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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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Coronavirus in UP Live Updates: 27 लाख मनरेगा मजदूरों के खाते में भेजे गए 611 करोड़ रुपये

शासन और प्रशासन संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लोगों से भी हर वक्त घरों में रहने की अपील की जा रही है।

30 मार्च 2020

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शामली

सोमवार, 30 मार्च 2020

100 बैड का होगा क्वारंटीन अस्पताल

शामली। प्रदेश के गन्नामंत्री सुरेश राणा ने लॉक डाउन पर जिले की व्यवस्था पर डीएम से बात कर जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि जल्द ही शामली के 50 बैड वाले क्वारंटीन बैड को 100 का किया जाएगा।उन्होंने बताया कि बाजार में आटे की कमी को देखते हुए खाद्य विभाग से बात की गई है। प्रशासन से बात कर आटा चक्कियों पर गेहूं की व्यवस्था कराकर उन्हें चलवाया जाएगा और बाजार में आटे की पर्याप्त आपूर्ति की जाएगी। बाहर से आ रहे जिले के नागरिकों को 14 दिन स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रखा जाएगा। इसके लिए जिले की सीमाओं पर ही बड़े कालेज, स्कूलों ,धर्मशलाओं में रखा जाएगा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच पूरी होने के बाद ही घर भेजा जाएगा। विदेश से आने वाले लोगों की जांच और काउंसिलिंग को स्वास्थ्य विभाग की 15 टीमें काम करेंगी।
लॉक डाउन में आज
लॉक डाउन उल्लंघन पर केस दर्ज - 22
महामारी अधिनियम में केस 10
वाहन सीज - 68
जुर्माना 2,22,500
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मीलों की दूरी और घर पहुंचने की मजबूरी...लोग पैदल चलने को बेबस, दोहरी भूमिका निभा रही पुलिस

इस समय सड़कों पर हाल यह है कि लोग पैदल अपने घरों की तरफ बढ़ रहे हैं। भले ही यह केसरिया कपड़ों में न हों और यह समय कावड़ यात्रा का न है। लेकिन न कोई परिवहन व्यवस्था और न ही सुविधा। सामाजिक संगठन गाहे.बगाहे कहीं खाने की व्यवस्था तो करा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि कहीं शिविर हो या सरकारी स्कूल व कॉलेजों में रुकने की कोई व्यवस्था की गई हो।

कोई भूखा ही पैदल चल रहा है तो किसी पर पुलिस की लाठियां पड़ रही हैं। एक तरफ पुलिस खाना खिला रही है तो दूसरी तरफ कुछ लोग बता रहे हैं पुलिस गाली देकर ही बोलती है। इन पैदल चलते यात्रियों के लिए कोई भोजन उपलब्ध करा दे तो सही, नहीं तो पूरे पूरे दिन भूखे ही रहना पड़ रहा है। शहर की सड़कों से लेकर हाईवे और मुख्य मार्ग पर यही हाल है लेकिन सफर अभी लंबा है.....
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जरूरतमंदों को भोजन पैकेट मिले

रंजिशन हमला तीन घायल

हरियाणा बॉर्डर पर बनाए रेन बसेरे

शामली। डीएम जसजीत कौर ने बताया कि जिले में दो दिनों से लगातार हरियाणा, पंजाब से पलायन कर आ रहे उन श्रमिकों को हरियाणा बार्डर पर ही रोक दिया गया है। मजदूरों के स्वास्थ्य विभाग द्वारा चेकअप करने के बाद 14 दिन की क्वारंटीन में रखा जाएगा। बार्डर पर रेन बसेरों में रुकने, खाने-पीने, शौचालय आदि की व्यवस्था की गई है। 14 दिन के उपरांत ही वे अपने घर जा सकते हैं। लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी।
सांसद निधि से प्रदीप चौधरी ने एक करोड़ दिए
शामली। कैराना के भाजपा सांसद प्रदीप चौधरी ने कोरोना वायरस के बचाव के लिए सांसद निधि से एक करोड़ रुपये की धनराशि शामली जिले के लिए अवमुक्त करने के लिए डीएम को पत्र भेजा है। सांसद प्रदीप चौधरी ने पत्र जारी करके यह जानकारी दी है।
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लॉकडाउन में फंसे लोगों को मंजिल तक पहुंचाएंगी बसें

