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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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मुजफ्फरनगर

सोमवार, 30 मार्च 2020

लॉकडाउन में घरों में लगी योग, आसन की कक्षाएं

लॉकडाउन में घरों में लगी योग, आसन की कक्षाएं
मुजफ्फरनगर। कोरोना लॉकडाउन की वजह से सुबह और शाम को संचालित योग प्रशिक्षण कक्षाएं तथा शिविर बंद हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा को प्रत्येक नागरिक का घर में रहना जरूरी है। लॉकडाउन को जिंदगी पर बंदिश नहीं माने, बल्कि घर-घर में बेटे-बेटियों को विधिवत योगासन सिखाएं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करें।
भारतीय योग संस्थान की प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य योगाचार्य सुरेंद्रपाल सिंह कहते हैं कि कोरोना सुरक्षा अभियान के तहत सभी योगाभ्यास केंद्र बंद रखे गए है। साधक-साधिकाओं को प्रेरित किया गया है कि घर पर सुरक्षित रहकर योगासन नियमित कीजिए। साथ ही सुबह-शाम नित्य पुत्र-पुत्रियों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास कराएं। लॉकडाउन की स्थिति में दिनचर्या उत्साह रहेगी, बच्चे बोझिल महसूस नहीं करेंगे। बुजुर्ग भी क्षमता अनुसार प्रतिदिन योग करें। गांधी कॉलोनी के लक्ष्मी नारायण मंदिर के परिसर में योग कक्षा संचालित करने वाले गजेंद्र सिंह राणा कहते हैं कि युवाओं के लिए सूर्य नमस्कार महत्वपूर्ण है। योग की सूक्ष्म क्रियाएं शरीर के अंगों को मजबूत बनाती है।
गायत्री मंत्रोच्चार से बढ़ेगी मानसिक क्षमता
मुजफ्फरनगर। कोरोना वायरस में गले और फेफड़ों को संक्रमण से बचाना पहली प्राथमिकता है। प्रशिक्षक यज्ञदत्त आर्य बताते हैं कि सिंहासन करने से गले का संक्रमण तथा टॉंसिल की समस्या नहीं होगी। भस्त्रिका, प्राणायाम एवं कपालभांति अवश्य कीजिए, ताकि फेफड़ों में वायु भरने की क्षमता बढ़ जाए। कोरोना का प्रभाव शरीर पर कम पड़ेगा। अनुलोम, विलोम भी उत्तम है। गहरे लंबे श्वासों के प्राणायाम गले, फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता में रामबाण है। ओम ध्वनि, गायत्री मंत्रोच्चारण से योग, आसन प्रारंभ करें। घर पर योगाभ्यास के उपरांत ओम जाप से मानसिक शांति मिलेगी।
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खेतों में हम नहीं जाएंगे, तो पशु चारा कहां से खाएंगे

खेतों में हम नहीं जाएंगे, तो पशुओं के लिए चारा कहां से आएगा
जानसठ। कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के दौरान पशुपालकों को खेतों में चारा लेने जाते समय पुलिसकर्मी रोकटोक करते हैं। रविवार की सुबह ऐसा ही नजारा देखने को मिला। इस पर पुलिसकर्मी बोले अपने घरों को वापस जाओ। इस पर पशुपालक बोले कि खेतों में हम नहीं जाएंगे, तो पशु चारा कहां से खाएंगे। पुलिसकर्मियों ने पशुपालकों से कहा कि सुबह छह बजे अपने खेतों पर जाओ और तीन घंटे बाद नौ बजे तक चारा लेकर वापस अपने घर आओ।
लॉकडाउन को लेकर पशुपालक भी मुसीबत के दौर से गुजर रहे हैं। पशुपालक भी चाहते हैं कि वे भी किसी भी सूरत में अपने घरों से बाहर नहीं निकलें, लेकिन पशुओं की भूख प्यास के आगे पशुपालक अपने को घरों में रोक नहीं पा रहे हैं। दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा तो जरूर चाहिए, नहीं तो वे दूध नहीं देंगी। पशुपालक राजेश, सतीश, हरपाल, सीताराम आदि का कहना है कि वे लॉक डाउन का स्वागत करते हैं, यह लॉकडाउन उनकी जिंदगी की सलामती के लिए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगाया है। उनके सामने मजबूरी यह है कि पशुओं को खिलाने को चारा खेतों से लाना अति आवश्यक है। रविवार की सुबह पशुपालकों को खेतों में जाते हुए रोका तो, पशुओं को चारा लाने की बात सुनकर पुलिसकर्मियों को भी खेतों में जाने की इजाजत देनी पड़ी। पशुपालकों का कहना है कि लॉकडाउन का किसी भी सूरत में उल्लंघन नहीं करेंगे।
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कमल के आसन पर विराजमान रहती है स्कंदमाता

