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नवरात्र में कराएं कामाख्या बगलामुखी कवच का पाठ व हवन, पाएं कर्ज मुक्ति एवं शत्रुओं से छुटकारा
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Coronavirus in UP Live Updates: प्रदेश में 80 संक्रमित, लखनऊ में 9 दिनों से नहीं मिला कोई मरीज

शासन और प्रशासन संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लोगों से भी हर वक्त घरों में रहने की अपील की जा रही है।

30 मार्च 2020

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सोनभद्र

सोमवार, 30 मार्च 2020

सामानों की होम डिलेवरी कराने के लिए सड़क पर उतरा प्रशासन

सोनभद्र। जिले में लॉक डाउन के दौरान आम लोगों को रोजमर्रा की सामानों को उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन सड़क पर उतर गया है। शुक्रवार को राबट्र्सगंज नगर में डीएम एस. राजलिंगम और एसपी आशीष श्रीवास्तव ने भ्रमण कर किराना की सामानों, सब्जी आदि सामानों की जा रही होम डिलेवरी के बारे में आम लोगों से मुलाकात कर जानकारी ली।
सुबह छह बजे से ही राबट्र्सगंज समेत अन्य शहरों में फोर्स अलर्ट हो जा रही है। पूरे दिन प्रशासनिक और पुलिस के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर लॉक डाउन को सफल बनाने एवं लोगों को जरूरत की सामानों की आपूर्ति कराने में जुटे है। ताकि लोगों को किसी प्रकार की समस्याएं न होने पाएं और लोग अपने-अपने घरों में ही मौजूद रहें। राबट्र्सगंज में डोर टू डोर डिलवेरी के निरीक्षण के दौरान डीएम ने कहा कि नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लॉक डाउन में स्वास्थ्य विभाग, आपूर्ति विभाग व जिला कन्ट्रोल रूम को क्रियाशील रखा गया है। खादान्न सामग्रियों, सब्जी व अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए किराना दुकानों, सब्जियों को ठेलो आदि के माध्यम से नागरिकों के घर तक हुंचाने का कार्य किया जा रहा है। गॉव से सब्जी मण्डी तक सब्जियों को ले आने के लिए किसानों को पास जारी किए जा रहे हैें और उचित दर पर मण्डी में सरकार उनकी सब्जी लेकर सीधा वार्डवार आवंटित ठेलों पर सब्जियां रखवा कर मुहल्लेवार भेजने का कार्य हो रहा है। सब्जी व खाने के सामानों के लिए संबंधित दुकानदारों व ठेलों के संचालकों का मोबाइल नंबरों की जानकारी आम नागरिकों तक मीडिया व पंपलेट के माध्यम से पहुंचाया जा रहा है। कहा कि 05444.222384, वाट्सअप नंबर. 7839564750 और सोनभद्र जिले की वेबसाइट पर कोविड.19 ट्रेड बना हुआ हुआ है जिस पर पास के लिए सीधा आवेदन कर सकते हैं और आनलाईन पास आपके वाट्सअस नंबर पर सीधा भेजने की व्यवस्था है। पास के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने नागरिकों का आह्वान करते हुए कहा कि इस अपरिहार्य परिस्थिति में जिला प्रशासन जिले के नागरिकों के साथ है। एसडीएम यमुना धर चौहान, एएसपी ओपी सिंह, सीओ राजकुमार त्रिपाठी, तहसीलदार सुशील और ईओ प्रदीप गिरि भी भ्रमण कर जायजा लेते रहे।
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कोरोना पर जागरूकता को लेकर हो रही ऑनलाइन प्रतियोगिता, घर बैठे ऐसे लें हिस्सा

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक नई मुहिम शुरू की है। इसके तहत घर बैठे छात्र-छात्राओं के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता की शुरुआत की जा रही है "कोरोना को हराना है भारत से भगाना है"। इस थीम पर छात्र छात्राओं के लिए पोस्टर, स्लोगन और निबंध प्रतियोगिता की शुरुआत की गई है।