शामली। कोरोना वायरस के बचाव के लिए लागू किए गए डॉकडाउन में फंसे यात्रियों को प्रदेश सरकार ने सवारियों को निशुल्क यात्रा कराने का निर्णय लिया है। जिले से नौ रोडवेज बसों को संचालन किया गया है। एक लखनऊ और दो मेरठ और तीन लाल कुआं गाजियाबाद और तीन बसें हरिद्वार सहारनपुर के लिए चलाई गई है। बसों को पहले सैनिट्राइज और सवारियों के स्वास्थ्य की जांच के बाद रवाना किया गया है।
यूपी रोडवेज बस अड्डे के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी राजेंद्र चौहान ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर एक रोडवेज बस लखनऊ और दो रोडवेज बसें मेरठ के लिए 132 सवारियों को भेजा गया है। मेरठ और लखनऊ जाने से पहले यूपी रोडवेज की बसों को सैनिट्राइज किया गया। सवारियों को स्वास्थ्य की जांच के बाद सुबह 11 बजे से 12.30 बजे लखनऊ और मेरठ के लिए रवाना किया गया। यूपी रोडवेज के जलालाबाद बस डिपो के एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि लॉकडाउन में फंसी सवारियों के लिए नौ यूपी रोडवेज की बसों के लिए संचालन किया है। जिनमें तीन बस लाल कुआं गाजियाबाद, तीन बसे हरिद्वार और सहारनपुर के लिए संचालित की गई हैं। जिला प्रशासन की मांग के आधार पर रोडवेज बसे उपलब्ध कराई जाएगी। उधर करनाल बस स्टेशन के यातायात उप अधीक्षक चंद्र प्रकाश ने बताया कि लॉकडाउन में फंसे सवारियों के लिए करनाल से हरियाणा रोडवेज की दस बसों को गाजियाबाद होकर लखनऊ के लिए संचालित किया गया है।
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भूखे पेट सफर और पांव में पड़ गए छाले

शामली। फर्रुखाबाद जिले के जलालाबाद निवासी रमेेश अपनी अनीता देवी समेत 15 सदस्यों के साथ पानीपत की कंबल फैक्टरी में काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद फैक्टरी बंद हो गई। सबको घर जाने को कह दिया। मालिक को फोन किया तो उसने उठाया तक नहीं। किराए की झुग्गी थी। वे समान लेकर चलने लगे तो झुग्गी वाला किराया मांगने आ गया। जरूरी सामान लेकर बाकी सामान झुग्गी वाले को दिया और शनिवार दोपहर पैदल ही गांव के लिए निकल गए। बकौल रमेश काम बिना कौन खाना देता, सोचा अपने गांव जाकर साहूकारों के खेत में मजदूरी मिल जाएगी। दो नहीं तो एक वक्त की रोटी तो मिलेगी। यही सोचकर जरूरी सामान लिया और बाकी झुग्गी वाले को देकर शनिवार को पैदल ही गांव के लिए निकल गए। सभी भूखे थे, कैराना आते आते महिलाओं और बच्चों के पैरों में छाले पड़ गए। बच्चों को गोद में लेकर चले रविवार को कैराना आकर उन्हें खाना नसीब हुआ यहां खाना खाने के बाद आगे का सफर शुरू हो गया।
पानी पीकर पेट भरते रहे और बढ़ते रहे
शामली। कैराना रोड पर पूर्वी यमुना नहर पुल पर चार युवक मिले। उनके पीठ पर बैग था। पूछने पर नाम उन्होंने अपने नाम नन्हें निवासी नूरपुर, राहुल निवासी काशीपुर, सुनील और सबलीक निवासी दौड़बाग जिला मुरादाबाद बताया। बताया कि वे पानीपत की फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हुई तो उनके पास न पैसे बचे और न ही राशन बचा था। फैक्टरी की तरफ से भी कोई मदद नहीं दी और मकान मालिक ने भी मकान खाली कर अपने घर जाने को कह दिया गया। शनिवार शाम को पानीपत से चल दिए । पूरे रास्ते कहीं खाना नहीं मिला। जो हैंडपंप नजर आया उस पर पानी पीकर पेट भर रहे थे। बस घर पहुंचने की उम्मीद में ये भूखे प्यासे अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे। शामली में उन्हें सामाजिक संस्था ने भोजन के पैकेट दिए।
कैराना  में पानीपत से पैदल चलकर शामली  जाते मजदूर
कैराना में पानीपत से पैदल चलकर शामली जाते मजदूर- फोटो : SHAMLI
कैराना  में पानीपत से पैदल चलकर शामली  जाते मजदूर
कैराना में पानीपत से पैदल चलकर शामली जाते मजदूर- फोटो : SHAMLI
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पैदल अपने घरो की ओर आ रहे सैकडो लोगो की एलम र्बोर्डर पर जांच