कमल के आसन पर विराजमान रहती है स्कंद माता
देवबंद (सहारनपुर)। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की आराधना की गई। पुजारियों का कहना है कि स्कंद की माता होने के कारण शास्त्रों में इन्हें स्कंदमाता कहा गया है।
शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक स्कंद देवता कोई और नहीं बल्कि भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय को ही जाता है। देवी स्कंद माता की गोद में स्कंद देवता हमेशा विराजमान रहते हैं। उन्होंने बताया कि स्कंद माता की चार भुजाएं हैं। ये दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए है। बाई तरफ की ऊपर वाली भुजा में वर मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है, उसमें कमल पुष्प लिए हुए है। स्कंद माता कमल के आसन पर विराजमान रहती है। शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरूप स्कंदमाता के रूप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती है।
घरों में ही चल रहे दुर्गा सप्तशती पाठ
गंगोह। नगर एवं क्षेत्र में मां दुर्गा के भजनों की धूम मची हुई है। कोरोना के कारण इस बार लोग घरों में ही रह कर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन कर मां भगवती से विश्व को संकट से निकालने की प्रार्थना कर रहे हैं। रविवार को मां दुर्गा के पांचवे रूप स्कंद माता की पूजा की गई। इस बार किसी भी देवी मंदिर में पाठ नहीं बिठाए गए हैं। कोरोना वायरस के प्रभाव के चलते भी लोगों की आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
भक्तों ने की स्कंदमाता माता की पूजा-अर्चना
सहारनपुर। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां भगवती के स्वरूप मां स्कंदमाता की भक्तों ने पूजा-अर्चना की। भक्तों ने मां जगदंबा से कोरोना वायरस से बचाव की प्रार्थना की।
महानगर के श्री दुर्गा मंदिर, श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री हरि मंदिर, श्री बालाजी धाम, चौंताला स्थित श्री बालाजी मंदिर, श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर, तहसील शिव मंदिर, श्री मातेश्वरी धाम, श्री मां काली मंदिर, श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर और श्री बागेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिरों में अधिष्ठाताओं ने सुबह और शाम के समय मां भगवती की आरती की।
देवबंद की गांधी कालोनी में मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना करते श्रद्धालु
देवबंद की गांधी कालोनी में मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना करते श्रद्धालु- फोटो : DEVBAND
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यूपी: मुजफ्फरनगर जिला कारागार में 24 घंटो के भीतर महिला कैदी समेत दो की मौत, काफी समय से थे बीमार

मुजफ्फरनगर जिला कारागार में पिछले 24 घंटे में महिला कैदी समेत दो की मौत होने से अफरातफरी मच गई। दोनों काफी समय से बीमार थे, जिन्हें हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव सुजड़ू के कूंगरपट्टी निवासी इसरार (45) पुत्र निसार को करीब एक साल पहले पुलिस ने हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि इसरार काफी समय से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित था, जिसकी डायलेसिस चल रही थी। शुक्रवार को अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर जेल में तैनात कांस्टेबल राजकुमार व टेकचंद उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

उधर, मेरठ के मोहल्ला जागृति विहार निवासी शीला उर्फ सुशीला (70) पत्नी रमेश सजायाफ्ता कैदी थी। हत्या के मामले में उसे सजा हुई थी तथा वह वर्ष 2014 से जेल में बंद थी। शनिवार रात अचानक उसकी हालत बिगड़ गई, जिसे जेल अस्पताल से दवा दिलवाई गई।

हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। देर रात उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल अधीक्षक ने बताया कि दोनों के परिजनों को हादसे की जानकारी देने के बाद नई मंडी थाना पुलिस को भी सूचना दे दी गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

