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Coronavirus in UP Live Updates: प्रदेश में 80 संक्रमित, लखनऊ में 9 दिनों से नहीं मिला कोई मरीज

शासन और प्रशासन संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहा है। लोगों से भी हर वक्त घरों में रहने की अपील की जा रही है।

30 मार्च 2020

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उन्नाव

सोमवार, 30 मार्च 2020

दिल्ली में फंसे यात्रियों को लाने के लिए भेजी गई 32 रोडवेज बसें

उन्नाव। दिल्ली से अलग-अलग मार्गों पर जाने वाले यात्रियाें को पहुंचाने के लिए रोडवेज बसों का संचालन किया गया है। रास्ते में मिलने वाली सवारियों को बिठाने के आदेश नहीं हैं। बसें सीधे आनंद विहार बस अड्डा पहुंचेंगी। वहां यात्रियों को सैनिटाइज करने के बाद बस में बिठाया जाएगा और सीधे उनके गंतव्य तक बस छोड़ेगी।
कोरोना वायरस के चलते काम बंद होने से दिल्ली में अलग-अलग जिलों के रह रहे लोगों को उनके घर पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने परिवहन विभाग की बसों का संचालन किया है। वर्कशाप में सैनिटाइज की हुई खड़ी 85 बसों में 32 बसों को दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन के लिए रवाना किया गया। यह बसें यमुना एक्सप्रेसवे से होते हुए सीधे दिल्ली पहुंचेंगी। वहां बस स्टेशन पर खड़े यात्रियों को बिठाकर उनके गंतव्य तक छोड़ने जाएंगे। रास्ते में किसी भी यात्री को नहीं बिठाया जाएगा। ताकि संक्रमण का खतरा न बढ़े। शनिवार शाम बसें दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
एआरएम एके उपाध्याय ने बताया कि सैनिटाइज कर बसों को भेजा गया है। बस अड्डे से ही सैनिटाइज करने के बाद यात्रियों को बिठाएंगी और उनके गंतव्य तक छोड़ेंगी। बीच में सवारियां बिठाते मिलने या जानकारी होने पर चालक व परिचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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घर पहुंचने की आपाधापी में सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार

