अब 220 की रफ्तार से दौड़ेंगी साधारण ट्रेनें

लखनऊ/ निशांत यादव Updated Tue, 02 Jul 2013 03:05 PM IST
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train will run at 220 km per hour speed

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देश की सबसे तेज दौड़ने वाली शताब्दी एक्सप्रेस की तरह ही अब साधारण मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें भी हवा से बातें करती नजर आएंगी। अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) ने 220 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली बोगियों के धुरे का डिजाइन तैयार कर लिया है।
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हो रही तैयारी प्रोटोटाइप बनाने की
आरडीएसओ ने कैरिज निदेशालय में इस धुरे का कम्प्यूटर पर सिम्युलेटिंग परीक्षण भी कर लिया है। परीक्षण में सफलता मिलने से उत्साहित आरडीएसओ अब उसका प्रोटोटाइप बनाने की तैयारी कर रहा है। इस समय दिल्ली से आगरा रेलखंड पर 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस दौड़ रही है।
इसी रेल खंड पर दौड़ने वाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम गति सीमा 110 किलोमीटर प्रति घंटा है। दरअसल, मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के धुरे पर पड़ने वाला अधिक वजन और उसके भारी भरकम स्प्रंग मास गति में सबसे अधिक बाधक है।

आरडीएसओ ने इससे पहले स्टेनलेस स्टील की बोगियों का प्रोटोटाइप तैयार कर गति बढ़ाने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिल सकी थी।

लगाया गया सस्पेंडेड मोटर व ड्राइव गियर सिस्टम
वर्तमान बोगियां ईएमडी क्लास डब्ल्यूडीपी सीरीज के इंजन से दौड़ रही हैं। इसमें नोज सस्पेंडेड मोटर लगी हुई है। नोज सस्पेंडेड मोटर के कारण धुरे की असेम्बली का 50 प्रतिशत वजन अनस्प्रंग मास के रूप में होता है। अनस्प्रंग मास के वजन को कम करने के लिए आरडीएसओ ने धुरे में पूर्णत: सस्पेंडेड मोटर और ड्राइव गियर सिस्टम लगाने का डिजाइन तैयार किया।

इस डिजाइन से बोगी व अंडर फ्रेम के वजन को धुरे का बेहतर सहारा मिल सका। धुरे की इस डिजाइन पर कम्प्यूटर में सिम्युलेटर पद्धति से बोगी तैयार कर उसे 200 किलोमीटर प्रति घंटे तक दौड़ाने का परीक्षण किया गया है।

जल्द शुरू होगा ट्रायल
अब आरडीएसओ इस महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने के लिए कुछ विदेशी कंपनियों के साथ प्रोटोटाइप तैयार कर इसके ट्रायल की योजना बना रहा है। इस बारे में आरडीएसओ के अधिशासी निदेशक प्रशासन एके माथुर का कहना है कि आरडीएसओ इस दिशा में शोध कर रहा है।

डिजाइन से आगे की योजना को मूर्त रूप देने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यदि प्रोटोटाइप में कामयाबी मिली तो यात्रियों का पचास फीसदी समय बच सकेगा।
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