लॉकडाउन : पानीपत से पैदल चलकर रविवार को शामली पहुंची अपने पैर के छाले दिखाती हुई महिला।
घर जाने की याद सताने लगी
कांधला। कोरोना वायरस के खतरे से अपने देश को बचाने के लिए लॉकडाउन के बाद से सभी लोग अपने अपने स्थानों पर रुक गए थे। कई दिनों के बीत जाने के बाद लोगों को अपने घरों और बच्चों की याद सताने लगी। साधन नहीं मिल पाने के कारण लोग अपने घरों की ओर पैदल ही चल दिए। रास्ते में कई तरह की परेशानियों का सामना कर ये लोग अपने घरों की ओर बढ़ रहे हैं। रविवार को बार्डर स्थित कसबा एलम में एक स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया। प्रशासन ने एहतियातन तौर पर बाहरी लोगों के जिले की सीमा पर प्रवेश से पूर्व जांच कराई। यहां पर पहुंच रहे सैकड़ों लोगों की जांच कैंप में करने के बाद इनको आगे के लिए परमिशन दी गई। कैंप में चिकित्सक विजय राणा, वीरेंद्र सिंह, प्रकाश ने कैंप में पहुुंचे 185 लोगों की जांच कर उन्हें मास्क प्रयोग करने की सलाह दी।
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दो दिन से भूखे हैं, नींद भी नहीं आती साहब