उन्नाव। लॉकडाउन के बीच शनिवार को शहर के बाइपास चौराहे का नजारा हैरान कर देने वाला रहा। दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, नोयडा सहित अन्य प्रांतों व जिलों में रह रहे कामगार, रोजगार का जरिया बंद होने के बाद पैदल ही अपने घरों को लौट पड़े हैं। कई दिनों का सफर तय करके यहां तक पहुंचे मजदूरी पेशा परिवारों का शनिवार को लखनऊ-कानपुर हाईवे पर मजमा लगा रहा। सोशल डिस्टेंसिंग का नियम भी तार-तार हो गया। बाइपास तिराहा के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे, बांगरमऊ लखनऊ मार्ग पर कई स्थानों पर सैकड़ों के समूह में लोग एक साथ दिखे। कुछ देर थकान मिटाने के लिए रुके इन श्रमिक परिवारों को प्रशासन और स्थानीय लोगों ने भोजन-पानी की व्यवस्था की।
दूसरे प्रांतों और जिलों में फंसे लोग ट्रेनें, बस व अन्य सवारी साधन बंद होने से पैदल ही सफर पर निकल पड़े हैं। जिसे जहां तक के लिए जो साधन मिला वहां तक के लिए बैठकर पहुंचा और आगे के लिए फिर पैदल निकल पड़ा। शनिवार को शहर के आवास विकास बाइपास तिराहा, गदन खेड़ा चौराहा, आजाद मार्ग चौराहा, गंगा बैराज, बांगरमऊ, गंजमुरादाबाद, सफीपुर और हसनगंज सहित कई स्थानों पर सैकड़ों की संख्या में श्रमिक व उनके परिवारों के लोग एक समूह में नजर आए। सूचना पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की हर सभंव कोशिश करने की सलाह भी दी।
दिल्ली में मजदूरी करने वाले बिहार के गया जिला निवासी सुंदर लाल, रोशन लाल व उनकी पत्नी सीमा, बाराबंकी निवासी फैय्याज, अबरार, मोहसिन, सीतापुर निवासी राजमंगल, महेश, सुंदरलाल, कृष्णा, प्रेमा, जानकी आदि ने बताया कि कोरोना को लेकर लॉकडाउन होने से वह फैक्टरी और मल्टी स्टोरी बिल्ंिडग बनाने का का काम भी बंद हो गया। ठेकेदार ने पूरी मजदूरी भी नहीं दी। घर जाने के लिए कोई साधन भी नहीं मिला तो वह सभी पैदल ही चल पड़े। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद मुरादाबाद में एक ट्रक ने कानपुर तक पहुंचाया। इसके बाद वह सभी फिर पैदल जा रहे हैं। उनके जैसे हजारों लोग सुबह से शाम तक हाईवे, एक्सप्रेसवे व अन्य मार्गों पर दिखे। दूसरे जिलों और प्रांतों से आ रहे वाहनों में खचाखच भीड़ रही। छत पर बैठकर सफर न करने का मानक भी तार-तार हो गया।
भीड़ जुटने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को बाइपास चौराहा व अन्य स्थानों से भगाने की कोशिश की तो पुलिस को भी मुश्किलों से परेशान लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। पुलिस ने लोगों से आपस में दूरी बनाकर रहने की अपील की। बाइपास तिराहा पर सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार ने सैकड़ों की समूह में खड़े लोगों को फटकारा तो मुसाफिरों ने सवालिया लहजे में कहा कि भूखे पेट, घर से दूर और सवारी साधन के अभाव में पैदल सफर करने की मजबूर होती तो आप क्या करते।
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कोरोना संदिग्धों को दी जा रही दवाओं में हाइड्रोक्सी क्लोरोफिन खत्म

उन्नाव। कारोना वायरस से विदेशों या खाड़ी देश से आ रहे लोगों, उनके परिजनों व मेडिकल स्टाफ को दी जा रही चार दवाओं में एक हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन स्टोर में खत्म हो गई है। सीएमएस ने शासन को पत्र भेजकर तत्काल आपूर्ति की मांग की है।
विदेशों या दूसरे प्रांतों से लौटकर आ रहे लोगों को सर्दी के साथ जुकाम, बुखार होने पर युवक उसके परिजनों व जाने वाले मेडिकल स्टाफ को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन, एरिथ्रोमाइसिन, पैरासीटामाल व सेट्रीजिन दवा दी जाती है। लगातार बढ़ रहे मरीज, उनके परिजन और मेडिकल स्टाफ को देने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग के पास हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन दवा स्टोर में खत्म हो गई है। ऐसे में अब सभी को तीन दवाएं ही दी जा रही हैं। सीएमएस डॉ. बीबी भट्ट ने बताया कि दो दिन पहले ही दवा समाप्त हुई है। मांगपत्र शासन को भेज दिया गया है। जल्द ही इसकी आपूर्ति मिल जाएगी और जरूरतमंदों को उपलब्ध कराई जाएगी।
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डीएसओ को हार्ट अटैक, कार्डियोलॉजी में भर्ती

उन्नाव। जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) के शनिवार रात अचानक सीने में तेज दर्द उठा। साथ रहे जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को सूचना देने के साथ ही डीएसओ को जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां पर प्राथमिक उपचार के बाद डीएसओ को चिकित्सकों ने कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया।
शनिवार देररात करीब 2 बजे ऑफीसर्स कालोनी में अपने कक्ष में आराम करने के दौरान डीएसओ रामेश्वर प्रसाद के अचानक सीने में तेज दर्द उठा। इसकी जानकारी उन्होंने तुरंत साथ में रहने वाले खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ को दी। डिप्टी आरएमओ ने डीएम को जानकारी दी और डीएसओ को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पर तुरंत चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। मामले की जानकारी होने पर डीएम रवींद्र कुमार, एसपी विक्रांतवीर व एडीएम राकेश सिंह मौके पर पहुंचे। सीएमओ व सीएमएस भी अस्पताल पहुंच गए। यहां पर तुरंत डीएसओ को कानपुर कार्डियोलॉजी रेफर कर दिया गया। डीएम ने एक चिकित्सक को भी साथ भेजा। जिलाधिकारी ने बताया कि रविवार सुबह उन्होंने जानकारी ली तो डीएसओ की स्थिति में सुधार की जानकारी मिली है।
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शनिवार रात डीएसओ की तबियत खराब होने पर उन्नाव जिला अस्पताल से कानपुर भेजते चिकित्सक। शनिवार रात डीएसओ की तबियत खराब होने पर उन्नाव जिला अस्पताल से कानपुर भेजते चिकित्सक।

