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रोजी-रोटी चली गई, अब जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

Meerut Bureauमेरठ ब्यूरो Updated Sun, 29 Mar 2020 11:57 PM IST
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भोपा गंग नहर पटरी मार्ग से होकर हरिद्वार जिले से पैदल लौटता परिवार।
भोपा गंग नहर पटरी मार्ग से होकर हरिद्वार जिले से पैदल लौटता परिवार। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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रोजी-रोटी चली गई, अब जिंदगी बचाने की जद्दोजहद
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मुजफ्फरनगर। खेत खलिहान, सड़कों और रेलवे ट्रैकों पर चलकर श्रमिक तबका किसी हालात में घर पहुंचने के लिए बेचैन है। कोराना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए देश में लॉकडाउन लागू होने के बावजूद श्रमिक अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर सड़क पर है। भूख-प्यास और बच्चों को बिलखता देख किसी का भी दिल पसीज सकता है। किसी महिला के गोद में बच्चा है तो किसी के कंधे पर जरूरी सामान है। बस सबकी एक कहानी है कि प्रशासन के चक्रव्यूह को तोड़कर किसी तरह पहुंच जाएं अपने घर की दहलीज पर। जिंदगी की असल कहानी को प्रस्तुत करती एक रिपोर्ट।
लॉकडाउन के चलते बाहरी जिलों और राज्यों से मजदूरों के लौटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। तमाम बाधाओं को झेलकर लोग अपने घर पहुंचने के लिए आतुर हैं। परिवहन निगम ने अन्य राज्यों से लोगों को शहरों की सीमा तक छोड़ दिया है, मगर आगे की कोई वाहन व्यवस्था नहीं है। उन लोगों को ज्यादा दिक्कतें है, जिनके साथ परिवार हैं। खासकर महिलाओं और बच्चे पैदल चल-चलकर थक चुके हैं, सांसें फूल रही हैं, गले सूख गए हैं। बाहर से आए ये लोग कहते हैं कि कोरोना ने जिंदगी पर ताला जड़ दिया है।
लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों से अमर उजाला ने उनकी दुश्वारियां की बारे में बातचीत की। भोपा ओवरब्रिज पर लौटते मिले पीलीभीत के नौ लोगों में से रामखिलावन ने बताया कि वह यहां मखियाली में एक फैक्टरी में काम करते है। फैक्टरी बंद हो गई। कोई साधन मिला नहीं। पैदल रोडवेज बस स्टैंड पर जाएंगे। वहां से कोई सवारी लेंगे। रोडवेज बस स्टैंड पर बस के इंतजार में बैठे बिहार के सिवान जिले के गणेश, महेश ने बताया कि वे यहां बेगराजपुर दवा फैक्टरी में काम करते हैं। बस चलने की जानकारी हुई तो आज पैदल चल कर यहां पहुंचे हैं। अब पता नहीं कैसे घर जाएंगे।
बस स्टैंड पर चरथावल निवासी जयपाल, सलीम, हसीब, कछौली के इकराम ने बताया कि सीतापुर जिले में कोल्हू पर काम करते हैं, वहां कई दिनों से फंसे थे। किसी तरह पैदल चल कर सीतापुर शहर आए। रात में बस मिली तो आज यहां पहुंचे हैं। यहां भी कोई साधन नहीं है, यहां से भी पैदल जाना होगा। शिव चौक के पास भगत सिंह रोड पर महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण पैदल जाते मिले। तितावी के मोहित ने बताया कि हरिद्वार फैक्टरी में काम करते हैं। ट्रक के जरिये रामपुर तिराहे तक पहुंचे हैं। वहां से पैदल गांव जा रहे है। बस अब किसी तरह से घर पहुंच जाएंगे।
167 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग
रोडवेज बस स्टैंड पर रविवार को यहां से जाने वालों और बाहर से आने वाले 167 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जांच में सभी सही पाए गए। सभी के नाम पते और मोबाइल नंबर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नोट किए हैं।
82 बसें गईं रोडवेज की
डिपो से अभी तक 82 बसें रोडवेज की बसों को लालकुआं गाजियाबाद भेजा गया है। पहले दिन दस, दूसरे दिन 60 और परिवार को 12 बसे ंभेजी गई हैं। एआरएम संदीप अग्रवाल ने बताया कि यहां से यात्रियों को गाजियाबाद भेजा गया है। वहां से बसें पूर्वांचल के जिलों में जाएंगी।
चालक को हड़काया
मुजफ्फरनगर। बिजनौर जाने वाली बस के चालक ने कुछ यात्रियों को महावीर चौक पर उतार दिया था, जिस पर इंस्पेक्टर सिविल लाइन डीके त्यागी ने चालक की जमकर क्लास ली तथा यात्रियों को बस स्टैंड पर उतरवाया, जहां पर उनके नाम पते नाम कर स्वास्थ्य विभाग ने थर्मल स्कैनिंग की। इसके बाद बस बिजनौर के लिए रवाना की गई।
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