शामली/कैराना/बाबरी/कांधला। सैकड़ों मील का लंबा सफर, टूटा बदन, जेब खाली, पेट भूखा। लॉकडाउन के बाद पलायन कर अपने घरों को लौट रहे दिहाड़ी मजदूरों और कर्मचारियों की हालत बहुत खराब है। अमर उजाला टीम ने जिले की सड़कों पर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे इन लोगों से बात की। किसी ने कहा जब से चले हैं ना कुछ खाया ना ही पानी पीया है। रास्ते में कुछ खाने को भी नहीं मिला। कोई तो अपनी परेशानी बताते बताते रो पड़ा। पेश है एक रिपोर्ट...
देहरादून के विकासनगर रोड पर स्थित गांव टिमली निवासी जाहिद ने बताया कि उसके गांव के छह लोग पानीपत के एक बड़े होटल में लॉड्री का काम करते हैं। सात हजार महीना और खाना पीना मिलता है। लॉक डाउन के बाद होटल बंद हो गया। तीन दिन जो घर में था वो खाया। शुक्रवार शाम को घर का राशन भी खत्म हो गया था। उनके मकान मालिकों ने भी निकाल दिया। महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं जो जमा था वो भी खत्म हो गया। जेब खाली हो चुकी थी। शनिवार रात को भूखे पेट पानीपत से देहरादून के लिए चल दिए। रात को सिनौली गांव में कुछ देर लेटकर काटी लेकिन भूख के मारे नींद नहीं आई। सुबह चले तो कैराना में कुछ लोगों ने भोजन के पैकेट दिए जब भूख मिटी। लंबा सफर बाकी है पता नहीं घर कब पहुंचेंगे रास्ते में रोटी मिलेगी भी या नहीं।
कासगंज निवासी मोहित शामली में बस अड्डे के निकट अपने मामा मुकेश और भाई सेवाराम सहित 11 लोगों के साथ घर जाने के लिए किसी वाहन की इंतजार में खड़ा था। मोहित ने बताया कि वे पंजाब के पटियाला में छोले कुल्चे का ठेला लगाते थे। एक सप्ताह पहले से काम बंद हो गया। जो पैसे थे, वे खर्च हो गए। काम बंद होने के साथ खाने के लिए भी कुछ नहीं बचा तो उन्होंने घर लौटने का निश्चय किया, लेकिन घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए। रास्ते में एक दो जगह थोड़ी बहुत दूर के लिए ट्रैक्टर आदि साधन मिला। बाकी पूरे रास्ते वे भूखे प्यासे पैदल ही यहां तक पहुंचे। हरियाणा से यमुना पुल पार करने के बाद रास्ते में लोगों ने उन्हें खाना खिलाया।
कन्नौज निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वे पटियाला में फेरी लगाकर चूड़ी बेचने का काम करते थे। जब से लॉकडाउन हुआ तो काम बंद हो गया। काम बंद होने पर उनके पास न पैसे बचे और न खाने को राशन बचा। दिनभर की कमाई से वे बाजार से राशन खरीदकर लाते थे और बनाकर खाते थे। जो पैसे बचाए थे वे खाने में खर्च हो गए। अब घर जाने के सिवा उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था। साधन न मिलने पर वे दो दिन से पैदल चलकर यहां तक जैसे-तैसे पहुंचे। रास्ते में एक-दो जगह ही खाना मिला, बाकी पूरे रास्ते भूखे पेट ही चलना पड़ा।
मैनपुरी निवासी उदयवीर ने बताया कि वह पंजाब के पटियाला में फेरी लगाकर चूड़ी बेचता था। आठ दिन पहले काम बंद हो गया। खाने को राशन खत्म, जेब में पैसे नहीं बचे। इसलिए घर जाने के शनिवार को अपने साथी विनय के साथ पैदल ही निकल पड़ा। भूखे प्यासे हरियाणा बार्डर पर पहुंचा। यूपी में झिंझाना के पास कुछ लोगों ने उसे भोजन दिया। अब शामली से घर जाने के लिए कोई साधन मिल जाए तो अच्छा वरना पैदल ही चले जाएंगे।
कैराना में अपने 12 साथी श्रमिकों के साथ 650 किमी श्रावस्ती जा रहे शिव प्रसाद ने बताया कि वो सभी पानीपत में चिनाई मजदूरी का काम करते थे। 10 दिन से काम बंद होने के कारण पैसे भी खत्म हो गये। रात करीब तीन बजे वो सभी पानीपत से पैदल चले थे। रास्ते में कुछ नहीं खाया। अभी पैदल ही जा रहे हैं।
फर्रुखाबाद निवासी संजीव व उसका साथी छोटे लाल पैदल शामली की ओर जा रहे थे। संजीव ने बताया कि वो पानीपत में हैंडलूम पर काम करते थे। 10 दिन पहले मालिक ने काम बंद कर दिया था। 10 दिन पानीपत में रहने के कारण सारे पैसे खत्म हो गए। मालिक ने शनिवार को चलते समय 500 रुपये दिए थे। सुबह चार बजे पानीपत से पैदल चले। अभी तक कुछ नहीं खाया।
सहारनपुर निवासी मनोज व उसके 14 साथी पानीपत में गन्ना छिलाई के लिए दिहाड़ी मजदूरी पर गए थे। खाली रहने के कारण मजदूरी में मिले पैसे भी खत्म हो गए। अब वो सभी पैदल सहारनपुर जा रहे हैं। रविवार सुबह सात बजे चले थे। रास्ते में खाने को अभी तक कुछ नहीं मिला।
शामली निवासी पालेखान के साथ चार महिलाएं, दो युवतियां और चार बच्चे पैदल ही शामली की और जाते मिले। पाले खान ने बताया कि पानीपत में 21 मार्च की शादी में गए थे। लॉकडाउन में बसे बंद हो जाने पर आज मजबूरी में पैदल ही घर जा रहे है।
राजेश निवासी लांक ने बताया कि करनाल भट्ठे पर काम करने गया था। लॉकडाउन के चलते प्रशासन ने कार्य पर रोक लगा दी। भट्ठा मालिक ने घर जाने को बोल दिया। वह कल सुबह सात बजे करनाल से पैदल चला था। सहारनपुर में रात को सड़क किनारे बैठते उठते थानाभवन, बाबरी, बुटराड़ा के रास्ते अपने गांव लांक जा रहा हूं। शनिवार सुबह से भूखे प्यासे राजेश को बाबरी पहुंचने पर जिला पंचायत सदस्य अनिल टीनू ने भोजन कराया।
केस नौ
सिसौली निवासी शावेज हरिद्वार की एक कंपनी में नौकरी करता है। लॉकडाउन के चलते कंपनी मालिक ने 14 अप्रैल तक काम पर न आने को बोल दिया। वह शनिवार को 11 बजे हरिद्वार से नहर पटरी और जंगल के रास्ते गोगवान गांव में पहुंचा। गांव निवासी किसान बीर सिंह ने उसे भोजन कराया।
केस 10
कांधला के निकट भारसी मोड़ पर मिले झिंझाना निवासी ओमप्रकाश दिल्ली में जूते बनाने कारखाने में काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद से वे अपने घर बच्चों में आने को परेशान थे, लेकिन साधन न होने पर वे पैदल निकल पड़े। सुबह पांच बजे से चलकर कई स्थानों पर जलपान करते हुए वे अब कांधला तक पहुंचे हैं। अब आगे और पैदल चलने की हिम्मत जवाब दे रही है।
केस 11
फोटो संख्या -38
कांधला में भारसी मोड़ पर पहुंचे सोनू निवासी नीमखेड़ी ने बताया कि वह गौरीपुर में कोल्हू पर मजदूरी कर अपनेे परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। सोनू की आंखें अपना दर्द बताते हुए नम हो गईं। उन्होंने कहा बच्चों की घर में जब भूखा मरने की नौबत सामने आती दिखाई दी, तो वे पैदल ही अपने घर की ओर चल पड़े। जहां से पैदल आने पर कई तरह की परेशानी भी सामने आई।
केस 12
फोटो संख्या- 40
एलम के निकट झिंझाना निवासी सन्नवर ने बताया कि अपने गांव के कई साथियों के साथ दिल्ली में पेंटर है। लॉकडाउन के बाद से वहां खाने की भी परेशानी सामने आनेे लगी थी। कोई साधन न होने पर अपने घर की ओर पैदल चल दिए। सुबह तीन बजे से पैदल चलते हुए पैरों में छाले और आंखों में आंसू आने लगे हैं। कोई इस बीमारी के डर से कुछ दूरी तक भी लिफ्ट देने को तैयार नहीं है।
केस13
फोटो संख्या-39
एलम में मिले अलीपुर झिंझाना निवासी फैसल गुड़गांव में अपने साथियों के साथ एल्युमीनियम के दरवाजे बनाने का काम करता है। वहां से अपने घर के लिए पैदल निकल पड़े रास्ते में कहीं पर कोई साधन नहीं मिला। अब चलते हुए 17 घंटों से भी ज्यादा हो गया। कई स्थानों पर कैंप में भी जांच के नाम काफी समय रुकना पड़ रहा है। घर जाने पर ही राहत मिलेगी।
शामली में चबुतरे पर लेटे हूये युवक
शामली में चबुतरे पर लेटे हूये युवक- फोटो : SHAMLI
शामली में थक कर महिला के साथ बैठा युवक
शामली में थक कर महिला के साथ बैठा युवक- फोटो : SHAMLI
शामली  जुगाड वाहन से परिवार  को लेकर गुजरता  युवक
शामली जुगाड वाहन से परिवार को लेकर गुजरता युवक- फोटो : SHAMLI
शामली में पानीपत से पैदल आते मजदूर
शामली में पानीपत से पैदल आते मजदूर- फोटो : SHAMLI
शामली में पानीपत से पैदल आते मजदूर
शामली में पानीपत से पैदल आते मजदूर- फोटो : SHAMLI
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टिटौली में पैदल आ रहे श्रमिकों को कराया भोजन