एक्सप्रेसवे पर हादसा, बाइक सवार की मौत

गंजमुरादाबाद(उन्नाव)। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से बाइक सवार बिहार प्रांत के मधुबनी जिला निवासी मजदूर की मौत हो गई। जबकि बाइक में पीछे बैठा उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया है। दोनों लॉकडाउन के कारण दिल्ली से बिहार प्रांत जा रहे थे। बाइक चला रहा युवक हेलमेट नहीं लगाए था। डाक्टरों के अनुसार सिर में गंभीर चोट से उसकी मौत हुई।
बिहार प्रांत के जिला मधुबनी के थाना पिरही के ग्राम सलखनिया निवासी संजय कुमार यादव (25) पुत्र रघुनंदन दिल्ली में एक फैक्टरी में काम करता था। लॉकडाउन होने से उसने घर जाने का फैसला लिया। उसके साथ काम करने वाले 336 डीसी बौद्ध विहार गोनिरिका जेएनयू नई दिल्ली निवासी जयनारायण (50) पुत्र देवनारायण ने भी उसके साथ चलने की इच्छा जताई। जिस पर दोनों बाइक से बिहार प्रांत जाने के लिए निकले। बाइक संजय चला रहा था। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे पर बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के ग्राम देवखरी के पास रविवार सुबह 6 बजे करीब अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। तेज टक्कर से बाइक डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में दोनों दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए।
सूचना के एक घंटे बाद यूपीडा टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान संजय तड़पता रहा। इसी बीच मौके पर पहुंचे कोतवाल बांगरमऊ श्यामकुमार पाल ने दोनों को सीएचसी पहुंचाया, जहां संजय को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। जयनारायण को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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49 विचाराधीन बंदियों को 56 दिन की मिली अंतरिम पैरोल

उन्नाव। कोराना वायरस से बचाव के लिए जेल से भीड़ कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जेल प्रशासन की ओर से 88 कैदी व बंदियों की सूची भेजी गई थी। शनिवार को अंतरिम पैरोल दिए जाने का आदेश मिलने के बाद जेल प्रशासन ने रविवार को विचाराधीन 49 बंदियों को 56 दिन के लिए अंतरिम पैरोल पर जेल से रिहा किया है। छोड़े गए बंदियों में दो महिलाएं भी शामिल है।
कोरोना वायरस के संक्रमण जेल तक न पहुंचे, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन बंदियों को अंतरिम पैरोल पर छोडे़ जाने की योजना बना सभी जिलों से ऐसे विचाराधीन बंदियों की सूची मांगी, जो सात साल तक की सजा के अपराध में जेल में बंद है। जेल अधीक्षक ने बताया कि यहां से 88 बंदियों व कैदियों की सूची भेजी गई थी। जिस पर 49 विचाराधीन बंदियों को 56 दिन के अंतरिम पैरोल पर छोडे़ जाने के निर्देश जिला जज की ओर से मिले। रविवार देर शाम पैरोल की कार्रवाई पूरी करने के बाद 49 बंदियों को छोड़ा गया है। पुलिस लाइन की वैन से इन बंदियों को उनके स्थानीय थाना पर छोडे़गी। इसके बाद पुलिस अपने साधन से सभी को घर पहुंचाएगी। जेलर ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि कैदियों को उनके थाना क्षेत्र में छोड़ने के लिए पुलिस लाइन से तीन वैन भेजी गई है। लॉक डाउन का अनुपालन कर सभी बंदियों को छोड़ा गया है। बताया अग्रिम आदेश मिलने पर अन्य कैदियों को भी छोड़ा जाएगा।
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मानवीय ड्यूटी निभा रहे पुलिस के पहरेदार

