुपये दिए थे। नेता ने आरोपियों को बेकसूर बताकर क्राइम ब्रांच से छुड़ाने की पैरवी की। लेकिन क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को छोड़ने से इंकार कर दिया।

अपनी जुबान से पलटे एसएसपी 
दो सप्ताह पहले सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और एसएसपी डीसी दूबे की पुलिस ऑफिस में सपा नेत्री और उसके बेटे पर गलत आरोप लगाने की बात को लेकर तीखी झड़प हुई थी। एसएसपी ने साफ कहा था कि दरोगा पर हमला हुआ है, कोई धारा नहीं हटेगी। जिस पर सपा जिलाध्यक्ष ने नाराजगी भी जतायी थी। दोनों में नोकझोंक तो जिलाध्यक्ष यह कहकर गए थे कि कप्तान साहब 307 की धारा तो हटानी होगी। अब एसएसपी डीसी दूबे अपनी जुबान से कैसे पलट गए।

फर्जी ‘विकास’ को भेजना पडे़गा महंगा 
टीपीनगर पुलिस ने नामजद विकास को थाने से भगाया और फर्जी ‘विकास’ निवासी औरंगाबाद भावनपुर को जेल भेजा था। इसका खुलासा होने पर डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने इसकी जांच एएसपी बागपत विद्या सागर मिश्र को सौंप दी थी। जांच में एसओ टीपी नगर प्रशांत कपिल का कारनामा उजागर हुआ। एसपी सिटी ओमप्रकाश ने साफ कहा कि असली विकास उन्होंने एसओ टीपी नगर को सौंपा था। दूसरा विकास कैसे जेल भेजा, इसका जवाब तो एसओ ही देंगे। इसकी पोल खुलने के बाद पुलिस लापरवाही छुपाने के लिए झूठ बोलती आ रही है।
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