जिले के इंटर कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र छात्रा हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। खास बात यह है कि इस प्रतियोगिता में पंजीकरण और प्रविष्ठियां ऑनलाइन भेजनी होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. विजय प्रकाश सिंह ने बताया कि सभी इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी जा चुकी है।

साथ ही उनसे इस बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी देने को भी कहा गया है। बताया कि 31 मार्च की शाम 5 बजे तक प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया जा सकेगा और 8 अप्रैल तक ऑनलाइन आई प्रविष्टी पर ही विचार किया जाएगा। प्रतियोगिता में हर स्तर पर तीन विजेताओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

रजिस्ट्रेशन के लिए छात्रों को अपना नाम, पिता का नाम, कक्षा, विद्यालय का नाम और मोबाइल नंबर भी देना होगा। लॉकडाउन में घर बैठे छात्र-छात्राओ का समय व्यतीत हो और कोरोना से बचाव के प्रति जागरूकता ही इसका उद्देश्य है। प्रतियोगिता के लिए जिले में 3 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।

इसमें वाराणसी के राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश सिंह यादव, सीएम एंग्लो बंगाली कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. विश्वनाथ दुबे और सनबीम ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप मुखर्जी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

 

 

 

 

 

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लॉकडाउन की मार, पहले रोजगार चौपट, फिर घर पहुंचने को पैदल ही तय कर रहे 154 किलोमीटर का सफर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए देश में लॉक डाउन प्रभावी है। ऐसे में  देशभर में 21 दिनों के लॉक डाउन से सबसे ज्यादा दिक्कत बाहर कमाने गये लोगों को घर वापस लौटने में हो रही है। सवारी वाहन न मिलने से लोग को कोसों दूर पैदल चलने को विवश हैं। शुक्रवार को एक श्रमिक परिवार राबट्र्सगंज नगर से सटे इमरती कालोनी के समीप मिला, जो वाराणसी के राजघाट से लगभग 154 किलोमीटर पैदल चलकर दुद्धी जा रहा श्रमिक परिवार मिला।

दुद्धी तहसील क्षेत्र के गोरसिंग गांव के रहने वाले संजय घसिया, राजन, मुन्नालाल, दाऊ, सीताराम का कहना है कि वे 12 की संख्या में एक सप्ताह पहले वाराणसी के राजघाट मजदूरी करने गये थे। उनके साथ चार औरतें और दो बच्चे थे। सभी राजघाट के समीप एक निर्माणाधीन मकान में काम कर रहे थे।
24 मार्च की रात लॉकडाउन की घोषणा होने पर मालिक ने पैसे का भुगतान कर दिया। संजय घसिया ने बताया कि लॉकडाउन होने पर वे 25 मार्च की सुबह राजघाट से पैदल ही परिवार के साथ घर के लिए चल दिए। रास्ते में दुकान और होटल न खुलने की वजह से वह लोगों से खाने-पीने की सामान मांगकर खाते-पीते चले आ रहे हैं।
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राहत: झारखंड सरकार ने यूपी बार्डर पर लगाए छह बस

विंढमगंज। यूपी सरकार की रोडवेज की बसें झारखंड के मजदूूरों को यूपी की सीमा पर जिले के सलैयाडीह ग्राम पंचायत स्थित कोन मोड़ तिराहे पर उतार रही हैं। वहां से झारखंड की लगी छह बसें मजदूरों को उनके गांव तक छोड़ रही हैं। बार्डर पर मजदूरों को सोशल डिस्टेंस का पालन कर रहने का निर्देश जारी किया गया है।
यूपी की बसें मजदूरों को झारखंड सीमा से एक किमी पहले सलैयाडीह ग्राम पंचायत के कोन मोड़ तिराहे पर उतार रही हैं। यात्री मेन बाजार से पैदल चलते हुए झारखंड बॉर्डर पर जा रहे हैं। वहां पहले से खड़ी झारखंड की बसें यात्रियों को संबंधित जिला लेकर जा रही हैं। दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद, भोपाल, चेन्नई से आने वाले झारखंड व बिहार के हजारों मजदूर इस रास्ते से होकर गुजर रहे हैं। उनसे कोरोना वायरस फैलने का भय लोगों में है। सन क्लब सोसाइटी समेत अन्य समाजसेवी क्षेत्र के रिक्शा, ठेला वालों के साथ ही गरीब तबके के लोगों को भोजन मुहैया कराने में लगे हुए हैं। जरूरत के अनुसार तत्काल संबंधित घरों तक जीवन जीने के लिए खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है ताकि वह अपने घरों में रहकर ही खा सकें और लॉक डाउन का पालन कर सकें।
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जेल में लगी अदालत 27 विचाराधीन बंदियों को किया रिहा