उन्नाव। कोराना वायरस के संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए लॉकडाउन के बाद पुलिस ने मानवीयता की मिसाल कायम की है। कानून का पालन करने के लिए हाथ में लाठी-डंडा और रायफल लेकर चलने वाली खाकी के हाथ अब लोगों का पेट भरने के लिए खाने की थाली देखी जा रही है।
रविवार को भी पुलिस ने भूखे लोगों तक भोजन पहुंचा कर्तव्य का निर्वहन किया। हसनगंज पुलिस ने दिल्ली से साइकिल से बिहार प्रांत जा रहे युवक को लंच पैकेट और पानी की बोतल देकर उनकी भूख और प्यास मिटाई। इसी तरह पुरवा कोतवाल केएन पांडेय ने दिल्ली, गाजियाबाद से आने वाले यात्रियों को भोजन वितरित किया। इसी तरह अजगैन थाना के नवाबगंज चौकी प्रभारी जितेंद्र यादव ने सड़क से पैदल जा रहे यात्रियों को टोल प्लाजा के पास खाने के पैकेट देकर उनकी भूख मिटाई।
इसी क्रम में सीओ सफीपुर एमपी शर्मा ने सड़क से गुजर रहे लोगों को लंच पैकेट वितरित किए। एक्सप्रेसवे पर बांगरमऊ औरास व हसनगंज पुलिस ने राहगीरों को लंच पैकेट व पानी की व्यवस्था की। इसी क्रम में दही चौकी प्रभारी प्रेमनारायण व अस्पताल चौकी प्रभारी रामजीत यादव ने भी लंच पैकेट व अन्य जरूरत की वस्तुएं गरीब असहाय परिवारों तक पहुंचाईं।
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दिल्ली भेजी गईं 31 रोडवेज बसों में 29 बसें लौटी वापस

लखनऊ कानपुर हाइवे पर बाहर से आ रहे लोगों को नवाबगंज टोल पर भोजन कराते इंस्पेक्टर अरविंद सिंह।
उन्नाव। दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल यात्रियों को लाने के लिए भेजी गईं परिवहन विभाग की 31 बसों में रविवार शाम तीन बजे तक 29 बसे वापस लौटीं। यह बसें शनिवार रात 7 बजे दिल्ली के लिए रवाना की गई थीं। इसके साथ ही एआरटीओ ने बाहर से आने वाले यात्रियों को गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, बलरामपुर, प्रतापगढ़, औरैया, इटावा, कुशीनगर, इलाहाबाद तक पहुंचाने के लिए 42 प्राइवेट बसों का संचालन कराया। गोरखपुर रूट के 70 से अधिक यात्री लखनऊ बाईपास पर पहुंचने से आनन फानन वर्कशाप में खड़ी एक रोडवेज बस को बुलाया गया और यात्रियाें को रवाना किया गया।
वहीं, आगरा एक्सप्रेसवे के साथ ही अन्य छोटे-बड़े मार्गों से सुबह से शाम तक 170 भारी वाहन गुजरते नजर आए। शहर के रोडवेज बस अड्डा व लखनऊ बाईपास पर बसों को खड़ा कराया गया था। ताकि लोगों को आसानी से सुविधा मुहैया कराई जा सके। लंबी दूरी से आ रहीं प्राइवेट बसों के संचालकों ने यात्रियों से डेढ़ गुना अधिक किराया वसूला। एआरटीओ व पुलिस प्रशासन ने शनिवार देर रात तक अन्य जिलों व प्रदेशों से लौटे उन्नाव, पुरवा, मियागंज लोकल में रहने वाले लोगों को उनके घर भिजवाने के लिए 22 बसों की व्यवस्था कराई और और सभी को थर्मल स्कैनिंग के बाद घर भेजा गया।
रविवार सुबह से अन्य जिलों व प्रांतों से आने वाले यात्रियों को भेजने के लिए बसों के साथ पुलिस प्रशासन ने टैंकर, लोडर, डीसीएम व ट्रकों को लखनऊ-कानपुर हाईवे पर रोका गया। इनमें कुछ हजारों यात्री ऐसे रहे कि जिनकी जांच नहीं हुई और पुलिस ने उन्हें गाड़ियों में बिठाकर आनन फानन जिले की सीमा पार कराई। इस दौरान लखनऊ व कानपुर की ओर जा रहे कुछ कार चालकों को रुकवाकर यात्रियों को बिठाया गया। इस दौरान कई कार संचालकों ने नाराजगी भी जताई लेकिन पुलिस ने जबरन बिठाकर भेज दिया।
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मां की गोद में तीन साल की ‘दामिनी’ ने भी किया संघर्ष