शामली। गांव टिटौली में गन्ना मंत्री सुरेश राणा के निर्देश पर गांव टिटौली के प्रधान के पति राजीव शास्त्री ने ग्रामीणों के सहयोग से गांव के विद्यालय में हरियाणा और पंजाब से पैदल चलकर आने वाले श्रमिकों को भोजन कराया गया। इस अवसर पर रामपाल सिंह, जाहिद, विरेंद्र, राजेंद्र, रोजू और पवन मास्टर आदि का सहयोग रहा।
मेडिकल स्क्रीनिंग के बिना ही पहुंचे श्रमिक
कैराना। दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक अपने घर लौट रहे हैं। रविवार को सैकड़ों की तादाद में श्रमिक पानीपत खटीमा राजमार्ग से पैदल ही गुजरते नजर आएं। जब श्रमिकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यूपी हरियाणा बॉर्डर पर उनकी डॉक्टरों द्वारा मेडिकल स्क्रीनिंग नहीं हुई है। जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो पूर्वाह्न करीब 11 बजे डाक्टरों की टीम यमुना पुल पर पहुंची तथा हरियाणा की और से आने वाले मजदूरों की स्क्रीनिंग शुरू हुई। इस मामले में एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि अगर ऐसी स्थिति है तो चिकित्सा अधीक्षक को निर्देशित किया जाएगा कि 24 घंटे यमुना पुल पर डाक्टरों की ड्यूटी बनी रहे ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न आए। उधर, दूसरे राज्यों व जिलों से आने वाले लोगों के लिए हरियाणा बार्डर पर सूची बनाई गई है। उन लोगों के गांव और आस पड़ोस में पत्रक चस्पा कर उन्हें 14 दिन के अपने घर में क्वारंटीन में रहने की सलाह दी। साथ ही कहा कि अगर उन्हें कोई परेशानी होती है तो स्वास्थ्य विभाग को सूचना दे।
ग्रामीणों की मदद से यूपी में पहुंचे बरेली के श्रमिक
कैराना। शनिवार रात करीब 9 बजे करनाल में कारपेट फैक्टरी में काम करने वाले बरेली निवासी नूरहसन, जीशान, अली हसन, साकिर व रियासुदीन सहित 12 श्रमिक पानीपत होते हुए पैदल ही कैराना पहुंचे। कैराना में अम्बा पैलेस में बनाया गया कैंप बंद मिलने पर सभी श्रमिक बाहर सड़क पर बैठ गये। इस दौरान कुछ लोगों ने श्रमिकों को खाने के लिए फल दिए। नूर हसन ने बताया कि वो सभी करनाल से सुबह के समय चले थे। शाम के समय यमुना पुल से उन्हें आने नहीं दिया, जिसके बाद उनको गांव के लोगों की मदद से वे यूपी में पहुंचे। उनकी स्क्रीनिंग भी नहीं हुई। यह जानकारी मिलने पर एसडीएम देवेंद्र सिंह ने श्रमिकों को सरकारी अस्पताल भेजकर स्क्रीनिंग कराई।
बिड़ौली बार्डर पर शिविर में हुई स्क्रीनिंग
झिंझाना। लॉकडाउन के चलते अन्य प्रदेशों से आ रहे मजदूरों को यूपी में प्रवेश करने से पहले चिकित्सीय परीक्षण किया जा रहा है। करनाल हाईवे स्थित बिड़ौली बार्डर पर लगाए गए चिकित्सा शिविर में डाक्टरों की टीम अन्य प्रदेश से आ रहे सभी लोगों का सैनिटाइज के बाद उनकी स्कैनिंग कर यूपी में जाने की अनुमति दी जा रही है। शिविर में चिकित्सक शशिकांत ने बताया की सीएमओ के निर्देश पर सीमा पर चिकित्सा शिविर लगाया गया है। कोई भी महिला पुरुष बिना स्क्रीनिंग के यूपी में प्रवेश नहीं कर सकता है। रविंद्र यादव, इकबाल खां आदि स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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देश गुल्लक तोड़कर मदद को आगे आए बच्चे