सोनभद्र। जिला कारागार गुरमा परिसर में शनिवार की शाम कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत न्यायिक अधिकारियों ने अदालत लगाकर 27 विचाराधीन बंदियों को रिहा किया। रिहा होते ही बंदियों को चेहरे पर खुशियां झलक रही थीं। बंदियों ने जेल में अदालत लगाने के लिए न्यायिक विभाग व जेल प्रशासन का आभार जताया। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने बंदियों की रिहाई आदेश मिलते ही पुलिस के वाहन से उनके घर भेजा।
जेल अधीक्षक के मुताबिक जेल में संतोष कुमार गौतम प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश, नेत्रपाल सिंह विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, पंकज श्रीवास्तव अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश विशेष पास्को एक्ट, रवि प्रकाश साहू मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, महेंद्र कुमार द्वितीय सिविल जज सीनियर डिविजन/एसीजेएम, सुनील शेखर सिविल जज जूनियर डिविजन/न्यायकि मजिस्ट्रेट ने 27 विचाराधीन बंदी जो अधिकतम सात वर्ष की सजा वाले फौजदारी वादों में कारागार में निरूद्घ थे उन्हें आठ सप्ताह की अंतरिम जमानत पर व्यक्तिगत मुचलका एवं अंडरटेकिंग दाखिल करने के उपरांत रिहा करने का आदेश पारित किया। उन्होंने बताया रिहा हुए सभी बंदियों को पुलिस के वाहन से उनके घर तक पहुंचवाया गया।
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छत्तीसगढ़ से आए मजदूर थर्मो स्क्रीनिंग को नहीं हुए तैयार

चोपन। छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में स्थित खदान, क्रशर व कंपनियों में काम कर रहे सैकड़ों मजदूर रविवार को पैदल ही चोपन बाजार में आए। यहां पुलिस ने उन्हें भोजन कराया और अस्पताल भेेजना चाहा। लेकिन मजदूर जाने के लिए तैयार नहीं हुए। इससे उनकी थर्मो स्क्रीनिंग नहीं हो सकी। मजदूरों के जिद पर पुलिस ने उन्हें बस और ट्रक से उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया।
छत्तीसगढ़ के रायपुर, अंबिकापुर, भरतपुर के खदानों, क्रेशर, कंपिनयों में काम कर रहे मजदूर काम बंद होने पर पैदल ही अपने-अपने घरों के लिए चल दिये। इसमें कुछ मजदूर नेवारी, भरहरी, जु्गैल के थे तो कुछ बलरामपुर, गोंडा, बांदा के। मजदूरों ने बताया कि ठेकेदार ने मोबाइल बंद कर दिया। कुछ लोग साइकिल से कुछ पैदल चल दिये। सुबह नौ बजे चोपन पहुंचे तो चोपन पुलिस ने उन्हें रोकवाया और हाथ धोलवाया, खाना खिलवाया। इन मजदूरों का थर्मो स्क्रीनिंग नहीं हो पाया, क्यों कि यह उपलब्ध नहीं था। दूसरे लेबर अस्पताल जाने को तैयार नहीं थे। प्रशासन ने ट्रक व बस से उन्हें नेवारी, भरहरी, जुगैल भेजवाया। वहीं 70-80 लेबर बलरामपुर, गोड़ा, बांदा गए हैं। उधर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल यादव ने बिजौरा गांव में मजदूरों को भोजन कराया। नगर पंचायत चोपन के प्रतिनिधि अनीश अहमद व ईओ महेंद्र सिंह ने नगर से होकर गुजर रहे मजदूरों को लंच पैकेट बंटवाया।
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श्रमिकों को राबट्र्सगंज शेल्टर हाउस में रोका गया