उन्नाव। लॉकडाउन के बाद उन्नाव के रऊ गांव पहुंचने के लिए दिल्ली में रहने वाली रोशनी अपनी तीन साल की बेटी दामिनी को लेकर पैदल ही निकल पड़ी। इस दौरान करीब 60 किमी तक पैदल भी चलना पड़ा। इस दौरान मासूम बेटी कभी मां की गोद तो कभी पैदल चलकर संघर्ष करती रही। मां-बेटी की बेबसी देख गांव के 10 अन्य लोगों ने भी उनकी मदद की। हालांकि बाद में सवारी साधन मिलने पर खचाखच भीड़ के बीच बैठकर उन्नाव तक पहुंची।
माखी के रऊ डीहा गांव निवासी गुड्डू अपनी पत्नी रोशनी, सास जनाका व ससुर तिवारी के साथ दिल्ली में बिजली के तार बनाने वाली फैक्टरी में काम करता है। दो माह पहले पिता रामनाथ की मौत पर गुड्डू घर आ गया, जबकि पत्नी समेत अन्य परिजन वहीं रुके रहे। लॉकडाउन के बाद 26 मार्च को गुड्डु की पत्नी रोशनी अपनी तीन साल की बच्ची दामिनी व अपनी मां, पिता और गांव के 10 अन्य लोगों के साथ घर जाने के लिए पैदल निकल पड़ी। गाजियाबाद से लालकुंआ तक लगभग 60 किमी की दूरी पैदल तय की। इसके बाद उसे बस मिल गई और वह उन्नाव के बाईपास तिराहा पर तीसरे दिन 28 मार्च की रात 2 बजे उतरी। यहां से पुलिस ने वाहन की व्यवस्था कर उसे घर पहुंचाया।
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आईजी ने लिया लॉकडाउन का जायजा, मिली यात्रियों की भीड़

उन्नाव। डीएम और एसपी के मॉनीटरिंग प्वांइट पर सीएमओ व उनकी टीम की मौजूदगी तो दिखाई दी पर अन्य रूटों पर स्वास्थ्य अधिकारी नदारद रहे। शनिवार सुबह एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत अन्य जिलों से अपने घर को निकली सैकड़ों की भीड़ दिखाई दी। यहां न तो कोई प्रशासनिक-पुलिस अधिकारी नजर आया और न ही डॉक्टरों की टीम। आईजी रेंज के निरीक्षण की भनक लगते ही एसपी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद स्वास्थ्य टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम ने यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की। पुलिस कर्मियों ने बेहाल यात्रियों के खाने का प्रबंध किया।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के रास्ते सुबह से यात्रियों का निकलना शुरू हो गया। बांगरमऊ व हसनगंज थाना की पुलिस इन यात्रियों के खाने-पीने के प्रबंध में लग गई। दोपहर 12 बजे आईजी रेंज लखनऊ एसके भगत के निरीक्षण की सूचना पर एसपी विक्रांतवीर भी मौके पर पहुंच गए। आईजी लॉकडाउन की हकीकत परखने आए थे। भीड़ देख उन्होंने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था के निर्देश दिए। जिस पर पुलिस ने एक्सप्रेसवे से निकल रहे वाहनों को रोककर यात्रियों को रवाना करना शुरू किया। यहां निरीक्षण के बाद आईजी लखनऊ लौट गए। एसपी ने पुलिस टीम को यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने का निर्देश दिया और मुख्यालय लौट गए।
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तहसीलों में खुले अस्थायी सामुदायिक रसोईघर