गुल्लक तोड़कर मदद को आगे आए बच्चे
थानाभवन (शामली)। देश में कोरोना वायरस महामारी फैलने के बाद जहां उद्योगपति से लेकर फ़िल्म स्टार व खिलाड़ी देश की आर्थिक मदद करने में जुटे हैं। वहीं, इस आपदा में बच्चों ने भी अपना योगदान देना शुरू कर दिया है। मस्तगढ़ गांव के बाल स्वयंसेवकों ने अपनी गुल्लक तोड़कर 2001 रुपये पीएम राहत कोष में जमा कर अनूठी पहल शुरू की है।
ये सभी बच्चे गांव की शिव शाखा से जुड़े बाल स्वयं सेवक हैं, जिन्होंने अपनी गुल्लकें तोड़कर यह पैसा जिलाधिकारी के माध्यम से कोरोना पीड़ितों के लिए राहत कोष में जमा किया है। सात साल के लक्ष्य ने कहा कि जब देश ही नहीं रहेगा तो हम इस पैसे का क्या करेंगे। 12 वर्षीय कृष ने कहा कि उसने ये पैसे बैडमिंटन लेने के लिए इकट्ठे। हालांकि अब बैडमिंटन से ज्यादा जरूरी देश की मदद करना है। पांच साल का बालक वासु भी अपनी गुल्लक तोड़कर 170 रुपये एकत्रित करके लाया और बोला, भैया इनको भी मोदी जी को भेज दो। शिवशाखा मस्तगढ़ के सभी बाल स्वयंसेवकों ने प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 2001 रुपये जमा कर सकारात्मक पहल की है।
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तमंचा लहराने की वीडियो वायरल करने का आरोपी गिरफ्तार

