रहने की दिक्कत थी न खाने के लाले, मगर घर की याद ने ठहरने नहीं दिए कदम

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sun, 29 Mar 2020 11:02 PM IST
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बाहर से आए यात्री तांगे से अपने घर जाते हुए। संवाद
बाहर से आए यात्री तांगे से अपने घर जाते हुए। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। नोएडा से बिहार के जिला सहरसा जा रहे प्रवासी मजदूरों को न वहां रहने की दिक्कत थी, न खाने के लाले क्योंकि मकान मालिक ने उनसे कह दिया था कि जब तक देश इस संकट से नहीं निकल पाता वे यहां आराम से रहें और किराया देने की भी जरूरत नहीं है। जिस ठेकेदार के यहां काम करते थे उसने उन्हें पूरा भुगतान किया और खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए पांच हजार रुपये अलग से दिए। मगर जमा पूंजी खर्च होने का डर और घर की याद सताई तो उनके कदम नहीं ठहर सके। यही वजह रही कि बाइक के पीछे रस्सी से रिक्शा बांधकर बिहार जाने को निकले पड़े। अमूमन यही हाल अन्य मजदूरों का भी था, जो दिल्ली नोएडा, गाजियाबाद और हरियाणा से दूरदराज स्थित अपने घरों को जा रहे थे और शाहजहांपुर में हरदोई बाईपास पर खड़े वाहन का इंतजार कर रहे थे।
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बिहार के जिला सहरसा के थाना राजासोनवर्षा के गांव तीनधारा निवासी राहुल गुप्ता और उनके साथ नोएडा में बतौर मजदूर काम कर रहे अजय, पंकज, अनोज, नितीश को भी लॉकडाउन के चलते घर लौटना पड़ रहा है। उनके साथ जिले के 12 लोग निकले। तमाम लोग पीछे आ रहे थे। उन्हें घर भी पहुंचना है और कोरोना के संक्रमण का डर भी सता रहा है। राहुल बोले- वह और उनके साथी एक ठेकेदार के यहां नोएडा सेक्टर-दो में पेंटिंग का काम करते थे। पेंटिंग का जब काम नहीं होता था तो रिक्शा चलाकर गुजारा करते थे। पहले एक दिन का जनता कर्फ्यू लगा, तब तो कोई बात नहीं, लेकिन जब पता चला कि 21 दिन का लॉकडाउन हो गया है और यह तीन महीने तक रहेगा तो चिंता सताने लगी। बस यही सोचकर चल दिए। हालांकि ठेकेदार ने पांच हजार रुपये खाने-पीने को भी दिए थे और मकान मालिक ने बोला कि किराया भी नहीं लेंगे, लेकिन इसके बाद भी लंबे समय तक काम न मिला तो क्या करेंगे। बस यही डर घर जाने के लिए मजबूर कर रहा है। राहुल बोले, कोरोना का डर भी है। इसलिए घर पहुंचने से पहले स्वास्थ्य परीक्षण कराएंगे। इसके बाद ही गांव और घर में घुसेंगे।
15 घंटे में तय किया साढ़े तीन सौ किमी. का सफर
शनिवार रात 10 बजे नोएडा से चले बिहार के लिए
राहुल गुप्ता ने बताया कि वह नोएडा से रात करीब दस बजे चले थे। बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले ठेकेदार हरवन ने अपनी बाइक दे दी थी। बाइक में पीछे रस्सी से रिक्शा बांधकर चल दिए। नोएडा से लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर का सफर तय कर शाहजहांपुर 12:49 बजे पहुंचे हैं। रात में कहीं रुकना भी नहीं हुआ। अब लगभग 160 किलोमीटर का सफर तय कर लखनऊ में आराम करेंगे।
लॉकडाउन में काम बंद, गांव में करेंगे गेहूं की कटाई
बिहार के ही जिला जमशेदपुर के रहने वाले एक शख्स परिवार के साथ बरेली मोड़ पर वाहन के इंतजार में बैठे थे। पुलिस ने उन्हें खाने के पैकेट दिए थे। बताया कि दिल्ली में एक फैक्टरी में मजदूरी करते थे, लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया इसलिए घर जा रहे हैं। रहने-खाने की दिक्कत के बारे में पूछने पर बताया कि ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन तीन महीने तक खाली बैठकर क्या करते। इस समय गेहूं की कटाई चल रही है। गांव जाकर गेहूं की कटाई करेंगे तो कुछ पैसे पैदा हो जाएंगे इसलिए घर जा रहे हैं। बातचीत करने पर इनमें भी कोरोना का जरा भी खौफ नहीं दिखा, बस जल्दी थी तो घर पहुंचने की।
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