सोनभद्र। प्रयागराज जनपद के मेजा रोड से पैदल चलकर घोरावल पहुंचे श्रमिकों का शनिवार की रात स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद राबट्र्सगंज शेल्टर हाउस में ठहराया गया। रविवार को दोपहर बाद तक श्रमिक शेल्टर हाउस में ठहरे रहे। चोपन ब्लॉक के रामगढ़ कचनरवा के रहने वाले अयोध्या प्रसाद और सुनील कुमार ने बताया कि वह 23 की संख्या में प्रयागराज जनपद के मेजा रोड काम करने गये थे। इसमें झारखंड के 17 मजदूर, राबट्र्सगंज के दो और रामगढ़ कचनरवा के दो श्रमिक है। लॉकडाउन होने पर सभी श्रमिक पैदल ही घर के लिए चल दिए। दो दिन पैदल चलकर व लिफ्ट लेकर घोरावल पहुंचे। जहां नगर पंचायत घोरावल के ईओ ने सभी श्रमिकों को भोजन कराने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इसके बाद डीएम के निर्देश पर सभी श्रमिकों को रोडवेज बस से राबट्र्सगंज शेल्टर हाउस पहुंचाया गया। श्रमिकों का कहना है शनिवार की रात लगभग 10 बजे वह शेल्टर हाउस पहुंचे। यहां खाने-पीने की व्यवस्था की गई। सभी श्रमिकों ने प्रशासन से उन्हे शीघ्र घर पहुंचाने की अपील की। कहा कि घर जाकर वह फसल कटवाएंगे। ताकि परिवार की रोजी-रोटी चल सके। ... और पढ़ें

बाहर से आने वाले मजदूरों के लिए बनेगा कम्युनिटी किचेन

Workers detained at Rabtrasganj Shelter House
सोनभद्र। जिले में लॉक डाउन के दौरान बाहर से आने वाले मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कम्युनिटी किचेन संचालित करने का निर्णय लिया है। ब्लॉक और नगरीय क्षेत्र में संचालित होने वाले इस किचेन के लिए सीडीओ अजय कुमार द्विवेदी को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। यह जानकारी जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने दी। उन्होंने बताया कि 21 दिन के लिए जिलों को लॉकडाउन कर दिया गया है। इस दौरान बाहर से भी मजदूर आ सकते हैं व जो जनपद के दिहाड़ी मजदूर हैं, इनमें अंत्योदय कार्डधारक भी होंगें। मजदूरों को इस दौरान खाद्य सामग्री व सब्जी मिलने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मजदूरों को संबंधित ब्लॉकों के बीडीओ व नगरीय क्षेत्रों में ऐसे मजदूरों को खाद्य सामग्री व सब्जी की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित अधिशसी अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। निर्देश दिया किइस आदेश का अनुपालन करते हुए ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों के संबंध में निर्धारित प्रारूप पर प्रतिदिन कलेक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम में सूचना उपलब्ध करायी जाय। डीएम ने निर्देश दिया कि बाहर से आने वाले मजदूरों व उनके परिवार व बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण जिला चिकित्सालय में होने के बाद ही उन्हे उनके घरों तक पहुंचाया जाए। संसाधनों के अभाव में उन्हें कठिनाई न हो, इसके लिए डीएम ने एआरटीओ प्रवर्तन को नोडल अधिकारी नामित किया है। जो इस के लिए अपने अधीनस्थों की 24 घंटे ड्यूटी जिला संयुक्त चिकित्सालय में लगाते हुए उनके नाम व मोेबाइल नंबर या विवरण कलेक्ट्रेट में स्थापित कंट्रोल रूम में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। ... और पढ़ें