रोजी-रोटी चली गई, अब जिंदगी बचाने की जद्दोजहद

रोजी-रोटी चली गई, अब जिंदगी बचाने की जद्दोजहद
मुजफ्फरनगर। खेत खलिहान, सड़कों और रेलवे ट्रैकों पर चलकर श्रमिक तबका किसी हालात में घर पहुंचने के लिए बेचैन है। कोराना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए देश में लॉकडाउन लागू होने के बावजूद श्रमिक अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर सड़क पर है। भूख-प्यास और बच्चों को बिलखता देख किसी का भी दिल पसीज सकता है। किसी महिला के गोद में बच्चा है तो किसी के कंधे पर जरूरी सामान है। बस सबकी एक कहानी है कि प्रशासन के चक्रव्यूह को तोड़कर किसी तरह पहुंच जाएं अपने घर की दहलीज पर। जिंदगी की असल कहानी को प्रस्तुत करती एक रिपोर्ट।
लॉकडाउन के चलते बाहरी जिलों और राज्यों से मजदूरों के लौटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। तमाम बाधाओं को झेलकर लोग अपने घर पहुंचने के लिए आतुर हैं। परिवहन निगम ने अन्य राज्यों से लोगों को शहरों की सीमा तक छोड़ दिया है, मगर आगे की कोई वाहन व्यवस्था नहीं है। उन लोगों को ज्यादा दिक्कतें है, जिनके साथ परिवार हैं। खासकर महिलाओं और बच्चे पैदल चल-चलकर थक चुके हैं, सांसें फूल रही हैं, गले सूख गए हैं। बाहर से आए ये लोग कहते हैं कि कोरोना ने जिंदगी पर ताला जड़ दिया है।
लॉकडाउन के चलते ऐसे लोगों से अमर उजाला ने उनकी दुश्वारियां की बारे में बातचीत की। भोपा ओवरब्रिज पर लौटते मिले पीलीभीत के नौ लोगों में से रामखिलावन ने बताया कि वह यहां मखियाली में एक फैक्टरी में काम करते है। फैक्टरी बंद हो गई। कोई साधन मिला नहीं। पैदल रोडवेज बस स्टैंड पर जाएंगे। वहां से कोई सवारी लेंगे। रोडवेज बस स्टैंड पर बस के इंतजार में बैठे बिहार के सिवान जिले के गणेश, महेश ने बताया कि वे यहां बेगराजपुर दवा फैक्टरी में काम करते हैं। बस चलने की जानकारी हुई तो आज पैदल चल कर यहां पहुंचे हैं। अब पता नहीं कैसे घर जाएंगे।
बस स्टैंड पर चरथावल निवासी जयपाल, सलीम, हसीब, कछौली के इकराम ने बताया कि सीतापुर जिले में कोल्हू पर काम करते हैं, वहां कई दिनों से फंसे थे। किसी तरह पैदल चल कर सीतापुर शहर आए। रात में बस मिली तो आज यहां पहुंचे हैं। यहां भी कोई साधन नहीं है, यहां से भी पैदल जाना होगा। शिव चौक के पास भगत सिंह रोड पर महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण पैदल जाते मिले। तितावी के मोहित ने बताया कि हरिद्वार फैक्टरी में काम करते हैं। ट्रक के जरिये रामपुर तिराहे तक पहुंचे हैं। वहां से पैदल गांव जा रहे है। बस अब किसी तरह से घर पहुंच जाएंगे।
167 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग
रोडवेज बस स्टैंड पर रविवार को यहां से जाने वालों और बाहर से आने वाले 167 यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जांच में सभी सही पाए गए। सभी के नाम पते और मोबाइल नंबर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नोट किए हैं।
82 बसें गईं रोडवेज की
डिपो से अभी तक 82 बसें रोडवेज की बसों को लालकुआं गाजियाबाद भेजा गया है। पहले दिन दस, दूसरे दिन 60 और परिवार को 12 बसे ंभेजी गई हैं। एआरएम संदीप अग्रवाल ने बताया कि यहां से यात्रियों को गाजियाबाद भेजा गया है। वहां से बसें पूर्वांचल के जिलों में जाएंगी।
चालक को हड़काया
मुजफ्फरनगर। बिजनौर जाने वाली बस के चालक ने कुछ यात्रियों को महावीर चौक पर उतार दिया था, जिस पर इंस्पेक्टर सिविल लाइन डीके त्यागी ने चालक की जमकर क्लास ली तथा यात्रियों को बस स्टैंड पर उतरवाया, जहां पर उनके नाम पते नाम कर स्वास्थ्य विभाग ने थर्मल स्कैनिंग की। इसके बाद बस बिजनौर के लिए रवाना की गई।
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सऊदी से लौटे युवक को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया

सऊदी से लौटे युवक को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। 17 दिन पहले कुटेसरा गांव में सऊदी अरब के रियाद से लौटे युवक की तेज बुखार में परिजनों और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। युवक की हालत संदिग्ध मानते हुए देवबंद निजी हॉस्पिटल से जिला चिकित्सालय भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज की केस हिस्ट्री तैयार की।
गांव कुटेसरा के जामा मस्जिद के निकट रहने वाला युवक 11 मार्च की रात को सऊदी अरब के रियाद शहर से वापस आया था। कुछ दिन उसकी हालत ठीक थी, लेकिन कई दिनों से उसे बुखार और किडनी में परेशानी हुई। उसने निकटवर्ती कस्बे देवबंद जिला सहारनपुर में निजी हॉस्पिटल में उपचार शुरू कराया। दो दिन पहले हालत बिगड़ने पर उसे वहीं भर्ती कराया गया। किसी ग्रामीण ने बीमारी की सूचना मुजफ्फरनगर हेल्पलाइन को दे दी। आनन फानन में कुटेसरा चौकी प्रभारी शिव कुमार पड़ताल करने के लिए उसके घर पहुंचे। परिजनों द्वारा मरीज के देवबंद भर्ती होने की बात बताई। दरोगा ने देवबंद के चिकित्सक से मोबाइल फोन से बातचीत की। चिकित्सक ने उन्हें तेज बुखार होने के कारण संभावित मानते हुए जिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर रेफर करने की बता कही। रविवार को सीएचसी प्रभारी डा. सतीश कुमार ने टीम के साथ पीड़ित के घर जाकर बीमारी की हिस्ट्री संकलित की। उन्होंने बताया कि कोरोना वार्ड से उसका सैंपल मेरठ भेजा जा रहा है। दो दिन बाद मामले से पर्दा साफ होगा। मरीज के संभावित लक्षण देखने के बाद कुटेसरा में हड़कंप मच गया। इसके बाद ग्रामीण खुद घरों में कैद हो गए।
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पश्चिम बंगाल और पटना से जौला पहुंचे ग्रामीण

पश्चिम बंगाल और पटना से जौला पहुंचे ग्रामीण
बुढ़ाना। जौला गांव के प्रधान के पति हाजी जमशेद ने यूपी 112 के अलावा प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना देते हुए बताया कि उनके गांव में दो ग्रामीण पश्चिम बंगाल व पटना से आए हैं, जिनके स्वास्थ्य का परीक्षण होना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के गांव में न पहुंचे पर ग्राम प्रधान के पति खालिद (55) पुत्र सद्दीक व इरफान (40) पुत्र गुलफाम को लेकर रविवार को कस्बे की सीएचसी पर पहुंचे। सीएचसी पर चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करने के बाद ठीक पाए जाने पर उन्हें वापस घर भेज दिया। ग्राम प्रधान ने बताया कि उनके गांव में दूसरे राज्यों में काम करने वाले 25 सोमवार अथवा मंगलवार में गांव में पहुंचेंगे, जिनके स्वास्थ्य का परीक्षण होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि गांव में युवाओं की एक टीम बनाई गई है, जो बाहर से आने वाले ग्रामीणों की सूचना पुलिस प्रशासन को देगी।
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जिले में 1457 लोगों को क्वारंटीन किया

मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन ने अमित सिंह ने बताया कि रविवार को जिले की सीमा में बाहरी जनपदों से 400 लोग आए। सभी की मेडिकल टीम ने थर्मल स्कैनिंग जांच की। इनमें से 85 लोग चिह्नित हुए, जिन्हें तत्काल बीआईटी मीरापुर में इंस्टिट्यूशनल क्वारंटीन किया गया है। क्वारंटीन किए गए लोग मेडिकल टीम के पर्यवेक्षण में रहेंगे। बाकी अन्य जनपदों के वासियों को सकुशल उनके गंतव्य भेज दिया गया है। एडीएम ने बताया कि इसके पूर्व जनपद में 1156 लोग ऐसे हैं जिन्हें होम क्वारंटीन किया गया है। 216 बाहरी लोग हैं उन्हें भी होम क्वारंटीन किया गया है। जनपद में कुल 1457 लोगों को क्वारंटीन किया गया है। सभी का मेडिकल टीम द्वारा पर्यवेक्षण किया जा रहा है।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ बालियान ने दिए डेढ़ एक करोड़ रुपये
मुजफ्फरनगर। सांसद एवं केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने अपनी सांसद निधि से डेढ़ करोड़ रुपये और अपनी एक महीने का वेतन कोरोना वायरस की रोकथाम और बचाव के लिए दिए है। एक करोड़ रुपये और एक महीने का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में दिए हैं, जबकि 50 लाख रुपये मुजफ्फरनगर अस्पताल में वेंटिलेटर व अन्य चिकित्सा सुविधा के लिए दिए हैं।
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प्रशासन की होम डिलीवरी व्यवस्था थड़ाम