तमंचा लहराने की वीडियो वायरल करने का आरोपी गिरफ्तार
शामली। शहर कोतवाली पुलिस ने मोहल्ले में तमंचा लहराकर वीडियो वायरल करने के आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की निशानदेही पर तमंचा और 120 ग्राम चरस बरामद कर चालान कर दिया गया है।
कोतवाली प्रभारी प्रेमवीर राणा ने बताया कि चार दिन पहले एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें एक युवक हाथ में तमंचा लहराता हुआ दिखाई दे रहा है। एसपी विनीत जायसवाल के निर्देश पर वायरल वीडियो की जांच की गई। जांच के दौरान तमंचा लहराने वाले युवक की पहचान सद्दाम उर्फ सादा, निवासी मोहल्ला कलंदरशाह थाना कोतवाली शामली के रूप में हुई। रविवार को कोतवाल ने बताया कि आरोपी सद्दाम को ब्लाक रोड से चेकिंग के दौरान करीब 120 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पता चला कि वीडियो दो माह पहले बनी थी, जो चार दिन पहले वायरल हुई थी। आरोपी की निशानदेही पर तमंचा बरामद कर उसका चालान कर दिया है।
चिकनशॉप पर दो आरोपी पकड़े
शामली। आजाद चौक में चिकन शॉप की दुकान पर खुले में मीट काटकर बेचने के आरोप में आसमोहम्मद, निवासी आजाद चौक व असगर निवासी सराय कबाड़ी बाजार शामली को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर गांव लिलौन निवासी ओपिंदर को शांतिभंग की आशंका में चालान किया गया है।
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गरीब परिवारों को भोजन और राशन उपलब्ध कराया

