भटक रहे किसान, आठ दिन में विभाग ने खरीदा 61 मीट्रिक टन धान

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 06:59 PM IST
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उपज बेचने के लिए किसान परेशान
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कहीं क्रय केंद्र सक्रिय नहीं तो कहीं कमी बताकर लौटा दिए जा रहे हैं किसान
आठ दिन में खरीदा गया 61 मीट्रिक टन धान
15 अक्तूबर से शुरू हो चुकी है धान की खरीद
धान खरीद के लिए जिले में बने हैं 92 क्रय केंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। उपज बेचने के लिए किसान परेशान हैं, मगर उनका धान बिक नहीं पा रहा है। विभागीय जिम्मेदार क्रय सक्रिय बता रहे हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश क्रय केंद्र खरीद शुरू हुए नौ दिन का वक्ता गुजर चुका है। लेकिन अभी तक वह सक्रिय ही नहीं हो सके हैं। यह हाल तब है जब खुद मुख्यमंत्री धान खरीद में शिथिलता और लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं।
कृषि विधेयक लागू होने के बाद सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल और किसान नाराज हैं। विधेयक का लगातार विरोध जारी है। इस बीच धान की खरीद का सीजन शुरू हो गया। शासन की ओर से पूर्वी यूपी में एक नवंबर को धान खरीद की तिथि तय की गई थी। मगर इसी बीच समय को बदलते हुए 15 अक्तूबर को ही खरीद शुरू कर दिया। अधूरी तैयारी के बीच क्रय केंद्र तो खोल दिए गए, लेकिन खरीद का बुरा हाल है। अधिकांश क्रय केंद्र सक्रिय ही नहीं हुए हैं। वहीं जो सक्रिय हैं वहां पर धान में कमी बताते हुए किसानों को लौटा दिया जा रहा है। ऐसे में किसान औने-पौने दाम पर उपज को बेचने को विवश हैं। वहीं विभागीय जिम्मेदार खरीद होने की दलील दे रहे हैं। बढ़नी क्षेत्र के किसान महादेवा गांव निवासी अनवर सादात ने कहा कि सरकार किसानों की आय को दोगुना करने की बात कर रही है। जब उसके उपज का वाजिब मूल्य मिलेगा ही नहीं तो उसकी आय कैसे बढ़ेगी। कागज में खरीद शुरू कर दिया गया, लेकिन क्षेत्र में एक भी केंद्र सक्रिय नहीं है। जिम्मेदारों को इस पर ध्यान देना चाहिए। मनिकौरा गांव निवासी किसान आशुतोष शुक्ल ले कहा कि गेहूं की बुवाई सिर पर है। धान कटने के बाद क्षेत्र का भ्रमण कर चुके हैं, लेकिन एक भी केंद्र सक्रिय नहीं है। सरकार की ओर से 1888 रुपये प्रति क्विंटल धान की कीमत निर्धारित किया गया। मगर आढ़तियों के हाथ मजबूर होकर 900 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेचना पड़ा। मटियार उर्फ भुतहवा गांव निवासी मो. सफात और सधुवारनगर निवासी संत प्रसाद निषाद ने कहा कि खरीद व्यवस्था हवाहवाई है। किसान आढ़तियों के हाथ लुट जाएगा। फिर आढ़तियों का धान खरीद कर लक्ष्य पूरा कर लिया जाता है। कोई किसानों का भला करने वाला नहीं है। सरकार को चाहिए कि न्याय पंचायत स्तर पर क्रय केंद्र बनाए और लक्ष्य निर्धारित कर दे कि इतने किसानों का हाल में खरीद किया जाए, तब जाकर किसानों का भला होगा।
जिले में बने हैं हैं 92 धान क्रयकेंद्र
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक किसानों की सुविधा के लिए जिले में कुल 92 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। और जिले को 55 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला है। 15 अक्तूबर से धान की खरीद शुरू हुई है। अब तक 61 मीट्रिक टन का विभाग खरीद किया है।
बोले जिम्मेदार
क्रय केंद्रों पर जाने वालों किसानों की उपज को खरीदा जा रहा है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की जा रही है। सभी क्रय केंद्र सक्रिय हैं, वहां पर बोरा आदि की व्यवस्था की गई है। रही बात बढ़नी क्षेत्र की तो जल्द ही वहां पर तीन और नए केंद्र खोले जाएंगे। धान खरीद में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी पर कार्रवाई की जाएगी।
- संजय पांडेय, जिला विपणन अधिकारी

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