उन्नाव। शहर और गांव के गरीबों को पका-पकाया भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने सभी तहसीलों में अस्थायी सामुदायिक रसोईघर खोल दिए हैं। इन रसोईघर में प्रभारी अधिकारियों को तैनात करके उनके मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं।
डीएम रवींद्र कुमार ने बताया कि ऐसे गरीब जिनके पास खाने को नहीं है, उनके लिए सभी तहसीलों में अस्थायी सामुदायिक रसोईघरों को खुलवाया गया है। इसमें प्रभारी भी नामित किए गए हैं। रसोईघरों में भूले-भटके लोगों को भी भोजन कराया जाएगा। इसके अलावा कंट्रोलरूम व अन्य नंबरों से आने वाली सूचनाओं पर रसोईघरों के माध्यम से पका-पकाया पैकेटबंद भोजन घरों में भिजवाया जाएगा। इसके अलावा आटा, चावल, आलू आदि खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि ब्लॉक व नगर पंचायतों में भी अस्थायी सामुदायिक रसोईघर खुलवाए जा रहे हैं। वहीं, शुक्लागंज में अलग रसोईघर खुलवाई जा रही है।
आम जनता के साथ डीएम रवींद्र कुमार ने बेजुबानों का भी दर्द समझा। सड़कों पर विचरण कर रहे गोवंशीय मवेशियों और कुत्तों के लिए एक कंपनी के जरिए रोटियों की व्यवस्था कराई। करीब 40 किलो आटे की रोटियां बनवाकर कुत्तों व मवेशियों को खिलाया। खुद डीएम ने मगरवारा में मवेशियों के झुंड को देख गाड़ी रुकवाई और पास जाकर मवेशियों को रोटी और गुड़ खिलाया। डीएम ने बताया कि शहर और शुक्लागंज में मवेशियों व कुत्तों को रोटियां खिलाने की व्यवस्था की गई है।
तहसीलवार खुले सामुदायिक रसोईघर
तहसील स्थान प्रभारी अधिकारी का नंबर
सदर मनोकामना मंदिर रायबरेली रोड 7860393939
सफीपुर तहसील मुख्यालय 9454416662
बांगरमऊ पुलिस चौकी बांगरमऊ 8299860239
हसनगंज तहसील मुख्यालय 9454416668
पुरवा तहसील मुख्यालय 7317323321,8840219319
बीघापुर तहसील मुख्यालय 9005135640
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जिले में मुसाफिरों के रेला, अफसरों को आया पसीना