शामली/झिंझाना/कांधला। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में शामली इंडस्ट्रीयल स्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन द्वारा लॉकडाउन में गरीब परिवारों को भोजन वितरित किया। झिंझाना में भी सामाजिक संगठनों के लोगों ने गरीब परिवार को खाना खिलाने के साथ ही 15 दिन का राशन उपलब्ध कराया।
लॉकडाउन में काम धंधा बंद होने पर गरीब परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट बना हुआ है। रविवार को अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में शामली इंडस्ट्रीयल स्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सहयोग से सीबी गुप्ता कालोनी में गरीब परिवारों को भोजन के पैकेट वितरित किए। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने कहा कि कोराना की वजह से पूरे देश पर संकट बना हुआ है। इसलिए सभी का कर्तव्य है कि जिससे तो भी जिस तरह की मदद हो सके वह करनी चाहिए। इस अवसर पर अमित जैन, निखिल ऐरन, गौरव गोयल, भारत मित्तल, सुखबीर गर्ग, मनीष, राजकुमार जैन आदि मौजूद रहे।
कस्बा झिंझाना के मोहल्ला नई बस्ती में अमर उजाला फाउंडेशन के आह्वान पर सामाजिक संगठनों ने गरीब परिवार को भोजन के साथ 5 दिन का राशन उपलब्ध कराया है। कसबे के मोहल्ला नई बस्ती में विधवा कौशल के परिवार में 11 सदस्य है। उसके दोनो बेटे ठेले रेहड़े पर चाट बेचकर परिवार की गुजर बसर कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन में काम बंद होने पर पूरा परिवार के भूखा रहने की नौबत आ गई। परिवार की हालत देखते हुए अमर उजाला फाउंडेशन ने कसबे के सामाजिक संगठनों के सहयोग से परिवार को भोजन, फल आदि उपलब्ध कराने के साथ ही 15 दिन का राशन उपलब्ध कराया। इस अवसर पर आशीष मित्तल, अंकुर मित्तल, अरविंद बंसल, कमल नारंग, विनोद संगल, शानु राजवंशी आदि मौजूद रहे। कांधला में भी दिल्ली बस स्टैंड पर दिल्ली की तरफ से पैदल घर लौट रहे लोगों को दूध और बिस्किट का वितरण किया।
मुसाफिरों को खाने के पैकेट वितरित किए
कैराना। रविवार को भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अनिल चौहान ने यमुना पुल पर पहुंचकर पानीपत की तरफ से आने वालो श्रमिकों को करीब 250 खाने के पैकेट वितरित किए। वहीं रविवार सुबह आर्यपुरी निवासी शमशाद व दिव्यांग शौकीन अपने परिवार के साथ कोतवाली पहुंचे और काम बंद होने के कारण खाने के लिए पैसे न होना बताया। पुलिस ने कैंप में खाना वितरित कर रहे समाजसेवियों के माध्यम से दोनों परिवार को खाना भिजवाया।
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