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नई सरकार में बनेगी रैपिड ट्रेन की डीपीआर

अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Wed, 24 Aug 2016 01:52 AM IST
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बैठक में मौजूद अधिकारी।
बैठक में मौजूद अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-मेरठ रैपिड ट्रेन की डीपीआर विधानसभा चुनाव के बाद बनेगी। सोमवार को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई आरआरटीएस की बैठक में एनसीआरटीसी अधिकारियों ने इस प्लान का प्रेजेंटेशन दिया। इस दौरान फैसला हुआ कि चार माह में प्रदेश सरकार से इसका अनुमोदन लेने के बाद दो माह में डीपीआर तैयार की जाएगी। इससे तय है कि  विधानसभा चुनाव के बाद ही अब रैपिड की डीपीआर फाइनल हो पाएगी। साथ ही कहा गया कि हर माह इसकी प्रगति की समीक्षा कर तेजी से सारे अवरोध दूर किए जाएंगे।
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आयुक्त सभागार में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) की बैठक में एनसीआरटीसी (नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरशन) ने रैपिड ट्रेन की अब तक की प्रगति रिपोर्ट और फ्यूचर प्लान का प्रेजेंटेशन दिया। चूंकि अब एनएच-58 का परतापुर तक का हिस्सा एनएचएआई के पास नहीं है, इसलिए यहां रैपिड ट्रेन चलाना आसान होगा।
इस दौरान डीएम जगत राज त्रिपाठी, एमडीए वीसी योगेंद्र यादव, एडीएम-एलए डीपी श्रीवास्तव, चीफ इंजीनियर एमडीए एससी मिश्रा, नोडल अधिकारी विवेक भास्कर, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता सुधांशु यादव, कैंट बोर्ड के एसएसओ कर्नल टीआर देवगन (सेवानिवृत्त),  मुख्य अभियंता गाजियाबाद विकास प्राधिकरण सुशील चंद द्विवेदी, नगर निगम से केबी वार्ष्णेय, अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी राम अवतार शर्मा, कंसलटेंट डीआईएमडीएस के समीर शर्मा आदि मौजूद रहे।
62 मिनट में दिल्ली से मेरठ
एनसीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक रैपिड ट्रेन प्रोजेक्ट पर दो चरणों में काम होगा। इसकी कुल दूरी 90 किमी होगी, जो 62 मिनट में तय होगी। इसमें कुल 17 स्टेशन होंगे और औसत रफ्तार 90 किमी प्रति घंटा होगी। आरआरटीएस के लिए राज्य सरकार से अनुमोदन एनसीआरटीसी द्वारा चार माह में लिया जाएगा। डीपीआर 6 माह में (फरवरी  2017 तक) बनेगी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में काम शुरू होने की तारीख से 4-5 वर्ष का समय लगेगा।

पहले दिल्ली से परतापुर तक
मंडलायुक्त ने कहा कि पहले फेज पर फोकस करो, जिसमें दिल्ली से परतापुर तक ट्रेन चलनी है। दूसरा चरण परतापुर से पल्लवपुरम तक का है, जिसका अभी यह पता नहीं कि वहां क्या होना है। चूंकि शहर में मेट्रो भी चलनी है और रैपिड का प्रोजेक्ट मेट्रो के ऊपर या नीचे या फिर समानांतर गुजारने का बनाया जा रहा है।

राज्य सरकार करेगी भू-अधिग्रहण
डीएम जगतराज त्रिपाठी ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए भू-अधिग्रहण की जरूरत होगी। इसके लिये राज्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पॉवर कमेटी (एचपीसी) और केंद्र से कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में गठित कमेटी फैसला लेगी। भू-अधिग्रहण राज्य सरकार करेगी।

टॉप स्पीड 180 किमी प्रति घंटा
रैपिड ट्रेन की अधिकतम स्पीड 180 किमी प्रति घंटा और औसत स्पीड 90 किमी प्रति घंटा होगी। इसमें कुल 12 कोच होंगे। लेकिन, प्रारंभिक स्तर पर 6 कोच होंगे। इसमें हवाई जहाज की तरह बैठने की व्यवस्था होगी। कुल 17 स्टेशन होंगे। इनमें से 15 मेन लाइन और 02 स्पर स्टेशन होंगे। 60 किमी एलिवेटेड और 30 किमी अंडरग्राउड होगा।

रूट डायवर्जन बड़ी चुनौती
रैपिड ट्रेन पर काम शुरू होने के समय रूट डायवर्जन बड़ी चुनौती होगा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर सुधांशु यादव ने यह मामला उठाया। कहा कि एनएच-58 तो पूरी तरह से चोक होकर रह जाएगा। काम शुरू होने से पहले एक्सप्रेसवे बन जाए, तभी स्थिति कंट्रोल हो पाएगी। इसे लेकर ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी पेश किया गया।

इसके तहत एनएच-58 को 36 मीटर चौड़ा करने की बात कही। साथ ही मोदीनगर और मुरादनगर से गंगनहर पटरी की चौड़ाई सात मीटर बढ़ाकर इसका इस्तेमाल बाईपास के रूप में करने समेत सिवालखास, मोदीनगर-निवाड़ी, सौंधा-मोदीनगर और पिलखुवा आदि के मार्गों से रूट डायवर्जन किया जाएगा।

ऐसे बनेगा प्लान
राज्य सरकार से एलाइनमेंट का नोटिफिकेशन कराया जाएगा।
ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू होगा।
भू अधिग्रहण, डिपो लैंड आदि की व्यवस्था।
हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग।

ये आएगी लागत
कुल लागत 21274 करोड़
इंट्रेस्ट रेट ऑफ  रिटर्न (आईआरआर) - 5.78 प्रतिशत
इकोनोमिक आईआरआर - 22.31 प्रतिशत 

भूमि का अच्छा दाम मिलेगा
कमिश्नर ने कहा कि गाजियाबाद भी अपनी जमीन का सही नियोजन करे।आरआरटीएस यदि जल्द आ गया तो उसकी जमीन की अच्छी कीमत मिल जाएगी। एमडीए शताब्दीनगर में यह लाभ कमा सकता है।
वीसी का सुझाव- रेलवे की जमीन लें
वीसी एमडीए योगेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि वर्तमान रेलवे ट्रैक के पास भी रेलवे की जमीन है। इसका उपयोग कर यहां एलाइनमेंट बनाया जा सकता है। स्टेशन भी पहले हैं। इससे भू-अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी। इस पर कंसलटेंट ने जवाब दिया कि वर्ष-2014 में एनसीआरटीसी की टीम रेलवे ट्रैक पर स्पेशल कोच से भ्रमण कर इसकी फिजिबिलिटी देख चुकी है, पर बात नहीं बनी। ऐसे में नया प्रस्ताव बनाया गया।
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