प्रशासन की होम डिलीवरी व्यवस्था धड़ाम
मुजफ्फरनगर। कोरोना वायरस से बचाव को चले रहे लॉकडाउन में प्रशासन की होम डिलीवरी की व्यवस्था धड़ाम हो गई। मोहल्लों में लोगों को जरूरत का सामान नहीं मिल पा रहा है। हालात ये है कि प्रशासन के दिए गए हेल्पलाइन के नंबर भी फेल है।
जरूरी सामान घर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने कुछ नंबर जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। इनमें परचून के, सब्जी के और मेडिकल स्टोर के कुछ दुकानदारों के नंबर है। इसके अलावा भी स्वास्थ्य, जन सुनवाई के भी हेल्प लाइन फोन नंबर दिए गए हैं। आम जनता नंबर मिलाती है तो कोई उठाता ही नहीं है, यदि कोई उठाता है तो कहता है सामान ले जाओ। केशवपुरी के सुधीर भारतीय कहते हैं कि उन्हें अपने पिता की दवा लानी थी, दिए नंबर को कोई उठाता ही नहीं है। सुबह के समय तीन घंटे के समय में सामान की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बढ़ेड़ी के किसान रणवीर सिंह पंवार, ओमपाल सिंह ने बताया कि कीटनाशक और दवाई चाहिए थी, मगर पुलिस ने रामपुर तिराहे पर ही बाइकों में पंचर कर दिया तथा धमका कर वापस भेज दिया।
चारे की समस्या खड़ी हुई
मुजफ्फरनगर। शहर में पशुपालन करने वाले लोगों के सामने चारे के संकट गहराने लगा है। लॉकडाउन में चारा कहां से लाए, बड़ी समस्या है। प्रशासन की सख्ती से गांवों से आने वाला चारा नहीं आ पा रहा है। लोग चारा लेने के लिए निकल भी नहीं पा रहे हैं। अंकित विहार के आत्माराम, जाट कालोनी के विकास ने बताया कि पशु पालक बेहद परेशान है।
- सभी व्यवस्था को धीरे-धीरे सही किया जा रहा है। होम डिलीवरी की व्यवस्था को भी सही कराया जाएगा।
अमित सिंह
एडीएम प्रशासन
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व्यवस्थाओं पर मंत्रियों ने अफसरों की बैठक ली

मुजफ्फ्फरनगर। लॉकडाउन के बाद जनता के सामने आ रही समस्याओं और बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की सही जांच नहीं होने को लेकर कौशल विकास राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल और राजस्व राज्यमंत्री विजय कश्यप ने अफसरों की बैठक ली। विकास भवन में हुई बैठक में कपिलदेव अग्रवाल ने कहा कि बाहरी राज्यों के लोग लगातार जनपद में आ रहे है। इन सब का डॉक्टरी परीक्षण होना चाहिए। खुशी की बात है कि अब तक कोई कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला है।
डीएम सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि जिले के सभी पांच एंट्री प्वाइंट पर टीमें लगा दी गई हैं। बाहर से आने वाले सभी लोगों की जांच की जा रही है। कपिलदेव ने आम जनता को राशन, सब्जी, फल आदि लेने में आ रही समस्याओं को भी उठाते हुए कहा कि चीनी मिलें और कोल्हू निर्बाध रूप से चलने चाहिए। किसानों के वाहन रोके नहीं जाने चाहिए। राज्यमंत्री विजय कश्यप ने कहा कि शहर में पशु पालन करने वालों को चारे की परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसानों को गन्ना बुआई के लिए खाद, दवा, पेस्टिसाइड खरीदने की छूट दी जाए। बैठक में विधायक उमेश मलिक, विक्रम सैनी, प्रमोद उटवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, एसएसपी अभिषेक यादव आदि मौजूद रहे।
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पूर्व मंत्री की आईडी हैक कर मांगे रुपये