रोजगार की तलाश में दूसरे प्रांतों में गए 40

सोनभद्र। कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए घोषित लाकडाउन का विपरीत असर दूसरे राज्यों दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, सूरत, पंजाब, केरल, कोलकाता सहित अन्य जगहों पर कमाने गए मजदूरों पर पड़ा है। काम बंद होने और रहने व खाने पीने की व्यवस्था न होने पर संकट गहराते देख अब तक 4087 मजदूर पैदल अथवा अन्य साधनों से किसी तरह से अपने गांव लौट चुके हैं। काम बंद होने पर अपने गांव लौटने वाले श्रमिकों को चिह्नित कर सूची प्रशासन को सौंपने की जिम्मेदारी प्रधानों व ग्राम विकास अधिकारियों को सौंपी गई है। ताकि कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के मद्देनजर उनके खून व स्वास्थ्य की जांच करने के साथ ही सरकार की तरफ से घोषित योजनाओं का आपदा की इस घड़ी में लाभ दिया जा सके। उधर, स्वास्थ्य महकमा की स्थिति यह है कि अब तक विभिन्न प्रांतों से किसी तरह से घर लौटे ग्रामीणों में से 700 लोगों की जांच भी नहीं करा पाया है।
अब तक चार हजार से अधिक मजदूर विभिन्न प्रांतों में काम बंद होने पर सोनभद्र में अपने गांव लौट चुके हैं लेकिन इनमें कोरोना वायरस का फैलाव रोकने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग व खून की जांच अब तक सात सौ की भी नहीं हो सकी है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य महकमा कोरोना संकट के प्रति कितना सतर्क व तत्पर है। यह आंकड़ा तो ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा चिह्नित मजदूरों का है जबकि वाराणसी, प्रयागराज, भोपाल, जबलपुर सहित अन्य जगहों से भूखे प्यासे कई सौ किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर अपने गांव लौटने वाले उन मज़दूरों की भी संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिनकी न तो जांच अब तक की गई है और न ही उनके बारे में प्रशासन के पास ठोस जानकारी ही है। ये मजदूर अपने गांव पहुंचकर चुपचाप घरों में पड़े हैं।
यही नहीं, यहां काम बंद हो जाने पर अपने घर प्रयागराज, सीतापुर (यूपी) , भभुआ (बिहार) आदि स्थानों पर अपने घर पैदल ही रवाना होने वाले मजदूरों के रक्त की जांच भी नहीं की जा रही। इन मजदूरों की थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही। सारी कवायद सिर्फ कागजों पर चल रही है। बानगी देखिए, एनटीपीसी में टावर लाइन में आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे प्रयागराज जिले के करछना क्षेत्र निवासी 22 श्रमिक शक्तिनगर से रेल लाइन के किनारे-किनारे पैदल ही करीब 70 किमी दूरी पैदल तय कर शनिवार की रात ओबरा पहुंचे। इनका कहना था कि ठेकेदार काम बंद कर धोखा देकर भाग गया। दो दिन तक तो जितनी रकम थी, उससे राशन खरीदकर भोजन कर लिए लेकिन जब रुपये खत्म हो गए तो पैदल ही अपने गांव चल दिए। उधर, ओबरा में जब सीओ व थाना प्रभारी को पता चला तो इन लोगों ने श्रमिकों के भोजन आदि की व्यवस्था की। यहां भी इनके स्वास्थ्य की जांच नहीं हुई। मजदूर भोजन करने के बाद पैदल ही करछना के लिए रवाना हो गए।
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लॉकडाउन में पैदल ही घर लौटने लगे मजदूर

