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मंदी से मैंथा इंडस्ट्री को 800 करोड़ का झटका 

अमर उजाला ब्यूरो/संभल Updated Sat, 02 Apr 2016 12:54 AM IST
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सिंथेटिक मैंथॉल की आमद और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छायी मंदी से मैंथा इंडस्ट्री को वर्ष 2015-16 में 800 करोड़ का झटका लगा है। कारोबारियों के मुताबिक वर्ष 2014-15 मैंथा और मैंथॉल प्रोडक्ट का निर्यात 3500 करोड़ रुपये का था जो घटकर इस वर्ष 2700 करोड़ रह गया है।
निर्यात घटने के पीछे जर्मनी का सिंथेटिक मैंथॉल मुख्य चुनौती है। सिंथेटिक मैंथाल की बढ़ती खपत से प्राकृतिक मैंथा और मैंथॉल प्रोडक्ट की भारतीय मंडी पर सबसे बड़ा असर है। विश्व की तमाम उपभोक्ता कंपनियां अपने प्रोडक्ट में प्राकृतिक मैंथॉल के स्थान पर सिंथेटिक मैंथॉल का इस्तेमाल करने की ओर बड़ी तेजी के  साथ बढ़ गईं हैं।
नतीजा भारत के मैंथा किसानों के साथ कारोबारियों और निर्यातकों को झटका लग रहा है। पूरी इंडस्ट्री संकट में हैं। मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यातक हिमांशु अग्रवाल कहते हैं ‌‌तकनीक के मामले में संसार बहुत आगे बढ़ चुका है।
मैंथा किसान पुराने ढर्रे पर हैं। पुरानी प्रजातियों से पैदावार घट चुकी है। सिमक्रांति जैसी नई प्रजातियां अपना कर खेती करनी होगी। मैंथा की पत्ती से ऑयल निकालने तरीका है बदलने के लिए सरकार को मशीनें खरीदने में अनुदान देना होगा जिससे किसान खुद अपनी मशीन लगा 
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