पूर्व मंत्री की आईडी हैक कर मांगे रुपये
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस के पूर्व मंत्री दीपक कुमार की फेसबुक व मेसेंजर आईडी हैक कर शातिरों ने उनके रिश्तेदार व परिचितों से हजारों रुपयों की डिमांड कर डाली। मामले की शिकायत एसएसपी से की गई है।
शहर के साउथ सिविल लाइंस निवासी कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री दीपक कुमार फिलहाल कुछ समय से परिवार के साथ गाजियाबाद में रह रहे हैं। पूर्व मंत्री की पत्नी डॉ पुष्पलता अधिवक्ता ने बताया कि शनिवार को शातिरों ने पूर्व मंत्री की फेसबुक आईडी और मेसेंजर को हैक कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने पूर्व मंत्री की फ्रेंडलिस्ट में मौजूद उनके परिचित व रिश्तेदारों से मेसेंजर के जरिये मेसेज भेजकर अचानक रुपयों की जरूरत बताते हुए ऑनलाइन एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा। डॉ पुष्पलता ने बताया कि एक परिचित पत्रकार ने तो शातिर के झांसे में आकर करीब आठ हजार रुपये ट्रांसफर भी कर दिए, जबकि कुछ लोग इससे बच गए। जानकारी मिलने पर पूर्व मंत्री की ओर से एसएसपी अभिषेक यादव को ऑनलाइन मामले की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है।
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मन की बात सुनकर लिया कोरोना से जंग का संकल्प

पीएम की मन की बात सुनकर लिया कोरोना से जंग का संकल्प
शाहपुर। कस्बे के लोगों ने रविवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात को सुनकर देशव्यापी लॉकडाउन का पूर्ण रूप से पालन करने और कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए जंग का संकल्प लिया।
समाजसेवी सुंदरलाल सैनी का कहना है कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता से लॉकडाउन जैसे कठोर निर्णय के लिए क्षमा मांगी है, लेकिन देश पर आए संकट से निपटने के लिए कड़े निर्णय लेने पड़ते हैं। प्रधानमंत्री के आह्वान का हम सबको पालन करना चाहिए। समाजसेवी उमेश मित्तल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान जो लोग नियम तोड़ रहे हैं, वे अपने व परिवार के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। देशवासी नियमों का पालन करेंगे, तभी देश बचेगा। डॉ प्रदीप चौहान का कहना है कि कोरोना वायरस से देश में युद्ध जैसी स्थिति है। हमें इस लड़ाई में सावधान व सतर्क रहना होगा। बीमारी से पीड़ित मरीज ठीक भी हो रहे हैं, इसलिए सभी लोग हौसला रखें। हाजी इलियास कुरैशी का कहना है कि कोरोना वायरस से लड़ने में जो लोग सहयोग दे रहे हैं, उन सभी का आभार व्यक्त करना चाहिए। इससे जंग में लड़ने वाले कर्मवीरों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अधिक मेहनत कर कोरोना के खिलाफ जारी इस जंग को जीतकर देश को इससे मुक्ति दिलाएंगे।
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दूसरे जिलों में फंसे अपनों को लेकर सता रही चिंता

दूसरे जिलों में फंसे अपनों को लेकर सता रही चिंता
मुजफ्फरनगर। जिले के सैकड़ों स्टूडेंट और नौकरी करने वाले लोग दूसरे स्थानों पर फंसे है। परिवार के लोग अपनों को लेकर चिंतित है। एडीएम प्रशासन के ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं पर कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है।
लॉकडाउन के बाद जिले के काफी संख्या में विद्यार्थी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम में फंसे हैं। इनमें इंजीनियरिंग के स्टूडेंट अधिक हैं। उनके माता पिता को अधिक परेशानी हो रही है, जिनकी बेटियां इस दौरान अपने कमरो या हॉस्टल में अकेले रह गई हैं। इन स्थानों पर जॉब करने वाले भी बड़ी संख्या में फंसे है। अपने बच्चों को घर पर कैसे लाए यही चिंता लगातार सता रही है। ऐसे लोग पुलिस से बचकर किसी तरह प्रतिदिन काफी संख्या में नागरिक डीएम ऑफिस पहुंच रहे है। जहां सर उन्हें एडीएम प्रशासन के ऑफिस भेजा जा रहा है। यहां पास बनाने की बात की जाती है, लेकिन जारी नहीं किए जा रहे हैं। मंडी के विशाल का कहना है कि कई दिन से चक्कर काट रहा हूँ, लेकिन कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा है। उसकी बेटी दिल्ली में है। गांधी कालोनी के बृजबंधु कहते है कि उनकी पत्नी हरिद्वार मायके गई थी, उसे लाना है, यहां कोई कुछ बता नहीं बता रहा है। जानसठ, खतौली के भी कई लोगो की यह समस्या है। अफसरों का हाल ये है कि वह किसी का फोन ही रिसीव नहीं कर पा रहे है।
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