बीजपुर (सोनभद्र)। लॉकडाउन के बीच ऊर्जांचल में कार्यरत अन्य प्रदेशों के मजदूूर पैदल ही घर को लौटने लगे हैं। शनिवार को वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर मजदूरों का जत्था छोटी-छोटी टोलियों में अपने-अपने गृह प्रदेश को जाते दिखाई दिए।
औद्योगिक नगरी के रूप में विख्यात ऊर्जांचल में अन्य प्रदेशों से रोजी-रोजगार को लेकर मजदूरों का आना-जाना लगा रहा है। देश में जारी लॉकडाउन के बाद मजदूर घर लौटने लगे हैं। इससे सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी व ठेका मजदूरों को हो रही है। जिन्हें काम से निकाल दिया गया है अथवा काम नहीं है। मजदूरों ने बताया कि काम पूरी तरह से बंद है। ऐसे में घर लौटना विवशता है। स्थिति सामान्य होने पर पुन: लौट आए। वाराणसी - शक्तिनगर मार्ग पर शनिवार को गढ़वा, म्योरपुर, बिहार आदि स्थानों के लिए लोग जाते हुए देखे गये। शनिवार को उत्तर प्रदेश की सीमा पर लगभग 50 की संख्या में मजदूर अपने परिवार के साथ पहुंचे, जो पैदल भोपाल, जबलपुर सहित मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों से चल कर बभनी, म्योरपुर के गांवों की ओर जा रहे थे। सीमा पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सब को रोक दिया और इसकी सूचना प्रभारी निरीक्षक श्याम बहादुर यादव को दी। सूचना के बाद सीमा पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक ने वहां पहुंचे सभी मजदूरों के हाथों को साबुन से धुलवा कर खाने पीने की व्यवस्था की। उसके बाद सभी मजदूरों को अपने उनके घरों तक भेजने के लिए वाहनों की व्यवस्था की। बभनी निवासी श्रमिक रामकृत व म्योरपुर निवासी श्याम बिहारी ने बताया कि वो भोपाल में काम कर रहे थे। वहां काम बंद हो जाने से उन्हें रहने खाने की दिक्कत होने लगी तो घर वापसी का मन बना लिए। लॉकडाउन के कारण सभी रास्ते बंद होने की वजह से वह अपने साथियों के साथ पैदल ही चल पड़े और चार दिन बाद यहां पहुंचे हैं।
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जगह-जगह लिफ्ट लेकर विंध्याचल से पहुंचे विंढमगंज

सोनभद्र। 25 अप्रैल से देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन होने के बाद रोजी-रोजगार के लिए बाहर गये लोगों का घर वापसी का सिलसिला जारी है। शनिवार को झारखंड प्रांत के रहने वाले 22 श्रमिक विंध्याचल से कभी पैदल चलकर तो कहीं लिफ्ट लेकर विंढमगंज तक पहुंचे। विंढमगंज से 20 किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर अपने घर पहुंचे। झारखंड प्रांत के रमना थानान्तर्गत बहियार गांव के रहने वाले सर्फराज अंसारी और एनुन अंसारी का कहना है कि वह दो माह पहले मिर्जापुर जनपद के विंध्याचल शिवपुर मजदूरी करने गये थे। वहां रहकर वह दरी की बुनाई करते थे। उनके साथ में झारखंड प्रांत के धुरकी थानान्तर्गत अलग-अलग गांव के 20 श्रमिक भी काम करते थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से 24 अप्रैल की रात में देश में 21 दिनों तक लॉकडाउन के घोषणा के बाद मालिक ने श्रमिकों का हिसाब कर दिया। उनका कहना है कि वह विंध्याचल शिवपुर से शनिवार की भोर में पैदल ही सभी 22 श्रमिक चल दिए। लगभग 23 किलोमीटर पैदल चलने पर उन्हे ट्रक मिला। ट्रक से वह राबट्र्सगंज पहुंचे। यहां सभी श्रमिक दूसरे ट्रक पर बैठ गये जो हाथीनाला श्रमिकों को उतार दी। इसकेे बाद श्रमिक कानपुर से विंढमगंज जा रही रोडवेज बस में सवार होकर विंढमगंज पहुंचे। विंढमगंज से लगभग 20 किलोमीटर पैदल चलकर श्रमिक शनिवार की शाम को अपने-अपने घर पहुंचे। लॉकडाउन के दौरान वाहन नहीं चलने ने श्रमिकों को लगभग 200 किलोमीटर दूरी तय करने में 10 से 12 घंटे लग गए। ... और पढ़ें