उन्नाव। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, गाजियाबाद सहित अन्य स्थानों में फंसे लोगों का घर लौटने की सिलसिला तेज है। कोई वाहनों से घर लौट रहा है तो कोई पैदल। यात्रियों का रेला जुटने से लॉकडाउन बेअसर होने से प्रशासन के पसीने छूट गए। शनिवार रात करीब 500 मुसाफिरों की भीड़ जत्थों में निकली जिससे पुलिस व प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गईं। शहर के भीतर से निकली भीड़ आवास विकास बाईपास तिराहा पहुंची तो अधिकारी मेडिकल टीम के साथ पहुंचे। सभी की थर्मल स्कैनिंग कराई गई। गनीमत रही कि सभी सामान्य पाए गए। डीएम के निर्देश पर एआरटीओ ने बसों की व्यवस्था की और यात्रियों को गंतव्य के लिए रवाना किया।
दूसरे प्रांतों व जिलों से अपने घरों के लिए निकले करीब पांच सौ यात्रियों की भीड़ शनिवार रात करीब 10 बजे शहर के बस स्टेशन व मोहल्ला मोतीनगर पहुंचे। इनमें अधिकांश दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व नोएडा से लौटकर अपने घर सीतापुर, बहराईच, बाराबंकी, फतेहपुर, रायबरेली, गोंडा, बस्ती, बलरामपुर के थे। शहर में बाहर से आए लोगों की भारी भीड़ होने की सूचना पर डीएम रवींद्र कुमार, एसपी विक्रांतवीर, सिटी मजिस्ट्रेट चंदन कुमार पटेल, एडीएम राकेश सिंह, एएसपी उत्तरी विनोद कुमार पांडेय, सीओ सिटी यादवेंद्र यादव व सदर कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्रा पहुंचे। सभी को शहर से बाहर बाइपास तिराहा पर सड़क के किनारे निर्धारित दूरी पर बैठाया। डीएम के निर्देश पर सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार मेडिकल टीम के साथ पहुंचे। टीम का नेतृत्व कर रहे संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. आरएस मिश्र ने सभी की थर्मल स्कैनिंग कराई। सभी का नाम व पता के अलावा कहां से आए हैं और कहा जाना है इसकी सूचना भी नोट की गई। एआरटीओ प्रशासन अनिल त्रिपाठी ने यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों का इंतजाम किया। इस दौरान पुलिस ने हाईवे से निकल रही बसों व अन्य वाहनों में भी बैठाकर यात्रियों को रवाना किया। करीब एक घंटे बाद एआरटीओ ने 22 निजी बसें बुलाई और उनमें यात्रियों को बैठाकर दूसरे जिलों के लिए भेजा। उन्होंने यात्रियों से सीमिति किराया देने की बात कही।
सिटी मजिस्ट्रेट चंदन पटेल ने यात्रियों को लॉकडाउन की पुन: जानकारी देकर उचित दूरी बनाने की बात कही। यात्रियों को बसों में बैठाने के लिए वह माइक से अनांउस भी करते रहे। सीओ यादवेंद्र यादव व सदर कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्र के अलावा दही चौकी प्रभारी प्रेमनारायण की भूमिका सराहनीय रही। मुसीबत में यात्रियों को देख लॉकडाउन टूटने के बाद भी पुलिस उनकी मददगार बनी रही।
एसपी विक्रांतवीर ने बताया कि दिल्ली और नोएडा से आने वाले लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने और लॉकडाउन का पालन कराने के लिए आवास विकास चौराहा पर दो शिफ्टों में पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें एक सीओ व एक अतिरिक्त इंस्पेक्टर के साथ 10 महिला व पुरुष पुलिस कर्मी मौजूद रहेंगे। रात 8 से सुबह आठ तक की एक शिफ्ट होगी।
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सब्जी मंडी लगाने पर सात लोगों पर रिपोर्ट

बीघापुर(उन्नाव)। लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए बीघापुर थाना क्षेत्र में सब्जी मंडी लगाई गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लाठियां पटक कर भीड़ को खदेड़ा। पुलिस ने सात लोगों पर लॉकडाउन उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज की है।
बीघापुर थाना क्षेत्र के कटरा दीवानखेड़ा चौराहा में सप्ताह में दो दिन बाजार लगती है। लॉकडाउन के बाद भी शनिवार सुबह यहां सब्जी बाजार लगाई गई। जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंच गए। सूचना पर उपनिरीक्षक जितेंद्र पांडेय पहुंचे और लाठियां पटक कर भीड़ को हटाया। इससे लोगों में अफरातफरी मच गई। पुलिस ने गांव के आवेश मोहम्मद, रहीमबख्श, बुद्धीलाल, चंद्रिका प्रसाद व अरम गांव निवासी राजकपूर, ओसियां गांव निवासी गुरुदयाल व रामगुलाम के खिलाफ लॉकडाउन के उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज की है।
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