जमीन विवाद में अधेड़ की कुल्हाड़ी से हत्या

बभनी (सोनभद्र)। स्थानीय थाना क्षेत्र के भलपहरी ग्राम पंचायत के नवाटोला गांव में शुक्रवार की देर शाम एक अधेड़ के सिर पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर हत्या कर दी गई। अधेड़ अपने दूसरे पाही पर खलिहान में पत्नी और बच्चों सहित सरसों की कुटाई कर रहा था। मामले की सूचना पर पहुंची थाना पुलिस ने शव को कब्जे मे लेकर पोस्टमार्टम के लिए दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया।
शुक्रवार की शाम करीब छह बजे आधार सिंह (55) पुत्र स्व. शीतल सिंह निवासी नवाटोला अपने पाही पर पत्नी ममता देवी और अपने बेटे सिंगार सिंह, अनिल सिंह के साथ सरसों की कुटाई मिसाई करने गया था। आधार सिंह खलिहान में सरसों की गुड़ाई करने लगा। उसकी पत्नी और बच्चे कुछ दूर बैठकर दाना खा रहे थे। इतने में ही अचानक गांव एक लड़का कुल्हाड़ी लेकर पहुंचा और आधार सिंह के सिर पर हमला कर दिया। पहले उसने उसके सिर पर मारा और फिर दूसरा वार दाढ़ी पर किया। इससे मौके पर ही आधार सिंह की मौत हो गई। जब तक बच्चे आरोपी को पकड़ने के लिए दौड़ते वह जंगल की ओर भाग गया। शनिवार की सुबह मृतक का बड़े पुत्र सिंगार सिंह ने घटना की जानकारी बभनी थाना पुलिस को दिया। सिंगार ने बताया कि उसके पिता की हत्या उसके रिश्तेदार ने की है। उसने बताया कि रिश्तेदार से लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा है। सिंगार सिंह की तहरीर पर पुलिस ने उसके बुआ के लड़के अभिषेक कुमार के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही आरोपी की तलाश में जुट गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी भेज दिया। प्रभारी निरीक्षक अविनाश चंद्र सिन्हा ने बताया कि लड़के की तहरीर पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और हत्यारोपी की तलाश की जा रही है। बहुत जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 2700 दुकानें चिन्हित, पास जारी

सोनभद्र। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए 14 अप्रैल तक के लॉकडाउन किया गया है। ऐसे में किराना के सामान एवं सब्जियों की कमी ना होने देने को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 2698 दुकानों को चिह्नित कर पास जारी कर दिया गया है। लोगों की परेशानियों को देखते हुए जिलाधिकारी ने यह कदम उठाया है। जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने जिले के सभी 637 ग्राम पंचायतों में चार-चार किराना और सब्जी के दुकानों को पास जारी करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी को निर्देशित किया। सीडीओ ने डीपीआरओ आरके भारती को निर्देशित किया कि ग्राम प्रधान एवं सचिवों के माध्यम से यह सुनिश्चित कराया जाए कि सभी ग्राम पंचायतों में कम से कम चार - चार किराना एवं सब्जी की दुकानें अधिकृत कर दी जाएं। वहीं जिले की 25 बड़ी ग्राम पंचायतों में आठ से दस दुकान अधिकृत करने को कहा गया। डीपीआरओ आरके भारती ने ग्राम प्रधान व सचिव के माध्यम से दुकानें चिह्नित कराकर पास जारी कराने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू करा दिया। डीपीआरओ ने बताया कि लगभग 2698 किराना व सब्जी की दुकानों को ग्रामीण क्षेत्रों में खोलने के लिए पास जारी कर दिया गया है। सभी दुकानें खुल भी गयी हैं और सोशल डिस्टेंसिंग को मेंटेन कराया जा रहा है। लोगों को लाइन से ही सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। कहा गया है कि एक घर से एक लोग ही सामान लेने के लिए आएंगे। पुलिस एवं अधिकारियों के निरीक्षण में जिस दुकान पर सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन नहीं हो रही या अगर किसी ग्राम पंचायत में दुकान नहीं खुलती हैं तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत की होगी। ... और पढ़ें
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